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		<title>Mega Daily News</title>
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		<![CDATA[
		Mega Daily News		]]>
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		<link>https://megadailynews.com/</link>
		<lastBuildDate>Wed, 22 Apr 2026 02:33:27 +0530</lastBuildDate>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 02:33:27 +0530</pubDate>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Cooking Hacks: हर होम शेफ को जानने चाहिए ये 5 कुकिंग हैक्स, जो बनाएंगे कुकिंग को सुपर आसान!]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>Cooking Hacks: क्या आप भी रोजाना खाना बनाते समय छोटी-छोटी परेशानियों का सामना करते हैं? जैसे कि सब्जी में नमक ज्यादा हो जाना, रोटी का सही आकार में न बनना, या चावल का बार-बार चिपक जाना, खासकर तब जब खाना जल्दी या मेहमानों के लिए बनाना हो? ये समस्याएं लगभग हर किसी के साथ होती हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो रोजाना ऐसी दिक्कतों का सामना करते हैं तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे टिप्स के बारे में जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर इन चीजों से छुटकारा पा सकते हैं।</p>
सब्जी में घी या तेल ज्यादा हो जाए?
<p>ऐसा कई बार बहुत से लोगों के साथ होता है सब्जी बनाते समय ज्यादा तेल या घी डल जाता है, जिससे सब्जी पकने के बाद ऊपर तेल तैरने लगता है। इसके लिए अब परेशान न हों। तेल को सब्जी से कम करने के लिए बर्फ का एक टुकड़ा लें और करी वाली सब्जी या दाल में 1 मिनट के लिए डाल दें। ऐसा करने से अतिरिक्त तेल ऊपर जम जाएगा और आप उसे आसानी से हटा सकेंगे।इसके साथ ही सब्जी का स्वाद भी नहीं बिगड़ेगा।</p>
दाल या सब्जी ज्यादा पतली हो जाए?


&nbsp;


<p>क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सब्जी या दाल में पानी ज्यादा हो जाता है जिससे वह पतली लगने लगती है और स्वाद भी फीका हो जाता है? तो इसे सुधारने के लिए दो चम्मच बेसन में थोड़ा सा पानी मिलाकर सब्जी में डाल दें। ऐसा करने से आपकी सब्जी या दाल गाढ़ी हो जाएगी और स्वाद भी बेहतर हो जाएगा।</p>
हरी पत्तेदार सब्जियां पकाते समय उन्हें ढककर न रखें
<p>बहुत से लोग पत्तेदार सब्जियों को ढक कर पकाना सही समझते हैं लेकिन ऐसा करने से वे ओवरकूक हो जाती हैं और उनका स्वाद भी अच्छा नहीं आता। इसलिए ध्यान रखें कि हरी पत्तेदार सब्जियों को कभी भी ढक कर न पकाएं। इन्हें हमेशा खोलकर ही पकाएं जिससे वे हरी-भरी और स्वादिष्ट बनी रहें।</p>
चावल बार-बार चिपक जाते हैं?
<p>ऐसा अक्सर होता है कि चावल पकाते समय अगर सही मात्रा में पानी और तकनीक का ध्यान न रखा जाए, तो चावल अक्सर चिपक जाते हैं या गीले हो जाते हैं जिससे उनका स्वाद और बनावट दोनों बिगड़ जाते हैं। इसके लिए आप चावल पकाने से पहले उन्हें कम से कम 20&ndash;30 मिनट तक भिगोकर रखें और पकाते समय 1 कप चावल में लगभग 1.5 से 2 कप पानी डालें। इससे आपके चावल चिपकेंगे नहीं और न ही इनका स्वाद बिगड़ेगा।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/cooking-hacks-every-home-chef-should-know-these-5-cooking-hacks-which-will-make-cooking-super-easy						]]>
					</link>
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					<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 13:13:37 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Hotel Room Booking Tips: होटल में कमरा बुक करते समय रखें ये सावधानी, नहीं होंगे फ्रॉड के शिकार]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p><strong>Hotel Room Booking Tips:</strong> जब भी कोई बाहर घूमने जाता है या काम के सिलसिले में किसी दूसरे शहर जाता है तो वह एक होटल में कमरा बुक करता है और वहीं रुकता है। और ये बहुत आम है कि लोग अपनी पसंद और बजट के हिसाब से होटल के कमरे बुक करते हैं। लेकिन होटल रूम बुक करते समय लोगों की थोड़ी सी गलती भी उनके लिए मुसीबत बन जाती है।</p>
<p>आजकल होटल रूम बुक कर लोगों को ठगा जा रहा है। जिसमें लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही है। अगर आप खुद को ऐसे घोटालों से बचाना चाहते हैं। इसलिए होटल रूम बुक करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें।</p>
<strong>इन बातों का रखें ध्यान</strong>
<p><strong>Verified Portal:</strong> यदि आप होटल का कमरा बुक करते हैं, तो Verified Portal का उपयोग करें। उन साइटों से बुक करें जिनके अंत में .com या .in है और शुरुआत https से होती है।</p>
<p><strong>पेमेंट डिटेल्स:</strong> जब आप होटल बुक कर रहे हों तो कभी भी अपना Payment Details किसी भी पोर्टल पर सेव न करें। अक्सर लोग पेमेंट डिटेल्स को बार-बार डालने से बचने के लिए उसे सेव कर लेते हैं। लेकिन ऐसा करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>निजी नेटवर्क:</strong> जब आप होटल का कमरा बुक कर रहे हों&nbsp; तब पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल न करें। होटल के कमरे हमेशा निजी नेटवर्क का उपयोग करके ऑनलाइन बुक करें। इससे आपकी डिटेल्स लीक होने का खतरा नहीं रहेगा।</p>
<p><strong>फर्जी ऑफर:</strong> लोगों को धोखा देने के लिए घोटालेबाज सबसे आम तरीका अपनाते हैं। यानी उन्हें फर्जी ऑफर से लुभाना। फिर आपको किसी अनजान मेल के जरिए ऐसा कोई ऑफर मिलता है। इसलिए इस पर बिल्कुल भी क्लिक न करें।</p>
<p><strong>होटल वेबसाइट:</strong> यदि संभव हो, तो सीधे होटल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग करें। इससे आपको अधिक सुरक्षा और सही जानकारी मिलती है।</p>
<p><strong>कॉन्टैक्ट इनफार्मेशन:</strong> होटल की वेबसाइट पर दिए गए कॉन्टैक्ट नंबर और ईमेल की जांच करें। डाउट होने पर सीधे होटल से संपर्क करें।</p>
<p><strong>रिव्यू पढ़ें:</strong> अन्य ग्राहकों द्वारा दी गई रिव्यू पढ़ें। इससे आपको होटल की वास्तविक स्थिति और सेवाओं के बारे में जानकारी मिलेगी।</p>
<p><strong>पेमेंट के तरीके:</strong> हमेशा सुरक्षित पेमेंट प्रोसेस का इस्तेमाल करें। क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना अधिक सुरक्षित होता है, क्योंकि इसमें आप धोखाधड़ी के खिलाफ सिक्योरिटी मिलती है।</p>
<p><strong>कन्फर्मेशन ईमेल:</strong> बुकिंग के बाद आपको एक कन्फर्मेशन ईमेल प्राप्त होना चाहिए। यदि यह नहीं आता है, तो जांचें कि आपकी बुकिंग सफल हुई है या नहीं।</p>
<p><strong>शर्तें पढ़ें:</strong> बुकिंग करते समय सभी शर्तों और पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें, जैसे कैंसिलेशऩ और एक्सट्रा पेमेंट आदि।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/hotel-room-booking-tips-keep-these-caution-while-booking-room-in-hotel-will-not-be-a-victim-of-fraud						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 13:17:00 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[इस तरीके से लगाए जामुन का पेड़ और 6 से 8 साल में मिलेंगे फल | Learn How to Grow Jamun Tree]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p><strong>How to grow jamun tree: </strong>जामुन का फल न केवल खाने में स्वादिष्ट लगता है बल्कि ये सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। मानसून के मौसम में इसे घर की बगिया में आसानी से लगाया जा सकता है। अगर आप चाहें तो इसके जामुन के पौधे को गमले में उगाएं। जब ये बड़ा हो जाए तो इसे बड़े गमले या बगीचे में शिफ्ट कर दें।</p>
<p>यूं तो जामुन का पेड़ लगाना बेहद आसान है और इसकी देखभाल भी ज्यादा कठिन नहीं होती है। लेकिन अगर इसकी थोड़ी सी भी केयर कर ली जाए तो आपको 6 से 8 साल में इतने फल मिलेंगे कि आप खाते-खाते थक जाएंगे। आइए जानते हैं जामुन का पेड़ लगाने का सही तरीका और बागवानी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।</p>
जामुन के पेड़ के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी?
<p>जामुन का पेड़ लगाने के लिए सबसे पहले आपको इसकी मिट्टी तैयार करनी चाहिए। इसके लिए आप ऑर्गेनिक खाद का यूज करें। पहले फ्रेश मिट्टी की लेयर डालें। फिर ये खाद डालें। इसके बाद फिर से मिट्टी डाल दें। आप चाहें तो गोबर, चायपत्ती, सब्जी के छिलके से ऑर्गेनिक खाद तैयार कर सकते हैं।</p>
बीज से जामुन का पेड़ कैसे लगाएं?
<p>अगर आप बीज से जामुन का पौधा लगाना चाहते हैं तो पके हुए जामुन का गूदा खा ले या हटा दें। फिर इन्हें धोकर पानी में करीब 24 घंटे भिगोएं। फिर मिट्टी में करीब 1 इंच तक इसे नीचें बोएं। मिट्टी को पानी डालकर नम करें। बहुत ज्यादा पानी न डालें। इसे अंकुरित होने में करीब 3 हफ्ते लग सकते हैं।</p>
जामुन की पेड़ की कटिंग से नया पौधा कैसे उगाएं?
<p>किसी अच्छे जामुन के पेड़ से करीब 12 इंच लंबी कटिंग लें। इसमें कुछ पत्ते भी होने चाहिए। जड़ें तैयार करने के लिए कटिंग के नीचले हिस्से को पानी में डालें। फिर इसे करीब 2 इंच गहरी मिट्टी में लगाएं।</p>
जामुन के पौधे में चीटियां लगने पर क्या करें?
<p>अगर आपने बारिश के दिनों में जामुन का पौधा लगाया है और इसमें चीटियों ने ढेरा जमा लिया है तो आप परेशान न हों। आपको बस करना इतना है कि चूना लें और उसे पानी में मिक्स करें। इस तैयार मिश्रण को पौधे के जड़ों के आसपास छिड़क दें। सारी चीटियां भाग जाएंगी।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/in-this-way-berries-will-be-treated-in-this-way-and-fruits-will-be-found-in-6-to-8-years						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 13:13:30 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जरुरी सुचना : 31 मार्च से पहले जरूर कर लें ये काम, वरना आ सकती हैं दिक्कतें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>दिल्ली. मार्च महीने के दो सप्ताह बीत चुके है, ऐसे में 31 मार्च तक आपको कुछ जरूरी कार्यों को जल्द से जल्द कर लेना चाहिए। अगर आप 31 मार्च तक इन कामों को नहीं करते हैं। ऐसे में आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस महीने पैसों से जुड़े कई जरूरी काम हैं, जिन्हें आपको 31 मार्च की डेडलाइन से पहले करना है। अगर आप इन कार्यों को नहीं करते हैं। इस स्थिति में आपको जुर्माना तक भरना पड़ सकता है। इस महीने के अंत तक आपको पैन आधार लिंकिंग, टैक्स प्लानिंग और कई दूसरे जरूरी कार्यों को करना होगा। मार्च महीना वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना होता है। ऐसे में यह महीना काफी महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में आज हम आपको उन जरूरी कार्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको मार्च महीने के अंत तक करा लेना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से - </p>
पैन-आधार लिंकिंग
<p>पैन को आधार कार्ड से लिंक करने की डेडलाइन 31 मार्च तय की गई है। ऐसे में आपको इस काम को 31 मार्च, 2023 से पहले कर लेना चाहिए। अगर आप 31 मार्च से पहले अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं करते हैं। इस स्थिति में 1 अप्रैल से आपका पैन कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा। </p>
<p>Pancard Update : पैन कार्डधारकों की फूटी किस्मत, सरकार ने किया ऐसा ऐलान कि उड़ गई नींद, लगा झटका</p>
<p>नाबालिग की इनकम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो उसे भी इनकम टैक्स फाइल करना होगा, क्या है नाबालिक का पैन कार्ड बनाने का नियम</p>
एडवांस टैक्स भरने का वक्त
<p>साल की हर तिमाही में चार किस्तों में 15 पर्सेंट, 30 पर्सेंट, 30 पर्सेंट और 25 पर्सेंट के हिसाब से एडवांस टैक्स जमा किया जाता है। यह 15 मार्च तक जमा कराना होता है। अगर 15 तक न हो पाए तो किसी भी हालत में 31 मार्च से पहले जमा कर दें। ऐसा न करने पर बकाया रकम पर ज्यादा इंटरेस्ट देना होगा। यह प्रोफेशनल्स और बिजनेसमैन के लिए होता है। अगर रेंट, इंटरेस्ट, डिविडेंड या कैपिटल गेंस आदि से भी आमदनी होती है तो सैलरी पाने वालों को भी अडवांस टैक्स देना होता है। जो लोग अपना खुद का काम करते हैं उन्हें अपनी सालाना आमदनी का अनुमान लगाकर हर तिमाही टैक्स देना होता है। लेकिन इस आमदनी पर कुल टैक्स 10,000 रुपये से भी कम बन रहा है तो यह टैक्स जमा कराने की जरूरत नहीं। पेंशनर्स को भी अडवांस टैक्स देने की जरूरत नहीं होती।</p>
<p>देश का इकलौता राज्य जहाँ कितना भी कमाए, नहीं देना होता एक रूपया भी टैक्स</p>
टैक्स प्लानिंग 
<p>अगर आप टैक्स में बचत करना चाहते हैं। ऐसे में आपको 31 मार्च से पहले टैक्स सेविंग स्कीम में निवेश करना चाहिए। ऐसा करने पर आपको टैक्स डिडक्शन में लाभ मिलेगा। </p>
<p>अगर आपकी कमाई आयकर के दायरे में नहीं आती है तो भी भरें रिटर्न क्योंकि इसके कई फायदे हैं</p>
<p>एक सेविंग अकाउंट में कर सकते हैं कितने पैसे जमा?, यहां जानिए टैक्स के नए नियम</p>
एसबीआई स्कीम में निवेश
<p>अगर आप एसबीआई की नई एफडी स्कीम अमृत कलश योजना में निवेश करके 7.6 प्रतिशत की ब्याज दर प्राप्त करना चाहते हैं। ऐसे में आपके पास इस स्कीम में निवेश करने के लिए 31 मार्च तक का ही मौका है। </p>
म्यूचुअल फंड स्कीम में नॉमिनेशन
<p>अगर आप म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं। ऐसे में आपको 31 मार्च, 2023 से पहले नॉमिनेशन करा लेना चाहिए। फंड हाउस ने सभी निवेशकों को यह काम 31 मार्च से पहले करने के निर्देश दिए हैं। अगर आप इस काम को नहीं करते हैं। इस स्थिति में आपके फंड को फ्रीज कर दिया जाएगा। </p>
<p>सीनियर सिटीजन्स को बैंकों ने दिया तोहफा, करें निवेश होगा बड़ा फायदा</p>
<p>इस सरकारी योजना में लगाए पैसे, हर माह मिलेंगे 9000 रुपये</p>
सुकन्या समृद्धि और PPF, NPS योजनाएं करें एक्टिव
<p>अगर आपने सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), पब्लिक प्रोविडेंट फंड अकाउंट (PPF) या नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) योजनाओं के अकाउंट्स खोल रखें हैं ताकि उनमें इन्वेस्ट कर सकें तो अपने अकाउंट में इस साल भी मिनिमम पैसे जरूर रखें। ऐसा न करने पर अकाउंट बंद हो जाएगा। इन खातों को दोबारा एक्टिव कराने में वक्त भी जाया होगा और फाइन भी लगेगा। इसलिए वक्त रहते इसमें पैसा जमा करा दें। PPF के लिए मिनिमम कंट्रिब्यूशन 500 रुपये है। यह ELSS की तरह रिस्क वाला भी नहीं है। इस पर सरकार हर तिमाही में इंटरेस्ट रेट का ऐलान करती है। अगर अकाउंट खोल लिया तो हर फाइनेंशल ईयर में इसमें 500 रुपये इन्वेस्टमेंट करने ही होंगे वरना यह डिसकंटिन्यू हो जाएगा और हर साल 50 रुपये की पेनल्टी लगाई जाती है। इसी तरह NPS के लिए 1,000 रुपये और SSY का अकाउंट एक्टिव रखने के लिए हर साल कम से कम 250 रुपये जमा करवाने होते हैं। SSY अकाउंट एक परिवार की सिर्फ दो बेटियों के लिए खोला जा सकता है और दो बेटियां जुड़वां हैं तो तीन बेटियों के लिए यह अकाउंट खोल सकते हैं। 10 साल तक की बेटी के पिता यह अकाउंट खोल सकते हैं। इस योजना में 3 करोड़ अकाउंट खोले जा चुके हैं। हर तिमाही पर सरकार इसके इंटरेस्ट रेट का ऐलान करती है। कोई भी शख्स बैंक या पोस्ट ऑफिस के जरिये अकाउंट खोल सकता है। सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट खुलने के 21 साल बाद मैच्योर होता है। इसके तहत कम से कम 15 साल तक इन्वेस्ट करना होता है।</p>
<p>नए साल में इस शानदार स्कीम में करें निवेश, टैक्स के साथ-साथ बचेगा बहुत सारा पैसा</p>
<p>एलआईसी की इस पॉलिसी में इन्वेस्ट करें और पाएं 27 लाख से ज्यादा, अधिक जानकारी के लिए इसे पूरा पढ़े</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/important-information-must-do-this-work-before-march-31-otherwise-there-may-be-problems						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 12 Mar 2023 09:40:05 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Train Seat Belts : हवाई जहाज और कार की तरह, ट्रेन में सीट बेल्ट क्यों नहीं होते]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p ><strong>Train Seat Belts :</strong> आपने देखा होगा की जब भी हम हवाई जहाज या कार में बैठते है तो सीट बेल्ट जरूर लगाते है। ट्रेफिक पुलिस भी हमारी सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट लगाने को कहती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हवाई जहाज और कार में सीट बेल्ट होता है, पर ट्रेन में क्यों नहीं होता। जबकि रेल गाड़ी भी दुर्घटनाओं का शिकार होती रहती है।</p>
<p >सबसे पहले आपको यह बता दे कि हवाई जहाज में सीट बेल्ट तब लगाते है जब प्लेन उड़ने के लिए तैयार हो या फिर उतरने वाला हो तब ही सीट बेल्ट लगाया जाता हैं। क्योंकि इन दोनों परिस्थितियों में बिना सीट बेल्ट के यात्रियों का बैलेंस बिगड़ सकता है। और यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए हवाई जहाज में सीट बेल्ट लगाना जरूरी होता है। वही कार की बात करे तो कार एक मायने से हल्की होती है। दुघर्टना के दौरान कार पटलती है तो बिना सीट बेल्ट के यात्रियों को काफी चोटे आती है। इसलिए कार में सीट बेल्ट हमेशा लगाने को कहा जाता हैं।</p>
<p ><strong>ट्रेन में सीट बेल्ट क्यों नहीं?</strong></p>
<p >अब बात करते है कि ट्रेन में सीट बेल्ट क्यों नहीं होता? दरअसल, ट्रेन के डिब्बे काफी भारी होते हैं। जिसके चलते अगर ट्रेन का एक्सीडेंट होता है तो अंदर बैठे यात्रियों को ज्यादा क्षति नहीं पहुंचती है। क्योंकि ट्रेन बड़ी और भारी होती है, और डिब्बों का फ्रेम भी बड़ा होता है। और अगर ट्रेन का एक्सीडेंट होता है तो अचानक से लगने वाला झटका कार के मुकाबले थोड़ा कम होता है। इसलिए ट्रेन में सीट बेल्ट नहीं होता।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/train-seat-belts-like-airplanes-and-cars-why-dont-trains-have-seat-belts						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/train-seat-belts-like-airplanes-and-cars-why-dont-trains-have-seat-belts</guid>
					<pubDate>Thu, 23 Feb 2023 09:22:00 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[किस नंबर पर पंखा चलाने से बिजली का खर्च होगा कम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>गर्मी का मौसम शुरू होने वाला है. ऐसे में लोगों को अब पंखे, कूलर और एसी की जरूरत पड़ने वाली हैं. घरों में पंखा होना आम बात है और गर्मियों में लगभग पूरा दिन घरों में पंखा चलता रहता है. ऐसे में बिजली का बिल भी ज्यादा आता है. हालांकि लोगों का यह मानना है कि पंखे की स्पीड के हिसाब से बिजली का बिल कम या ज्यादा हो सकता है.</p>
<p><strong>पंखा</strong></p>
<p>दरअसल, लोगों का मानना है कि अगर पंखे की स्पीड 1 पर रहेगी तो बिजली कम खर्च होगी, जिससे बिजली का बिल कम आएगा. वहीं अगर पंखा अपनी फुल स्पीड यानी चार नंबर या पांच नंबर पर होगा तो बिजली ज्यादा खर्च होगी. इससे बिजली का बिल भी ज्यादा होगा. ऐसे में आज हम आपको इस भ्रम के बारे में बताने वाले हैं कि इसके पीछे का राज क्या है.</p>
<p><strong>पंखे की स्पीड</strong></p>
<p>बता दें कि पंखे की स्पीड जितनी होगी, उतनी ही पावर खर्च होगी. यह रेगुलेटर पर निर्भर करता है कि पंखे की स्पीड कितनी है. रेगुलेटर के हिसाब से पंखे की स्पीड निर्भर करती है और फिर उसी के हिसाब से बिजली की खपत भी होती है. हालांकि बाजार में ऐसे भी कई रेगुलेटर हैं, जिनका बिजली की खपत पर कोई असर नहीं पड़ता है और ये सिर्फ पंखे की स्पीड को ही कंट्रोल करते हैं.</p>
<p><strong>बिजली बिल</strong></p>
<p>वहीं पंखे में किस तरह का रेगुलेटर लगा है, इसी पर निर्भर करेगा कि पंखे की स्पीड से बिजली की बचत होगी या नहीं. वहीं बाजार में कई रेगुलेटर ऐसे भी हैं, जो वोल्टेज को कंट्रोल करते हैं और फिर पंखे की स्पीड को नियंत्रित करते हैं. वहीं रेगुलेटर बिजली की खपत कम कर सकते हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि वो बिजली की बचत भी करें. ऐसे में पंखे की स्पीड को कम या ज्यादा करने से बिजली की बचत पर कोई खास असर नहीं पड़ता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/by-running-the-fan-on-which-number-the-cost-of-electricity-will-be-less						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/by-running-the-fan-on-which-number-the-cost-of-electricity-will-be-less</guid>
					<pubDate>Tue, 21 Feb 2023 02:09:29 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[फ्री में मिलने वाली चूल्हे की राख अमेजन पर इतने रुपए प्रति किलो मिल रही है, सुनकर विश्वास नहीं होगा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हाल ही में सोशल मीडिया पर ऑनलाइन बिकने वाले सामानों की कड़ी में एक ऐसे सामान की कीमत वायरल हुई जिसे सुनकर लोगों के सिर चकरा गया. लोगों को यकीन नहीं हुआ कि यह वही राख है जो चूल्हे से लकड़ी जब जल जाती है उसके बाद निकलती है. लकड़ी के अवशेष के रूप में यह राख ही बचती है. अब उस राख की असली कीमत जाकर पता चली है.</p>
<p>दरअसल इस राख को ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी अमेजन पर बेचा जा रहा है. इसकी कीमत हाल ही में तब वायरल हुई है जब कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके बारे में ट्विटर पर लिखा है. इसके बाद इस पर चर्चा होने लगी है. स्वामी रामदेव के भी ट्विटर हैंडल पर लिखा गया कि जिस चूल्हे की राख से हमारे पूर्वज बर्तन मांजते थे, पहले उनको अवैज्ञानिक कहकर उसका मजाक बनाया गया. </p>
<p>उन्होंने आगे लिखा कि इसके बाद केमिकल वाले डिशवाश के प्रयोग की आदत डाली, जो कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बना. आज वही चूल्हे की राख अमेजन जैसी कंपनी 1800 रुपए किलो बेच रही हैं. इसके बाद यह बहस शुरू हो गई और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. </p>
<p>यही कारण है कि फ्री में मिलने वाली चूल्हे की राख अमेजन पर 1800 रुपए प्रति किलो मिल रही है. इतना ही नहीं इस तरह अमेजन पर कई ऐसी चीज़ें महंगी मिल रही हैं, जो हमें बिल्कुल मुफ्त में मिला करती थी. उपले हो या दातून, खाट हो या फिर पूजा के लिए लकड़ी... सबकुछ ऑनलाइन मिल रहा है. इसके लिए आपको बहुत ही ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/stove-ash-available-for-free-is-being-sold-on-amazon-for-so-much-rupees-per-kg-you-will-not-believe						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/stove-ash-available-for-free-is-being-sold-on-amazon-for-so-much-rupees-per-kg-you-will-not-believe</guid>
					<pubDate>Thu, 16 Feb 2023 01:03:45 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[ऐसे पता करें कि आपका पार्टनर व्हाट्सएप पर सबसे ज्यादा किससे बातें करता हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>Whatsapp सबसे पॉपुलर सोशल मैसेजिंग ऐप है, इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. पर्सनल मैसेज करना हो, वीडियो कॉल या फिर ऑडियो कॉल. हर चीज के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल किया जाता है. कई यूजर्स को नहीं पता होता है कि वॉट्सएप पर क्या-क्या फीचर्स मिलते हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक हिडन फीचर के बारे में बताना जा रहे हैं. वॉट्सएप पर ही पता कर सकते हैं कि आप किससे सबसे ज्यादा बातें करते हैं.</p>
<p><strong>किससे करते हैं हम सबसे ज्यादा वॉट्सएप पर बातें</strong></p>
<p>वॉट्सएप पर कई ग्रुप्स बना दिए जाते हैं. स्कूल के दोस्तों का अलग, परिवार का अलग और ऑफिस के लोगों का अलग. ऐसे पता करना मुश्किल हो जाता है कि आप किस वॉट्सएप मेंबर के साथ सबसे ज्यादा बातें करते हैं. आप अपने पार्टनर के फोन का भी पासवर्ड जानते हैं, तो उनका वॉट्सएप भी चेक कर सकते हैं और पता कर सकते हैं कि वो किससे ज्यादा बातें करता है. आइए जानते हैं कैसे...</p>
<p><strong>Find Who You Talk to the Most on WhatsApp</strong></p>
<p>1. सबसे पहले अपना वॉट्सएप ओपन करें और साइड कॉर्नर तीन डॉट्स पर क्लिक करें.</p>
<p>2. वहां सेटिंग्स पर क्लिक करें, वहां आपको कई ऑप्शन्स नजर आ जाएंगे. </p>
<p>3. वहां आपको स्टोरेज एंड डेटा नाम का ऑप्शन नजर आएगा. उस पर क्लिक करें.</p>
<p>4. यहां आपको कई ऑप्शन्स दिख जाएंगे. वहां मैनेज स्टोरेज का ऑप्शन मिलेगा. उस पर क्लिक करें.</p>
<p>5. वहां क्लिक करते ही आपके कई सारे ऑप्शन्स दिख जाएंगे. जो सबसे पहला नाम होगा, उससे आप सबसे ज्यादा बातें करते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/how-to-find-out-who-your-partner-talks-to-the-most-on-whatsapp						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/how-to-find-out-who-your-partner-talks-to-the-most-on-whatsapp</guid>
					<pubDate>Wed, 15 Feb 2023 10:03:55 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[दुनिया की सबसे अमीर शहजादी जिसकी शान-ओ-शौकत जानकर आप रह जाएंगे दंग]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>इतिहास की किताबों में हमने मुगलों के शान-ओ-शौकत के बारे में खूब पढ़ा है. हममें से ज्यादातर लोग मुगलों से परिचित होंगे क्योंकि भारत के इतिहास में मुगलों का बहुत बड़ा योगदान रहा है. मुगलों की धन संपदा का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उनके द्वारा बनाए गए आगरा का किला, लाल किला, ताजमहल और जामा मस्जिद जैसे मशहूर इमारतों को लोग देखने के लिए दुनियाभर से भारत आते हैं.</p>
<p>आपको बता दें कि दुनिया की सबसे अमीर शहजादी भी मुगलों के खानदान से नाता रखती थी. शाहजहां के शासनकाल के लिए कहा जाता है कि सबसे ज्यादा विकास और रिहायशी इमारतों का निर्माण इसी समय हुआ था. हमने दुनिया की जिस सबसे अमीर शहजादी का जिक्र किया वह शाहजहां की बेटी थी. शाहजहां की बेटी का नाम जहां आरा था जो मुमताज और शाहजहां की सबसे बड़ी बेटी थी.</p>
<p>साल 1614 में अजमेर में पैदा हुई, जहांआरा औरंगजेब की बड़ी बहन थी. कहा जाता है कि जहां आरा रूपवती और कुशल महिला थी जो बेहद कम उम्र से ही मुगल शासन का हिस्सा बन गई थी. इस दौरान वह अपनी सेवाएं आम जनों तक भी पहुंचा रही थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि जहां आरा को बादशाह शाहजहां के द्वारा ₹6 लाख का वार्षिक वजीफा मिलता था. जो अब तक मुगल इतिहास में सबसे ज्यादा था क्योंकि अब तक इतनी बड़ी धनराशि किसी को नहीं मिली थी.</p>
<p>आपको बता दें कि वजीफा उस राशि को कहते हैं जो बादशाह शाहजहां के द्वारा भरण पोषण के लिए शहजादी जहां आरा को (आर्थिक सहायता) दिया जाता था, जिस वक्त शाहजहां से जहां आरा को ये वजीफा मिला था उस वक्त उसकी उम्र सिर्फ 14 साल थी. दिल्ली के मशहूर चांदनी चौक बाजार को हम सभी जानते हैं. चांदनी चौक डिजाइन करने का श्रेय भी कई लोग जहां आरा को ही देते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/you-will-be-stunned-to-know-the-worlds-richest-princess						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/you-will-be-stunned-to-know-the-worlds-richest-princess</guid>
					<pubDate>Mon, 13 Feb 2023 09:41:28 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[ट्रेन में टॉयलेट लगने की दिलचस्प कहानी, इस एक घटना की वजह से करना पड़ा बड़ा बदलाव]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>ट्रेन जब भारत में 1853 में पहली बार चली थी तब उसमें टॉयलेट (Toilet) नहीं थे. फिर अगले 56 साल तक ऐसा ही चलता रहा और 1909 में भारत के अंदर पहली बार ट्रेनों के अंदर शौचालय की व्यवस्था कराई गई. ऐसा सिर्फ एक लेटर की वजह से करना पड़ा. पेट खराब की समस्या से पीड़ित शख्स ने साहिबगंज मंडल कार्यलय को लेटर लिखा था कि वह टॉयलेट के लिए ट्रेन से उतरा था और फिर उसके लिए ट्रेन 2 मिनट भी नहीं रुकी. गार्ड की इस हरकत की वजह से वह लड़खड़ाकर पटरी पर गिर गया और उसको चोट लग गई. धोती-लोटा पकड़कर उसको रेलवे लाइन पर दौड़ना पड़ा. इस लेटर के बाद रेलवे ने बड़ा बदलाव करते हुए 50 मील से ज्यादा दूर तक चलने वाली ट्रेनों में टॉयलेट की व्यवस्था कराई.</p>
<p><strong>ट्रेन में टॉयलेट लगने की दिलचस्प कहानी</strong></p>
<p>अखिल चंद्र सेन ने लेटर में लिखा कि मैं रेलगाड़ी से अहमदपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा. मैं पेट खराब की समस्या से पीड़ित था. इस वजह से मैं टॉयलेट के लिए चला गया था. इस बीच, गार्ड ने सीटी बजा दी और ट्रेन चल पड़ी. फिर ट्रेन पकड़ने के लिए मैं लोटा हाथ में पकड़े हुए और धोती संभालते ट्रेन की तरफ रेलवे लाइन पर दौड़ा.</p>
<p><strong>जब महज 2 मिनट के लिए नहीं रुकी ट्रेन</strong></p>
<p>उन्होंने लेटर में आगे लिखा कि मुझे उस वक्त सब लोग देख रहे थे. मैं वहां गिर पड़ा. इसकी वजह से मैं अहमदपुर स्टेशन पर ही छूट गया. गार्ड ने 2 मिनट तक और ट्रेन नहीं रोकी. गार्ड पर इस हरकत के लिए भारी-भरकम जुर्माना लगाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं यह खबर अखबार वालों को दे दूंगा.</p>
<p><strong>नाराज शख्स ने लिखा लेटर</strong></p>
<p>गौरतलब है कि अगर 1909 में उस वक्त अखिल चंद्र सेन के साथ ये घटना नहीं हुई होती और उन्होंने इसको गंभीरता से लेकर रेलवे के अधिकारियों को लेटर नहीं लिखा होता तो शायद कुछ और दशक ट्रेनों में टॉयलेट की सुविधा नहीं होती है. हालांकि, अब ट्रेनों में वाई-फाई समेत तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है.</p>
<p>जान लें कि अखिल चंद्र सेन का लिखा हुआ लेटर दिल्ली के रेलवे म्यूजियम में सुरक्षित रखा हुआ है. इसी लेटर के कारण भारत की ट्रेनों में शौचायल की सुविधा मुहैया करवाई गई. ट्रेनों में बड़ा बदलाव किया गया.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/interesting-story-of-toilet-installation-in-train-due-to-this-one-incident-a-big-change-had-to-be-ma						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/interesting-story-of-toilet-installation-in-train-due-to-this-one-incident-a-big-change-had-to-be-ma</guid>
					<pubDate>Sun, 12 Feb 2023 21:56:20 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[देश का इकलौता राज्य जहाँ कितना भी कमाए, नहीं देना होता एक रूपया भी टैक्स]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कुछ दिनों पहले वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्‍त वर्ष 2023-24 का बजट पेश किया था. उस भाषण में बताया गया था कि 7 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्‍स नहीं लगेगा. इस ऐलान के बाद कई लोग खुश हुए, लेकिन क्‍या आप जानते हैं भारत का एक राज्‍य ऐसा भी है. जहां की जनता से आयकर के रूप में एक रुपया भी नहीं वसूला जाता है. जी, हां आप सही पढ़ रहे हैं. अगर उस राज्‍य के लोगों की इनकम करोड़ों रुपये भी हो तो आयकर विभाग उनसे एक रुपये भी नहीं वसूलता है. आइए जानते हैं सिक्किम में ये नियम क्‍यों बनाया गया है?  </p>
<p><strong>क्‍यों दी गई ये छूट?</strong></p>
<p>इसके लिए आपको भारत के इतिहास के बारे में जानना होगा क्‍योंकि साल 1950 के दौर में भारत ने सिक्किम के साथ शांति समझौता किया था. उसके तहत सिक्किम भारत के सरंक्षण में आया था. फिर 1975 के समय में इसका पूर्ण विलय हो गया. सिक्किम में चोग्याल शासन चल रहा था. उन्‍होंने 1948 में सिक्किम इनकम टैक्स मैनुअल जारी किया था और जब इसका भारत के साथ विलय हुआ तो उसमें शर्त थी कि सिक्किमी लोगों को इनकम टैक्‍स से छूट दी जाएगी. आपको बता दें कि आयकर अधिनियम की धारा 10 (26एएए) के तहत सिक्किम के मूल निवासियों को छूट प्रदान की जाती है. </p>
<p><strong>मूल निवासियों को मिलती है छूट</strong></p>
<p>इनकम टैक्‍स एक्‍ट के तहत सिक्किम के मूल निवासियों को ये छूट दी गई है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक फैसला सुनाया था. उसके बाद से सिक्किम के लगभग 95% लोग इस छूट का फायदा उठाते हैं. पहले यह छूट सिर्फ सिक्किम सब्जेक्ट सर्टिफिकेट रखने वालों को ही दी जाती थी. </p>
<p><strong>आर्टिकल 371 ए</strong></p>
<p>आपको बता दें कि पूर्वोतर के सभी राज्‍यों को आर्टिकल 371A  के तहत विशेष दर्जा दिया गया है. इसी वजह से देश के दूसरे हिस्से के लोग, यहां संपत्ति या जमीन नहीं खरीद सकते हैं. सिक्किम के मूल निवासियों को इनकम टैक्‍स की धारा, 1961 की धारा 10 (26AAA) के तहत आयकर में छूट दी जाती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/the-only-state-in-the-country-where-no-matter-how-much-you-earn-you-dont-have-to-pay-even-a-single-r						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/the-only-state-in-the-country-where-no-matter-how-much-you-earn-you-dont-have-to-pay-even-a-single-r</guid>
					<pubDate>Sun, 12 Feb 2023 15:29:56 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जानिए कोहिनूर के बारे में जिसे पाने के लिए मचा कत्लेआम और क्यों कहा जाता है इसे बदनाम हीरा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भारतीय इतिहास का सबसे कीमती और सबसे बदनाम हीरा जिसे लोग कोहिनूर के नाम से जानते हैं. कभी कोहिनूर मुगलों के तख्त-ए-ताऊस की शान हुआ करता था लेकिन कोहिनूर के बारे में एक और बात बहुत मशहूर है, जिसके भी हाथ कोहिनूर लगा, वह बर्बादी के गर्त में चला गया. एक वक्त था जब मुगलों का साम्राज्य एक बड़े भूभाग में फैला हुआ था लेकिन कोहिनूर आने के बाद मुगलों का साम्राज्य धीरे-धीरे सिमटता गया और एक वक्त पर खत्म भी हो गया और यही बात अंग्रेजों के लिए भी कही जाती है. आज हम नादिर शाह के बारे में जानेंगे जिसने मुगलों से युद्ध में जीत हासिल की और कोहिनूर को अपने साथ लेकर चला गया.</p>
<p><strong>कौन था नादिर शाह?</strong></p>
<p>नादिर शाह से हारने के बाद मुगलों के पतन की शुरुआत होती है. नादिर शाह की सेना ने उत्तर भारत पर साल 1739 में आक्रमण किया और युद्ध में मुगलों को बुरी तरह से हराया था. मुगलों को लड़ाई में हराकर नादिर शाह भारत से करीब 100 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति अपने साथ ले गया था और इसी में दुनिया का बेशकीमती हीरा कोहिनूर भी शामिल था. नादिर शाह ने ही इस हीरे को कोहिनूर नाम दिया था. इसका मतलब होता है, 'रोशनी का पहाड़'.  नादिरशाह ने जब भारत पर आक्रमण किया था. उस समय मुगलों का राजा मोहम्मद शाह रंगीला हुआ करता था. आपको बता दें कि नादिर शाह एक ईरानी था, जिसने अफशरीद राजवंश की संस्थापना की थी. आक्रमण के दौरान नादिर शाह ने देश में जमकर खून खराबा किया था और हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था.</p>
<p><strong>जब अंग्रेजी हुकूमत के हाथ लगा ये हीरा</strong></p>
<p>इस युद्ध में हारने के बाद मुगलों का धीरे-धीरे पतन हुआ. कहा जाता है कि बाद में जब ब्रिटिश साम्राज्य के हाथ हीरा लगा उससे पहले ब्रिटिश सम्राज्य पृथ्वी के बड़े भूभाग में फैला हुआ था. लेकिन इस हीरे  को पाने के बाद अंग्रेजी हुकूमत भी धीरे-धीरे सिमटती गई.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/know-about-the-kohinoor-which-created-a-massacre-to-get-it-and-why-it-is-called-infamous-diamond						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/know-about-the-kohinoor-which-created-a-massacre-to-get-it-and-why-it-is-called-infamous-diamond</guid>
					<pubDate>Thu, 09 Feb 2023 01:41:59 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[इस अनोखे देश में साल में 12 नहीं १३ महीने होते है, वहां २०२३ नहीं २०१५ चल रहा है, क्या है इसके पीछे की वजह]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>अगर आपको लगता है कि पूरी दुनिया में 12 महीनों का 1 साल होता है तो आप गलत हैं. जी हां इस  दुनिया में एक ऐसा देश भी हैं जहां एक साल 12 महीनों का नहीं बल्कि 13 महीनों का होता है. यही वजह है कि जहां बाकी पूरी दुनिया में 2022 चल रहा है, इस देश में अभी भी 2015 ही चल रहा है.</p>
<p>यह देश है इथोपिया. यहां हर 13 महीनों के बाद नया साल आता है. लेकिन ऐसा क्या है कि इस अफ्रीकी देश में 13 महीने का एक साल आता है. लेकिन आखिर इसका कारण क्या है.</p>
<p><strong>दुनिया से अलग है इथोपिया का कैलेंडर</strong></p>
<p>इसका कारण है कि यह देश जुलियस सीजर द्वारा बनाए गए जूलियन कैलेंडर को मानता है जबकि बाकी पूरी दुनिया ने ग्रेगोरियन कैलेंडर को स्वीकार किया है.</p>
<p><strong>पूरी दुनिया में लागू होता है एक कैलेंडर</strong></p>
<p>ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत पोप ग्रेगोरी 13वें ने साल 1582 में की थी. इन्होंने यह कैलेंडर जूलियन कैलेंडर में सुधार करके बनाया था और 1 जनवरी को नए साल का पहला दिन करार दिया था. पूरी दुनिया में यही कैलेंडर लागू होता है. लेकिन इथोपिया ने इसे मानने से इनकार कर दिया था और अपने यहां वह पुराने जूलियन कैलेंडर को ही लागू किया.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/in-this-unique-country-there-are-12-not-13-months-in-a-year-it-is-not-2023-but-2015-what-is-the-reas						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/in-this-unique-country-there-are-12-not-13-months-in-a-year-it-is-not-2023-but-2015-what-is-the-reas</guid>
					<pubDate>Mon, 30 Jan 2023 02:05:04 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[क्या आपको पता है घोडा कभी सोता नहीं, इसके पीछे क्या है वजह आओ जाने]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>नींद जब आती है तो उसके सामने कुछ भी प्यारा नहीं लगता है. फिर तो सारी दुनिया एक तरफ और नींद एक तरफ. लेकिन घोड़े के साथ कुछ अलग ही सीन है. घोड़ा सोता ही नहीं है! आखिर ऐसा क्या है जिसकी वजह से घोड़ा सोता ही नहीं है. इसके पीछे एक साइंटिफिक कारण है जिसके बारे में हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं. </p>
<p>घोड़ों का देश-दुनिया में अपना अलग रोल है. भारत में घोड़ों का इस्तेमाल माल ढुलाई और घुड़सवारी से लेकर सेना पुलिस में किया जाता है. मतलब देश की रक्षा के लिए भी घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. तो आज हम घोड़े की नींद को लेकर बात कर रहे हैं. आपने कभी देखा होगा तो घोड़े को बैठे हुए नहीं देखा होगा. वह हमेशा तैयार की पॉजिशन में ही होता है. ऐसा बिलकुल नहीं है कि घोड़ा बैठता ही नहीं है. जब वह कमजोर या फिर बीमार होता है तो वह बैठता भी है. </p>
<p>घोड़े के न बैठने के पीछे एक और कारण है कि अगर घोड़ा बैठ जाएगा तो उसके फेंफड़ों को पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी और यह उसके लिए घातक हो सकता है. इसीलिए वह खड़ा ही रहता है. यह एक कारण भी है जो घोड़े को खड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करता है. </p>
<p>घोड़ा पूरे 24 घंटे में 30 से 40 मिनट ही सोता हैं. सबसे खास बात ये है कि इस 30-40 मिनट की नींद को वह कई बार में लेता है. वह अपनी नींद भी खड़े होकर ही पूरी करता है. घोड़ा अत्याधिक उर्जा तथा ताकतवर होता है. इसी उर्जा की वजह से उसे बहुत कम नींद की जरूरत होती है. इसलिए वह सिर्फ इतना सोता है. आपने अगर घोड़े के पैरों की बनावट पर ध्यान दिया हो तो देखा होगा कि वह एकदम तने हुए होते हैं. इसके लिए घोड़े के पैरों की मांसपेशियां और उसकी शारीरिक बनावट भी काफी कारगार साबित होती हैं. इसी वजह से वह खड़े खड़े सो भी पाता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/do-you-know-that-the-horse-never-sleeps-what-is-the-reason-behind-it						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/do-you-know-that-the-horse-never-sleeps-what-is-the-reason-behind-it</guid>
					<pubDate>Sat, 28 Jan 2023 01:51:08 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[यह पेड़ भूलकर भी अपने खेत में नहीं लगाना चाहिए वरना मुनाफा देने के बजाय खेत को ही बंजर कर डालेगा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>खेती के साथ एक्स्ट्रा कमाई के लिए किसान अपने खेतों की मेड़ पर अक्सर विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगवाना पसंद करते हैं. ऐसे पेड़ डेढ़ साल से लेकर 5 साल तक में बड़े हो जाते हैं. कुछ ऐसे पेड़ होते हैं, जिन्हें देखभाल और खाद-पानी की जरूरत होती है. वहीं कई पेड़ ऐसे भी होते हैं, जो अपने आप धीरे-धीरे बढ़ना शुरू कर देते हैं. इन सभी पेड़ों की लकड़ी बाजार में काफी महंगे दामों में बिकती है, जिसकी बिक्री से किसानों को ठीकठाक कमाई हो जाती है. लेकिन कुछ ऐसे पेड़ भी हैं, जिन्हें किसानों को भूलकर भी अपने खेत में नहीं लगाना चाहिए वरना वह मुनाफा देने के बजाय खेत को ही बंजर कर डालता है. यूकिलिप्टिस यानी सफेदा, ऐसा ही एक पेड़ है. इसे नीलगिरी के पेड़ के नाम से भी जाना जाता है. आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं. </p>
<p><strong>सोख लेता है जमीन में मौजूद पानी </strong></p>
<p>वनस्पति विज्ञान के जानकारों के मुताबिक यूकिलिप्टिस का पौधा लगाने (Disadvantages of Planting Eucalyptus Tree) के 5 साल बाद वह अपना पूर्ण रूप हासिल कर लेता है यानी कि वह 25-30 फुट लंबा पेड़ बन चुका होता है, जिसे बेचकर आप ठीक-ठाक धनराशि कमा सकते हैं. लेकिन इस पेड़ का साइड इफेक्ट ये है कि यह जमीन में मौजूद पानी और मिट्टी के पोषक तत्वों का बुरी तरह दोहन कर बंजर बना देता है. इस पेड़ को रोजाना 12 लीटर पानी और भारी मात्रा में पोषक तत्वो की जरूरत होती है. सिंचाई का पानी न मिलने पर इसकी जड़ें भूजल को सोखना शुरू कर देती हैं, जिससे उस इलाके का भूगर्भ जलस्तर नीचे गिर जाता है. </p>
<p><strong>कई इलाकों में पेड़ लगाने पर लगा बैन</strong></p>
<p>पर्यावरण से जुड़ी कई रिपोर्ट में पता चला है कि जिन इलाकों में सफेदे यानी यूकिलिप्टिस (Disadvantages of Planting Eucalyptus Tree) की खेती की जा रही है, वहां का भूजल स्तर दूसरों के मुकाबले काफी नीचे पहुंच चुका है. हालात को देखते हुए प्रशासन ने ऐसे इलाकों को डेंजर जोन घोषित करके वहां पर सफेदे के पेड़ लगाने पर बैन लगा दिया है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे पेड़ लगाने के बाद वह मिट्टी दूसरी खेती के लायक नहीं रहती और उसमें मौजूद सभी पोषक तत्व बुरी तरह बर्बाद हो चुके होते हैं. </p>
<p><strong>भारत में अंग्रेजों ने शुरू किया था चलन</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस पेड़ की खेती (Disadvantages of Planting Eucalyptus Tree) का चलन अंग्रेजों ने शुरू किया था. उन्होंने दलदली और पानी वाले इलाकों को सुखाने के लिए नीलगिरी यानी सफेदे के पेड़ों को लगाना शुरू किया. नतीजतन उन इलाकों में पानी की मात्रा और नमी खत्म होती चली गई. इस पेड़ की लंबाई बाकी पेड़ों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है, जिसके चलते इसमें से बड़ी मात्रा में लकड़ी निकलती है, जिसे बेचने से किसानों को फायदा होता है. </p>
<p><strong>केवल ऐसे इलाकों में लगा सकते हैं पेड़</strong></p>
<p>लेकिन आज के दौर में जब भूजल स्तर बहुत नीचे पहुंच चुका है, ऐसे में नीलगिरी का पेड़ (Side Effects of Neelgiri Tree) मुनाफे के बजाय नुकसान का सबब ज्यादा बन रहा है. इसके चलते अधिकतर किसानों ने इस पेड़ को लगाने से अब तौबा कर लिया है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पेड़ को लगाना केवल तभी फायदेमंद माना जा सकता है, जब आप उसे नहर, तालाब, नदी या दलदली जमीन के पास लगाने की सोच रहे हैं. बाकी जगहों पर इस पेड़ को लगाना अब केवल जमीन को बंजर करवाने जैसा होता है और कुछ नहीं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/this-tree-should-not-be-planted-in-your-field-even-by-mistake-otherwise-instead-of-giving-profit-it-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/this-tree-should-not-be-planted-in-your-field-even-by-mistake-otherwise-instead-of-giving-profit-it-</guid>
					<pubDate>Thu, 12 Jan 2023 09:49:38 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कोहरे में गाड़ी ड्राइव करनी हो तो यूपी पुलिस के ये टिप्स आएगी आपके काम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के अधिकतर इलाकों में कोहरा छाया हुआ है. ऐसे मौसम में सबसे बड़ी समस्या वाहन चलाने वालों को होती है. Fog के कारण एक्सीडेंट की घटनाएं भी बढ़ जाती है. कार या बाइक चलाते समय आपकी छोटी सी गलती भी आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) ने इस मौसम में वाहन चलाने वालों के लिए कुछ ड्राइविंग टिप्स शेयर किए हैं. फिर भी अगर आप किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में यूपी पुलिस ने एक इमरजेंसी नंबर भी जारी किया है जो आप सभी के पास जरूर होना चाहिए. </p>
<p><strong>इस नंबर पर तुरंत मिलेगी हेल्प</strong></p>
<p>यूपी पुलिस ने एक ट्विट में लिखा, "हम है न!  किसी भी आकिस्मिक स्थिति मे फोन उठाएं 112 मिलाएं! आप अपने या दूसरों की मदद के लिए हमारे व्हाट्स एप नंबर 7570000100 पर भी चैट करके मदद प्राप्त कर सकते है."</p>
<p><strong>इन टिप्स को जरूर रखें याद</strong></p>
<p>1. Low Beam Light को चालू रखें: आमतौर पर ड्राइवर कोहरे के मौसम में गाड़ी की हाई बीम को ऑन कर लेते हैं, लेकिन इससे उन्हें देखने में और परेशानी ही होगी. जब भी सड़क पर विजिबिलिटी कम हो तो हेडलाइट को लो बीम (Low Beam) पर कर लें. अगर आपकी कार में फॉगलैंप मिलते हैं तो उन्हें भी ऑन कर लें.</p>
<p>2. धीमे चलाएं: ऐसे मौसम में ओवरस्पीडिंग (OverSpeeding) आपके लिए खतरनाक हो सकती है. विजिबिलिटी कम होने के कारण कोई भी वाहन अचानक आपके सामने आ सकता है और आप दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं.</p>
<p>3. हजार्ड लाइट्स (Hazard Lights) का इस्तेमाल करें: सभी गाड़ियों में पार्किंग लाइट्स के लिए खास बटन दिया होता है. इस बटन को दबाने से गाड़ी के चारों इंडिकेटर एक साथ जलने लगते हैं. इन्हें हजार्ड लाइट्स भी कहा जाता है. इन लाइट्स का इस्तेमाल करने से पीछे और आगे से आ रहे वाहनों को आप दूर से ही दिख जाते हैं.</p>
<p>4. ओवरटेकिंग से बचें: कोहरे के मौसम में बेहतर होगा कि आप एक सीमित स्पीड पर चलते रहें. किसी भी वाहन को ओवरटेक करने से बचें. आपको अपनी लेन भी नहीं बदलनी चाहिए. किसी भी तरह का टर्न लेते समय इंडिकेटर्स का जरूर इस्तेमाल करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/if-you-want-to-drive-in-fog-then-these-tips-of-up-police-will-be-useful-for-you						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/if-you-want-to-drive-in-fog-then-these-tips-of-up-police-will-be-useful-for-you</guid>
					<pubDate>Sun, 08 Jan 2023 23:35:34 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[होटल्‍स या शॉपिंग मॉल के टॉयलेट का दरवाजा नीचे से क्‍यों काटा जाता है, क्या है इसका कारण]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हाल ही में क्रिसमस बिता और कुछ ही दिनों में न्‍यू ईयर आने वाला है. ऐसे में आप कहीं न कहीं  होटल्‍स या शॉपिंग मॉल में जरूर गए होंगे और इसके अलावा भी आपने नोटिस किया होगा कि यहां के टॉयलेट्स कुछ खास तरह से बनाए जाते हैं. आपने वहां के दरवाजे नीचे से कटे देखे होंगे. क्‍या कभी आपने सोचा है कि इन दरवाजों को नीचे से क्‍यों काटा जाता है? दरअसल, इन दरवाजों को इस तरह से डिजाइन करने के पीछे कई उद्देश्य रहते हैं. इससे रोमियो पर भी लगाम लगाई जाती है. आइए जानते हैं. ये सब कैसे किया जाता है? </p>
<p><strong>इमरजेंसी के लिए होते हैं ये छोटे दरवाजे</strong></p>
<p>टॉयलेट का इस्‍तेमाल करते समय अगर किसी इंसान की तबीयत खराब हो जाए तो उसे आसानी से बाहर निकाल सकते हैं. मॉल्‍स में बच्‍चे भी होते हैं. अगर वे गलती से खुद को लॉक कर लें तो उन्‍हें भी बिना किसी टेंशन के बाहर निकाला जा सकता है. </p>
<p><strong>साफ-सफाई करने में नहीं आती दिक्‍कत </strong></p>
<p>शॉपिंग मॉल्‍स, मल्टीप्लेक्स या कोई भी पब्लिक टॉयलेट्स का इस्‍तेमाल दिनभर होता रहता है. ऐसे में साफ-सफाई करने में दिक्‍कत आती है. इसलिए यहां के दरवाजे नीचे से कटे होते हैं क्‍योंकि नीचे आसानी से पोछा लगाया जा सकता है. जिससे टॉयलेट्स साफ-सुथरे रहें.   </p>
<p><strong>रोमियो पर लगाते हैं लगाम </strong></p>
<p>कुछ लोग पब्लिक टॉयलेट्स का इस्‍तेमाल सेक्युअल एक्टिविटी के करने लगते हैं. ऐसे में अगर दरवाजे नीचे से कटे होंगे, तो उन लोगों प्राइवेसी नहीं मिल पाएगी और वे इस तरह की एक्टिविटी नहीं करेंगे. </p>
<p><strong>स्मोकिंग वालों के लिए </strong></p>
<p>अगर बंद टॉयलेट में स्‍मोकिंग (Smoking) किया जाए तो वह बहुत खतरनाक हो सकता है. आप जानते ही हैं कि इन जगहों पर लोग स्‍मोकिंग करते हैं. ऐसे में बंद टॉयलेट में धुआं आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर इन दरवाजों को नीचे से काट देंगे, तो ये प्रॉब्‍लम नहीं होगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/why-the-toilet-door-of-hotels-or-shopping-malls-is-cut-from-the-bottom-what-is-the-reason						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/why-the-toilet-door-of-hotels-or-shopping-malls-is-cut-from-the-bottom-what-is-the-reason</guid>
					<pubDate>Thu, 05 Jan 2023 14:35:58 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[पत्नी का पति और ससुराल की प्रॉपर्टी पर इतना हक होता है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पति पत्नी का रिश्ता प्रॉपर्टी या दूसरी किसी भी चीजों से ऊपर होता है. जब लड़की की शादी होती है तो फिर पति का घर ही उसका अपना घर होता है. आज हम आपको पत्नी के कुछ अधिकारों के बारे में बताने जा रहे हैं जो पत्नी को पति घर के में मिलते हैं. आज हम आपको यह भी बता रहे हैं कि पति की प्रॉपर्टी पर पत्नी का कितना हक होता है. </p>
<p>ऐसा बिलकुल जरूरी नहीं है कि पति के पास जो प्रॉपर्टी है उस पूरी प्रॉपर्टी पर आपका हक हो. ससुराल की प्रपोर्टी पर एक महिला का उतना अधिकार है जितना ससुराल वाले उसे देना चाहें. वहीं अपने पति की प्रॉपर्टी पर महिला का अधिकार होता है. पति अपनी प्रॉपर्टी में किसी के नाम कोई वसीयत नहीं करता है और उसकी मौत हो जाती है तो, कैटेगरी 1 कानूनी उत्तराधिकारी है, पति की संपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उसके पास होगी.</p>
<p>भारत में कानून के अधिकार के तहत ही पत्नी का पति की प्रॉपर्टी पर हक होता है. शादी के बाद अगर पति-पत्नी अलग होने का फैसला लेते हैं तो महिलाएं हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पति से भत्ता मांग सकती हैं. वहीं पत्नी घरेलू हिंसा अधिनियम और 125 सीआरपीसी के तहत महिलाएं जीवन भर अपने पति से गुजारा भत्ता की मांग कर सकती हैं.</p>
<p>उदाहरण के लिए यदि A की मृत्यु हो जाती है और उसने कोई वसीयत नहीं की है और उसके पत्नी, बेटा और बेटी हैं. इस स्थिति में सभी वर्ग 1 कानूनी उत्तराधिकारी हैं इसलिए पति की संपत्ति को उसके सभी वर्ग 1 कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच समान रूप से बांटा जाएगा.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/the-wife-has-so-much-right-on-the-property-of-her-husband-and-in-laws						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/the-wife-has-so-much-right-on-the-property-of-her-husband-and-in-laws</guid>
					<pubDate>Mon, 02 Jan 2023 09:13:53 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[ब्रह्मोस मिसाइल का नामकरण कैसे हुआ और इसका अर्थ क्या है, आऒ जाने इसका जवाब]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है. इस मिसाइल की गिनती 21वीं सदी की सबसे खतरनाक मिसाइलों में होती है. इसे पनडुब्‍बी, जंगी जहाज, एयरक्राफ्ट और जमीन से भी लॉन्‍च किया जा सकता है. ये मिसाइल दुश्‍मन को संभलने का मौका नहीं देती. ब्रह्मोस के कई वैरियंट्स हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मिसाइल के नाम (BrahMos missile name) का अर्थ क्या है? इस मिसाइल (Brahmos missile name on rivers) का ये नाम कैसे और क्यों पड़ा. इसकी जानकारी कम लोगों को ही पता होगी. </p>
<p><strong>क्यों चर्चा में है ​ब्रह्मोस?</strong></p>
<p>ये मिसाइल पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है. हाल ही में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर लॉन्च संस्करण का कई बार परीक्षण किया गया है. इसकी ताकत से दुश्मन देश खौफ खाते हैं. इसकी क्षमता से इतर फिलहाल सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा इसके नाम की वजह से हो रही है और लोग गूगल कर रहे हैं कि आखिर इस लंबी दूरी की ब्रह्मोस मिसाइल का ये नामकरण कैसे और किसलिए हुआ?</p>
<p><strong>ब्रह्मोस का नाम किन दो नदियों पर पड़ा है?</strong></p>
<p>डीसी संजय कुमार (Sanjay Kumar) ने एक ट्वीट कर लोगों ने ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़ा सवाल किया है. जिसमें उन्होंने पूछा, 'Brahmos मिसाइल का नाम दुनिया की किन दो नदियों का नाम जोड़कर बनाया गया है?' इस सवाल का सही जवाब बहुत से लोगों ने दिया है. लेकिन यहां हम आपसे पूछते हैं कि क्या आपको इसका जवाब पता है? अगर नहीं तो कोई बात नहीं हम आपको बताते हैं कि इस मिसाइल का नाम कौन सी दो नदियों को मिलाकर रखा गया है.</p>
<p>ब्रह्मोसको रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस (Russia) ने मिलकर तैयार किया है. इसी वजह से इसका नाम भारत और रूस की दो प्रमुख नदियों के नाम पर रखा गया है. भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोसक्वा नदी के नाम को मिलाकर इसका नाम ब्रह्मोस पड़ा है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/how-was-the-brahmos-missile-named-and-what-is-its-meaning-lets-know-the-answer						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/how-was-the-brahmos-missile-named-and-what-is-its-meaning-lets-know-the-answer</guid>
					<pubDate>Sat, 31 Dec 2022 09:59:39 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[वॉटर हीटर रॉड का इस्तेमाल करने वालों के लिए सेफ्टी टिप्स, ये आपको दुर्घटना से बचाएगी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सर्दी में अक्सर ठंडे पानी से नहाने का डर होता है. ठंड से बचने के लिए कुछ लोग गीजर फिट कराते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग पानी गर्म करने के लिए अभी भी वॉटर हीटर रॉड का इस्तेमाल करते हैं. वॉटर हीटर रॉड को इस्तेमाल करने के लिए काफी एहतियाद बरतना पड़ता है. इसको काफी रिस्की टास्क माना जाता है. एक छोटी सी गलती भी नुकसानदायक साबित हो सकती है. अगर आपके घर में भी वॉटर हीटर रॉड है तो हम आपको कुछ सेफ्टी टिप्स बताने जा रहे हैं...</p>
<p><strong>अच्छी तरह से करें यूज</strong></p>
<p>वॉटर हीटर रॉड काफी लंबे समय तक चलते हैं. यह सालों-साल खराब नहीं होते हैं. लेकिन 2 साल पुराने हीटर रॉड को यूज करने में काफी खतरा होता है. इससे करंट भी लग सकता है. कई लोकल वॉटर हीटर रॉड भी होते हैं, जो ज्यादा बिजली की खपत करते हैं. अगर आप भी खरीदने जा रहे हैं तो ओरिजनल ही खरीदें.</p>
<p><strong>बाल्टी में डालने के बाद ही करें ऑन</strong></p>
<p>कई लोग गलत तरीके से रॉड का इस्तेमाल करते हैं. ऑन करने के बाद बाल्टी में डालते हैं. लेकिन इससे करंट करने का खतरा होता है. समझदारी है कि सबसे पहले पानी से भरी बाल्टी में रॉड डालें और ऑन करें. </p>
<p><strong>रॉड की करते रहें सफाई</strong></p>
<p>Water Heater Rod को समय-समय पर साफ करते रहें. खराब होने पर रॉड पानी को ज्यादा गर्म नहीं कर पाती है. ऐसे में जब आप रॉड गंदी दिखे या मिट्टी जम जाए तो उसको साफ कर लें.</p>
<p><strong>प्लास्टिक की बालटी का करें इस्तेमाल</strong></p>
<p>कई लोग लोहे की बाल्टी का इस्तेमाल करते हैं. वॉटर हीटर रॉड को डालने के बाद करंट लगने का डर होता है. ऐसे में सिर्फ प्लास्टिक की बाल्टी का ही इस्तेमाल करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/safety-tips-for-those-who-use-water-heater-rod-this-will-save-you-from-accident						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/safety-tips-for-those-who-use-water-heater-rod-this-will-save-you-from-accident</guid>
					<pubDate>Sat, 31 Dec 2022 02:29:48 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मादा मक्खियां दूसरे से संबंध नहीं बना पाएं इसलिए नर मक्खियां करती है ये काम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>अकसर घरों या कहीं बाहर आपने मक्खियों को घूमते देखा होगा. ये विभिन्न प्रकार की होती हैं. इनमें से एक होती हैं फलों पर बैठने वाली मक्खियां (Fruit Flies). इनके बारे में हैरतअंगेज खुलासा हुआ है. जब नर मक्खी अपने पार्टनर के साथ संबंध बनाती है तो वह मादा मक्खी के शरीर में ऐसा रसायन छोड़ देती है, जिससे वह नींद में चली जाती है और किसी अन्य नर मक्खी के साथ संबंध नहीं बना पाती. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नर मक्खियों की एक रणनीति होती है. अर्जेंटीना के बारिलोच एटॉमिक सेंटर और फंडाकियोन इंस्टीट्यूटो लेलोइर ने वेबकैम के जरिए फलों पर बैठने वाली मक्खियों के प्रजनन को स्टडी किया. </p>
<p>रिसर्च में सामने आया कि संबंध बनाते समय नर मक्खी स्पर्म के साथ मादा मक्खी के शरीर में पेप्टाइड छोड़ देता है. ऐसा करने से मादा मक्खियां अन्य नरों के लिए कम आकर्षक हो जाती हैं. इसके अलावा ये मादा मक्खी की बायोलॉजिकल क्लॉक मिकैनिज्म पर भी असर डालता है. </p>
<p>पिछली रिसर्च में सामने आया था कि ये मक्खियां सूरज उगने से पहले जग जाती हैं. ये वो वक्त होता है, जब मक्खियां मेटिंग करती हैं. मगर पेप्टाइड के कारण मक्खियों को सुबह का पता नहीं चलता और वह नींद में रहती हैं. लेकिन ये वह वक्त होता है जब नर मक्खियां सबसे ज्यादा एक्टिव होती हैं. </p>
<p>वैज्ञानिक लोरेना फ्रेंको और उनके सहयोगियों का कहना है कि रिसर्च नर मक्खियों पर केंद्रित था. अकसर रिसर्च में मादाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसलिए उन्होंने लाइट कंट्रोल्ड लैब में 4 दिन के लिए वेबकैम के जरिए मादा मक्खियों पर नजर रखी. लैब में हाल ही में संबंध बनाने वाली मादा और वर्जिन मक्खियों पर नजर रखी गई. तुलना करने के लिए एक ग्रुप स्टडी नर मक्खियों पर की गई. रिसर्चर्स ने पाया कि जो मक्खियां सुबह के वक्त उठीं तो वह वर्जिन थीं जबकि जिन्होंने संबंध बनाया था, वे तब तक सोती रहीं, जब तक सूरज की रोशनी उन पर नहीं पड़ी. रिसर्चर्स को शक था कि इसकी वजह पेप्टाइड हो सकता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/female-flies-cant-make-relation-with-others-so-male-flies-do-this-work						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/female-flies-cant-make-relation-with-others-so-male-flies-do-this-work</guid>
					<pubDate>Thu, 29 Dec 2022 02:20:26 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[पनीर बनाने की ट्रिक: इमरजेंसी में पनीर न मिले तो इस तरह से चावल से तैयार करें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पनीर खाना किसे अच्छा नहीं लगता है. घर में कोई पार्टी या फिर फंक्शन पड़ जाए वो पनीर के बिना पूरा नहीं होता है. ज्यादातर हर शाकाहारी की पहली पसंद पनीर होता है. घर में आपने कई बार अपनी मम्मी को दूध से पनीर तैयार करते देखा होगा. अगर हम आपसे कहें कि आप बिना दूध के भी पनीर तैयार कर सकते हैं तो क्या आप मानेंगे? जरा सोचिए कि कभी कोई इमरजेंसी पड़ जाए और आपको पनीर न मिले तो आप ऐसे में क्या करेंगे. इसके लिए आज हम आपको पनीर बनाने की एक ट्रिक के बारे में बताएंगे जिसमें आप बिना दूध के सिर्फ घर के चावलों से ही पनीर बना लेंगे. तो आइए बिना देर किए इस इंटेरेस्टिंग रेसिपी की ओर बढ़ते हैं.</p>
<p><strong>आवश्यक सामग्री</strong></p>
<p>इस रेसिपी को बनाने के लिए आपको आलू, चावल, टमाटर, प्याज, दही, हरी मीर्च, नमक, बेकिंग सोडा, मैदा, मिल्क पाउडर, सूखा लाल मिर्च, अदरक की जरूरत पड़ेगी. ये सारी चीजें पहले से ही हर किचन में मौजूद होती हैं. तो आइए रेसिपी बनाना शुरू करते हैं.</p>
<p><strong>ऐसे बनाएं पनीर</strong></p>
<p>पनीर बनाने के लिए आप सबसे पहले एक बर्तन में भीगे हुए चावल, आलू काटकर, टमाटर, प्याज,  अदरक, हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च, और लगभग 1.5 ग्लास पानी डालें और फिर 10 मिनट तक इन सभी चीजों को सही से उबाल लें. जब समय पूरा हो जाए तो इसमें चावल और आलू को छोड़कर बाकी चीजों को निकाल लें और उसे मिक्सी में पीस लें. इस मिक्सचर को आप किसी भी सब्जी में ग्रेवी बनाने के लिए यूज कर सकते हैं. अब आलू और चावल को छानकर अलग कर लें. उसके बाद एक मिक्सर में आलू और चावल को डालें और उसके साथ ही उसमें दही और मिल्क पाउडर भी ऐड करें. फिर इन सभी चीजों को सही पीस कर पेस्ट तैयार कर लें. अब इस पेस्ट को कम से कम 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें. उसके बाद इस पेस्ट में मैदा, नमक और बेकिंग सोडा डालें. अब एक प्लेट में तेल लगाएं और उसे गर्म कर लें. उसके बाद तैयार पेस्ट को प्लेट पर फैला लें और 6 से 7 मिनट तक के लिए पकाएं. लास्ट में इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. ज्यादा पानी लगने पर इसे फ्रिज में रख दें. पनीर तैयार है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/paneer-making-trick-if-paneer-is-not-available-in-emergency-then-prepare-it-with-rice-in-this-way						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/paneer-making-trick-if-paneer-is-not-available-in-emergency-then-prepare-it-with-rice-in-this-way</guid>
					<pubDate>Tue, 27 Dec 2022 00:58:07 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जेसीबी सिर्फ पीले रंग की ही क्यों होती है, क्या है इसके पीछे की खास वजह, आओ जाने]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>जेसीबी अक्सर सड़क, मकान या किसी अन्य कंस्ट्रक्शन साइट पर दिख जाती है. राह चलते अगर ये भारी-भरकम मशीन दिख जाए तो कुछ समय के लिए आंखें इस पर टिक जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हरेक जेसीबी का रंग एक जैसा यानी पीला ही क्यों होता है? मतलब अगर आप कुछ और मशीन देखें तो पाएंगे कि उनमें कई अलग-अलग रंग मौजूद होते हैं लेकिन जेसीबी सिर्फ पीले रंग में ही क्यों होती है और क्या इसके पीछे कोई खास वजह है?</p>
<p>ऐसा नहीं है कि जेसीबी का रंग हमेशा से पीला ही रहा हो. बल्कि एक समय में इसका रंग लाल और सफेद भी हुआ करता था लेकिन इसे बनाने वाली कंपनी ने इसके रंग में बदलाव किया और पूरी बॉडी पर पीला रंग चढ़ाने का फैसला किया. इसके बाद से सभी जेसीबी का रंग एक ही यानी पीला ही होता है. अब सवाल है कि आखिर क्यों पीला ही क्यों... लाल, नीला या हरा क्यों नहीं?</p>
<p>जेसीबी के पीले रंग का होने के पीछे एक खास कारण है. दरअसल, जब ये लाल और सफेद रंग की हुआ करती थी तो कंस्ट्रक्शन साइट पर इसे दूर से या ऊंचाई से देख पाने में दिक्कत होती थी. ये दूर से दिखाई नहीं देती थी. रात में ये मशीन बिलकुल भी नहीं दिखती थी. इसलिए इसे बनाने वाली कंपनी ने फैसला लिया कि इसका रंग कुछ ऐसा रखते हैं जिससे ये दूर से आसानी से दिख जाए. इसके बाद पीले रंग को इसके लिए चुना गया और तब से सभी जेसीबी पर यही रंग नजर आता है.</p>
<p><strong>जेसीबी कंपनी का नाम है मशीन का नहीं</strong></p>
<p>आप जिस मशीन को जेसीबी पुकारते हैं उसका नाम जेसीबी नहीं है बल्कि ये उस कंपनी का नाम है जो इसे तैयार करती है. भारत से 110 देशों में एक्सपोर्ट होने वाली इस मशीन को बनाने वाली कंपनी के मालिक और फाउंडर का नाम जोसेफ सिरिल बामफोर्ड है. इन्हीं के नाम का शॉर्ट फॉर्म है जेसीबी और इसी नाम पर कंपनी का नाम भी जेसीबी रखा गया है. बामफोर्ड ने इस कंपनी की स्थापना 1945 में की थी.</p>
<p>जेसीबी पूरी दुनिया में करीब 300 प्रकार की मशीनें तैयार करती है. इसका व्यापार भी करीब 150 देशों में है. जानकारी के मुताबिक 22 देशों में इसके मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं. जीसीबी नाम इतना प्रचलित हो गया कि ब्रिटेन की मशहूर ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने भी इस नाम को अपने शब्दकोश में ट्रेड मार्क के रूप में शामिल किया है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/why-jcb-is-only-yellow-what-is-the-special-reason-behind-it-lets-know						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/knowledge/why-jcb-is-only-yellow-what-is-the-special-reason-behind-it-lets-know</guid>
					<pubDate>Sun, 18 Dec 2022 20:44:27 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[क्या आप जानते हैं ट्रेन के डिब्बों पर पीली और सफेद लाइन क्यों दी जाती हैं और ये क्या संकेत देती हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भारतीय रेलवे पैसेंजर्स के जीवन में एक जरूरी भूमिका निभाता है. ट्रेन ट्रांसपोर्टेशन आधुनिक साधनों में से एक है. 1951 में, भारतीय रेलवे का नेशनलाइजेशन किया गया था. यह एशिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और उसी प्रबंधन के तहत संचालित दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है. भाप के इंजन से लेकर डीजल इंजन और फिर इलेक्ट्रिक इंजन तक की यह एक शानदार जर्नी रही है. अब बात करते हैं रेल के डिब्बे पर बनी लाइनों की.</p>
<p>भारतीय रेलवे में बहुत सी चीजों को बताने के लिए एक विशेष प्रकार के प्रतीकों का उपयोग किया जाता है जैसे ट्रैक के किनारे के सिंबल, प्लेटफार्म पर सिंबल आदि. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के डिब्बों में एक खास तरह के सिंबल का इस्तेमाल किया जाता है.</p>
<p>नीले रंग के आईसीएफ कोच में कोच के आखिर में विंडो के ऊपर पीले या सफेद रंग की लाइन या पट्टियां लगाई जाती हैं, जो असल में कोच को दूसरे कोच से अलग करने के काम आती हैं. ये लाइन सेकेंड क्लास के अनरिजर्व कोच को दर्शाती हैं. जब कोई ट्रेन स्टेशन पर आती है तो कई लोग ऐसे होते हैं जो जनरल बोगी को लेकर भ्रमित रहते हैं, लेकिन इन पीली लाइनों को देखकर लोग आसानी से समझ सकते हैं कि यह जनरल कोच है. </p>
<p>इसी तरह नीले/लाल रंग पर पीली धारियों का इस्तेमाल विकलांग और बीमार लोगों के लिए किया जाता है. इसी तरह, ग्रे पर हरी लाइन दर्शाती हैं कि कोच केवल महिलाओं के लिए है. ये रंग पैटर्न केवल मुंबई, पश्चिम रेलवे में नए ऑटो डोर क्लोजिंग ईएमयू के लिए शामिल किए गए हैं. इसी तरह लाल रंग की पट्टी फर्स्ट क्लास के कोच को दर्शाती है. तो हम अब समझ गए हैं कि ट्रेन के डिब्बों पर ये रंगीन पट्टियां क्यों दी जाती हैं और ये क्या संकेत देती हैं?</p>]]>                    </description>

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						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/do-you-know-why-yellow-and-white-lines-are-given-on-train-coaches-and-what-do-they-indicate						]]>
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					<pubDate>Sun, 18 Dec 2022 18:02:33 +0530</pubDate>
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							<item>
                    
                    <title><![CDATA[बड़े-बुजुर्गों के पैर छूना केवल एक रीति ही नहीं, इसके अपने तमाम फायदे भी हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हमारे सनातन धर्म में ऐसी अनेक परंपराएं हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं. इन्हीं में से एक है बड़ों के पैर छूना. ऋषि-मुनियों के दौर से भी पहले से चली आ रही इस परंपरा में बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं. यह केवल एक रीति ही नहीं है, इसके अपने तमाम फायदे भी हैं. आज हम इस परंपरा के तमाम पहलुओं के बारे में आपको अवगत कराते हैं. </p>
बड़ों के पैर छूने के लाभ
<p><strong>कुंडली के दोष हो जाते हैं दूर</strong></p>
<p>बड़ों के पैर छूकर (Touching Feet Benefits) आशीर्वाद लेना भारतीय संस्कृति में शिष्टाचार का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि नियमित रूप से ऐसा करने से ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव भी अनुकूल हो जाते हैं और कुंडली के दोष दूर हो जाते हैं. </p>
<p><strong>खत्म हो जाता है अंदर का अहंकार</strong></p>
<p>अपने से बड़ों के पैर छूने (Touching Feet Benefits) का एक फायदा ये है कि ऐसा करने से व्यक्ति के अंदर मौजूद अहंकार खत्म हो जाता है और वह खुद को एक सामान्य प्राणी मानने लगता है. साथ ही उसमें बड़े- बुजुर्गों के प्रति सम्मान का भाव भी बढ़ता है. </p>
<p><strong>दूसरों के प्रति बढ़ता है सम्मान</strong></p>
<p>बड़े-बुजुर्गों के पैर छूने (Touching Feet Benefits) से व्यक्ति के यश, बल और आयु में बढ़ोतरी होती है. ऐसा करने से हमारे मन में दूसरों के प्रति सम्मान का भाव जाग्रत होता है. हमारे पैर छूने से जब बड़े अपना आशीर्वाद देते हैं तो मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बिगड़े काम भी बनने लग जाते हैं. </p>
<p><strong>शरीर बनता है चुस्त-तंदरुस्त</strong></p>
<p>अपने से बड़ों के चरण स्पर्श करना (Touching Feet Benefits) एक शारीरिक व्यायाम भी होता है. आगे की ओर झुककर चरण स्पर्श करने से शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इससे शरीर मजबूत और तंदरुस्त बनता है.</p>]]>                    </description>

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						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/touching-the-feet-of-elders-is-not-just-a-ritual-it-also-has-its-own-benefits						]]>
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					<pubDate>Sun, 11 Dec 2022 02:31:10 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[रिसर्च में सामने आया कि कैसे मिट्ठू इंसान की आवाज निकाल लेता है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>बहुत से लोगों को जानवरों और पक्षियों से बहुत लगाव हैं. जो लोग पक्षियों से प्रेम करते हैं, वो कबूतर, तोता या कोई अन्य पक्षी पाल लेते हैं. सबसे ज्यादा पाले जाने वाला पक्षी है तोता. इसे मिट्ठू भी कहा जाता है. इसे लोग इसलिए भी पालना पसंद करते हैं, क्योंकि यह सुंदर होने के साथ ही इंसानों की नकल करना जानता है.</p>
<p>तोते (Parrot) में इंसानों की बोली की नकल करने की क्षमता होती है, लेकिन क्या कभी आपने इस बारे में जानना चाहा कि आखिर तोता इंसानों की आवाज कैसे निकाल लेता है? इस रहस्य को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने वर्षों तक इस पर रिसर्च की है. आज जानेंगे कि इस रिसर्च में क्या निकलकर सामने आया...</p>
<p><strong>महत्‍वपूर्ण सरंचनात्‍मक अंतर</strong></p>
<p>प्‍लॉस वन जर्नल में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक वैज्ञानिकों की एक टीम ने तोते के दिमाग में एक महत्‍वपूर्ण सरंचनात्‍मक अंतर ढूंढा, जो उसकी इस खूबी के बारे में बहुत कुछ बताता है. इस टीम में मौजूद भारतीय मूल की वैज्ञानिक मुक्‍ता चक्रबर्ती के मुताबिक यह शोध इस बात का खुलासा करता है कि तोते जरूरी जानकारी को किस तरह से प्रोसेस करते हैं. उनमें कौन सी मैकेनिज्‍म है जो इंसानों की भाषा की नकल करती है. </p>
<p><strong>ये है मुख्य वजह </strong></p>
<p>तोते के दिमाग में एक ऐसा केंद्र होता है, जो वोकल लर्निंग को कंट्रोल करता है. इसे 'कोर' कहा जाता है. वहीं, तोते में एक बाहरी रिंग होती है, जो वोकल लर्निंग में बहुत हेल्पफुल होती है, जिस शेल भी कहते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि इनकी कुछ प्रजातियों में इस रिंग का साइज ज्‍यादा बड़ा होता है. ऐसे तोते ज्यादा अच्छे तरीके से इंसानों की तरह बोल पाते हैं. इस स्टडी के मुताबिक न्‍यूजीलैंड में पाई जाने वाली तोतों की सबसे पुरानी प्रजाति 'कीया' में भी यह शेल पाया जाता है.</p>]]>                    </description>

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						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/knowledge/research-reveals-how-mittu-can-pick-up-human-voice						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 11 Dec 2022 01:46:21 +0530</pubDate>
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