Breaking News
Cooking Oil Price Reduce : मूंगफली तेल हुआ सस्ता, सोया तेल की कीमतों मे आई 20-25 रुपये तक की भारी गिरावट PM Kisan Yojana : सरकार किसानों के खाते में भेज रही 15 लाख रुपये, फटाफट आप भी उठाएं लाभ Youtube से पैसे कमाने हुए मुश्किल : Youtuber बनने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये काम की बात वरना बाद में पड़ सकता है पछताना गूगल का बड़ा एक्शन, हटाए 1.2 करोड़ अकाउंट, फर्जी विज्ञापन दिखाने वाले इन लोगो पर गिरी गाज Business Ideas : फूलों का बिजनेस कर गरीब किसान कमा सकते है लाखों रुपए, जानें तरीका
Thursday, 18 April 2024

Election News

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने संविधान उसके मूल्यों की रक्षा के लिए कही ये बड़ी बात

04 July 2022 01:01 AM Mega Daily News
सिन्हा,उम्मीदवार,उन्होंने,राष्ट्रपति,सरकार,सांप्रदायिक,जस्टिस,चुनाव,विपक्ष,पूर्व,केंद्रीय,मंत्री,यशवंत,रविवार,कर्नाटक,,presidential,candidate,yashwant,sinha,said,big,thing,protect,constitution,values

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने रविवार को कहा कि कर्नाटक में भाजपा सरकार राज्य में स्कूली पाठ्यक्रम को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रही है. सिन्हा 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए कर्नाटक पहुंचे हैं. इस क्रम में उन्होंने आज रविवार को कांग्रेस विधायकों से बेंगलुरु में मुलाकात की. यशवंत सिन्हा ने कहा, 'कर्नाटक में सरकार सत्तारूढ़ पार्टी के वैचारिक एजेंडे द्वारा रंगा एक नया स्कूल पाठ्यक्रम शुरू कर युवा पीढ़ी के दिमाग को सांप्रदायिक बनाने का प्रयास कर रही है.'

सिन्हा ने की चीफ जस्टिस की तारीफ

इस दौरान उन्होंने देश के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति एन वी रमण की भी तारीफ की. उन्होंने चीफ जस्टिस के इस बयान का स्वागत किया कि न्यायपालिका केवल संविधान के प्रति जवाबदेह है. सिन्हा ने कहा कि वास्तव में, जब से मैंने 27 जून को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है, मैं कह रहा हूं कि संयुक्त विपक्ष के उनके उम्मीदवार होने के प्रस्ताव को स्वीकार करने के पीछे एकमात्र उद्देश्य संविधान और उसके उच्च मूल्यों की रक्षा करना है, जो आज बड़े खतरे में है.

द्रौपदी मुर्मू को लेकर सिन्हा ने क्या कहा?

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह भाजपा की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का बहुत सम्मान करते हैं, जो एक आदिवासी नेता हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भगवा पार्टी के उम्मीदवार को संवैधानिक मूल्यों के लिए खड़े होने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए और रबर स्टैंप अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहिए. पिछले आठ वर्षों में केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार ने लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर बार-बार हमले किए हैं. इसने भारत के बहु-धार्मिक समाज को विभाजित करने के लिए एक जहरीला सांप्रदायिक प्रचार किया है

whatsapp share facebook share twitter share telegram share linkedin share
Related News
Latest News