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		<title>Mega Daily News</title>
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		<![CDATA[
		Mega Daily News		]]>
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		<lastBuildDate>Wed, 22 Apr 2026 06:49:19 +0530</lastBuildDate>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 06:49:19 +0530</pubDate>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[गुरु पूर्णिमा पर करें ये 5 खास काम, और पाएं जीवन में असीम सफलता और सम्मान]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p><strong>Guru Purnima 2025:</strong> भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा को एक विशेष पर्व माना गया है, जो गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु (बृहस्पति) को ज्ञान, समृद्धि, सौभाग्य और मान-सम्मान का कारक माना जाता है। यदि आपकी कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर है या आप अपने जीवन में सफलता, धन और सम्मान की कामना करते हैं, तो गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन किन उपायों को किया जा सकता है?</p>
<strong>गुरु की करें पूजा</strong>
<p>गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग गुरु ग्रह का प्रतीक है। भगवान विष्णु या गुरु बृहस्पति के मंदिर में जाएं और उनकी विधिवत पूजा करें। पूजा में हल्दी, चंदन, पीले फूल और पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू) अर्पित करें। पूजा के बाद अपने माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। यह उपाय गुरु ग्रह को मजबूत करता है और जीवन में सौभाग्य व समृद्धि लाता है।</p>
<strong>गुरु मंत्र का करें जाप</strong>
<p>गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए गुरु मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावी माना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन शांत मन से पीले आसन पर बैठें और गुरु मंत्र &lsquo;ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः&rsquo; का कम से कम 108 बार जाप करें। जाप के लिए केसर या हल्दी मिश्रित जल से अभिमंत्रित रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। यह उपाय ज्ञान, बुद्धि और सफलता दिलाता है।</p>
<strong>दान करें पीली वस्तुएं</strong>
<p>ज्योतिष में दान को ग्रहों की शांति का सबसे सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन पीली वस्तुओं जैसे हल्दी, पीले कपड़े, बेसन, चने की दाल, या केले का दान करें। ये दान किसी ब्राह्मण, गुरु, या जरूरतमंद व्यक्ति को दें। इसके अलावा, गुरु के सम्मान में किसी शिक्षक को किताबें, पेन या शैक्षिक सामग्री दान करना भी फायदेमंद होता है। यह उपाय गुरु ग्रह को मजबूत करता है और आपके जीवन में मान-सम्मान को बढ़ाता है।</p>
<strong>गुरु का आशीर्वाद लें</strong>
<p>गुरु पूर्णिमा का दिन अपने गुरु, शिक्षक या किसी ऐसे व्यक्ति से आशीर्वाद लें, जिसने आपको जीवन में मार्गदर्शन दिया हो। यदि आप अपने गुरु से मिल सकते हैं, तो उनके चरण स्पर्श करें और उनकी सेवा करें। अगर मिलना संभव न हो, तो मन ही मन उनका स्मरण करें और उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लें। गुरु का आशीर्वाद आपके जीवन में सकारात्मकता और सफलता का द्वार खोलता है।</p>
<strong>पीपल के पेड़ की पूजा</strong>
<p>गुरु पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना भी गुरु ग्रह को मजबूत करने का एक शक्तिशाली उपाय है। सुबह पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं, हल्दी और चंदन अर्पित करें, और पेड़ की सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय &lsquo;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&rsquo; मंत्र का जाप करें। यह उपाय न केवल गुरु ग्रह को मजबूत करेगा, बल्कि आपके जीवन से नकारात्मकता को भी दूर करेगा।</p>
<p><strong>डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। इसकी पुष्टि नहीं करता है।</strong></p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-these-5-special-things-on-guru-purnima-and-get-immense-success-and-respect-in-life						]]>
					</link>
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					<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 19:32:24 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मां लक्ष्मी की कृपा जिंदगीभर बनी रहती है अगर घर में हो ये ५ चीजें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>ज्योतिष शास्त्र में मां लक्ष्मी को धन की देवी के नाम से भी जाना जाता है. हर व्यक्ति चाहता है कि उस पर जिंदगीभर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, ताकि जीवन में किसी प्रकार की कोई समस्या न रहे. इसके लिए वे नियमित कई प्रकार के जतन करता है. मान्यता है कि उन लोगों की आर्थिक स्थिति हमेशा अच्छी रहती है, जिन्हें जीवन में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है.</p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है. ऐसे में इस दिन घर के पूजा स्थल पर कुछ जरूरी चीजों को रखने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. आइए जानें कैसे प्रसन्न किया जा सकता है धन की देवी मां लक्ष्मी को.</p>
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घर में रखें ये चीजें
<p><strong>घर के मंदिर में स्थापित करें श्री यंत्र</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्री यंत्र का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है. इसलिए धन की देवी की कृपा पाने के लिए घर के मंदिर में श्री यंत्र की स्थापना करने से लाभ होता है. श्री यंत्र को शुक्रवार के दिन लाल रंग का कपड़ा बिछाकर स्थापित कर दें. इतना ही नहीं, इसे ईशान कोण में स्थापित करें. इसके साथ ही श्री यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निम्नलिखित मंत्र का 21 माला जाप करें. मंत्र है- ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं नम्ः, ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महा लक्ष्म्यै नम्ः.</p>
<p><strong>मां की मूर्ति के आगे रखें इत्र</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मां लक्ष्मी की मूर्ति के आगे गुलाब का इत्र अवश्य रखें. इससे व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है. साथ ही, मां लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है.</p>
<p><strong>गाय का देसी घी</strong></p>
<p>बता दें कि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घर के मंदिर में गाय का देशी घी खुले बर्तन में जरूर रखें. इसके साथ ही, नियमित रूप से मां लक्ष्मी की मूर्ति के आगे घी का दीपक जलाएं. इसके अलावा, श्री सूक्त और कनकधारा स्त्रोत का पाठ करें.</p>
<p><strong>कमल का फूल</strong></p>
<p>मां लक्ष्मी को कमल का फूल भी बेहद प्रिय है. ऐसे में अगर नियमित रूप से मां लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित किया जाए, तो इससे घर में सुख-समद्धि का वास होता है.</p>
<p><strong>दक्षिणावर्ती शंख</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर में दक्षिणावर्ती शंख जरूर रखें. मान्यता है कि दक्षिणावर्ती शंख का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है. इसके अलावा, शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से मां लक्ष्मी का अभिषेख करने से विशेष लाभ होता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/mother-lakshmis-grace-lasts-for-life-if-these-5-things-are-in-the-house						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 30 Jun 2023 07:42:29 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शिव मंदिर जाते समय बिल्कुल भी न करें ये गलती, वरना घर में रहेगा दरिद्रता का वास]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न तरह के पूजा-पाठ, अनुष्ठान आदि के बारे में बताया गया है। भगवान की पूजा करने का विशिष्ट तरीके वेद-शास्त्रों में बताए गए हैं। देवो के देव महादेव को भगवान शिव, भोलेनाथ, शंकर जी जैसे सैकड़ों नामों से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव बहुत भोले होने के साथ विनाशक भी कहा जाता है। जितना जल्द पूजा से भोले बाबा प्रसन्न हो जाते हैं और वह जल्द ही रुष्ट हो जाते हैं। भोलेनाथ की पूजा करने से सुख-समृद्धि और धन संपदा की प्राप्ति होती है।</p>
शिव मंदिर जाते समय न करें ये गलती
<p>हिंदू शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव की पूजा के लिए सोमवार, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि आदि दिनों में खास माना जाता है। इन दिनों में कई लोग व्रत रखने के साथ मंदिर भी जाते हैं। लेकिन कई बार शिव मंदिर जाते समय कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे भगवान शिव की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।</p>
खुद से लाई गई चीजों से ही करें शिव जी की पूजा
<p>अधिकतर लोग शिव मंदिर जाते हैं, तो जल आदि घर से नहीं ले जाते हैं बल्कि मंदिर के प्रांगण में मौजूद जल से ही शिवलिंग का अभिषेक कर देते हैं या फिर पूजा के समय कुछ चीजें जैसे चंदन, सिंदूर, अक्षत, धूप आदि कम पड़ जाती है, तो मंदिर में मौजूद या फिर किसी अन्य व्यक्ति से मांग लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। इसके साथ ही घर का वास्तु दोष समाप्त नहीं होता है।</p>
<p>शास्त्रों के अनुसार, शिव मंदिर जाते समय घर से ही जल लेकर जाना चाहिए। क्योंकि आपके घर में ही वास्तु दोष, पितृ दोष, काल सर्प दोष सहित अन्य दोष विराजमान रहते हैं। ऐसे में जब आप घर में मौजूद घड़ा या फिर किसी जल से भरे हुए पात्र से पानी लेते हैं, तो उसके साथ ही घर के सभी दोष साथ जाते हैं और शिव जी को ये जल चढ़ाने से हर तरह के दोषों से छुटकारा मिल जाता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही घर की दरिद्रता और सदस्यों के कार्यों में आने वाली अड़चनों से भी छुटकारा मिल जाता है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-not-do-this-mistake-while-going-to-shiva-temple-otherwise-poverty-will-remain-in-the-house						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sat, 01 Apr 2023 15:20:49 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्रि: इस तरह और इस दिशा में करें माँ दुर्गा की स्थापना, बनेंगे सारे काम नहीं होगी पैसों की कमी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च बुधवार यानी की कल से शुरू हो रहे हैं. ऐसे में ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. कहते हैं कि ये नौ दिन मां अम्बे धरती पर भक्तों के बीच होती हैं और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी सभी कामनाएं पूर्ण करती हैं.</p>
<p>वास्तु शास्त्र में भी नवरात्रि को लेकर कुछ नियमों के बारे में बताया गया है. ये नौ दिन अगर वास्तु को ध्यान में रखकर पूजा की जाए या फिर मां दुर्गा की चौकी तैयार की जाए, तो पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मान्यता है कि वास्तु के अन नियमों का पालन करने से घर में वास्तु दोष भी उत्पन्न नहीं होता. साथ ही, नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं. आइए जानें नवरात्रि की पूजा के दौरान किन वास्तु नियमों का ध्यान रखना चाहिए.</p>
<p><strong>कलश स्थापना की सही दिशा</strong></p>
<p>वास्तु जानकारों का कहना है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ चुना और हल्दी से स्वास्तिक बनाएं. इसके साथ ही, मां की प्रतिमा या तस्वीर के साथ कलश स्थापना घर के ईशान कोण में करें. कहते हैं कि घर की इस दिशा में देवी-देवताओं का वास होता है.</p>
<p><strong>अखंड ज्योति के लिए सही दिशा</strong></p>
<p>घर के पूजा स्थल को पहले साफ  कर लें उसके बाद ही वहां मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें. पहले गंगाजल से छिड़काव कर उस जगह को शुद्ध कर लें. इगर आप अखंड ज्योति प्रज्जवलित कर रहे हैं, तो दीपक को घर के आग्नेय कोण में रखें. बता दें कि घर की ये दिशा अग्नि का प्रतिनिधित्व करती है. इस दिशा में अखंड ज्योति जलाने से शत्रुओं पर विजाय पाई जा सकती है.</p>
<p><strong>इस दिशा में हो मां दुर्गा की मूर्ति</strong></p>
<p>वास्तु जानकारों का कहना है कि पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान को अलग-अलग जगह पर स्थापित करने से लाभ होता है. हर चीज के लिए अलग दिशा निर्धारित है. पूजा से पहले मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करने से पहले सही दिशा का ज्ञात होना बेहद जरूरी है. बता दें कि घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में ही मां की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए.</p>
<p><strong>पूजा करते समय इस दिशा में रखें मुख</strong></p>
<p>वास्तु अनुसार पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर की तरफ होना चाहिए. इस बात का ख्याल जरूर रखना चाहिए. कहते हैं कि इस तरह पूजा करने से व्यक्ति का सम्मान बढ़ता है क्योंकि इस दिशा को शक्ति और शौर्य का प्रतीक माना जाता है. इसके साथ ही मां दुर्गा की मूर्ति के पीछे दुर्गा बीसा यंत्र की स्थापना भी अवश्य करनी चाहिए.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/navratri-establish-maa-durga-in-this-way-and-in-this-direction-all-work-will-be-done-there-will-be-n						]]>
					</link>
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					<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 11:28:44 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सीता जयंती: रावण को खुद भस्म कर देतीं माता सीता, अगर राजा दशरथ के इस वचन से बंधी नहीं होती]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>इस साल 2023 में सीता जयंती (Sita Jayanti 2023) 29 अप्रैल दिन शनिवार को मनाई जाएगी. माता सीता इस दिन धरती से प्रकट हुई थीं. राजा जनक की पुत्री होने के कारण माता सीता को जानकी के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए उनके जन्म दिवस को जानकी जयंती (Janaki Jayanti) भी कहा जाता है. मान्यता है कि सीता नवमी के दिन अगर माता सीता (Mata Sita) की विधि विधान से पूजा की जाए तो व्यक्ति के जीवन के तमाम दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं.  वही अगर माता सीता की पूजा-व्रत यदि महिलाएं करती हैं तो उन्हें सौभाग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही उनके पति दीर्घायु होते हैं.  रामायण में सीता माता का चिरण धैर्यवान, तेजस्वी, पतिव्रता स्त्री के रूप में किया जाता है. चलिए इसी कड़ी में बताते हैं कि माता सीता खुद शक्ति स्वरूपा थी कि वो खुद रावण को भस्म कर देती, लेकिन उन्होंने राजा दशरथ को कौन-सा वचन दिया, जिसमें वे मजबूर हो गई थी.</p>
<p><strong>माता सीता थी शक्ति स्वरूपा </strong></p>
<p>रामायण में वर्णन किया गया है कि रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया था, जिसके बाद प्रभु श्रीराम ने रावण का वध करके माता सीता को वहां से मुक्त कराया था, लेकिन क्या आप जानते हैं, कि वास्तव में माता सीता स्वयं शक्ति स्वरूपा थीं. यदि माता सीता चाहतीं तो स्वयं ही रावण को भस्म कर सकती थीं.  लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, आज हम आपको बताएंगे माता सीता की शक्ति का वो किस्सा, जिसने राजा दशरथ को भी हैरान कर दिया था और वे समझ गए थे कि माता सीता स्वयं जगत जननी का स्वरूप हैं.</p>
<p><strong>तिनके को घूरकर ही बना दिया था भस्म </strong></p>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार बताया जाता है कि जब माता सीता का विवाह प्रभु श्रीराम से हुआ तो ससुराल आने के बाद उन्होंने सबसे पहले ऋषि-मुनियों और परिवारीजनों के लिए खीर पकाई. जब वे उन्हें खीर परोस रही थीं, उसी समय तेज हवा का झोंका आया. सभी ने अपनी अपनी पत्तल संभाली. लेकिन उस दौरान राजा दशरथ की खीर में एक छोटा सा घास का तिनका आकर गिर गया. माता सीता ने उस तिनके को देख लिया, लेकिन खीर से वो ति​नका सबके बीच कैसे निकालें,  उनके लिए ये बड़ी दुविधा थी. तभी उन्होंने तिनके को दूर से घूरा. माता सीता की दृष्टि से ही वो तिनका राख बन गया. सीता जी को लगा कि उनका ये चमत्कार किसी ने नहीं देखा, लेकिन राजा दशरथ ने ये सब देख लिया था और वो समझ गए थे कि माता सीता कोई साधारण स्त्री नहीं, बल्कि जगत जननी हैं.</p>
<p><strong>राजा दशरथ ने लिया मां सीता से वचन </strong></p>
<p>खीर खाने के बाद राजा दशरथ जब अपने कक्ष में चले गए तो उन्होंने सीता जी को अपने कक्ष में बुलवाया. वहां उन्होंने माता सीता से कहा कि आपका चमत्कार मैं देख चुका हूं और समझ गया हूं कि आप कौन हैं. इसलिए आज आप मुझे वचन दीजिए कि जिस दृष्टि से आपने उस तिनके को देखा, उससे कभी किसी और को नहीं देखेंगी. इसके बाद माता सीता ने दशरथ को ये वचन दिया. यही कारण था कि जब रावण ने माता सीता का हरण किया था, तो वो खुद रावण को खत्म कर देती लेकिन वो राजा दशरथ के वचन में बंधी हुई थी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/sita-jayanti-mother-sita-herself-would-have-incinerated-ravana-if-she-had-not-been-bound-by-this-pro						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 19 Mar 2023 23:32:11 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[पैसों की तंगी, करियर में असफलता और प्यार की कमी हों तो चैत्र नवरात्र में करें ये उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>चैत्र नवरात्र 22 मार्च से शुरू होकर 30 मार्च को संपन्न होंगे. नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से न सिर्फ सभी 9 ग्रह शांत होते हैं बल्कि उनके अशुभ प्रभाव भी दूर हो जाते हैं. कुंडली में अगर राहु और केतु दोष हों तो व्यक्ति को कई दिक्कतों से गुजरना पड़ता है, जिसमें पैसों की तंगी, करियर में असफलता और प्यार की कमी शामिल है. लेकिन कुछ उपाय ऐसे हैं, जिनको करने से न सिर्फ नवग्रह शांत होंगे बल्कि आपको हर समस्या से छुटकारा भी मिलेगा.</p>
<p><strong>मां चंद्रघंटा और ब्रह्मचारिणी की पूजा</strong></p>
<p>किसी शख्स की कुंडली में अगर राहु दोष है तो उसे मां ब्रह्मचारिणी की पूरे विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. केतु की समस्या से पीड़ित हैं तो मां चंद्रघंटा की आराधना करें. नवरात्रि में इन देवियों की पूजा करने से आपको इन दोनों पापी ग्रहों के अशुभ प्रभाव से निजात मिलेगी.</p>
<p><strong>चंदन का पाउडर</strong></p>
<p>अगर आप नहाने के पानी में चंदन का पाउडर डालकर स्नान करते हैं तो कुंडली में राहु के दोष खत्म हो जाते हैं. नवरात्रि से इन उपायों को शुरू करें और लगातार 3 महीने तक करने से फायदा मिलेगा और सारी तकलीफें दूर होंगी.</p>
<p><strong>हनुमान जी की आराधना</strong></p>
<p>नवरात्र में मां दुर्गा के साथ-साथ हनुमान जी और भगवान शंकर की पूजा करने से भी राहु और केतु परेशान नहीं करते. अगर नवरात्र में आप हर दिन शिव सहस्त्रनाम और हनुमान सहस्त्रनाम का पाठ करते हैं तो कुंडली में राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाते हैं. </p>
<p><strong>घर लाएं ये चीजें</strong></p>
<p>अगर आप राहु दोष से मुक्ति चाहते हैं तो नवरात्रि में चांदी का एक ठोस हाथी खरीद लाएं. इसको आप पूजाघर या घर की तिजोरी  में भी रख सकते हैं. ऐसा करने और उसके हर दिन दर्शन से कुंडली में राहु के बुरे प्रभाव कम होने लगते हैं और आपको करियर में उन्नति मिलती है.</p>
<p><strong>दुर्गा सप्तशती का पाठ</strong></p>
<p>दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्र के 9 दिनों में करने से राहु-केतु के बुरे असर कम हो जाते हैं. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से न सिर्फ मां प्रसन्न होती हैं बल्कि भक्तों को इन दो पापी ग्रहों की बुरी नजर से भी बचाती हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-there-is-financial-crunch-failure-in-career-and-lack-of-love-then-do-these-measures-in-chaitra-na						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-there-is-financial-crunch-failure-in-career-and-lack-of-love-then-do-these-measures-in-chaitra-na</guid>
					<pubDate>Sun, 19 Mar 2023 10:15:40 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[होलिका की आग में अर्पित करें ये चीजें, सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता, धन में वृद्धि के लिए करें ये उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दूसरे को गले लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं। आपको बता दें कि इस बार होलिका दहन 7 मार्च और रंग से खेलने वाली होली 8 मार्च को है। हालिका दहन के दिन होली जलाई जाती है। लेकिन क्या आपको बता है कि होली की अग्नि में कुछ चीज डालकर आप जीवन की सभी समस्याओं से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं ये चीजें कौन सी हैं…</p>
होलिका दहन का महत्व
<p>होलिका की अग्नि को बहुत पवित्र माना गया है। इस दिन अलग-अलग चीजों को अग्नि में डालकर व्यक्ति अपनी जीवन की समस्याओं से मुक्ति पा सकता है। मतलब रोग, बीमारी और विरोधियों की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही आर्थिक स्थिति में भी सुधार आ सकता है।</p>
होलिका दहन के समय करें ये काम
<p>होलिका दहन जहां पर हो रहा हो वहां अपने सभी पुरुष एक साथ जाएं और फिर उस अग्नि को प्रणाम करें। साथ ही इसके बाद अग्नि में गेहूं की बालियां को अग्नि में डालें। इसके बाद अग्नि की परिक्रमा कम से कम तीन, पांच या सात बार करें। फिर होलिका की राख को घर पर ले जाएं। साथ ही अपने धन रखने के स्थान पर होलिका की राख को रख दें। ऐसा करने से धन में वृद्धि होने की मान्यता है।</p>
विवाह और वैवाहिक जीवन के लिए करें ये काम
<p>अगर आपका विवाह नहीं हो पा रहा हो या वैवाहिक जीवन में क्लेश रहती हो तो होलिका की प्ररिक्रमा करते समय होली की आग में हवन सामिग्री डालें। ऐसा करने से विवाह के जल्दी योग बनेंगे।</p>
बीमारी से मुक्ति पाने के लिए
<p>अगर किसी व्यक्ति को लाइलाज बीमारी है तो होलिका की अग्नि में हरी इलायची और कपूर डालें। ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होगी। </p>
धन में वृद्धि के लिए करें ये उपाय
<p>अगर काफी मेहनत के बावजूद धन की सेविंग या आय में इजाफा नहीं हो रहा तो हालिका की अग्नि में चंदन की लकड़ी डालें। ऐसा करने से धन में वृद्धि होने की मान्यता है।</p>
मां लक्ष्मी की बनी रहेगी कृपा
<p>अगर आप मां लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं तो होलिका की अग्नि में एक सूखे नारियल में जौ, चावल और चीनी भर लें। अब इस नारियल को होलिका दहन की अग्नि में डाल दें।</p>
 ]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/offer-these-things-in-the-fire-of-holika-recognition-of-fulfillment-of-all-wishes-do-these-measures-						]]>
					</link>
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					<pubDate>Mon, 06 Mar 2023 16:34:50 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[रोज सुबह करें गाय से जुड़ा ये उपाय, खोलेगा आपके सोए नसीब, मां लक्ष्‍मी होगी मेहरबान]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म, ज्‍योतिष और वास्‍तु शास्‍त्र में कुछ कामों को बहुत शुभ माना गया है. साथ ही कुछ प्रतीकों को पूजनीय माना गया है. इनकी पूजा और इनसे जुड़े उपाय जीवन में सौभाग्‍य लाते हैं. आज हम एक ऐसा ही प्रभावी उपाय जानते है, जिसे रोज सुबह करने से हर काम में सफलता मिलती है. </p>
<p><strong>गाय से जुड़ा ये उपाय खोलेगा सोए नसीब</strong></p>
<p>गाय को हिंदू धर्म में माता का दर्जा दिया गया है. गाय की पूजा होती है. गाय और गाय से जुड़ी हर चीज जैसे दूध, गौ मूत्र, गोबर को भी बेहद पवित्र माना गया है. पुराणों के अनुसार गाय में 33 कोटी देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में हर सुबह गाय से जुड़े कुछ उपाय करने से जीवन में सौभाग्‍य, सुख-समृद्धि आती है. कामों में सफलता मिलती है. </p>
<p>- हर सुबह स्‍नान करने के बाद गाय की पूजा जरूर करें. ऐसा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है. ऐसे लोगों के घर में मां लक्ष्‍मी हमेशा प्रसन्‍न रहती हैं और खूब धन-संपत्ति देती हैं. गाय की पूजा करने वालों को जीवन में कभी भी पैसों की तंगी नहीं होती है. </p>
<p>- गाय को रोज चारा खिलाएं. खासतौर पर बुधवार के दिन गाय को हरा चारा जरूर खिलाएं, ऐसा करने से तमाम संकटों से बचाव होता है. साथ ही कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है. </p>
<p>- गाय की पीठ के उभरे हुए हिस्‍से को सहलाने से रोगों से बचाव होता है. यह स्‍थान सूर्य-केतु नाड़ी होती है जो सेहत को मजबूत करती है. </p>
<p>- कुंडली में ग्रह कमजोर हों और अशुभ फल दे रहे हों तो काली गाय की पूजा करें. ऐसा करने से ग्रह का दुष्‍प्रभाव दूर होता है, साथ ही दुश्‍मनों पर जीत मिलती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-this-remedy-related-to-cow-every-morning-it-will-open-your-sleep-mother-lakshmi-will-be-kind						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-this-remedy-related-to-cow-every-morning-it-will-open-your-sleep-mother-lakshmi-will-be-kind</guid>
					<pubDate>Sat, 04 Mar 2023 03:52:12 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[भगवान को भोग लगाने के बाद न करें ये गलती, उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भारतीय संस्कृति में हवन-पूजन के बाद भगवान को प्रसाद का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर सुख-समृद्धि की बरसात करते हैं. वास्तु शास्त्र की बात करें तो उसमें भगवान को भोग लगाने से जुड़े कई विधान बताए गए हैं. कहा जाता है कि अगर हम उन नियमों को नजरअंदाज करते हैं तो घर में मुश्किलों का आगमन होते देर नहीं लगती है. आइए जानते हैं कि भगवान पर अर्पित किए जाने वाले प्रसाद से जुड़े (Vastu Tips for Bhog) वे नियम क्या हैं. </p>
<p><strong>नैवेद्य को लेकर लोगों में रहता है असमंजस</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र में भगवान पर चढ़ाए जाने वाले भोग को नैवेद्य कहा जाता है. यह नैवेद्य बहुत शुभ और मंगलकारक माना जाता है. काफी सारे लोग भगवान की प्रतिमा पर भोग अर्पित करने के बाद इस असमंजस में रहते हैं कि उस प्रसाद का क्या किया जाए. क्या उसे ग्रहण कर लिया जाए या प्रतिमा के पास ही खुला छोड़ दिया जाए. भोग से जुड़ा यही असमंजस कई बार उनके लिए दुर्भाग्य लाने का बड़ा सबब बन जाता है.  </p>
<p><strong>भगवान के सामने से भोग न हटाने का नुकसान</strong></p>
<p>असल में भगवान को भोग (Vastu Tips for Bhog) अर्पित करने के कुछ देर बाद उसे वहां से हटा देना चाहिए. ऐसा न करने पर चण्डांशु, चांडाली, श्वक्सेन और चण्डेश्वर नामक नकारात्मक शक्तियां वहां आ जाती हैं और भोग को भ्रष्ट कर देती हैं, जिससे इंसान के दुर्दिन शुरू हो जाते हैं. वास्तु शास्त्रियों के अनुसार भोग को भगवान की प्रतिमा के सामने से हटाकर किसी तांबे, चांदी, सोने, पत्थर, मिट्टी या लकड़ी के पात्र में रख देना चाहिए. ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है और परिवार पर भगवा की कृपा बरसती है. </p>
<p><strong>खुद ग्रहण कर लें या बांट दें भगवान पर चढ़ाया भोग</strong></p>
<p>ज्योतिष में कहा गया है कि पात्र में रखने के कुछ देर इसके बाद भगवान पर अर्पित किया गया वह भोग (Vastu Tips for Bhog) प्रसाद का रूप ले लेता है. ऐसे में उस प्रसाद को खुद ग्रहण कर लेना चाहिए. साथ ही संभव हो तो उस प्रसाद को दूसरों में भी बांट देना चाहिए. ऐसा करने से प्रभु प्रसन्न  होते हैं और प्रसाद ग्रहण करने वाले सभी लोगों का बेड़ा पार करते हैं. कहा जाता है कि जो लोग प्रसाद से जुड़े इस नियम का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी किसी तरह का कष्ट नहीं रहता और घर खुशियों से भरा रहता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-not-make-this-mistake-after-offering-bhog-to-god-may-have-to-bear-heavy-losses						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-not-make-this-mistake-after-offering-bhog-to-god-may-have-to-bear-heavy-losses</guid>
					<pubDate>Sat, 04 Mar 2023 03:51:10 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सुख-समृद्धि के लिए विनायक चतुर्थी पर करें ये उपाय, चमक जाएगी किस्मत]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि इस बार 23 फरवरी के दिन पड़ रही है. गुरुवार के दिन विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए इसे गणेश जयंती के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से और व्रत आदि रखने से व्यक्ति को ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.</p>
<p>विनायक चतुर्थी का व्रत रखने से विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जीवन की सभी बाधाएं दूर करते हैं.  मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से भक्तों को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है.  बता दें कि इस बार विनायक चतुर्थी तिथि का आरंभ 23 फरवरी, गुरुवार के दिन रखा जाएगा. विनायक चतुर्थी 23 फरवरी को सुबह 03 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी. गुरुवार के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 26 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक है. इस दिन गणपति को सिंदूर का तिलक लगाकर लड्डू या मोदक का भोग लगाएं और आरती करें.   </p>
बप्पा की कृपा के लिए करें ये उपाय
<p><strong>सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद एक पान का पत्ता लें और उसे साफ पानी से धोकर कपड़े से साफ कर लें. इसके बाद केसर से पत्ते पर 'श्री' लिखकर पूजा करते समय श्री गणेश को अर्पित करें. शाम के समय संकटनाशन गणेश स्त्रोत का पाठ करें और श्री गणेश की आरती करें. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.  </p>
<p><strong>हर कार्य में सफलता पाने के लिए</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए विनायक चतुर्थी के दिन गणपति की विधिवत्त पूजा अर्चना करनी चाहिए. गणेश जी के इस मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करने से हर कार्य में सफलता पाते हैं.</p>
<p><strong>मंत्र - 'प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम। भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये।।'</strong></p>
<p><strong>नौकरी में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए</strong></p>
<p>अगर किसी व्यक्ति को नौकरी में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं या फिर किसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो उन परेशानियों से निपटने के लिए गणेपति के इस मंत्र का जाप उत्तम बताया गया है. बता दें कि कम से कम इस मंत्र का एक माला जाप करें.</p>
<p><strong>मंत्र - 'प्रथमं वक्रतुंडच एकदंतं द्वितीयकम। तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम।।'</strong></p>
<p><strong>परिवार के कल्याण के लिए</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार परिवार में खुशहाली बनाए रखने के लिए विनायक चतुर्थी के दिन सफेद धागे में लाल रंग के फूलों की एक माला बना लें. इस बात का ध्यान रखें कि माला में उतने ही फूल रखें, जितने परिवार में सदस्य हैं. इसके बाद ये माला भगवान श्री गणेश को अर्पित कर दें. इस उपाय को करने से परिवार में खुशियां बनी रहेंगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-these-measures-on-vinayaka-chaturthi-for-happiness-and-prosperity-luck-will-shine						]]>
					</link>
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					<pubDate>Thu, 23 Feb 2023 10:03:40 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[होली के टोटके: होली पर गुलाल के इस प्रयोग से दांपत्य जीवन खुशियों से भर जायेगा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्दशी के दिन होलिका दहन और दूसरे दिन पूर्णमासी को रंग खेला जाता है. होली के पर्व में कुछ खास तरह के उपाय भी किए जा सकते हैं. इन उपायों से जीवन की हर छोटी-बड़ी समस्या का निदान किया जा सकता है. होली के अवसर पर किए जाने वाले यह उपाय कभी भी व्यर्थ नहीं जाते हैं. ऐसा ही एक उपाय गुलाल से किया जा सकता है. इस उपाय से पति-पत्नी के बीच पैदा हुई खटास को खत्म किया जा सकता है और दोबारा से प्रेम के संबंध को प्रगाढ़ किया जा सकता है.</p>
<p><strong>गाय और कुत्ता </strong></p>
<p>होली के दिन पति-पत्नी साथ किसी काले कुत्ते को थोड़ा से गुलाल लगाकर उसे भोजन कराएं. वहीं, इस दिन पति-पत्नी गाय के चरणों में गुलाल डालकर आशीर्वाद लें और उन्हें गुड़-रोटी खिलाएं. ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है.</p>
<p><strong>जल में प्रवाहित</strong></p>
<p>होली के दिन लाल कपड़े में एक मुट्ठी गुलाल बांधकर पति के साथ बहते हुए जल में प्रवाहित करें. ऐसा करने से आपसी संबंध मजबूत होते हैं. होली के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के प्रतिमा के चरणों में पति-पत्नी मिलकर भरपूर गुलाल चढ़ाएं और उसी गुलाल को जीवनसाथी को लगाएं.</p>
<p><strong>होलिका दहन</strong></p>
<p>होली से एक दिन पहले काले कपड़े में थोड़ा सा लाल गुलाल लेकर बेडरूम में बेड के नीचे रख दें. इसके बाद अगले दिन उस पोटली को होलिका दहन की आग में पति-पत्नी डाल दें. होली के दिन पति-पत्नी</p>
<p>एक कपड़े में गुलाल के बीच में कपूर का टुकड़ा छिपाकर उसे पीपल के पेड़ में बांध आएं. इससे दांपत्य जीवन सुखमय होता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/holi-tricks-with-this-use-of-gulal-on-holi-married-life-will-be-filled-with-happiness						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/holi-tricks-with-this-use-of-gulal-on-holi-married-life-will-be-filled-with-happiness</guid>
					<pubDate>Sun, 19 Feb 2023 09:59:45 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चमत्कारिक व्रत: भगवान विष्णु का यह व्रत दिलाता है दुख-दरिद्रता से छुटकारा और हर काम में विजय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>संसार में कोई भी व्यक्ति कभी हार की कामना नहीं करता है, वह तो हर काम में यही कल्पना करता है कि जीत उसी की होगी. हर कोई जीवन में विजय की कामना करता है और यह स्वाभाविक भी है. रावण द्वारा सीता माता के हरण के बाद इस बात की जानकारी प्रभु श्री राम को हो गई तो उन्होंने भी वानरों, भालू आदि की सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की. समुद्र पर पुल का निर्माण और लंका में पूरी सेना पहुंचने के बाद युद्ध शुरू होने के पहले श्री राम ने भी विजय की कामना की थी. युद्ध के पूर्व भगवान विष्णु की आराधना करने से ही वह रावण और लंका पर विजय प्राप्त कर सके.</p>
<p>फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाए जाने से इस पर्व को विजया एकादशी कहते हैं. इसी दिन भगवान श्री राम ने लंका युद्ध के पूर्व ऋषियों की सलाह पर इस व्रत को किया था. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने वाले को कभी दुख दारिद्रय नहीं रहता है और विजय की प्राप्ति होती है. यह त्योहार आज मनाया जा रहा है. </p>
<p><strong>पूजन विधि</strong></p>
<p>एक मिट्टी के कलश को जल से भर कर स्थापित करें. उसके पास पीपल, आम, बड़ तथा गूलर के पत्ते रखें, फिर एक बर्तन में जौ भरकर उसे कलश पर स्थापित करें. जौ के बर्तन या पात्र में श्री लक्ष्मी नारायण की स्थापना करें और फिर उनका विधि पूर्वक पूजन करें. दिन भर उपवास रख कर विष्णु जी का ध्यान करते रहें. रात्रि में भी उनका भजन कीर्तन करते हुए जागरण करें और प्रात: काल जल को विसर्जित करने के साथ ब्राह्मणों को दान दक्षिणा और भोजन कराने के बाद ही स्वयं भी भोजन ग्रहण करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/miraculous-fast-this-fast-of-lord-vishnu-gives-relief-from-sorrow-and-poverty-and-victory-in-every-w						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/miraculous-fast-this-fast-of-lord-vishnu-gives-relief-from-sorrow-and-poverty-and-victory-in-every-w</guid>
					<pubDate>Fri, 17 Feb 2023 09:37:04 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शिवावतार: महाशिवरात्रि पर जाने शिवजी के अनजाने अनसुने अवतारों के बारें में]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भारतीय संस्कृति के सबसे अहम देव, महादेव शिव के बारें में कई गाथाएं सुनने को मिलती है. वर्तमान समय में अधिकांश व्यक्ति के नाम और उपनाम होते है. उसी तरह शिव महापुराण में भगवान शिव के भी कई नाम और 19 अवतारों के बारे में बताया गया है. भोले बाबा को सिर्फ शिव या शकंर ही नहीं बल्कि महाकाल, आदिदेव, जटाधारी, महेश, उमापति, शशिभूषण, नीलकंठ आदि सहस्त्रों नामों से जाना जाता है. शंकर जी का एक नाम अष्टमूर्ति भी है. महाकवि कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम में अष्टमूर्ति रूप में ही भगवान शिव की प्रार्थना की है. महादेव को कुछ नाम उनके समय व परिस्थिति पर लिए गए अवतार के अनुसार तथा कुछ उनके वेशभूषा के अनुसार भी दिए गए है. इसी महीने की 18 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व होगा. आइए उनके कुछ अवतारों के बारे में जानें. </p>
<p><strong>अश्वत्थामा अवतार</strong></p>
<p>गुरु द्रोणाचार्य ने भगवान शिव को पुत्र रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था कि वे उनके पुत्र के रूप में अवतीर्ण होंगे, जो  बाद में अश्वत्थामा के रूप में जाने गए.</p>
<p><strong>नंदी अवतार</strong></p>
<p>शिलाद मुनि नाम के एक ब्रह्मचारी थे, उनका वंश समाप्ति की ओर देखकर उनके पितरों ने शिलाद से संतान उत्पन्न करने को कहा. पितरों की आज्ञा मानकर मुनि शिलाद ने भगवान की तपस्या की. तब भगवान शंकर ने स्वयं शिलाद के यहां नंदी रुप में जन्म लेने का वरदान दिया.</p>
<p><strong>वीरभद्र अवतार</strong></p>
<p>प्रजापति दक्ष के यज्ञ में माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए. इस बात का पता चलते ही शिवजी ने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे पर्वत के ऊपर पटक दिया और उस जटा के पूर्व भाग से महाभयंकर वीरभद्र प्रगट हुए. शिव के इस अवतार ने दक्ष का विध्वंस कर दिया था.</p>
<p><strong>किरातेश्वर अवतार</strong></p>
<p>यह स्वरूप भगवाव शिव ने पाण्डु पुत्र अर्जुन के समक्ष प्रकट किया था. इस रूप में वे त्रिनेत्रधारी, एक हाथ में धनुष और दूसरे हाथ में बाण धारण कर आए थे.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/shivavatar-on-mahashivratri-know-about-the-unknown-unheard-incarnations-of-lord-shiva						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/shivavatar-on-mahashivratri-know-about-the-unknown-unheard-incarnations-of-lord-shiva</guid>
					<pubDate>Fri, 17 Feb 2023 09:24:56 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[बागेश्वर धाम के 'चमत्कार' पर कुछ संतो ने लगाई मुहर तो कुछ ने उठाये प्रश्न]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>बागेश्वर धाम बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) इन दिनों चर्चाओं का विषय बने हुए हैं. चमत्कारी शक्तियों का दावा करने वाले धीरेंद्र शास्त्री पर इन दिनों रोज तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं. जहां कई लोग बाबा पर अंधविश्वास फैलाने की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग शास्त्री जी के समर्थन में उतर आए हैं. धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन करने वालों में अब एक और नाम जुड़ गया है. आपको बता दें कि जाने-माने कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी बाबा धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन किया है. </p>
<p><strong>धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर </strong></p>
<p>बागेश्वर सरकार धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर सामने आ गए हैं. उन्होंने सनातन धर्म मानने वालों से अपील की है कि उन्हें अपनों में फूट नहीं पड़ने देनी है.उन्होंने कहा कि जब पादरी और मौलवी उल्टी-सीधी बात करते हैं तो उन्हें अंधविश्वास नहीं कहा जाता है. लेकिन जब कोई सनातनी लोगों के संकट दूर करता है और लोगों के दुख-दर्द दूर करता है तो कईयों को तकलीफ होती है. उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए न वह किसी को ठगते हैं न किसी से कोई रुपये मांगते हैं. इसके साथ ही उन्होंने सवाल खड़ा किया कि बार-बार सनातन धर्म को ही क्यों टारगेट में लिया जाता है?</p>
<p><strong>बाबा रामदेव भी धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में</strong></p>
<p>पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बाबा रामदेव (Swami Ramdev) का भी समर्थन मिल गया है. स्वामी रामदेव ने कहा है, "कुछ पाखंडी धीरेंद्र शास्त्री पर टूटकर पड़े हैं और पूछ रहे हैं कि बालाजी की कृपा क्या है, हनुमान जी की कृपा क्या है?"</p>
<p><strong>जोशीमठ आकर धसकती हुई जमीन को रोककर दिखाए-स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद </strong></p>
<p>स्वामी जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बागेश्वर महाराज को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बागेश्वर बाबा का नाम लेते हुए  कहा कि चमत्कार दिखाने वाले जोशीमठ के बारे में जानकारी दें. चमत्कार दिखाने वाले जोशीमठ आकर धसकती हुई जमीन को रोककर दिखाए. मकानों में आईं दरारों के बारे में बताएं, तब मैं भी उनके चमत्कार को मान्यता दूंगा.</p>
<p><strong>बागेश्वर पर बोले चंपत राय ने कहा-ये धर्म-श्रद्धा का विषय</strong></p>
<p>वीएचपी केंद्रीय उपाध्यक्ष और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पर कहा कि ये धर्म-श्रद्धा का विषय है. जिसकी श्रद्धा हो वह जाए जिसकी न हो वह न जाए. उन्होंने कहा कि ईश्वरीय शक्ति होती है जो कुछ लोगों को जन्म के साथ मिलती है. आलोचना करने वाले और उन्हें मानने वाले स्वतंत्र हैं.</p>
<p><strong>साध्वी प्राची ने किया धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन</strong></p>
<p>हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची ने बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं. मेरा बागेश्वर धाम को खुला समर्थन है.यह सनातन की परंपराओं को आगे ले जाने का काम करते हैं. भाई धीरेंद्र शास्त्री जी चादर और फादर से डरने वाले नहीं है, उनकी बहुत सारी परीक्षाएं ली जा रही है</p>
<p><strong>जानें क्या है विवाद?</strong></p>
<p>बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने और  समाधान करने का दावा किया जाता है. कहा जाता है कि भूत, प्रेत से लेकर बीमारी तक का इलाज बाबा की कथा में होता है.   धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था, "भारत में चादर चढ़ाना और कैंडल जलाना तो आस्था है, लेकिन अर्जी का नारियल बांधना अंधविश्वास है. पता नहीं लोग इतना दोगलापन कहां से लाते हैं." बाबा के समर्थकों का दावा है कि बागेश्वर धाम सरकार इंसान को देखते ही उसकी हर तरह की परेशानी जान लेते हैं  और उसका समाधान करते हैं.  वहीं, बागेश्वर धाम सरकार का कहना है कि वह लोगों की अर्जियां भगवा तक पहुंचाने का जरिया हैं. उनकी अर्जी पर  भगवान सुनकर समाधान देते हैं. इन्हीं दावों को नगापुर की अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने चुनौती दी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/some-saints-stamped-on-the-miracle-of-bageshwar-dham-and-some-raised-questions						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/some-saints-stamped-on-the-miracle-of-bageshwar-dham-and-some-raised-questions</guid>
					<pubDate>Tue, 14 Feb 2023 01:55:48 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[अघोरियों के बारें में हिला देने वाला खुलासा, शव तक को नहीं छोड़ते]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में साधु-संतों की कई बिरादरियां हैं. इनके जीने के तौर-तरीकों, भगवान की आराधना करने के तरीके आदि में काफी अंतर होता है. कुछ साधु-संत आम लोगों के बीच रहते हैं तो कुछ जंगल-पहाड़ों, गुफाओं में रहते हैं. वे कुंभ, महाकुंभ जैसे खास मौकों पर ही बाहर आते हैं और जल्‍द ही अपनी दुनिया में वापस लौट जाते हैं. लेकिन साधु-संतों की बिरादरी में एक बात आमतौर पर देखी जाती है कि वे अविवाहित होते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं. लेकिन साधु-संतों की एक बिरादरी ऐसी है जो इन मामलों में काफी अलग है. ये बाबा ना केवल महिलाओं से संबंध बनाते हैं, बल्कि शव तक से संबंध बनाते हैं.  </p>
<p><strong>शव से संबंध बनाते हैं अघोरी बाबा </strong></p>
<p>साधु-संतों की ये बिरादरी अघोरी बाबाओं की बिरादरी है. अघोरी बाबा अपने शरीर पर राख लपेटते हैं, लंबी जटाएं रखते हैं और जानवरों की खाल पहनते हैं. अपने रूप और वेशभूषा के कारण तो ये अघोरी बाबा लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रहते हैं, साथ ही इनका जीवन और भगवान की आराधना करने का तरीका भी बहुत अलग होता है. ये अघोरी बाबा श्‍मशान घाट में रहते हैं, शवों के साथ संबंध बनाते हैं. इनका मानना है कि जब वे शारीरिक संबंध बनाने के दौरान भी शिव भक्ति में लीन रह सकते हैं तो वे किसी भी स्थिति में शिव जी की आराधना कर सकते हैं. इसके अलावा वे जीवित महिलाओं से उस समय संबंध बनाते हैं, जब उनका मासिक चक्र चल रहा होता है. अघोरियों का मानना है कि इस तरह संबंध बनाने से उनकी तंत्र शक्ति प्रबल होती है. वे इंसानों का कच्‍चा मांस खाते हैं. जबकि यह सब बातें सोचकर ही आम आदमी की रूह कांप जाती है. </p>
<p>अघोरी बाबाओं का तर्क है कि शव से संबंध बनाना भी उनकी शिव साधना का एक तरीका है. यही वजह है कि अघोरी बाबा, साधु-संतों की ऐसी बिरादरी है जो ब्रम्‍हचर्य का पालन नहीं करती है. अघोरियों को कुत्‍तों से भी बहुत प्रेम होता है, वे हमेशा अपने साथ कुत्‍ता रखना बहुत पसंद करते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/shocking-revelation-about-aghoris-they-dont-leave-even-dead-bodies						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/shocking-revelation-about-aghoris-they-dont-leave-even-dead-bodies</guid>
					<pubDate>Mon, 30 Jan 2023 09:17:14 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[तुलसी सूखने लगे तो तुरंत कर ले ये उपाय, होगी बड़ी बाधा दूर]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को काफी पूज्यनीय माना गया है. मान्यताओं के अनुसार, इसमें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी वास करती हैं. ऐसे में इस पौधे का महत्व काफी बढ़ जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तुलसी को घर में लगाकर रोजाना उसकी पूजा करने से खुशहाली आती है और सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं. इससे धन लाभ के योग बनते हैं और नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है. हालांकि, कई बार तुलसी की देखभाल करने के बाद भी वह सूख जाती है. ऐसे में जरूरी है कि तुरंत कुछ उपाय कर लिए जाएं.</p>
<p><strong>प्रवाहित</strong></p>
<p>तुलसी का पौधा अगर सूखने लगे या मुरझा जाए तो इसको तरक्की में आने वाली बाधा के रूप में देखा जाता है. ऐसे में अगर तुलसी सूख जाए तो उसे ले जाकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए. नदी न हो तो किसी भी जलाशय में बहा सकते हैं.</p>
<p><strong>दूसरी तुलसी</strong></p>
<p>तुलसी को सूखने पर अगर नदी में प्रवाहित करने जा रहे हैं तो दिन का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. तुलसी के पौधे को रविवार के दिन प्रवाहित नहीं करना चाहिए. वहीं, तुलसी के सूखने पर उसे तुरंत हटाकर, दूसरी तुलसी लगा देनी चाहिए.</p>
<p><strong>टिप्स</strong></p>
<p>तुलसी के पौधे में सर्दी के मौसम में ठंडा पानी न डालें. गुनगुना पानी डालने से पत्तियां नहीं मुरझाती हैं. इसकी मंजरियों को ठंड के मौसम में हटा देना चाहिए, क्योंकि इसके सूखने से पूरी तुलसी सूख सकती है. सर्दियों के मौसम में इसकी दो बार गुड़ाई करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-basil-starts-drying-do-this-remedy-immediately-a-big-obstacle-will-be-removed						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-basil-starts-drying-do-this-remedy-immediately-a-big-obstacle-will-be-removed</guid>
					<pubDate>Fri, 27 Jan 2023 09:35:32 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[इन स्थितियों में बड़े-बुजुर्ग के पैर नहीं छूना चाहिए, दूर से हाथ जोड़ ले]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>अपनों से बड़े और सम्मानीय लोगों के चरण स्पर्श करना यानी पैर छूना हिंदू धर्म की सदियों पुरानी परंपरा है. इसके अलावा कुछ खास रिश्‍तों में उम्र में बड़े व्‍यक्ति भी अपने से कम उम्र वाले व्‍यक्ति के पैर छूते हैं. वहीं छोटी बच्चियों और कन्‍याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना भी बहुत अहम माना जाता है. लेकिन धर्म-शास्‍त्रों में कुछ ऐसी स्थितियों के बारे में बताया गया है जब सामने बड़े-बुजुर्ग आ भी जाएं तो भी उनके पैर नहीं छूना चाहिए. ऐसी स्थिति में पैर छूने की बजाय दूर से हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना ही पर्याप्‍त होता है. आइए जानते हैं किन स्थितियों में बड़े और सम्‍मानीय लोगों के पैर भी नहीं छूने चाहिए.</p>
इन स्थितियों में न छुएं बड़े-बुजुर्गों के पैर 
<p>श्मशान से लौटता हुआ व्यक्ति: यदि कोई सम्‍मानीय व्‍यक्ति या बड़े-बुजुर्ग श्‍मशान घाट से लौट रहे हैं तो उनके पैर छूने से बचना चाहिए. क्‍योंकि श्‍मशान घाट में किसी के अंतिम संस्‍कार से लौटने पर व्‍यक्ति अशुद्ध रहता है. जब वह स्‍नान कर ले उसके बाद ही उसे छूना चाहिए. </p>
<p><strong>मंदिर में :</strong> मंदिर में व्‍यक्ति भगवान की पूजा-प्रार्थना करने और उनकी कृपा पाने के लिए जाता है. वहां भगवान से बड़ा और ज्‍यादा सम्‍मानीय कोई नहीं होता है. लिहाजा मंदिर या धार्मिक स्‍थल के अंदर कोई बुजुर्ग या सम्‍मानीय व्‍यक्ति मिल जाए तो भी उसके पैर नहीं छूना चाहिए.   </p>
<p><strong>सोया हुआ व्यक्ति:</strong> यदि कोई व्‍यक्ति सो रहा है या लेटा हुआ है तो उस समय उसके पैर न छुएं. लेटे हुए या सोए हुए व्‍यक्ति के पैर छूना बहुत अशुभ होता है, मान्‍यता है कि ऐसा करने से व्‍यक्ति की उम्र घटती है. केवल मरे हुए व्‍यक्ति के ही पैर छुए जाते हैं.</p>
<p><strong>अशुद्ध स्थिति में:</strong> यदि पैर छूने वाला व्‍यक्ति या सम्‍मानीय व्‍यक्ति दोनों में से कोई भी अशुद्ध अवस्‍था में है तो पैर नहीं छूने चाहिए. इससे दोनों को हानि होती है. </p>
<p><strong>पूजा-पाठ कर रहा व्‍यक्ति:</strong> यदि कोई व्‍यक्ति पूजा-पाठ कर रहा है तो उसकी पूजा-आराधना पूरी होने तक इंतजार करें. बीच में ही पैर न छूएं, ऐसा करने से उसकी पूजा-अर्चना में बाधा पहुंचती है. जो कि गलत है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/in-these-situations-the-feet-of-elders-should-not-be-touched-join-hands-from-a-distance						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/in-these-situations-the-feet-of-elders-should-not-be-touched-join-hands-from-a-distance</guid>
					<pubDate>Fri, 27 Jan 2023 09:30:55 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कुछ खास पौधों में कलावा बांधने से जीवन की कई समस्याएं दूर हो जाती है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>ज्योतिष शास्त्र बहुत प्राचीन विज्ञान है. इसमें न सिर्फ ग्रहों की चालों को समझकर उनका उपाय किया जाता है. बल्कि व्यक्ति के जीवन में आने वाली समस्याओं का हल भी निकाला जाता है. ज्योतिष शास्त्र में कई बड़ी विपत्तियों का निपटारा छोटे से उपाय से हो जाता है. हिंदू धर्म में आपने देखा होगा कि पेड़ों पर कलावा बांधा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खास पौधों में कलावा बांधने से जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं. आइए आपको बताते हैं कि एक छोटा सा कलावा कैसे जीवन की समस्याओं को हल करने में सहायक बन सकता है. </p>
<p><strong>तुलसी का पौधा</strong></p>
<p>हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र माना गया है. इसमें माता लक्ष्मी का वास होता है. वास्तुशास्त्र कहता है अगर छोटा सा कलावा तुलसी के पौधे पर बांध दिया जाए तो इससे माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति की सारी मुरादें पूरी करती हैं. </p>
<p><strong>केले का पेड़</strong></p>
<p>अकसर गुरुवार के दिन आपने सुहागिन महिलाओं को केले के पेड़ की पूजा और उस पर कलावा बांधते देखा होगा. मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है. गुरुवार के दिन कलावा बांधा जाए तो बृहस्पति देव की कृपा भी प्राप्त होती है. </p>
<p><strong>शमी का पौधा</strong></p>
<p>महादेव की कृपा और शनि दोष से बचने के लिए लोग इस पौधे को घर में लगाते हैं. अगर इसके पौधे पर कलावा बांधा जाए तो इससे शनिदेव खुश हो जाते हैं. इसके अलावा राहु का दोष भी इससे कम हो जाता है. </p>
<p><strong>पीपल का पेड़</strong></p>
<p>हिंदू धर्म में पीपल को पवित्र पेड़ माना गया है. इसमें त्रिदेव यानी ब्रह्मा,विष्णु और महेश वास करते हैं. इसके पत्तों में देवी-देवताओं का भी वास माना गया है. कहा जाता है कि मंगलवार और शुक्रवार के दिन पीपल की पूजा करने के बाद उस पर कलावा बांधा जाए तो घर में पॉजिटिविटी आती है.</p>
<p><strong>बरगद</strong></p>
<p>धर्मग्रंथों में बरगद के पेड़ की पूजा करने का तरीका बताया गया है. इसको वटवृक्ष भी कहते हैं. वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं इस पेड़ की पूजा-अर्चना करती हैं. मान्यता है कि अगर सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करने के बाद उसमें कलावा बांधती हैं तो उनका सुहाग सुरक्षित रहता है और अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/by-tying-kalava-in-some-special-plants-many-problems-of-life-go-away						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/by-tying-kalava-in-some-special-plants-many-problems-of-life-go-away</guid>
					<pubDate>Wed, 25 Jan 2023 11:39:37 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[भगवान शिव को अर्पित नहीं की जाती ये 3 चीजें, शिवजी हो जाते है क्रोधित]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भगवान शिव को देवों का देव कहा जाता है. उनका स्वभाव बेहद भोला है. अगर आप अंतर्मन से पूरी शुद्धि के साथ उन्हें याद करें तो वे हर किसी की फरियाद पूरी करते हैं. उन्हें प्रसन्न करने के लिए अर्पित की जाने वाली सामग्री के बारे में पुराणों में अनेक तरीके बताए गए हैं. हालांकि 3 सामग्री ऐसी भी है, जिन्हें कभी भी भोले शंकर को अर्पित नहीं करना चाहिए वरना उनकी नाराजगी झेलनी पड़ जाती है. आइए जानते हैं कि वह सामग्री कौन सी है. </p>
<p><strong>कुमकुम या सिंदूर</strong></p>
<p>भगवान शिव (Lord Shiva Remedies) को महान तपस्वी यानी बैरागी माना गया है, जो दुनिया की मोहमाया से दूर रहकर हमेशा तपस्या में लीन रहते हैं. लिहाजा उन्हें कभी भूलकर भी सिंदूर या कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए. ऐसा करना भोलेनाथ का अपमान माना जाता है और इससे वे रुष्ट भी हो सकते हैं. </p>
<p><strong>तुलसी की पत्तियां</strong></p>
<p>तुलसी एक पवित्र पौधा है और इसमें मां लक्ष्मी का वास माना जाता है. लेकिन हमें भगवान शिव (Lord Shiva Remedies) की पूजा में कभी तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं करने चाहिए. कहा जाता है कि भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था. इसलिए तुलसी ने नाराज होकर भगवान शिव को अपने अलौकिक गुण वाले पत्तों से वंचित कर दिया था. जिसका हमें भी सम्मान करना चाहिए. </p>
<p><strong>हल्दी</strong></p>
<p>हल्दी का संबंध सेहत और शारीरिक सौंदर्य के निखार से माना जाता है, जबकि भगवान शिव (Lord Shiva Remedies) इन सबसे कोसों दूर रहते हैं. यही वजह है कि वे हल्दी को पसंद नहीं करते है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति जाने या अनजाने में भगवान शिव को हल्दी अर्पित करता है तो इससे पुण्य फल मिलने के बजाय नुकसान की ज्यादा आशंका रहती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/these-3-things-are-not-offered-to-lord-shiva-shivji-gets-angry						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/these-3-things-are-not-offered-to-lord-shiva-shivji-gets-angry</guid>
					<pubDate>Wed, 25 Jan 2023 11:35:50 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[बसंत पंचमी: बसंत पंचमी के दिन खरीदें ये शुभ चीजें, होगी सौभाग्य में वृद्धि, बनेंगे सारे काम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है. इस दिन शिक्षा की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. धर्म-शास्‍त्रों के अनुसार इसी दिन मां सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था इसलिए उन्‍हें यह दिन समर्पित है. इसके अलावा भारत में इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत भी हो जाती है. लिहाजा इसे बसंत पंचमी कहा जाता है. इस साल 26 जनवरी 2023, गुरुवार को बसंत पंचमी मनाई जाएगी. बसंत पंचमी पर्व के दिन कुछ खास चीजों को खरीदना बेहद शुभ माना जाता है. साथ ही यह विवाह करने के लिए अबूझ मुहूर्त भी होता है. </p>
<p><strong>बसंत पंचमी के दिन खरीदें ये शुभ चीजें </strong></p>
<p>किताब: बसंत पंचमी के दिन कोई अच्‍छी किताब घर लेकर आएं. मां सरस्‍वती विद्या और ज्ञान की देवी हैं, उनके जन्‍मोत्‍सव के दिन किताब या ग्रंथ लाना बहुत शुभ होता है.</p>
<p>हाग या शादी से जुड़ी चीजें: हिंदू धर्म-शास्‍त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का तिलकोत्‍सव हुआ था. इसलिए यह दिन विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त होता है यानी कि इस दिन विवाह मुहूर्त निकाले भी पूरे दिन शादी की जा सकती है. यानी कि प्रेम विवाह करने के इच्‍छुक लोग या ऐसे युवक-युवती जिनका विवाह मुहूर्त किसी कारण से नहीं निकल पा रहा है, वे इस दिन विवाह कर सकते हैं. इसके अलावा इस दिन विवाह से जुड़ी चीजें जैसे शादी का जोड़ा, गहने, सुहाग की चीजें या अन्य सामान की खरादारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है. मान्‍यता है कि बसंत पंचमी के दिन इन चीजों की खरीदारी करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है.</p>
<p>पीले रंग की फूल माला- मां सरस्‍वती को पीला रंग बेहद प्रिय है और इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है. बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के फूलों की माला माता पार्वती को अर्पित करें. घर के मुख्‍य द्वार को पीले रंग के फूलों से सजाएं, ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. </p>
<p>मोरपंखी का पौधा- मोरपंखी पौधा माता सरस्‍वती को बेहद प्रिय है. जिस घर में मोरपंखी पौधा होता है, उस घर के बच्‍चे पढ़ाई में अच्‍छा प्रदर्शन करते हैं. बसंत पंचमी के दिन आप अपने घर मोरपंखी का पौधा ले आएं और इसे घर के मुख्‍य द्वार पर या ड्राइंगरूम में लगाएं. </p>
<p>वाद्य यंत्र- माता सरस्वती कला और संगीत की भी देवी हैं. बसंत पंचमी के दिन आप कोई छोटा सा वाद्य यंत्र भी खरीद सकते हैं. वहीं कला-संगीत की शिक्षा ले रहे लोग तो वाद्य यंत्र लेने के लिए इस दिन का इंतजार करते हैं. </p>
<p>मां सरस्वती की तस्‍वीर या प्रतिमा- बसंत पंचमी के दिन घर में माता सरस्वती का कोई चित्र या मूर्ति ले आएं और इसे ईशान कोण में स्‍थापित करें. इससे बच्‍चों की शिक्षा पर सकारात्‍मक असर पड़ता है. </p>
<p>वाहन- बसंत पंचमी का दिन नया घर या गाड़ी खरीदने के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन ली गई चीजें लंबे समय तक चलती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/basant-panchami-buy-these-auspicious-things-on-the-day-of-basant-panchami-luck-will-increase-all-wor						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/basant-panchami-buy-these-auspicious-things-on-the-day-of-basant-panchami-luck-will-increase-all-wor</guid>
					<pubDate>Mon, 23 Jan 2023 10:27:19 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[गुप्त नवरात्री: बेहद शुभ संयोग में हो रही है नवरात्री की शुरुआत, न करे ये गलती, मां दुर्गा होगी प्रसन्न]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>साल में 4 नवरात्रि आती हैं, 2 गुप्‍त नवरात्रि और 2 प्रत्‍यक्ष नवरात्रि. माघ महीने की गुप्‍त नवरात्रि आज 22 जनवरी 2023, रविवार से शुरू होकर 30 जनवरी 2023 तक चलेंगी. गुप्‍त नवरात्रि की शुरुआत बेहद शुभ संयोग में हो रही है. साथ ही इन 9 दिनों के दौरान शनि और शुक्र ग्रह की युति का अद्भुत संयोग भी बन रहा है. गुप्‍त नवरात्रि की शुरुआत माघ मास के शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. गुप्‍त नवरात्रि में घटस्‍थापना करके 9 दिन तक मां की पूजा-अर्चना करने से हर तरह के दुःख दूर होते हैं और जीवन में खुशियों की दस्‍तक होती है. </p>
<p><strong>गुप्त नवरात्रि शुभ योग मुहूर्त </strong></p>
<p>गुप्त नवरात्रि यानी कि माघ मास की प्रतिपदा तिथि 22 जनवरी 2023, रविवार की सुबह तड़के 02 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है और 22 जनवरी, 2023 की रात 10 बजकर 27 मिनट तक चलेगी. इस दौरान घटस्थापना का शुभ मुहूर्त आज सुबह 09 बजकर 59 मिनट से लेकर 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इस दौरान सूर्योदय से ही सिद्धि योग शुरू हो जाएगा. इस तरह गुप्‍त नवरात्रि की शुरुआत सिद्धि योग से होना बेहद शुभ है. साथ ही कुंभ राशि में शनि-शुक्र की युति भी हो रही है, जो कि बेहद शुभ है क्‍योंकि शुक्र और शनि मित्र ग्रह हैं. </p>
<p><strong>किस दिन मां दुर्गा के किस रूप की पूजा करें </strong></p>
<p>प्रतिपदा (मां काली): 22 जनवरी 2023 </p>
<p>द्वितीया (तारा देवी): 23 जनवरी 2023 </p>
<p>तृतीया (त्रिपुर सुंदरी): 24 जनवरी 2023 </p>
<p>चतुर्थी (भुवनेश्वरी): 25 जनवरी 2023 </p>
<p>पंचमी (माता छिन्नमस्ता): 26 जनवरी 2023 </p>
<p>षष्ठी (त्रिपुर भैरवी): 27 जनवरी 2023 </p>
<p>सप्तमी (मां ध्रुमावती): 28 जनवरी 2023 </p>
<p>अष्टमी (मां बंगलामुखी): 29 जनवरी 2023 </p>
<p>नवमी (मातंगी): 30 जनवरी 2023 </p>
<p>गुप्‍त नवरात्रि के दौरान न करें ये काम </p>
<p><strong>- गुप्‍त नवरात्रि के दौरान गलती से भी नॉनवेज-शराब का सेवन न करें. </strong></p>
<p>- यदि घर में घटस्‍थापना की है तो घर में गंदगी न रहने दें. घर में लहसुन-प्‍याज का इस्‍तेमाल न करें. किसी भी तरह की तामसिक चीज घर में ना लाएं, वरना मां दुर्गा रूठ जाएंगी. </p>
<p>- नवरात्रि में कन्‍या पूजन करें, महिलाओं का सम्‍मान करें. इस दौरान किसी कन्‍या या महिला को सताना आपके जीवन में समस्‍याओं का अंबार लगा सकता है. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/gupta-navratri-navratri-is-starting-in-a-very-auspicious-coincidence-dont-make-this-mistake-maa-durg						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/gupta-navratri-navratri-is-starting-in-a-very-auspicious-coincidence-dont-make-this-mistake-maa-durg</guid>
					<pubDate>Sun, 22 Jan 2023 10:46:28 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[लाल किताब के उपाय: करें ये काम सफलता चूमने लगेगी कदम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>उम्मीदों और संभावनाओं से भरे नववर्ष 2023 की शुरुआत को आधा महीना बीत चुका है. लोगों को आशा है कि जो काम पिछले साल अधूरे रह गए थे, वे इस साल जरूर पूरे होंगे. इसके लिए सभी लोग अपनी-अपनी ओर से मेहनत करने के साथ ही देवी-देवताओं को प्रसन्न करने में भी लगे हैं. आज हम आपको जिंदगी में कामयाबी के लिए लाल किताब से जुड़े 4 अचूक उपाय बताते हैं. कहा जाता है कि इन उपायों का उपयोग करने से सफलता अपने आप खिंची चली आने लगती है. </p>
लाल किताब से जुड़े उपाय
<p><strong>साल में 2 बार करें पौधारोपण  </strong></p>
<p>अगर आप चाहते हैं कि इस साल आपके सारे कार्य पूरे होते चले जाएं तो आप वृक्षों की सेवा करें. कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन काल में एक नीम, एक पीपल, 3 कैथ, 3 बेल, 3 आंवला, 5 आम और 10 इमली के पेड़ लगाता है, वह जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्त हो जाता है. लिहाजा आप भी साल में 2 बार अलग-अलग संख्या में पौधारोपण जरूर करें. </p>
<p><strong>कंबलों का करें दान </strong></p>
<p>सर्दियों का पीक सीजन चल रहा है. ऐसे में जरूरतमंदों को कंबल का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है. लाल किताब (Lal kitab ke Achuk Upay) के अनुसार आप भी अपने हाथ से किसी जरूरतमंद या मंदिर में कंबल का दान कर दें. यह कंबल सफेद और काले रंग का मिक्सचर होना चाहिए. कोशिश करें कि यह दान अगर शनिवार को हो तो ज्यादा बेहतर होगा. ऐसा करने से राहु-केतु के दोष दूर हो जाते हैं.</p>
<p><strong>हनुमानजी को ओढ़ाएं चोला  </strong></p>
<p>किसी भी तरह के संकट से बचने के लिए आप बजरंग बली को प्रसन्न करें. इसके लिए आप आप साल में 2 बार भगवान हनुमान जी को लाल रंग का चोला अर्पित करें. साथ ही बहते पानी में सिंदूर, बताशे, रेवड़ी और शहद बहाएं. ऐसा करने से मंगल दोष दूर हो जाता है और जिंदगी में सफलता कदम चूमने लगती है. </p>
<p><strong>दिव्यांगों को करवाएं भोजन </strong></p>
<p>लाल किताब (Lal kitab ke Achuk Upay) के मुताबिक आप साल में कम से कम 10 दिव्यांगों, संन्यासी या कन्याओं को भोजन करवाएं. यह काम साल में 2 बार करना उत्तम रहता है. अगर ऐसा करना संभव न हो तो आप पशु-पक्षियों को भोजन करवाएं और छत पर उनके लिए पानी रखें. आप गोशाला में भी चारे के लिए दान कर सकते हैं. ऐसा करने से शनिदोष दूर हो जाता है और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/lal-kitab-remedies-do-this-work-success-will-start-kissing-you						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/lal-kitab-remedies-do-this-work-success-will-start-kissing-you</guid>
					<pubDate>Fri, 20 Jan 2023 11:16:05 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मां लक्ष्मी की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए करें ये काम,दूर होगी दरिद्रता]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>मां लक्ष्मी की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास है. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा और मंत्रों के जाप से वे प्रसन्न होकर भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. मान्यता है कि शुक्रवार के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ विधिपूर्वक करने से धन की देवी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और मनचाहा इच्छापूर्ति का वरदान देती हैं. इस दिन पूजा के साथ मां लक्ष्मी की आरती और चालीसा पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है. इससे व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. </p>
श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa)
<p><strong>॥ दोहा ॥</strong></p>
<p>मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।</p>
<p>मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥</p>
<p>सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।</p>
<p>ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥</p>
<p><strong>श्री लक्ष्मी चालीसा</strong></p>
<p>तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥</p>
<p>जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥1॥</p>
<p>तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥</p>
<p>जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥</p>
<p>विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥</p>
<p>केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3</p>
<p>कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥</p>
<p>ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥</p>
<p>क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥</p>
<p>चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥</p>
<p>जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥</p>
<p>स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥</p>
<p>कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥</p>
<p>ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥</p>
<p>क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥</p>
<p>चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥</p>
<p>जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥</p>
<p>स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥</p>
<p>ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥</p>
<p>त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥10॥</p>
<p>जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥</p>
<p>ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥11॥</p>
<p>पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥</p>
<p>विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥12॥</p>
<p>पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥</p>
<p>सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥13॥</p>
<p>बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥</p>
<p>प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥14॥</p>
<p>बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥</p>
<p>करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥15॥</p>
<p>जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥</p>
<p>तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥16॥</p>
<p>मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥</p>
<p>भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥17॥</p>
<p>बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥</p>
<p>नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥18॥</p>
<p>रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥</p>
<p>केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥19॥</p>
<p><strong>॥ दोहा॥</strong></p>
<p>त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥</p>
<p>रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-this-work-to-get-the-blessings-of-goddess-lakshmi-and-please-her-poverty-will-go-away						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-this-work-to-get-the-blessings-of-goddess-lakshmi-and-please-her-poverty-will-go-away</guid>
					<pubDate>Fri, 20 Jan 2023 11:12:38 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मकर संक्रांति पर न करें ये गलती नहीं तो झेलना पड़ेगा सूर्य का प्रकोप, रखे इन बातों का ध्यान]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>इस बार मकर संक्रांति पर असमंजस की स्थिति है. कुछ लोग इसे 14 जनवरी को मना रहे हैं तो कुछ 15 जनवरी को. भारतीय संस्कृति में इस दिन का बहुत महत्व बताया गया है. इस दिन ग्रहों के राजा उत्तरायण होकर अपनी मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसके साथ ही तमाम शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. वहीं कुछ कार्य किए जाने से वर्जित भी हो जाते हैं. आज हम आपको उन 6 कार्यों के बारे में बताते हैं, जो आपको मकर संक्रांति के दिन गलती से भी नहीं करने चाहिए वरना अनिष्ट होते देर नहीं लगती. </p>
<p>मकर संक्रांति के दिन भूलकर न करें ये काम (What Not to Do on Makar Sankranti)</p>
<p><strong>अपनी वाणी पर रखें संयम</strong></p>
<p>मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2023) को शुभ दिन माना गया है. इस दिन आपको अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए. साथ ही किसी के प्रति अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने या उन पर क्रोध करने से भी बचना चाहिए. ऐसा न करने से अशुभ परिणाम झेलने पड़ते हैं. </p>
<p>इस दिन गलती से भी रात का बचा हुआ बासी भोजन नहीं खाना चाहिए. ऐसा करने से मन में नकारात्मकता हावी हो जाती है. इसके बजाय मकर संक्रांति पर खिचड़ी और गुड़ का सेवन करना चाहिए. उनके सेवन से शरीर को गरमी और ऊर्जा हासिल होती है. </p>
<p><strong>बिना स्नान किए भोजन न करें</strong></p>
<p>मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2023) वाले दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए. साथ ही स्नान और पूजा-पाठ के पश्चात जरूरतमंदों को दान अवश्य करना चाहिए. ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है.</p>
<p>यह दिन प्रकृति से जुड़े पर्व मनाने का दिवस होता होता है. लिहाजा इस दिन गलती से घर के बाहर या अंदर पेड़-पौधों की कटाई-छंटाई नहीं करनी चाहिए. इन कृत्यों से पाप लगता है और बुरे परिणाम भुगतने पड़ते हैं. </p>
<p><strong>तामसिक भोजन से रहें दूर</strong></p>
<p>अगर मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2023) के दिन कोई जरूरतमंद आपके घर कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ कभी वापस नहीं लौटाना चाहिए और न ही किसी गरीब का मजाक उड़ाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु क्रोधित हो जाते हैं, जिसका खामियाजा मनुष्य को भुगतना पड़ता है. </p>
<p>इस शुभ दिन पर आपको भूल से भी तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. यानी कि आपको लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा से हर हाल में दूर रहना चाहिए. साथ ही तले-भुने और मसालेदार भोजन करने से भी परहेज करना चाहिए.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-not-do-this-mistake-on-makar-sankranti-otherwise-you-will-have-to-bear-the-wrath-of-the-sun-keep-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-not-do-this-mistake-on-makar-sankranti-otherwise-you-will-have-to-bear-the-wrath-of-the-sun-keep-</guid>
					<pubDate>Sat, 14 Jan 2023 12:20:54 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मकर संक्रांति पर सूर्य का गोचर पलटेगा इन राशि वालों की किस्मत, मिलेगा अपार धन]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज यानी 14 जनवरी को ग्रहों के राजा भगवान सूर्य धनु राशि से  निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे. इसी के साथ खरमास खत्म हो जाएगा और मांगलिक कार्यों जैसे शादी पर लगी पाबंदी भी समाप्त हो जाएगी. सूर्य का यह गोचर मीन, मकर, धनु, तुला, सिंह, और मेष राशि के लिए भाग्यशाली रहने वाला है. तो वृषभ और कन्या राशि वालों के खर्चों में इजाफा होगा. अब विस्तार से जानिए कि सूर्य गोचर किन राशि वालों के लिए रहेगा लकी और किनको बरतनी है सावधानी. </p>
<p><strong>मेष</strong></p>
<p>सूर्य के इस गोचर से आपकी सैलरी में इजाफा और प्रमोशन हो सकता है. जो स्टूडेंट लॉ, मिकैनिकल इंजीनियरिंग और पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं, उनको इस पीरियड में पॉजिटिव रिजल्ट मिलेंगे. प्रोफेशनल लाइफ में भी सुधार होगा और अलग पहचान भी बनेगी.</p>
<p><strong>वृषभ </strong></p>
<p>संबंधों के मामले में काफी उथल-पुथल से गुजरना पड़ सकता है. माता-पिता से विचार मेल नहीं खाएंगे. रोजाना के जीवन में खर्च बढ़ सकते हैं. हायर एजुकेशन के लिए विदेश यात्रा के बारे में सोच सकते हैं.</p>
<p><strong>मिथुन</strong></p>
<p>इस गोचर के कारण आपका कोई भेद खुल सकता है. शत्रुओं से सावधान रहें. वर्कप्लेस पर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.</p>
<p><strong>कर्क</strong></p>
<p>एवरेज स्पीड से करियर में आगे बढ़ेंगे. वर्कप्लेस पर अचानक शत्रु एक्टिव हो जाएंगे और आपको कड़ी टक्कर देंगे. अधिकारियों और अपने कलीग्स के साथ भी संबंध अच्छे नहीं रहेंगे. शादीशुदा जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. </p>
<p><strong>सिंह</strong></p>
<p>आज के दिन सूर्य छठे भाव में गोचर करेगा. ये भाव उधार, शत्रु और रोग का होता है. परिस्थिति आपके अनुकूल रहेगी. शत्रुओं की योजनाएं सफल नहीं होंगी. आपको पुराने कर्ज से निजात मिल सकती है. सरकारी नौकरी से जुड़े लोगों को मान-सम्मान मिलेगा.</p>
<p><strong>कन्या</strong></p>
<p>फिजूलखर्च पर लगाम लगाएं. विदेश में संतान को पढ़ाई करने का मौका मिल सकता है. आर्थिक नजरिए से यह अवधि आपके लिए औसत रहेगी.</p>
<p><strong>तुला</strong></p>
<p>सूर्य गोचर की यह अवधि तुला राशि वालों के लिए अनुकूल रहने वाली है. परिवार के साथ आपको अच्छा वक्त बिताने को मिलेगा. अलग-अलग स्रोतों से आपकी आय में इजाफा होगा. सेविंग्स करने में सफल रहेंगे. घर के बड़ों की मदद से प्रॉपर्टी भी खरीद सकते हैं. निवेश से पहले सलाह-मशविरा जरूर ले लें.</p>
<p><strong>वृश्चिक</strong> </p>
<p>यह वक्त आपके लिए अच्छा रहेगा. पड़ोसियों के अलावा भाई-बहनों के साथ भी संबंध सुधरेंगे. कम्युनिकेशन में भी सुधार आएगा. करियर में ज्यादा मेहनत करेंगे, जिसके बेहतर नतीजे भी देखने को मिलेंगे.</p>
<p><strong>धनु</strong></p>
<p>इस दौरान आपको पिता से मदद मिल सकती है. राजनीति में सक्रिय जातकों के लिए अच्छा वक्त रहेगा. इस अवधि में आपको धन लाभ भी होगा. पैसा कमाने के कई मौके मिलेंगे और आय में भी इजाफा होगा.</p>
<p><strong>मकर</strong></p>
<p>पार्टनर या फिर पिता के साथ मनमुटाव रह सकता है. हालांकि करियर में आप अलग मुकाम छू सकते हैं. अचानक आपको प्रसिद्धि मिलेगी. सरकारी नौकरी करने वालों के लिए यह अवधि अनुकूल रहेगी.</p>
<p><strong>कुंभ</strong> </p>
<p>कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर शादीशुदा जिंदगी में मुश्किलें बढ़ा सकता है. प्रोफेशनल लाइफ में चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है. हालांकि कुछ अच्छे मौके भी आपके हाथों से जाएंगे.</p>
<p><strong>मीन</strong></p>
<p>इस अवधि में आपको प्रत्याशित लाभ होगा. प्रमोशन भी मिल सकता है और करियर में नए मुकाम छूने का अवसर मिलेगा. सामाजिक व आर्थिक लाभ भी हासिल कर सकते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/suns-transit-on-makar-sankranti-will-change-the-fortunes-of-people-of-these-zodiac-signs-they-will-g						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/suns-transit-on-makar-sankranti-will-change-the-fortunes-of-people-of-these-zodiac-signs-they-will-g</guid>
					<pubDate>Sat, 14 Jan 2023 12:15:57 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नकारात्‍मक शक्तियां पीछा नहीं छोड़ रहीं तो आजमाए ये टोटके होंगी बड़ी समस्या भी चुटकियों में दूर]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>यदि घर को किसी की नजर लग जाए. बिना वजह व्‍यक्ति निराशा, थकान अनुभव करे. बार-बार आर्थिक नुकसान हो, घर का कोई ना कोई सदस्‍य हमेशा बीमार ही रहे, तो इसके पीछे नकारात्‍मक शक्तियां या किसी की बुरी नजर लगना कारण हो सकता है. आइए जानते हैं ऐसी तमाम समस्‍याओं से निजात पाने के अचूक टोटके. </p>
<p><strong>ढेरों समस्‍याओं से निजात दिलाएंगे ये टोटके </strong></p>
<p>- यदि कामों में बार-बार रुकावट आ रही हो, आर्थिक तंगी हो तो बुधवार के दिन सप्त धान्य (सात प्रकार के अनाज) का दान करें.</p>
<p>- करियर में सफलता नहीं मिल रही हो, बार-बार रुकावट आ रही हो तो नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करें. </p>
<p>- आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए अपने पर्स की जेब हमेशा चांदी का छोटा सा चौकोर टुकड़ा रखें. चाहें तो इसे घर या व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठान के धन स्‍थान पर रख लें, बहुत धन लाभ होगा. </p>
<p>- रोजाना कुत्ते को रोटी खिलाएं. यदि काले कुत्ते को रोटी खिलाएं तो बेहतर है. </p>
<p>- रोज पहली रोटी गाय को खिलाएं. इससे देवी-देवताओं की कृपा से जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि रहती है. </p>
<p>- पीपल, बरगद, नीम और केले की जड़ में रोज जल चढ़ाएं. </p>
<p>- अमावस्‍या, पूर्णिमा या जब भी मौका लगे किसी सफाईकर्मी को दान देते रहें. </p>
<p>- चींटी को आटा-शक्‍कर, पक्षियों को दाना डालें. इससे जीवन की तमाम बाधाएं-संकट दूर होते हैं. </p>
<p>- यदि तनाव हो तो तांबे के लोटे में जल भरकर उसे सिरहाने रखकर सोएं. अगले दिन सुबह उसे बाहर फेंक दें. तनाव से राहत मिलेगी. </p>
<p>- तनाव और नकारात्‍मकता से बचने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार नहाने के पानी में एक चम्‍मच समुद्री नमक मिलाकर स्‍नान करें. </p>
<p>- सफेद, काला या दोरंगी कंबल गरीबों को दान करें.</p>
<p>- घर में सुबह-शाम कपूर जलाएं. इसस घर में सकारात्‍मकता रहती है. बरकत होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-the-negative-forces-are-not-leaving-you-then-try-these-tricks-even-big-problems-will-be-removed-i						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-the-negative-forces-are-not-leaving-you-then-try-these-tricks-even-big-problems-will-be-removed-i</guid>
					<pubDate>Wed, 11 Jan 2023 09:23:11 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[ये 5 शुभ संकेत दिखाई दें तो समझ जाइए कि भाग्य उदय होने वाला है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>धार्मिक शास्त्रों में मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) को धन और वैभव की देवी कहा गया है. कहा जाता है कि मां लक्ष्मी जिस पर प्रसन्न हो जाती हैं, उसके जीवन में फिर कभी कोई कमी नहीं रहती. मां लक्ष्मी चंचल का एक नाम चंचला भी है. यानी कि वे किसी भी घर में स्थाई रूप से वास नहीं करती और बारी-बारी से सब पर अपनी कृपा बरसाती रहती हैं. वे जब भी किसी घर में प्रवेश करने वाली होती हैं तो कुछ संकेतों के जरिए पहले ही अपने आगमन के बारे में सूचित कर देती हैं. अगर आपको भी ऐसे संकेत दिखाई दें तो समझ जाइए कि आपका भाग्य उदय होने वाला है. आज हम आपको ऐसे ही 5 संकेतों के बारे में बताते हैं. </p>
मां लक्ष्मी के आगमन के संकेत
<p><strong>साफ-सफाई वाले घर</strong></p>
<p>मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) को साफ-सफाई बहुत पसंद होती है. जिन घरों में साफ-सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है तो समझ जाइए कि वहां पर मां लक्ष्मी का आगमन जरूर होगा और वे वहां लंबा वास करेंगी. अगर आप भी मां नारायणी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो अपनी और घर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें. </p>
<p><strong>उल्लू के दर्शन होना</strong></p>
<p>शास्त्रों में उल्लू को मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) का वाहन माना गया है. अगर आपको घर के आसपास कहीं पर उल्लू के दर्शन हो जाएं तो इसे अपने भाग्योदय का संकेत समझें. यह इस बात का इशारा होता है कि मां लक्ष्मी जल्द ही आपके घर पर आगमन करने वाली हैं. ऐसे में उनके स्वागत के लिए तैयारी कर लेनी चाहिए. </p>
<p><strong>सुबह शंख की ध्वनि सुनना</strong></p>
<p>शंख को मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) का भाई माना गया है. अगर आपको सुबह उठते ही शंख की ध्वनि सुनाई दे तो समझ लीजिए कि मां लक्ष्मी आपको अपने आगमन का संकेत दे रही हैं. इस संकेत के साथ ही आपके दिन भी फिरने शुरू हो जाते हैं. </p>
<p><strong>रास्ते में झाड़ू लगाते दिखना</strong></p>
<p>झाड़ू मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) को बेहद प्रिय है. इसी झाड़ू के जरिए घर की सारी गंदगी और धूल-मिट्टी साफ की जाती है. अगर आपको सुबह के वक्त कहीं पर कोई झाड़ू लगाता हुआ मिल जाए तो वह एक शुभ संकेत माना जाता है. इसका अर्थ ये होता है कि आप पर मां लक्ष्मी मेहरबान होने वाली हैं. </p>
<p><strong>खानपान में होने लगता है बदलाव</strong></p>
<p>कहा जाता है कि जिस घर में मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) का आगमन होने वाला होता है, उस घर के पारिवारिक सदस्यों के खानपान अपने आप बदलने लगता है. ऐसे लोग मांसाहार और हर प्रकार के नशे से अपनी दूरी बनाने लगते हैं. उन्हें भूख कम लगती है और कम खाना भी पर्याप्त लगने लगता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-see-these-5-auspicious-signs-then-understand-that-luck-is-about-to-rise						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-you-see-these-5-auspicious-signs-then-understand-that-luck-is-about-to-rise</guid>
					<pubDate>Wed, 11 Jan 2023 09:15:17 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[पुत्रों के दीर्घायु और आरोग्य की कामना के लिये करें संकष्टी चतुर्थी व्रत]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला संकष्टी चतुर्थी या सकट चतुर्थी पर्व इस बार 10 जनवरी, मंगलवार को होगा. पुत्रों के दीर्घायु और आरोग्य की कामना के साथ इस व्रत को महिलाएं दिन भर करती हैं फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं. शाम को चंद्रमा निकलने के पहले गणेश जी के सामने पूजन कर कथा पढ़ी या सुनी जाती है. पौराणिक कथा इस प्रकार है. </p>
<p><strong>कुम्हार के आवां से जीवित निकल आया बच्चा</strong></p>
<p>किसी नगर में एक कुम्हार राजा के लिए मिट्टी के बर्तन बनाता था. कई बार आवां न पकने से वह बर्तन नहीं दे सका तो राजा को जानकारी दी. राजा के पूछने पर राज पंडित ने कहा कि हर बार आवां लगाने के साथ ही किसी बच्चे की बलि देनी होगी. राजा की आज्ञा से हर परिवार को बारी-बारी से बच्चे के बलि देना अनिवार्य कर दिया गया. </p>
<p>एक वृद्ध महिला ने अपने एक मात्र सहारे की बारी आने के पहले सुपारी और दूब का बीड़ा उठा कर अपने बच्चे से कहा कि तुम भगवान का नाम लेकर आवां में बैठ जाना, सकट माता तुम्हारी रक्षा करेगी. सकट चौथ के दिन बालक का नंबर आया तो उसने वही किया इधर उसकी वृद्धा मां खुद सकट माता से प्रार्थना करने लगी लेकिन इस बार चमत्कार हो गया और आवां बहुत ही जल्दी पक गया और वह बालक भी सकुशल निकल आया. इतना ही नहीं, आवां में पहले बैठाए गए बालक भी सकुशल निकल आए. राजा ने पूरी जानकारी होने पर मुनादी करवा दी कि सकट चतुर्थी के दिन सभी लोग इस व्रत को करें ताकि उनके बच्चे दीर्घायु हों. </p>
<p><strong>गरीब का घर सोने की अशर्फियों से भर गया</strong></p>
<p>दो सगे भाई थे जिनमें बड़ा धनवान और छोटा गरीब था. छोटे की पत्नी बड़े के घर के काम करती और बदले में एक सेर अनाज मजदूरी में मिलता था. जिससे उनका गुजर बसर चल रहा था. सकट चौथ का त्योहार नजदीक आने पर देवरानी ने कहा कि जीजी, इस बार गेहूं देना ताकि चौथ की पूजा कर सकें. घर पर गेहूं पीस कर उसने त्योहार के दिन पूए बनाए तभी विवाद होने पर पति ने पीट दिया तो नाराज हो कर वह रोते-रोते सो गई. </p>
<p>शाम को गणेश जी भिक्षार्थी बन कर उसके घर आए और भोजन मांगा तो महिला ने कहा, खाना बना रखा है, खा लो. भोजन के बाद वह बोले कि मुझे शौच जाना है तो महिला ने कहा कि जहां जगह मिले कर लो. सुबह उठकर दोनों ने देखा तो अचंभे में आ गए क्योंकि पूरे घर में जहां भी उन्होंने मल त्यागा था वह सोना बन गया. उन्हें समझ में आ गया कि यह सब गणेश जी की कृपा का फल है. सोने की अशर्फियों को तौलने के लिए महिला का पति अपनी भाभी से तराजू ले आया और देने गया तो उसमें एक अशर्फी चिपकी रह गई. </p>
<p>भाभी के पूछने पर उसने पूरी बात बता दी. इस पर सकट चतुर्थी का इंतजार करने लगी और त्योहार आने पर पूए बनाए तथा पति से खूब पीटने को कहा जिससे उसकी पीठ ही नीली पड़ गई जिसके दर्द के कारण वह सो गई. उसके घर भी गणपति परीक्षा लेने पहुंचे और भोजन मांगा तो पहले से तय जवाब दिया कि खाना बना रखा है, खा लो. इसके बाद उन्होंने शौच के लिए कहा तो फिर वह बोली जहां जगह मिले कर लो. सुबह पति पत्नी जल्दी से उठे तो देखा पूरा घर बदबू और गंदगी से भरा है. दोनों दिन भर सफाई करते रहे कि उनके लालच करने से ही गणेश जी नाराज हो गए जबकि श्रद्धा और भक्ति के कारण ही उनकी देवरानी पर सुख समृद्धि की कृपा की.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/sankashti-chaturthi-fast-for-the-long-life-and-health-of-sons						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/sankashti-chaturthi-fast-for-the-long-life-and-health-of-sons</guid>
					<pubDate>Tue, 10 Jan 2023 11:46:42 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[तरक्की के नये रास्ते खोलना चाहते हैं तो करें झाड़ू से जुड़े कुछ कारगर उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में  झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. वास्तु शास्त्र की बात करें तो झाड़ू को लेकर कई सारे नियमों की जानकारी दी गई है. इसके अनुसार, अगर घर में झाड़ू का सही तरह से इस्तेमाल न किया जाए तो कई तरह के वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं. इससे घर में नकारात्मकता का वास होने लगता है और घर की सुख और शांति चले जाती है. ऐसे में अगर इन सब परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते हैं और धन तरक्की के नये रास्ते खोलना चाहते हैं तो झाड़ू से जुड़े कुछ कारगर उपाय किए जा सकते हैं.</p>
<p><strong>साढ़ेसाती</strong></p>
<p>किसी जातक पर अगर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है तो शनिवार के दिन भूलकर भी नई झाड़ू न खरीदें. ऐसा करने से शनि देव नाराज हो सकते हैं.</p>
<p><strong>सफेद धागा</strong></p>
<p>अगर आप झाड़ू खरीदने की सोच रहे हैं तो इसके लिए भी नियमों का पालन करना चाहिए. किसी भी झाड़ू खरीदने से परेशानियां पैदा हो सकती हैं. झाड़ू को मंगलवार, शनिवार, रविवार को खरीदना शुभ माना जाता है. वहीं, नई झाड़ू लाने पर उसके ऊपरी भाग पर सफेद रंग का धागा बांध दें. इससे मां मां लक्ष्मी का घर में स्थायी निवास होता है.</p>
<p><strong>सम्मान</strong></p>
<p>झाड़ू का हमेशा सम्मान करना चाहिए, उसे भूलकर भी पैर न लगाएं. झाड़ू का आदर करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बनाए रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू लगाकर घर से दरिद्रता को बाहर किया जा सकता है.</p>
<p><strong>शुक्रवार</strong></p>
<p>पुरानी झाड़ू को किसी भी दिन बाहर न फेंके. झाड़ू को केवल शनिवार के दिन ही घर से बाहर करना चाहिए. ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है और धन आगमन के नये द्वार खुलते हैं. शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का माना जाता है, इसलिए भूलकर भी इस दिन झाड़ू को घर से बाहर न फेंके. इससे मां लक्ष्मी नाराज हो सकता हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-want-to-open-new-avenues-of-progress-then-do-some-effective-measures-related-to-broom						]]>
					</link>
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					<pubDate>Mon, 09 Jan 2023 10:23:54 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[महिलाओं को श्मशान में जाने से मना क्यों करतें हैं, क्या है मान्यता]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>दुनियाभर में कई तरह के धर्म हैं. हर धर्म की अपनी कुछ मान्यताएं हैं और उस धर्म को मानने वाले इन मान्यताओं को जरूर मानते हैं. सनातन धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म कहा जाता है. इस धर्म में भी कई तरह की मान्यताएं हैं जिनमें से कुछ मान्यताएं अंतिम संस्कार को लेकर हैं. सनातन धर्म के अनुसार जब घर में किसी शख्स की मृत्यु हो जाती है तो उसका दाह संस्कार किया जाता है जिस जगह पर संस्कार किया जाता है उसे श्मशान घाट कहते हैं. श्मशान घाट पर पुरुष जा सकते हैं लेकिन औरतों को श्मशान घाट में जाने की मनाही होती है. यहां हम समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर क्यों महिलाओं को श्मशान घाट पर जाने से मना किया जाता है.</p>
<p><strong>इसलिए श्मशान घाट में नहीं जाती हैं औरतें</strong></p>
<p>सनातन धर्म में दाह संस्कार को लेकर होने वाली परंपराएं सदियों पुरानी हैं तो हम उसी समय की बात करेंगे. पुराने समय में ऐसा माना जाता था कि दाह संस्कार की प्रक्रिया बेहद डरावनी होती है. उस दौरान शव को आग में जलाया जाता है और अस्थियों को लकड़ी से दबाया जाता है. यह दृश्य बेहद भयानक होता है. महिलाएं कोमल स्वभाव की होती हैं जो इसे देखकर डर जाती है इसलिए श्मशान घाट पर महिलाओं को जाने की मनाही होती है.</p>
<p><strong>बुरी आत्माओं का होता है वास</strong></p>
<p>शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि श्मशान घाट पर बुरी आत्माओं का वास होता है और ये बुरी आत्माएं या नकारात्मक ऊर्जा लंबे-काले बालों की ओर आकर्षित होती है. ऐसा माना जाता है कि श्मशान घाट पर जलाए गए सभी लोग को मुक्ति नहीं मिल पाती है. उनमें से कुछ लोगों की आत्माएं वहीं भटकती रहती हैं और वह महिलाओं को अपना निशाना बनाती हैं इसलिए जब पुरुष दाह संस्कार की क्रिया को खत्म करते हैं तो अपने बाल वहीं अर्पित करके चले आते हैं लेकिन महिलाएं बालों को अर्पित नहीं कर सकती हैं. इस वजह से उन्हें श्मशान घाट पर नहीं जाना चाहिए.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/why-are-women-forbidden-from-going-to-the-crematorium-what-is-the-belief						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/why-are-women-forbidden-from-going-to-the-crematorium-what-is-the-belief</guid>
					<pubDate>Sat, 07 Jan 2023 01:12:38 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मृत्यु के बाद शव को अकेला नहीं छोड़ने का ये है कारण, जान ले गरूर पुराण की ये बात]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>इंसान की मौत के बाद भी कई तरह के नियम होते हैं. इनका परिवार के सदस्यों द्वारा पालन किया जाता है. इसके बारे में गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है. मौत के बाद के संस्कार को अंतिम संस्कार कहा जाता है. परिवार में किसी की मौत होने के बाद कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है. जैसे कभी भी सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है. वहीं, घर का बड़ा बेटा ही दाह संस्कार करता है. इसके अलावा शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता है.</p>
<p><strong>तांत्रिक क्रिया</strong></p>
<p>गरुड़ पुराण के अनुसार, रात के समय तांत्रिक क्रियाएं अधिक की जाती हैं. रात के समय शव को अकेले छोड़ दिया जाए तो मृत आत्मा संकट में आ जाती है. ऐसे में शव को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए.</p>
<p><strong>बुरी आत्माएं</strong></p>
<p>गरुड़ पुराण के मुताबिक, शव को अकेला छोड़ने से बुरी आत्माएं मृत शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करती हैं. ऐसे में खासकर रात के समय शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता है. इस समय बुरी आत्माएं अधिक सक्रिय होती हैं.</p>
<p><strong>बैक्टीरिया</strong></p>
<p>मौत के बाद मृत शरीर में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया पनपने का खतरा बने रहता है, इसलिए आपने देखा होगा कि शव के आसपास कोई न कोई बैठा रहता है और अगरबत्ती या धूपबत्ती भी जलाई जाती है.</p>
<p><strong>आत्मा</strong></p>
<p>इंसान के मौत के बाद उसकी आत्मा शव के आसपास ही रहती है. इस दौरान वह दोबारा से शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करती हैं. ऐसे में शव को लोग अकेला नहीं छोड़ते हैं.</p>
<p><strong>कीड़े-मकौड़े</strong></p>
<p>वहीं, इंसान की मृत्यु के बाद शव के आसापस कीड़े-मकौड़े आने का डर रहता है, जिससे शव जल्द खराब होने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में लोग शव को अकेला नहीं छोड़ते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/this-is-the-reason-for-not-leaving-the-dead-body-alone-after-death-know-this-thing-from-garur-purana						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/this-is-the-reason-for-not-leaving-the-dead-body-alone-after-death-know-this-thing-from-garur-purana</guid>
					<pubDate>Thu, 05 Jan 2023 02:25:59 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[बड़े सख्त नियम हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने के, इन नियमों का पालन करें शिव होंगे प्रसन्न]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के नियम बताए गए हैं. इनका पालन करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं और मनोकामना पूर्ण करते हैं. आज नए साल का पहला सोमवार है. रविवार को देश भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई. लिहाजा आज भी उम्मीद है कि भक्तों का मंदिरों में तांता नजर आएगा. </p>
<p>सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है. लेकिन इसके भी नियम हैं, जिनका पालन नहीं करने पर भोलेनाथ नाराज हो जाते हैं. क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए कौन सा बर्तन इस्तेमाल होता है. जल चढ़ाते हुए किस दिशा में मुंह होना चाहिए और क्या मंत्र बोलना चाहिए. अगर नहीं तो चलिए आपको बताते हैं.</p>
<p><strong>इस दिशा में रखें मुंह</strong></p>
<p>भगवान शिव को जल चढ़ाते वक्त आपका मुंह पूर्व दिशा की ओर कभी नहीं होना चाहिए. इस दिशा को भगवान शिव का प्रवेश द्वार माना जाता है. इसलिए इस दिशा की ओर मुंह करके जल चढ़ाने से भगवान शिव के द्वार में रुकावट पैदा होती है और वह नाराज हो जाते हैं. शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त आपका मुख उत्तर दिखा की ओर होना चाहिए. इस दिशा को भगवान शिव का बायां अंग कहा गया है, जो माता पार्वती को समर्पित है. इस दिशा में मुंह करके जल देने से माता पार्वती और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है. </p>
<p><strong>किस बर्तन का करें इस्तेमाल?</strong></p>
<p>भगवान शिव को हमेशा कलश से ही जल अर्पित करें. भगवान शिव पर जल चढ़ाने के लिए तांबे का कलश सबसे अच्छा माना जाता है. आप चांदी या कांसे के लोटे से भी जलाभिषेक कर सकते हैं. भगवान शिव पर जल चढ़ाने के लिए स्टील का बर्तन इस्तेमाल न करें. वहीं तांबे के कलश में दूध से जल अर्पित न करें. ऐसा करना अशुभ होता है. </p>
<p><strong>बैठकर जल चढ़ाएं</strong></p>
<p>शिवलिंग पर हमेशा बैठकर जल चढ़ाएं. इतना ही नहीं, रुद्राभिषेक करते वक्त भी खड़े न रहें. पुराणों में कहा गया है कि अगर आप खड़े होकर जल चढ़ाते हैं तो वह भगवान शिव को समर्पित नहीं होता और ना ही उसका लाभ मिलता है. </p>
<p><strong>दाएं हाथ से करें जलाभिषेक</strong></p>
<p>शिवलिंग पर जल हमेशा दाएं हाथ से ही चढ़ाएं और बाएं हाथ को दाएं हाथ से स्पर्श करें. जल चढ़ाते वक्त जल की धारा पतली बहकर आए, इसलिए धीरे-धीरे भगवान को जल चढ़ाना चाहिए. साथ ही ओम नम: शिवाय का जाप करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/there-are-very-strict-rules-to-offer-water-to-shivling-follow-these-rules-shiva-will-be-happy						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/there-are-very-strict-rules-to-offer-water-to-shivling-follow-these-rules-shiva-will-be-happy</guid>
					<pubDate>Mon, 02 Jan 2023 08:58:27 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में इन 4 गलतियों का वर्णन किया गया है, जिससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>जिंदगी में हर कोई सुख-समृद्धि की कामना करता है. इसके लिए वह दिन-रात भागता रहता है. इसके बावजूद सब लोगों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद नहीं मिल पाता. आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने अपनी पुस्तक नीति शास्त्र यानी चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में उन 4 गलतियों का वर्णन किया गया है, जिससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और वह इंसान देखते ही देखते कंगाल हो जाता है. आइए जान लेते हैं कि वे 4 गलतियां कौन सी हैं, जिन्हें हमें कभी नहीं करना चाहिए. </p>
चाणक्य नीति (Chanakya Niti) की खास बातें 
<p><strong>बुजुर्गों और महिलाओं का निरादर करने वाले </strong></p>
<p>आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) कहते हैं कि जो लोग महिलाओं, विद्वानों और बुजुर्गों का निरादर करते हैं, उनके घर पर कभी भी मां लक्ष्मी अपना वास नहीं करती. अपने माता-पिता के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले, घर में हमेशा कलह करने वाले लोग भी हमेशा धन के लिए तरसते रहते हैं. उनका सुख-चैन और धन सब खत्म हो जाता है. </p>
<p><strong>समय का मोल न पहचानने वाले </strong></p>
<p>चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के अनुसार जो लोग समय की कद्र नहीं करते, समय उनकी कद्र नहीं करता. ऐसे लोगों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद कभी नहीं मिल पाता और उनका पूरा जीवन गरीबी और आर्थिक तंगी में गुजरता है. जो लोग व्यर्थ के कामों में अपना समय बर्बाद करते हैं, उनके पास भी मां लक्ष्मी कभी नहीं टिकती और वे देखते ही देखते दरिद्र हो जाते हैं. </p>
<p><strong>बुरी आदतें में लिप्त रहने वाले</strong></p>
<p>जो लोग नशे, जुआ, छल-कपट, चोरी-डकैती जैसी बुरी आदतों में लिप्त रहते हैं, वे भी हमेशा निर्धनता का दंश सहने को मजबूर होते हैं. ऐसे लोगों के पास कभी नया धन नहीं आता है और जो पहले से मां-बाप ने जोड़कर रखा हो, वह भी छिन जाता है. ऐसे लोग हमेशा पाई-पाई के लिए तरसते हैं और समाज में तिरस्कार का शिकार होते हैं.</p>
<p><strong>धन की कद्र न करने वाले </strong></p>
<p>आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) कहते हैं कि जहां पर धन की कद्र नहीं होती, वहीं पर गरीबी अपने आप खिंची चली आती है. ऐसे लोग अनाप-शनाप चीजों में पैसा बर्बाद कर अपनी कंगाली का रास्ता खुद चुन लेते हैं. इस प्रकार के अपव्ययी लोगों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद कभी नहीं मिलता. जो लोग अपने धन को दान, सेवा जैसे कार्यों में लगाते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी का आशीर्वाद हमेशा मिलता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/these-4-mistakes-have-been-described-by-acharya-chanakya-in-chanakya-policy-due-to-which-goddess-lak						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/these-4-mistakes-have-been-described-by-acharya-chanakya-in-chanakya-policy-due-to-which-goddess-lak</guid>
					<pubDate>Sat, 24 Dec 2022 10:41:47 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नए साल के उपाय: तुलसी से जुड़े कुछ उपाय आपको आने वाले साल में मालामाल बना देंगे]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना जाता है. इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई बीमारियों के उपचार में किया जाता है. कई लोग सर्दियों में इम्यूनिटी को ठीक रखने के लिए तुलसी के पत्ते को चाय में डालकर पीते हैं. इसके अलावा तुलसी का अर्क रोगों से लड़ने में मदद करता है. तुलसी दिल के सेहत को दूरूस्त रखती है. वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे का खास महत्व बताया गया है. विद्वानों की मानें तो इस पौधे से जुड़े कुछ उपाय आपको आने वाले साल में मालामाल बना देंगे और आपको कंगाली का मुंह नहीं देखना होगा.</p>
<p><strong>धन की कमी इस तरह हो जाएगी दूर</strong></p>
<p>1. नए साल की शुरुआत में अब सिर्फ कुछ दिन ही बचे हुए हैं. साल 2022 कई लोगों का बड़ी मुश्किलों में गुजरा है. अधिकतर लोगों ने इस साल कोरोना का दंश झेला और गरीबी का सामना किया. विद्वानों की मानें तो तुलसी आपके आने वाले साल को कंगाली से दूर रखेगी. आपको करना बस इतना है कि शुक्रवार को माता लक्ष्मी को तुलसी की मंजरी अर्पित करनी है. इससे धन की देवी का आर्शीवाद आपके ऊपर बना रहेगा.</p>
<p>2. हर कोई चाहता है कि उसके घर में सुख - शांति का माहौल हमेशा बना रहे. इसके लिए आपको करना बस इतना है कि कोई भी शुभ दिन देखकर तुसली की मंजरी को गंगाजल में डालकर घर के सभी कोनों में इस पवित्र जल का छिड़काव करना है. इससे घर में सकरात्मक ऊर्जा का प्रसार होगा और घर की कलह खत्म हो जाएगी.</p>
<p>3. अगर आप संतान सुख से वंचित हैं और वैवाहिक जीवन की खुशहाली खत्म हो गई है तो नए साल के पहले दिन शिवलिंग को तुलसी की मंजरी वाला दूध अर्पित करें. इससे आपके जीवन में खुशियां लौट आएंगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/new-year-remedies-some-remedies-related-to-tulsi-will-make-you-rich-in-the-coming-year						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/new-year-remedies-some-remedies-related-to-tulsi-will-make-you-rich-in-the-coming-year</guid>
					<pubDate>Sun, 18 Dec 2022 17:24:24 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[बुधवार के दिन सिंदूर के उपाय करने से घर धन-धान्य से भरा रहेगा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में गणेश जी को सर्वपूजनीय माना गया है. किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य की शुरुआत गणेश पूजा से करने का विधान है. कहते हैं कि गणेश जी की पूजा के साथ कार्य की शुरुआत करने से वे कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं. वहीं, बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है. इस दिन गणेश जी की पूजा के साथ-साथ उनकी कृपा पाने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं. इस दिन विशेष उपाय करने से वे जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं. आइए जानते हैं बुधवार के दिन किन उपायों को करने से घर धन-धान्य से भरा रहता है. </p>
<p><strong>बुधवार के दिन कर लें ये उपाय </strong></p>
<p>- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार के दिन गणेश मंदिर जाएं और गणेश जी को गुड़ का भोग लगाएं. इससे बप्पा के साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी बरसती है. व्यक्ति को कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं रहती. इसके अलावा बुधवार को गणपति को मोदक का भोग भी लगाया जा सकता है. </p>
<p>- आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए बुधवार के दिन गणेश जी को 21 या 42 जावित्री अर्पित करें. ऐसा करने से आर्थिक संकट दूर होता है. साथ ही, बुधवार के दिन साबुत मूंग उबालकर उसमें घी और चीनी मिलाएं और गाय को खिलाने से व्यक्ति के कर्ज से जल्द छुटकारा मिल जाता है.</p>
<p>- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार के दिन मंदिर में जाकर गणेश जी को दूर्वा और लड्डू अर्पित करें. इससे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इतना ही नहीं, बुधवार के दिन सूर्योदय से पहले 2 मुट्ठी मूंग लेकर अपने ऊपर घुमाकर अपनी मनोकामना  बोलें और इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. इससे व्यक्ति के आर्थिक हालात सुधर जाते हैं. </p>
<p>- बुधवार के दिन गणेश पूजा के बाद किन्नर को कुछ दान करने से लाभ होता है. दान के बाद किन्नर से कुछ पैसे आशीर्वाद के रूप में ले लें.  इसके बाद इन पैसों को पूजा के साथ पर रख दें और इन्हें दीप-धूप दिखाएं. इससे जल्द ही आपकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी. </p>
<p>- ज्योतिषीयों का कहना है कि बुधवार के दिन अथर्वशीर्ष का पाठ करने से गणेश जी जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बरसाते हैं. भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं. </p>
<p>- इस दिन पूजा के बाद भगवान गणेश जी को मस्तक पर सिंदूर अर्पित करें और इसके बाद  इसे अपने माथे पर लगा लें. इससे आपको सभी कार्यों में सफलता मिलेगी. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/by-doing-vermilion-remedies-on-wednesday-the-house-will-be-full-of-wealth						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/by-doing-vermilion-remedies-on-wednesday-the-house-will-be-full-of-wealth</guid>
					<pubDate>Wed, 14 Dec 2022 10:07:08 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आज का राशिफल : परफेक्शन के साथ काम पूरा करने पर फोकस करें न कि जल्दबाजी में गलती करें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>मंगलवार को मिथुन राशि के लोग सारा दिन ऑफिस के कार्यों को लेकर व्यस्त रहेंगे, जिस कारण व्यवहार कुछ चिड़चिड़ा हो सकता है. वहीं धनु राशि के व्यापारियों के दिमाग में व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए आज सारा दिन मंथन होता रहेगा. आइए जानते हैं कि मंगलवार को आपका राशिफल कैसा रहेगा. </p>
<p><strong>मेष राशि</strong>: मेष राशि के विदेश में कार्य कर रहे लोगों को प्रमोशन मिलने की संभावना है. इसलिए पार्टी देने के लिए तैयार हो जाएं. व्यापारियों को  मुश्किलों से लड़ने के लिए हिम्मत रखनी होगी. तभी वह नई चुनौतियों से लड़ पाएंगे. युवा किसी बात को सुलझाने का प्रयास न करें वरना वह स्वयं कानूनी तौर पर फंस सकते हैं. परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए आर्थिक समस्याओं से जूझते नजर आ सकते हैं. आर्थराइटिस के मरीजों को दर्द का सामना करना पड़ सकता है, डॉक्टर से परामर्श करके ही कोई दवा लें.</p>
<p><strong>वृष राशि:</strong> इस राशि के लोग पुरानी गलती से कुछ सीखने का प्रयास करें न कि उसे दोहराने का. शादियों के सीजन की शुरुआत के कारण कॉस्मेटिक्स के व्यापार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाएंगी, जिससे आज आपको बड़ा मुनाफा होगा. युवा अपने परफेक्शन के गुणों के कारण छोटे भाई बहनों के प्रेरक बनेंगे. जीवनसाथी का सपोर्ट आपके रिश्ते को पहले से और अधिक मजबूत तो करेगा ही साथ ही प्रेम भी बढ़ेगा. यदि कोई ऑपरेशन कराना है तो उसे और अधिक पेंडिंग में मत डाले, डॉक्टर की सलाह से अब करा लेना चाहिए.</p>
<p><strong>मिथुन राशि:</strong> मिथुन राशि के लोग आज सारा दिन ऑफिस के कार्यों को लेकर व्यस्त रहेंगे, जिस कारण व्यवहार कुछ चिड़चिड़ा हो सकता है. व्यापारी वर्ग पैतृक विवादों को लेकर बड़ी जीत हासिल करेंगे, जी हां आज आपको पैतृक विवादों को सुलझाने में सफलता मिलेगी. युवाओं को स्किल को बढ़ाने पर फोकस बढ़ाना होगा. इनके यही स्किल्स उन्हें करियर में आगे बढ़ाने में मदद करेंगे. परिवार की चिंता आपको कुछ हद तक परेशान कर सकती है. लेकिन कुछ बातें समय पर छोड़ देनी चाहिए. स्किन पर कुछ भी लगाते समय पहले ही उसकी विस्तृत जानकारी ले लें क्योंकि स्किन एलर्जी होने की आशंका है. </p>
<p><strong>कर्क राशि:</strong> इस राशि के लोगों के सकारात्मक ग्रह आपके फेवर है इसलिए आप आज जो भी काम करेंगे उन सभी में सफलता हासिल करेंगे. कारोबारियों को व्यापार के सिलसिले में विदेशी यात्रा करनी पड़ सकती है, जिसमें काम के साथ साथ मनोरंजन भी हो जाएगा. युवाओं की मित्रों की सूची बढ़ती नजर आ रही है क्योंकि आप नए मित्र बनाने में सबसे आगे है. घर में आपसी मतभेद होने की संभावना है, इसलिए अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें, जिससे बात आगे न बढ़े. बासी और अनहेल्दी फूड खाने से परहेज करें, फूड प्वाइजन होने की आशंका है.</p>
<p><strong>सिंह राशि:</strong> सिंह राशि के लोग परफेक्शन के साथ काम को पूरा करने पर फोकस करें न कि जल्दबाजी में काम कर कोई गलती करें. व्यापार के सिलसिले में नए अनुबंध बनते नजर आ रहे हैं. जो कि व्यापारिक तरक्की के लिए कारगर साबित होंगे. युवा दूसरों के साथ सभ्यता से पेश आए, आपका व्यवहार ही आपके चरित्र का निर्माण करता है. संतान यदि गलत मार्ग पर जा रहे हैं तो पर उन पर पैनी नजर रखनी होगी, उनसे मित्रवत तरीके से बात कर उन्हें समझाने का भी प्रयास करें. शुगर के मरीज खाली पेट रहने और किसी बात का तनाव लेने से बचें, तबियत खराब हो सकती है.</p>
<p><strong>कन्या राशि:</strong> इस राशि के लोग अपने अधीनस्थ पर हुक्म न चलाएं ऐसा करने से टीम में तनाव बढ़ सकता है. जो आपके करियर ग्रोथ के लिए ठीक नहीं है. आपके विनम्र स्वभाव के चलते आपसे बड़ी संख्या में ग्राहक जुड़ेंगे, जिससे आप अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे. युवा यदि कोई प्रोफेशनली कोर्स करने के लिए विचार कर रहे थे तो अब आप कोर्स कर सकते हैं. परिवार में दूसरों के फैसलों का समर्थन करना होगा. उनके विपरीत जाने पर आपसी संबंध खराब हो सकते हैं. कफ और शीत विकार के शिकार हो सकते है इसलिए ठंडी खाने पीने की चीजों से दूर रहे.</p>
<p><strong>तुला राशि:</strong> तुला राशि के लोग अवकाश के दौरान ऑफिस पर भी निगाह बनाए रखें क्योंकि चोरी होने की आशंका है. व्यापारियों को अपने स्वयं के काम के साथ साथ पैतृक व्यापार को बढ़ाने में सबका साथ देना होगा. युवा दोस्तों के साथ सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि ज्ञान का भी आदान प्रदान करें तो अच्छा होगा क्योंकि ज्ञान बांटने से बढ़ता है. खरीदारी के लिए समय उपयुक्त चल रहा है, यदि होम एप्लायंसेज या कोई वाहन खरीदने की सोच रहें तो खरीद सकते हैं. नॉनवेज आदि का सेवन नहीं करे तो बेहतर होगा. हार्ट पेशेंट खासकर इससे दूर रहे.</p>
<p><strong>वृश्चिक राशि:</strong> इस राशि के लोग ऑफिस का माहौल हल्का-फुल्का रखने का प्रयास करें जिससे सहकर्मी और अधीनस्थों का काम में मन लगे. ट्रांसपोर्ट व्यापारी आयात-निर्यात करते समय सभी तरह के दस्तावेज तैयार करके चले अन्यथा कानूनी कार्यवाही के चक्कर में पड़ सकते हैं. युवा कुछ भी करने से पहले कार्यों के परिणाम पहले ही जान लें उसके बाद ही कोई कार्य करें. यदि काफी समय से घर का इंटीरियर चेंज करने के लिए सोच रहें है तो आज का दिन काम कराने के लिए उपयुक्त है. यदि जरूरी न हो तो बीमार लोग किसी भी तरह की यात्रा करने से बचें, यात्रा करने पर दिक्कत बढ़ सकती है.</p>
<p><strong>धनु राशि:</strong> धनु राशि के लोग पर यदि किसी काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है तो पहले कामों की लिस्ट बना लें और उसके बाद काम करेंगे तो अच्छा रहेगा. व्यापारियों के दिमाग में व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए आज सारा दिन विचार मंथन होता रहेगा. युवा मानसिक वर्क करने के साथ साथ फिजिकली वर्क भी करेंगे तो वह शारीरिक तौर पर फिट रहेंगे. परिवार में गेट टुगेदर की प्लानिंग कर सकते हैं, अपनों के साथ टाइम स्पेंड करके अच्छा लगेगा. ओवर ईटिंग करने से पेट संबंधित रोग पनप सकते हैं, साथ ही वजन भी बढ़ सकता है इसलिए सेहत का खास ध्यान रखें.</p>
<p><strong>मकर राशि:</strong> इस राशि के लोगों पर उच्चाधिकारियों का दबाव मानसिक तौर पर उन्हें परेशान कर सकता है. किसी प्रोडक्ट की अचानक से डिमांड होने के कारण रिटेल व्यापारी आज अच्छा मुनाफा कमाएंगे. युवा समय का मोल समझते हुए उसका सदुपयोग करें. अभी की लापरवाही भविष्य में भारी पड़ सकती है. परिवार में ननिहाल से कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना है. जिसमे आप सभी को शामिल होने का निमंत्रण भी मिल सकता है. ठंड के मौसम में अपना खास ख्याल रखें. वायरल बुखार या डेंगू की चपेट में आ सकते हैं.</p>
<p><strong>कुंभ राशि:</strong> कुंभ राशि के उच्च पद पर कार्यरत लोग ऑफिस के नियमों का पालन करें, यदि आप ही अनुशासनहीन हो जाएंगे तो आपके अधीनस्थ भी वही काम करेंगे. फैक्ट्री और ऑफिस में अग्निशमन यंत्र तैयार रख लें क्योंकि अग्नि दुर्घटना की आशंका है. युवाओं का उदार व्यवहार लोगों के बीच एक अलग जगह और पहचान बनाएगा. जिससे वह सभी के चहेते बन जाएंगे. दांपत्य जीवन के ताल मेल कुछ बिगड़े नजर आ रहे हैं, जीवनसाथी के साथ मतभेद की आशंका है. सीधे बैठकर काम करें व हल्का भोजन करें. गले में दर्द और जलन की आशंका है.</p>
<p><strong>मीन राशि:</strong> इस राशि के शिक्षा से जुड़े लोग छवि को मजबूत बनाने में सफल होंगे, जिसका असर घर के बच्चों पर भी पड़ेगा. व्यापारी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहें और बीच बीच में कारोबार का विज्ञापन भी करते रहे, इससे आपके ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और आप मुनाफा भी कमाएंगे. युवाओं को चालाकी के साथ काम पूरे करने होंगे जिससे उनका काम भी हो जाए और किसी को पता भी न चले. जो लोग घर से दूर रहकर काम करते है वह लोग फोन के जरिए अपनों के संपर्क में रहें. घर में यदि इस राशि का कोई छोटा बच्चा है तो सर्दी के मौसम से उसे बचा कर रखें क्योंकि उसका स्वास्थ्य खराब होने की आशंका है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/todays-horoscope-focus-on-getting-things-done-with-perfection-dont-commit-mistakes-in-haste						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/todays-horoscope-focus-on-getting-things-done-with-perfection-dont-commit-mistakes-in-haste</guid>
					<pubDate>Tue, 29 Nov 2022 02:31:35 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[साढ़ेसाती और ढैय्या में भी शनिदेव नहीं करेंगे परेशान, अगर कर लिया यह चमत्कारी उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शनिदेव को न्याय का देवता और कर्म फलदाता कहा गया है. वे इंसान को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के हिसाब से फल प्रदान करते हैं. उनकी कोप दृष्टि का सामना कोई नहीं करना चाहता, इससे लोगों को काफी कष्ट उठाना पड़ता है. शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या की बात करें तो यह समय काफी कष्टकारी माना जाता है. शनि की साढ़ेसाती साढ़े सात साल चलती है. इसके ढाई-ढाई साल के तीन चरण होते हैं. इस दौरान इंसान को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस दौरान इंसान को केवल कष्ट ही उठाना पड़े. कुछ ज्योतिष उपाय करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और शुभ परिणाम प्रदान करते हैं.</p>
<p><strong>पीपल का पेड़</strong></p>
<p>पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने से भी शनिदोष से छुटकारा मिलता है. वहीं, शनिवार के दिन उसके नीचे दीया जलाने से शनिदेव प्रसन्न होकर साढ़ेसाती और ढैय्या का असर कम कर देते हैं और अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं.</p>
<p><strong>शनि चालीसा</strong></p>
<p>शनिवार को किसी भी शनि मंदिर में जाकर उनकी स्तुति और शनि चालीसा व मंत्रों का जाप करें. इस दिन शनि देव के नाम से मीठी वस्तुओं का दान करें. ऐसा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और उनका प्रकोप धीरे-धीरे कम होने लगता है.</p>
<p><strong>लोहे का छल्ला </strong></p>
<p>शनि के प्रकोप को कम करने के लिए रत्न धारण किए जा सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए लोहे का छल्ला धारण करना काफी शुभ रहता है और इस दौरान शुभ परिणामों की प्राप्ति होने लगती है.</p>
<p><strong>पूड़ी और चने का वितरण</strong></p>
<p>शनिवार के दिन जरुरतमंदों को पूड़ी और चने का वितरण करने से भी साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है. हर शनिवार को ऐसा करने से शनिदेव करियर और बिजनेस में उन्नति प्रदान करते हैं और साढ़ेसाती में भी शुभ फल प्रदान करने लगते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/shani-dev-will-not-trouble-you-even-in-sade-sati-and-dhaiya-if-you-do-this-miraculous-remedy						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/shani-dev-will-not-trouble-you-even-in-sade-sati-and-dhaiya-if-you-do-this-miraculous-remedy</guid>
					<pubDate>Fri, 25 Nov 2022 09:31:33 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सोए हुए व्यक्ति को क्यों नहीं लांघते है, इसके पीछे क्‍या है कारण, महाभारत में भीम ने बताई वजह]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सनातन धर्म में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. हम भूल-चूक में ऐसे कई काम कर देते हैं, जिन्‍हें धर्म में अशुभ माना जाता है. हमें कई तरह के नियम बचपन से ही सिखाए जाते हैं. उसमें से ही एक नियम आप शायद न जानते होंगे. अगर कोई व्‍यक्ति सोया या लेटा रहे तो उसे लांघना नहीं चाहिए. ऐसी मान्‍यता है कि सो रहे व्यक्ति को लांघना अशुभ माना जाता है, तो चलिए जान लीजिए सो रहे व्यक्ति को क्यों नहीं लांघना चाहिए. महाभारत में इस तरह का एक प्रसंग बताया गया है, जिसे आपको जान लेना चाहिए.  </p>
<p><strong>महाभारत में क्‍या बताया गया है? </strong></p>
<p>महाभारत की कहानी के मुताबिक, भीम एक बार युद्ध के लिए जा रहे थे, उस समय हनुमान जी भीम का रास्ता रोकने के लिए वृद्ध वानर बन गए और मार्ग पर लेट गए. इसी वजह से उनकी पूंछ ने पूरे मार्ग को बाधित कर दिया. जब भीम उस मार्ग से गुजरे तो उन्होंने पूंछ को लांघा नहीं. </p>
<p><strong>भीम ने बताई वजह</strong></p>
<p>भीम ने हनुमान जी से पूंछ हटाने के लिए कहा, लेकिन हनुमान जी ने दुर्बलतावश पूंछ हटाने से मना कर दिया और कहा कि पूंछ लांघकर चले जाए, लेकिन भीम ने ऐसा नहीं किया, फिर भीम ने कहा कि इस संसार के सभी प्राणियों में ईश्वर का अंश विद्यमान होता है, ऐसे में किसी प्राणी को लांघना यानी परमात्मा का अनादर करना है. </p>
<p><strong>फिर भीम ने क्‍या करा? </strong></p>
<p>इस वजह से भीम ने हनुमान जी की पूंछ को नहीं लांघा और उन्‍होंने स्वयं ही पूंछ हटा दी, लेकिन उस समय कुछ ऐसा हुआ कि भीम अपनी पूर शक्ति लगाने के बाद भी हनुमान जी की पूंछ को हिला नहीं पाए फिर उन्हें समझ आ गया कि ये कोई साधारण वानर नहीं है फिर हनुमान जी ने भीम को अपना परिचय दे दिया और विशाल रूप दिखाया, फिर हनुमानजी ने युद्ध में विजय पाने का आर्शीवाद भीम को दिया.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/why-dont-you-cross-a-sleeping-person-what-is-the-reason-behind-this-bhima-told-the-reason-in-mahabha						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/why-dont-you-cross-a-sleeping-person-what-is-the-reason-behind-this-bhima-told-the-reason-in-mahabha</guid>
					<pubDate>Tue, 22 Nov 2022 23:22:37 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[क्या है मान्यता, पूजा खड़े होकर करनी चाहिए या बैठकर, जान ले पूजा के सही नियम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सनातन धर्म में पूजा-पाठ का बहुत महत्व माना गया है. हमारे हर सुख-दुख में ईश्वर की आराधना एक अभिन्न हिस्सा है. कई लोग बैठकर पूजा करना पसंद करते हैं तो कई लोग खड़े होकर. इनमें से कौन सा तरीका विधि सम्मत है, इस बारे में लोग अक्सर असमंजस में रहते हैं. आज हम इस बारे में आपका पूरा ज्ञानवर्धन करेंगे. साथ ही आपको बताएंगे कि पूजा करने के लिए कौन सा तरीका उपयुक्त माना गया है. </p>
<p><strong>मंदिर से नीचा होना चाहिए आपका आसन</strong></p>
<p>शास्त्रों के मुताबिक (Rules of Worship) हम जिस जगह बैठकर पूजा कर रहे हैं, वह स्थान मंदिर के स्थान से ऊंचा नहीं होना चाहिए. ऐसा करना मर्यादा के खिलाफ माना जाता है और ऐसे स्थान पर बैठने से पूजा का उचित फल नहीं मिलता है. अगर आप ऊंचे स्थान पर बैठे हैं और उसे नीचे नहीं कर पा रहे हैं तो मंदिर के स्थान को ऊंचा उटा दें. </p>
<p><strong>आराधना के दौरान इन बातों का रखें ध्यान</strong></p>
<p>धार्मिक विद्वानों के अनुसार हमें खड़े होकर पूजा (Pooja ke Niyam) नहीं करनी चाहिए. ऐसा करना उचित नहीं माना जाता है. इसके बजाय मंदिर के सामने आसन बिछाकर बैठकर पूजा करनी चाहिए. यह भी सुनिश्चित करें कि पूजा करते वक्त महिला-पुरुष, सभी को अपना सिर अवश्य ढंकना चाहिए. ऐसा न करने से पूजा के पुण्य लाभ से वंचित रह जाते हैं.</p>
<p><strong>जान लें पूजा करने की सही विधि</strong></p>
<p>पूजा (Pooja ke Niyam) करते वक्त वक्त हमारा मुख किस दिशा में होना चाहिए, इस बारे में भी पौराणिक शास्त्रों में सटीक वर्णन किया गया है. पुराणों के मुताबिक पूजा के दौरान हमारा मुख हमेशा पूर्व दिशा की ओर होना श्रेयस्कर होता है. साथ ही बायीं ओर पूजा सामग्री और दाहिनी ओर धूप, घंटी आदि चीजें रखनी चाहिएं. पूजा में बैठने वाले प्रत्येक व्यक्ति के माथे पर तिलक जरूर लगाया जाना चाहिए. अगर मंदिर का मुख दूसरी दिशा में आपको पूर्व दिशा के बजाय मंदिर की ओर मुख करके बैठना चाहिए. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/what-is-recognition-should-worship-be-done-standing-or-sitting-know-the-correct-rules-of-worship						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/what-is-recognition-should-worship-be-done-standing-or-sitting-know-the-correct-rules-of-worship</guid>
					<pubDate>Mon, 21 Nov 2022 11:31:00 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शादीशुदा जिंदगी और विवाह की बाधाएं होंगी दूर, विवाह पंचमी पर करें केसर दूध के ये चमत्कारी उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है. इस साल विवाह पंचमी 28 नवंबर के दिन मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में ये दिन बेहद खास है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था. कहा जाता है कि इस दिन जो लोग भगवान राम और माता सीता का विवाह अनुष्ठान, पूजा-पाठ करते हैं, उनके दांपत्य जीवन में हर परेशनियां दूर हो जाती हैं. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंवारी कन्याएं इस दिन सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं और राम-सीता की आराधना की जाती है. इस दिन को वैसे तो बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन इस दिन शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इस दिन कुछ उपाय करने से विवाह में आ रही बाधाएं, रिश्ते का बार-बार टूटना या विवाह में देरी होने की कई समस्याएं दूर होती हैं. इस दिन कुछ उपाय करने से विवाह में आ रही समस्याएं दूर होती हैं. और दांपत्य जीवन खुशहाल होता है. </p>
<p><strong>विवाह पंचमी पर कर लें ये उपाय </strong></p>
<p>- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी विवाह योग्य आयु है और इसके बावजूद विवाह में देर हो रही है या फिर योग्य वर नहीं मिल रहा, तो विवाह पंचमी के दिन ये खास उपाय से आपको विशेष लाभ होगा. इस दिन विधि-विधान से राम-सीता का विवाह कराएं. इतना ही नहीं, उनकी विधिवत पूजा करें. ऐसे में कुंडली में विवाह संबंधी दोष होने पर उसके प्रभाव कम हो जाते हैं. </p>
<p>-ज्योतिष का मानना है कि अगर विवाह में किसी कारण से देरी हो रही है या फिर  रिश्ता टूट रहा है, तो विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस का पाठ करने से विशेष लाभ होगा. ऐसा करने से भगवान राम की कृपा प्राप्त होगी और शादी-विवाह की अड़चने दूर होंगी. </p>
<p>- अगर किसी कारण से विवाह में किसी तरह की अड़चन आ रही है तो विवाह पंचमी पर केसर वाले दूध का उपाय लाभदायी रहेगा. इस दिन दूध में केसर मिलाकर भगवान विष्णु और तुलसी माता को अर्पित कर दें. ऐसा करने से विवाह संबंधी हर परेशानी, हर रुकावट खूद ब खूद दूर हो जाएगी. </p>
<p>- अगर आप किसी मनचाहे वर की तलाश कर रहे हैं और वे चाहकर भी पूरी नहीं हो रही है,तो विवाह पंचमी के दिन माता सीता को सुहाग की सामग्री अर्पित कर दें. इसके बाद ये सामग्री किसी जरूरतमंद सुहागिन को दान में दे दें. ऐसा करने से आपकी समस्या जल्दी ही समाप्त हो जाएगी. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/obstacles-of-married-life-and-marriage-will-be-removed-do-these-miraculous-remedies-of-saffron-milk-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/obstacles-of-married-life-and-marriage-will-be-removed-do-these-miraculous-remedies-of-saffron-milk-</guid>
					<pubDate>Thu, 17 Nov 2022 09:39:42 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[हर मनोकामना पूरी होगी, अगर सुहागिनें रखे आज सौभाग्य सुंदरी व्रत]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सनातन धर्म में सौभाग्य सुंदरी व्रत का विशेष महत्व है. इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं को सौंदर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके साथ ही धन, यश और कीर्ति भी प्राप्त होती है. इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी तरह की कठिनाइयों से भी मुक्ति मिलती है. यह व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के दिन रखा जाता है. इस बार यह तिथि 11 नवंबर को पड़ रही है.</p>
<p><strong>तीज की तरह महत्वपूर्ण</strong></p>
<p>हिंदू धर्म में विवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत तीज की तरह की महत्वपूर्ण है. वहीं, इस व्रत का भी काफी महत्व है. इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं कुछ खास मंत्रों का जाप करें तो जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है और वित्तीय समस्याओं का सामना भी नहीं करना पड़ता है.</p>
<p><strong>मंत्र</strong></p>
<p>- माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वर:</p>
<p>बान्धवा: शिवभक्ताश्च, स्वदेशो भुवनत्रयम ॥</p>
<p>- ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी सकल</p>
<p>स्थावर जंगमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः॥</p>
<p><strong>फायदे</strong></p>
<p>इन मंत्रों के जाप से व्रत कर रही महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. वह भावनात्मक, शारीरिक और वित्तीय रूप से मजबूत बनती हैं. इन मंत्रों का नियमित जाप करने से जीवन में असफलता का डर कम हो जाता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/every-wish-will-be-fulfilled-if-the-brides-keep-fasting-today-saubhagya-sundari						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/every-wish-will-be-fulfilled-if-the-brides-keep-fasting-today-saubhagya-sundari</guid>
					<pubDate>Fri, 11 Nov 2022 12:19:52 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कार्तिक पूर्णिमा के दिन नहाने के पानी में इन चीजों को मिलाने से आर्थिक लाभ के साथ मिलेगी हर कार्य में सफलता]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कार्तिक माह की पूर्णिमा इस माह 8 नवंबर के दिन पड़ रही है. सालभर की सबी पूर्णिमाओं में कार्तिक पूर्णिमा को सबसे उत्तम माना गया है. कार्तिक का पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित है. शास्त्रों में माना गया है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, कुंडों में नहाने और भगवान श्री हरि के नाम का जाप करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही, व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी नदी में स्नान करना संभव न हो तो नहाने के पानी में गंगाजल डालकर भी स्नान किया जा सकता है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन नहाने के पानी में कुछ विशेष चीजों को मिलाने से कई तरह के दोषों से छुटकारा मिलता है. साथ ही, हर कार्य में सफलता हासिल होती है और आर्थिक लाभ मिलता है. </p>
<p><strong>इलायची-केसर</strong></p>
<p>अगर लंबे समय से कोई काम अटक रहा है या फिर किसी शुभ काम को करने में बाधा आ रही है,तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन पानी में पवित्र नदी के जल में 2 इलायची और केसर मिला लें और स्नान करें. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है और बुरे वक्त से छुटकारा मिलता है. श्री हरि की कृपा से सभी कार्य सिद्ध होंगे. केसर डालकर स्नान करने से सूर्य की शुभता प्राप्त होती है. </p>
<p><strong>दूध</strong></p>
<p>शास्त्रों में कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन नहाने के पानी में दूध मिलाकर स्नान कर लें. ऐसा करने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है. आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है. वहीं, जातक पूरी एनर्जी के साथ सभी कार्य पूरा करता है. नहाने के बाद श्री हरि का ध्यान करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से लाभ होगा. </p>
<p><strong>हल्दी</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हल्दी भगवान विष्णु को प्रिय है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के पानी में एक चुटकी हल्दी मिला लें. इससे विवाह संबंधी समस्याएं दूर हो जाएंगी. इतना ही नहीं, बृहस्पति देव की कृपा से स्वास्थ्य में भी सुधार होगा. </p>
<p><strong>काला तिल</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आप पैसों की तंगी से परेशान हैं या फिर धन आने पर हाथ में नहीं रुकता तो कार्तिक पूर्णिमा पर पानी में काला तिल मिला लें. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा करने से व्यक्ति का भाग्य मजबूत होता है. साथ ही, दरिद्रता कोसों दूर होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/by-mixing-these-things-in-the-bath-water-on-the-day-of-kartik-purnima-you-will-get-success-in-every-						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 06 Nov 2022 11:54:30 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[तुलसी विवाह के मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि के बारे में आइए जानते हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है. तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से 4 महीने के बाद जागते हैं. जिसके बाद द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह होता है. इस दिन तुलसी माता का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम के साथ कराया जाता है. इस साल तुलसी विवाह 5 नवंबर 2022 को है. आइए जानते हैं तुलसी विवाह के मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि के बारे में....</p>
<p><strong>तुलसी विवाह की तिथि व शुभ मुहूर्त </strong></p>
<p>कार्तिक द्वादशी तिथि आरंभ- 05 नवंबर 2022, शाम 06:08 बजे से (शनिवार)</p>
<p>कार्तिक द्वादशी तिथि समाप्त- 06 नवंबर 2022, शाम 05:06 बजे तक (रविवार)</p>
<p><strong>तुलसी विवाह पूजन विधि </strong></p>
<p>इस दिन महिलाएं सुबह उठकर स्नान कर नए वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा स्थल तो अच्छी तरीके से सजाएं. फिर शुभ मुहूर्त पर पूजा करें. एक चौकी पर तुलसी का पौधा और दूसरी चौकी पर शालिग्राम को स्थापित करें. इनके बगल में कलश में जल भरकर रखें और उसके ऊपर आम के पांच पत्ते रखें. तुलसी के गमले में गेरू लगाएं. तुलसी और शालिग्राम को गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद रोली, चंदन का टीका लगाएं. तुलसी के गमले में गन्ने से मंडप बनाएं. अब तुलसी मां को लाल चुनरी ओढ़ाएं. गमले में साड़ी लपेटें. चूड़ी चढ़ाएं और उनका दुल्हन की तरह श्रृंगार करें. इसके बाद शालिग्राम को चौकी समेत हाथ में लेकर तुलसी की सात बार परिक्रमा की जाती है. इसके बाद घी का दीपक जलाएं और आरती करें. तुलसी विवाह संपन्न होने के बाद सभी लोगों को प्रसाद बांटे.</p>
<p><strong>तुलसी विवाह का महत्व</strong></p>
<p>मान्यता है कि कार्तिक महीने में जो भक्त तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह करते हैं, उनके पिछले जन्मों के सब पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन घर-घर में स्त्रियां शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती हैं. तुलसी जी को विष्णुप्रिया भी कहा जाता है. कार्तिक मास की नवमी, दशमी और एकादशी को व्रत एवं पूजन कर तुलसी विवाह किया जाता है. इसके अगले दिन तुलसी का पौधा किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ माना जाता है. तुलसी विवाह संपन्न कराने वालों को वैवाहिक सुख मिलता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/let-us-know-about-the-muhurta-importance-and-worship-method-of-tulsi-vivah						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 04 Nov 2022 10:23:47 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[देवउठनी एकादशी एवं तुलसी विवाह की पूजाविधि और मुहूर्त]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है. इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के पश्चात जागते हैं, इसलिए इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है. इसके बाद द्वादाशी तिथि को भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप के साथ माता तुलसी का विवाह भी किया जाता है. इस साल एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण बहुत से लोगों को कंफ्यूजन है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किस दिन देवउठनी एकादशी और किस दिन तुलसी विवाह मनाई जाएगी.</p>
<p><strong>देवउठनी एकादशी</strong></p>
<p>देवउठनी एकादशी इस साल 4 नवंबर 2022 को है, जो 3 नवंबर शाम को 7 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 4 नवंबर शाम 6 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी. देवउठनी एकादशी व्रत के पारण का समय शुभ समय 5 नवंबर को सुबह 6 बजकर 36 मिनट से सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक है.</p>
<p><strong>तुलसी विवाह</strong></p>
<p>तुलसी विवाह की बात की जाए तो वह 5 नवंबर 2022 को मनाई जाएगी. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 5 नवंबर को शाम 6 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी, जो कि 6 नवंबर को शाम 5 बजकर 6 मिनट पर समाप्त हो जाएगी.</p>
<p><strong>एकादशी पूजा विधि</strong></p>
<p>एकादशी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान विष्णु के सामने दीप-धूप जलाएं और फिर फल, फूल और भोग अर्पित करें. एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करनी चाहिए. विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें. व्रत खोलने के बाद ब्राहम्णों को दक्षिणा दें.</p>
<p><strong>तुलसी विवाह पूजा विधि</strong></p>
<p>वहीं, तुलसी विवाह के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करके घर में बने मंदिर में दीप प्रज्वलित करें. भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें और पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें. भगवान को भोग लगाएं, इसमें तुलसी को जरूर शामिल करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/worship-and-muhurta-of-devuthani-ekadashi-and-tulsi-vivah						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/worship-and-muhurta-of-devuthani-ekadashi-and-tulsi-vivah</guid>
					<pubDate>Fri, 04 Nov 2022 10:15:38 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[तुलसी की जड़ के असरकारी उपाय, रंक को बना देते हैं राजा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र माना गया है. नियमित रूप से तुलसी मां की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. शास्त्रों के अनुसार तुलसी में मां लक्ष्मी का वास होता है और नियमित रूप से तुलसी की पूजा करने से व्यक्ति को पैसों की तंगी से छुटकारा मिलता है. लगभग सभी हिंदू घरों में तुलसी का पौधा लगा होता है, जो कि घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुलसी के पौधे के साथ-साथ तुलसी की जड़ को भी बहुत पवित्र माना गया है. कहते हैं कि तुलसी की जड़ में शालीग्राम का वास होता है.इसलिए तुलसी की जड़ के कुछ उपाय कर लिए जाएं, तो व्यक्ति को धन लाभ होता है. आइए जानते हैं तुलसी की जड़ के कुछ उपायों के बारे में. </p>
<p><strong>कामों में सफलता पाने के लिए</strong></p>
<p>अगर किसी जातक को लगातार असफलता का सामना करना पड़ रहा है, तो ऐसे में तुलसी की जड़ का उपाय आपकी किस्मत बदल सकता है. कार्यों में सफलता पाने के लिए तुलसी की जड़ लेकर उसे गंगाजल में धो लें और विधिवत्त तरीके से उसकी पूजा करें. इसके बाद इसे पीले रंग के कपड़े में बांध लें और अपने पास रख लें. इससे व्यक्ति को तुंरत लाभ होता है. </p>
<p><strong>ग्रहों की शांति के लिए </strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली में ग्रह दोष है, तो ऐसे में तुलसी की पूजा करें और तुलसी की थोड़ी-सी जड़ निकाल लें. इसके बाद इसे किसी लाल रंग के कपड़े में बांध लें और ताबीज में डालकर अपने बाजू पर बांध लें. इससे व्यक्ति को जल्द  ही ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है. </p>
<p><strong>धन पाने के लिए </strong></p>
<p>अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और धन पाने के सारे रास्ते बंद हैं, तो ऐसे में व्यक्ति को नियमित रूप से रोजाना सुबह तुलसी में जल अर्पित करना चाहिए. इसके अलावा, तुलसी की जड़ को चांदी के ताबीज में डालकर पहनने से लाभ होता है और व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/effective-remedy-of-tulsi-root-the-king-makes-the-rank						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/effective-remedy-of-tulsi-root-the-king-makes-the-rank</guid>
					<pubDate>Wed, 02 Nov 2022 09:17:53 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आंवला नवमी: आज करले ये उपाय, होगी भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की अपार कृपा, जाने पूजा का मुहूर्त, विधि और उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार आज 2 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन अक्षय नवमी मनाई जाएगी. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है इसलिए इसे आंवला नवमी कहते हैं. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से सारे पाप नष्‍ट होते हैं. साथ ही भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की अपार कृपा होती है. आइए जानते हैं आज आंवला नवमी की पूजा का मुहूर्त, विधि और उपाय.  </p>
<p><strong>आंवले का पौधा लगाना बेहद शुभ </strong></p>
<p>आज आंवला नवमी के दिन आंवले का पौधा लगाना बेहद शुभ होता है. आंवले का पौधा मंदिर या पार्क आदि में लगाना चाहिए और रोजाना उसकी सेवा करना चाहिए. यदि ऐसा संभव न हो तो आंवले के पेड़ या पौधे की पूजा जरूर करें. </p>
<p><strong>आंवला नवमी 2022 पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>कार्तिक शुक्‍ल की नवमी तिथि 1 नवंबर की रात 11 बजकर 04 मिनट से 2 नवंबर, बुधवार की रात 09 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी. आंवला नवमी की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 04 मिनट तक रहेगा. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने के अलावा आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना बहुत शुभ होता है. ऐसा करने से जीवन में सुख-संपन्‍नता आती है. साथ ही सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. </p>
<p><strong>आंवला नवमी का है बड़ा महत्व</strong></p>
<p>मान्‍यता है कि आंवला के पेड़ में भगवान विष्‍णु का वास होता है. आंवला नवमी के दिन ही भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक दैत्य को मारा था. इसके अलावा अक्षय नवमी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस का वध करने से भी है. इसलिए लोग अक्षय नवमी पर मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/amla-navami-take-this-remedy-today-there-will-be-immense-grace-of-lord-vishnu-and-mother-lakshmi-kno						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/amla-navami-take-this-remedy-today-there-will-be-immense-grace-of-lord-vishnu-and-mother-lakshmi-kno</guid>
					<pubDate>Wed, 02 Nov 2022 09:10:28 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[क्या आप जानते हैं, बद्रीनाथ धाम में शंख नहीं बजाने के पीछे क्या कारण हैं?]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू मान्यताओं के हिसाब से चार धामों में से एक बद्रीनाथ (Badrinath Dham Temple) की विशेष महिमा है. भगवान श्री हरि विष्णु स्वयं यहां विराजते हैं. इसलिए इसे धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है. बद्रीनाथ धाम में अगर आपको दर्शन करने का सौभाग्य मिला होगा तो आपने गौर किया होगा वहां मंदिर में शंख (Conch) नहीं बजाया है जबकि शंख ध्वनि के फायदों और उसे बजाने से होने वाले फायदों को विज्ञान भी अपनी मान्यता देता है. दरअसल बद्रीनाथ धाम में शंख नहीं बजाए जाने के कई कारण हैं जिसमें  पौराणिक, धार्मिक मान्यताओं के अलावा वैज्ञानिक वजह भी है. ऐसे में अब आप भी जानिए बद्रीनाथ मंदिर में शंख न बजाने की क्या है वजह.</p>
<p><strong>धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक मान्यता</strong></p>
<p>यूं तो मंदिरों में भगवान की पूजा-स्तुति के बाद शंख ध्वनि का उद्घोष किया जाता है. पर उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में शंखनाद नहीं होता है. इसके कई कारण है. आइए एक एक करके बताते हैं कि भगवान विष्णु के इस धाम में ऐसा क्यों नहीं होता है? </p>
<p><strong>धार्मिक मान्यता</strong></p>
<p>यहां शंख नहीं बजाने के पीछे कुछ धार्मिक मान्यताएं भी हैं. शास्त्रों के वर्णित एक कथा के मुताबिक एक बार मां लक्ष्मी बद्रीनाथ धाम में ध्यान में बैठी थीं. उसी दौरान भगवान विष्णु ने शंखचूर्ण नाम के एक राक्षस का वध किया था. और हिंदू धर्म की मान्यताओं में जीत पर शंखनाद जरूर किया जाता है, लेकिन विष्णु जी लक्ष्मी जी के ध्यान में विघ्न नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने शंख नहीं बजाया. ऐसी ही एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक एक मुनि इसी क्षेत्र में कहीं राक्षसों का नाश कर रहे थे. तभी अतापी और वतापी नाम के राक्षस वहां से भाग गए. अतापी जान बचाने के लिए मंदाकिनी नदी की शरण में गया तो वतापी अपने प्राण बचने के लिए शंख के अंदर छिप गया. ऐसे में कहा जाता कि अगर उस समय कोई शंख बजाता, तो असुर उससे निकलकर भाग जाता, इस वजह से बद्रीनाथ धाम में शंख नहीं बजाया जाता है.</p>
<p><strong>वैज्ञानिक कारण</strong></p>
<p>यहां पर पूरे साल ठंड का अहसास होता है. कुछ महीनों को छोड़ दिया जाए तो यहां अक्सर बर्फ देखने को मिलती है. विज्ञान के अनुसार हर जीवित शख्य या कोई ऑब्जेक्ट सबकी अपनी एक फ्रीक्वेंसी होती है. ऐसी स्थितियों में अगर यहां शंख बजाया जाए तो उसकी ध्वनि पहाड़ों से टकराकर प्रतिध्वनि पैदा करती है. इस वजह से बर्फ में दरार पड़ने या फिर बर्फीले तूफान आने की आशंका बन सकती है. वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि खास आवृत्ति वाले साउंड पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसा होने पर पहाड़ों में लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में संभव है कि इसी वजह से इस धाम में शंख नहीं बजाया जाता हो.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-you-know-what-are-the-reasons-behind-not-blowing-conch-shell-in-badrinath-dham						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-you-know-what-are-the-reasons-behind-not-blowing-conch-shell-in-badrinath-dham</guid>
					<pubDate>Sat, 29 Oct 2022 00:54:26 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चाणक्य नीति: पुरुष के ये तीन गुण करते हैं महिलाओं को आकर्षित, उन्‍हें बनाना चाहती हैं अपनी जिंदगी का हिस्‍सा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>व्यक्ति का तौर-तरीका, व्यवहार, सोच और आदतें उसकी पर्सनालिटी को आकार देते हैं. व्‍यक्ति की पर्सनालिटी ही उसे एक नजर में लोगों के बीच लोकप्रिय बना देती है. आचार्य चाणक्‍य ने अपने नीति शास्‍त्र में कुछ ऐसे गुण बताए हैं जो जिस पुरुष में हों उसे महिलाओं के बीच लोकप्रिय बना देते हैं. ये भी कह सकते हैं कि ये गुण होना एक आदर्श पुरुष की पहचान होता है. महिलाओं ऐसे पुरुषों को बहुत पसंद करती हैं और उन्‍हें अपनी जिंदगी का हिस्‍सा बनाना चाहती हैं. </p>
किस्‍मत चमका देते हैं पुरुषों के ये गुण
<p>आचार्य चाणक्‍य ने अपने नीति शास्‍त्र में लिखा है- </p>
<p>'यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते, निघर्षणच्छेदनतापताडनैः</p>
<p>तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते, श्रुतेन शीलेन गुणेन कर्मणा.' </p>
<p>इस श्‍लोक में आचार्य चाणक्य ने आदर्श पुरुष के गुण और आदतें बताई हैं, जिसके कारण वह हर जगह सम्‍मान पाता है. ये गुण हैं ईमानदारी, अच्‍छा व्‍यवहार और अच्‍छा श्रोता होना. </p>
<p>ईमानदार पुरुष: जो पुरुष रिश्‍तों में ईमानदारी रखता है महिलाएं उसे बहुत पसंद करती हैं. यानी कि ऐसा पुरुष जो अपनी पत्‍नी या प्रेमिका को धोखा न दे. ऐसे पुरुष को कोई भी महिला कभी नहीं छोड़ना चाहती, बल्कि उसे हमेशा अपने जीवन का हिस्‍सा बनाकर रखना चाहती है. </p>
<p>महिलाओं से अच्‍छा व्यवहार: ऐसे पुरुष जो महिलाओं का सम्‍मान करते हों, उनसे विनम्रता और शिष्‍टाचार से बात करते हों उन्‍हें महिलाएं खूब पसंद करती हैं. ऐसे पुरुषों पर महिलाएं तुरंत फिदा हो जाती हैं. वहीं महिलाओं का अपमान करने वाला पुरुष अच्‍छा नहीं होता है. </p>
<p>अच्‍छा श्रोता: हर महिला चाहती है कि उसका पार्टनर उसकी बात सुने और उसे महत्‍व दे. लिहाजा जिस पुरुष में अच्‍छा श्रोता होने का गुण होता है, उसे महिलाएं बहुत पसंद करती हैं. साथ ही ऐसा पुरुष जिसमें अहंकार की भावना न हो और अपनी गलती पर माफी मांगे उसे महिलाएं बहुत पसंद करती हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/chanakya-niti-these-three-qualities-of-a-man-attract-women-want-to-make-them-a-part-of-his-life						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/chanakya-niti-these-three-qualities-of-a-man-attract-women-want-to-make-them-a-part-of-his-life</guid>
					<pubDate>Fri, 28 Oct 2022 10:09:44 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[त्रिपुंड धारण करना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टी से कल्याणकारी है, जानें मस्‍तक पर क्‍यों लगाते हैं त्रिपुंड]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म शास्त्रों में एक परंपरा हैं मस्तक पर यानि माथे पर त्रिपुंड लगाने की. आखिर साधु संत क्यों लगाते हैं त्रिपुंड. शास्त्रों के अनुसार क्या है इसका महत्व. त्रिपुंड लगाने की परंपरा पर क्या कहता है विज्ञान और क्या है इस त्रिपुंड को लगाने के महालाभ, आइए जानते हैं. मानव शरीर को ईश्वर की सबसे अनोखी, सुंदर और बेहतरीन रचना है. परमात्मा से आपकी आत्मा को जोड़े रखने के लिए धर्म शास्त्रों में कई साधनों का जिक्र मिलता है. इन्हीं साधनों में से एक हैं त्रिपुंड. धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रिपुंड में 27 दिव्य शक्तियों का वास होता है.</p>
<p><strong>3 रेखाओं में  त्रिलोकीनाथ की शक्ति, बेहद शक्तिशाली है त्रिपुंड </strong></p>
<p>साधू-संतों, तपस्वियों और पंडितों के माथे पर चन्दन या भस्म से बनी तीन रेखाएं कोई साधारण रेखाएं नहीं होती है. ललाट पर बनी इन तीन रेखाओं में देवी देवताओं की शक्ति समाई रहती है और इन तीन शक्तिशाली रेखाओं को त्रिपुण्ड कहते है. त्रिपुंड धार्मिक आस्था के साथ ही ईश्वर की भक्ति में रम जाने और उनसे अद्भुत शक्ति पाने का भी एक माध्यम है. ललाट पर चमकने वाली इन तेजस्वी रेखाओं की महिमा बहुत खास है. </p>
<p><strong>त्रिपुंड की महिमा</strong></p>
<p>माथे पर चंदन या भस्म से बनी तीन रेखाएं त्रिपुंड कहलाती हैं. चन्दन या भस्म द्वारा तीन उंगुलियों की मदद से त्रिपुण्ड बनाया जाता है. ललाट की इन तीन रेखाओं में 27 देवताओं का वास होता है. प्रत्येक रेखा में 9 देवताओं का वास होता हैं. त्रिपुंड धारण करने वालों पर शिव की विशेष कृपा होती है. त्रिपुंड परमब्रह्म की शक्ति का सूचक है. ये ईश्वर की भक्ति में सराबोर हो जाने और उनकी कृपा पाने का भी एक सूचक है. त्रिपुण्ड से जुड़ी कुछ अद्भुत और रोचक बातें हम आपको आज बताएंगे जो अब तक शायद आपको नहीं पता थीं. </p>
<p><strong>त्रिपुंड रेखाओं में इन देवताओं का वास</strong></p>
<p>आइए जानते हैं त्रिपुंड की तीनों रेखाओं में वास करने वाले देवों के बारे में. त्रिपुंड में अकार, गार्हपत्य अग्नि, पृथ्वी, धर्म, रजोगुण का वास, ऋग्वेद, क्रिया शक्ति, प्रात:स्वन और महादेव का वास होता है. मान्यता है कि त्रिपुंड लगाने से मस्तक की शोभा तो बढ़ती ही है भाग्य भी चमकता है. त्रिपुंड की दूसरी रेखा में भी 9 देव विराजमान हैं.त्रिपुंड की दूसरी रेखा में कौन से देव होते हैं देखिए. इसकी दूसरी रेखा में भी 9 देव विराजमान रहते हैं. इनमें ऊंकार, दक्षिणाग्नि, आकाश, सत्वगुण, यजुर्वेद, मध्यंदिनसवन, इच्छाशक्ति, अंतरात्मा और महेश्वर का वास होता है. वहीं त्रिपुंड की तीसरी रेखा में भी 9 देतवाओं का वास होता है.</p>
<p><strong>त्रिपुण्ड धारण करने के तरीके</strong></p>
<p>इस तरह त्रिपुंड की 3 रेखाओं में 27 देवों का वास होता है. लेकिन ये विचार मन में ना रखें कि त्रिपुण्ड केवल माथे पर ही लगाया जाता है. त्रिपुण्ड शरीर के कुल 32 अंगों पर लगाया जाता है. क्योंकि अलग-अलग अंगों पर लगाए जाने वाले त्रिपुंड का प्रभाव और महत्व भी अलग है. शरीर के कौन से हिस्से पर त्रिपुंड लगाने से किस देव की कृपा बरसती है, आइए बताते हैं. </p>
<p>और आस्था के इस निशान को त्रिपुंड कहते हैं. ये निशान इंसान के ललाट पर ही नहीं बल्कि आदि और अनंत से परे महादेव के मस्तक की भी शोभा बढ़ाते हैं. त्रिपुंड की प्रत्येक रेखा 9 देवों के आशीर्वाद से शोभायमान रहती है. यानि त्रिपुंड की तीन रेखा में 27 देवों का आशीर्वाद समाहित है. त्रिपुंड सिर्फ मस्तक पर ही नहीं बल्कि शरीर के 32 अंगों पर लगया जाता है. </p>
<p><strong>शरीर के 32 हिस्से जहां लगाया जाता है त्रिपुंड</strong></p>
<p>मस्तक, ललाट, दोनों कान, दोनों नेत्र, दोनों कोहनी, दोनों कलाई, ह्रदय, दोनों पाश्र्व भाग, नाभि, दोनों घुटने, दोनों पिंडली और दोनों पैर भी शामिल हैं. दरअसल इन अंगों में अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु, दस दिक्प्रदेश, दस दिक्पाल और आठ वसु वास करते हैं. शरीर के हर हिस्से में देवताओं का वास है. शास्त्रों के मुताबिक मस्तक में शिव, केश में चंद्रमा, दोनों कानों में रुद्र और ब्रह्मा, मुख में गणेश, दोनों भुजाओं में विष्णु और लक्ष्मी, ह्रदय में शंभू, नाभि में प्रजापति, दोनों उरुओं में नाग और नागकन्याएं, दोनों घुटनों में ऋषि कन्याएं, दोनों पैरों में समुद्र और विशाल पुष्ठभाग में सभी तीर्थ देवता रूप में रहते हैं. </p>
<p><strong>'त्रिपुंड हमेशा चंदन या भस्म से लगाया जाना चाहिए'</strong></p>
<p>ज्योतिषी कहते हैं कि त्रिपुंड हमेशा चंदन या भस्म से लगाया जाना चाहिए. भस्म से त्रिपुंड लगाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. दरअसल भष्म जली हुई वस्तुओं की राख होती है. सभी राख भस्म के रूप में प्रयोग करने योग्य नहीं होती है. उन्हीं राख का भस्म प्रयोग करें जो पवित्र कार्य के हवन, यज्ञ से प्राप्त हुई हो. </p>
<p><strong>त्रिपुंड लगाने के महालाभ</strong></p>
<p>त्रिपुंड की महिमा का गुणगान शिव पुराण में भी किया गया है. शिव पुराण के अनुसार जो व्यक्ति नियमित अपने माथे पर भस्म से त्रिपुण्ड धारण करता है. उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति शिव कृपा का पात्र बन जाता है. यही नहीं विज्ञान ने भी त्रिपुण्ड को लगाने या धारण करने के लाभ बताएं हैं. धर्म शास्त्रों में लिखित हर परंपरा और हर वस्तु से जुड़ा एक वैज्ञानिक पहलू भी है. जी हां आस्था और धर्म के नजरिए से बेहद अहम त्रिपुंड को विज्ञान भी मानव जीवन के लिए कल्याणकारी मानता है. </p>
<strong>धार्मिक नजरिए से त्रिपुंड अत्यंत फलदायी</strong>
<p>27 देवों की शक्ति से सुसज्जित त्रिपुंड की अपनी ही महिमा है. त्रिपुंड साक्षात शिव का आशीर्वाद है. धार्मिक नजरिए से त्रिपुंड अत्यंत फलदायी माना गया है.</p>
<p>माथे पर लगाई जाने वाली तीन रेखाएं त्रिपुंड हैं.</p>
<p>इसे शिव तिलक भी कहते हैं.</p>
<p>ये शरीर की तीन नाडियों का प्रतिनिधित्व करती हैं.</p>
<p>इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना का प्रतिनिधित्व करती हैं.</p>
<p>इसे लगाने से आत्मा को परम शांति मिलती है.</p>
<p>ये सेहत की दृष्टि से भी चमत्कारिक लाभ देती है.</p>
<p>त्रिपुंड की प्रथम रेखा के देवता महादेव हैं.</p>
<p>त्रिपुंड की दूसरी रेखा के देवता महेश्वर हैं.</p>
<p>त्रिपुंड की तीसरी रेखा के देवता शिव हैं.</p>
<p>इन 3 देवताओं को नमस्कार करके ही त्रिपुंड लगाएं.</p>
<p>त्रिपुण्ड धारण करने से सब देवता प्रसन्न होते हैं.</p>
<p>त्रिपुंड धारण करने से भक्त मोक्ष का अधिकारी होता है.</p>
<strong>त्रिपुंड का वैज्ञानिक महत्व</strong>
<p>विज्ञान कहता है कि त्रिपुण्ड चंदन या भस्म से लगाया जाता है.</p>
<p>चंदन और भस्म माथे को शीतलता प्रदान करता है.</p>
<p>इसे धारण करने से मानसिक शांति मिलती है.</p>
<p>अधिक मानसिक श्रम करने से विचारक केंद्र में पीड़ा होने लगती है, ऐसे में त्रिपुण्ड ज्ञान-तंतुओं को शीतलता प्रदान करता है.</p>
<p>तो इस तरह ये साफ होता है कि त्रिपुंड धारण करना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों की नजरिए से कल्याणकारी है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/wearing-tripund-is-beneficial-from-both-religious-and-scientific-point-of-view-know-why-tripund-is-a						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/wearing-tripund-is-beneficial-from-both-religious-and-scientific-point-of-view-know-why-tripund-is-a</guid>
					<pubDate>Fri, 28 Oct 2022 10:00:16 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[छठ पूजा: आज से देशभर में छठ पूजा और सूर्य उपासना का महापर्व शुरू, जानें नहाय-खाय, खरना की पूजा विधि और महत्व]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज से देशभर में छठ मैया की पूजा और सूर्य उपासना का महापर्व शुरू हो रहा है. इस त्योहार को सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है. छठ पूजा के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा भी की जाती है. छठ पूजा का पर्व आरोग्य, समृद्धि और संतान के लिए रखा जाता है. यह 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है. मान्यता है कि इस व्रत से अमोघ फल की प्राप्ति होती है.</p>
<p><strong>पहले दिन नहाय खाय से शुरुआत </strong></p>
<p>नहाय खाय से छठ पूजा की शुरुआत होती है. इस दिन व्रती नदी में स्नान करते हैं इसके बाद सिर्फ एक समय का ही खाना खाया जाता है. इस बार नहाय खाय की शुरुआत आज 28 अक्टूबर से हो रही है. </p>
<p><strong>दूसरा दिन- खरना</strong></p>
<p>छठ मैया की पूजा का दूसरा दिन 'खरना' कहलाता है. इस दिन विशेष भोग तैयार किया जाता है. इसके लिए शाम को मीठा भात (चावल) या लौकी की खिचड़ी खाई जाती है. वहीं इस महाव्रत का तीसरा दिन दूसरे दिन के प्रसाद के ठीक बाद शुरू हो जाता है. आपको बताते चलें कि इस साल 2022 में खरना 29 अक्टूबर को है. </p>
<p><strong>तीसरा दिन- अर्घ्य </strong></p>
<p>छठ पूजा की एक-एक विधि और नियम कायदे का अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व है. इस महापूजा के तीसरे दिन की भी अपनी अलग महिमा है. पूजा के तीसरे दिन शाम के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है. इस दौरान सभी व्रती श्रद्धालु अपनी-अपनी बांस की टोकरी में पूजा सामग्री के साथ फल, ठेकुआ और चावल के लड्डू भी रखते हैं. इस दौरान पूरे अर्घ्य के सूप को भी सजाया जाता है.</p>
<p>जब पूरे विधि-विधान से पूजा हो जाती है फिर सभी व्रती अपने परिजनों के साथ मिलकर अस्ताचल सूर्य यानी डूबते सूरज देवता को अर्घ्य देते हैं. यानी इस दिन डूबते सूर्य की उपासना की जाती है. छठ पूजा का पहला अर्घ्य इस साल 30 अक्टूबर को दिया जाएगा. इस दिन सूर्यास्त का समय 05 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा. इसलिए इस समय को आपको जरूर नोट कर लेना चाहिए.</p>
<p><strong>चौथा दिन- उगते सूर्य को अर्घ्य</strong></p>
<p>चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. ये अर्घ्य लगभग 36 घंटे के व्रत के बाद दिया जाता है. 31 अक्टूबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 27 मिनट पर होगा. इस उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस विराट महापर्व और छठ मैया के व्रत का समापन होगा.</p>
<p><strong>मनोकामना पूर्ति के लिए क्या करें?</strong></p>
<p>संतान प्राप्ति-  जो लोग संतान प्राप्ति करना चाहते हैं वो लोग छठ के दिन 108 बार इस मंत्र का जाप करें 'ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:'. संतान की सुख समृद्धि के लिए इस दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए.</p>
<p><strong>आर्थिक समस्या-</strong> जिन लोगों को किसी भी तरह की आर्थिक समस्या है वो छठी मैया के भजन और लोकगीतों को गुनगुनाने के साथ ही सूर्य देवता के इस विशेष मंत्र  'ऊं घृणिः सूर्याय नमः' का जाप करें तो श्रद्धालुओं को आर्थिक संकट से छुटकारा मिल सकता है.</p>
<p>मान्यता है कि इस दिन गरीब लोगों में खाना बांटा जाए तो छठ माता हर मनोकामना पूरी करती हैं. इसके साथ ही पशु-पक्षियों को गेहूं के आटे और गुड़ से बने व्यंजन खिलाने की बात घर के बड़े-बुजुर्ग बताते आए हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/chhath-puja-from-today-the-festival-of-chhath-puja-and-sun-worship-begins-across-the-country-know-th						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/chhath-puja-from-today-the-festival-of-chhath-puja-and-sun-worship-begins-across-the-country-know-th</guid>
					<pubDate>Fri, 28 Oct 2022 09:39:54 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[भाई दूज : इन अबूझ मुहूर्त में भाई को तिलक करना बेहद फलदायी है, आज का दिन है बेहद खास]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज का पर्व कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल द्वितीया तिथि 26 अक्‍टूबर की दोपहर से शुरू हुई और 27 अक्टूबर की दोपहर करीब 12 बजे तक रहेगी. ऐसे में भाई दूज का पर्व लोग 26 अक्टूबर और 27 अक्‍टूबर दोनों को मना रहे हैं. हालांकि आज 27 अक्‍टूबर को 4 बेहद शुभ योग रहने से भाई दूज का पर्व आज मनाना बेहतर है. हालांकि इसके लिए उनके पास 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक का समय ही रहेगा. </p>
<p><strong>27 अक्टूबर इसलिए खास!</strong></p>
<p>आज 27 अक्‍टूबर को भाई दूज मनाना बेहद खास रहेगा. दरअसल आज भाई दूज के दिन 4 बेहद शुभ योग- सौभाग्‍य योग, आयुष्‍मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग आदि बन रहे हैं. शुभ काम करने के लिए इन शुभ योगों को अबूझ मुहूर्त माना गया है. इन शुभ समय में किए गए काम बहुत सफल होते हैं. इ‍सलिए भाई दूज मनाने के लिए बहनों द्वारा भाईयों को इन शुभ योग में तिलक लगाना चाहिए. इससे भाई और बहन दोनों के जीवन में सौभाग्‍य बढ़ेगा. </p>
<p><strong>सर्वार्थ सिद्धि योग-</strong> 27 अक्‍टूबर की दोपहर 12 बजकर 42 मिनट से 28 अक्टूबर की सुबह 05 बजकर 38 मिनट तक</p>
<p><strong>अभिजीत मुहूर्त-</strong> 27 अक्‍टूबर की सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक</p>
<p><strong>आयुष्मान योग-</strong> 27 अक्टूबर के सूर्योदय से लेकर सुबह 07 बजकर 27 मिनट तक रहेगा</p>
<p><strong>सौभाग्य योग-</strong> 27 अक्टूबर के सूर्योदय से 28 अक्‍टूबर की सुबह 04 बजकर 33 मिनट तक रहेगा</p>
<p><strong>दूर होता है अकाल मृत्‍यु का भय </strong></p>
<p>मान्‍यता है कि भाई दूज के दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक लगवाते हैं और उसके घर जाकर भोजन करते हैं, उन्‍हें अकाल मृत्‍यु का डर नहीं रहता है. उनके जीवन से ये एक बड़ा संकट दूर हो जाता है. यमराज ने कार्तिक शुक्‍ल की द्वितीया के दिन ही अपनी बहन यमुना के घर भोजन किया था और प्रसन्‍न होकर संसार भर के बहन-भाईयों को वरदान दिया था कि आज बहन के घर आने वाले भाईयों की अकाल मृत्‍यु नहीं होगी. तब से ही भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/bhai-dooj-it-is-very-fruitful-to-tilak-brother-in-this-abuja-muhurta-today-is-a-very-special-day						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/bhai-dooj-it-is-very-fruitful-to-tilak-brother-in-this-abuja-muhurta-today-is-a-very-special-day</guid>
					<pubDate>Thu, 27 Oct 2022 10:19:35 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[भाई दूज कब मनाये 26 या 27 अक्टूबर, आईये जानते हैं किस तारीख को भाई दूज मनाना सही रहेगा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पांच दिवसीय दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर है और भाई दूज के साथ समाप्त होता है. इस बार धनतेरस, छोटी दिवाली और गोवर्धन की तिथियों को लेकर कनफ्यूजन रहा. ज्योतिषाचार्यों की राय इस मुद्दे बंटी हुई थी. कुछ ऐसा ही भाई दूज के साथ भी होत दिख रहा है. कुछ लोग 26 अक्टूबर को भाई दूज मानने की बात कर रहे हैं तो कुछ 27 अक्टूबर को इस त्योहार को मनाना ज्यादा सही मान रहे हैं. जानते हैं किस तारीख को भाई दूज मनाना सही रहेगा.</p>
<p>दरअसल इस वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितिया तिथि बुधवार, 26 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर गुरुवार, 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक  रहेगी. इसलिए ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन दोनों ही दिन भाई दूज मानना सही है. अब जानते हैं कि भाई दूज मनाने का शुभ मुहुर्त कब है.</p>
<p><strong>26 अक्टूबर का शुभ मुहुर्त</strong></p>
<p>-द्वितिया तिथि शुरू होने के बाद दोपहर 03 बजकर 33 तक पूजा और तिलक का शुभ मुहुर्त.</p>
<p>-शाम 05 बजकर 41 मिनट से शाम 06 बजकर 07 मिनट तक गोधुलि मुहूर्त.</p>
<p>27 अक्टूबर का शुभ मुहुर्त</p>
<p>-सुबह 11 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक.</p>
<p>-सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. इसमें भाई को तिलक करना बहुत ही शुभ रहेगा.</p>
<p><strong>भाई दूज की कथा</strong></p>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीय तिथि को यमुना ने अपने भाई यमराज की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा था और उन्हें अन्नकूट का भोजन कराया था. इससे प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन जो भी भाई-बहन एकसाथ यमुना नदी में स्नान करेगें, उन्हें मुक्ति प्राप्त होगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/when-to-celebrate-bhai-dooj-26-or-27-october-lets-know-on-which-date-it-would-be-right-to-celebrate-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/when-to-celebrate-bhai-dooj-26-or-27-october-lets-know-on-which-date-it-would-be-right-to-celebrate-</guid>
					<pubDate>Wed, 26 Oct 2022 01:02:06 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[हिंदू धर्म में दीपक को बुझाना माना जाता है बहुत अशुभ, जानें क्या कहता है भविष्य पुराण]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में पूजा व पर्व में दीपक जलाने का विशेष महत्व है. इसे जीवन में अंधकार यानी अज्ञान के गमन व प्रकाश स्वरूप ज्ञान के आगमन का प्रतीक माना जाता है. वास्तु व वैज्ञानिक आधार पर भी दीप प्रज्ज्वलन सकारात्मक उर्जा बढ़ाने वाला होता है. यही वजह है कि हिंदू धर्म के हर संस्कार में इसका महत्व है, पर बहुत कम लोग ये जानते हैं कि जिस दीपक को शुभ का प्रतीक माना गया है, उसे बुझाना भी उतना ही अशुभ माना जाता है. आज हम इसी से संबंधित मान्यताओं के बारे में बताने जा रहे हैं.</p>
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<p><strong>दीपक बुझाने वाला होता है काना</strong><br />ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र जोशी ने बताया कि भविष्यपुराण में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को दीप दान के बारे में बताने का जिक्र है, जिसमें वे दीप दान की विधि के साथ दीपक को बुझाने, हटाने व चुराने तीनों को ही निषेध बताते हैं. वे कहते हैं कि दीपदान करने वाले की गति दीपक की लौ की तरह ऊपर की तरफ होती है, इसलिए पुण्य अवसरों पर स्त्री व पुरुषों को दीप दान जरूर करना चाहिए. आगे वे कहते हैं कि दीपक को कभी बुझाना नहीं चाहिए और ना ही उसे स्थान से हटाना चाहिए, क्योंकि दीप बुझा देने वाला काना होता है और दीप को चुराने वाला अंधा होता है. भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि दीपक बुझाना बहुत निंदनीय कार्य है.</p>
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<p><strong>शुद्ध, पवित्र व साक्षी है अग्नि</strong><br />पंडित जोशी के अनुसार, अन्य वैदिक ग्रंथों में भी दीप बुझाने की मनाही है. इसकी वजह ये है कि दीपक बुझाने का अर्थ अग्नि को बुझाना होता है, जबकि अग्नि देव पवित्रता व शुद्धिकरण का प्रतीक है. विवाह व हवन आदि शुभ कार्य भी अग्नि की उपस्थिति व साक्ष्य को अनिवार्य माना जाता है. उसी अग्नि को बुझा देना किसी भी रूप में शुभ नहीं कहा जा सकता</p>
<p><strong>दीप प्रज्ज्वलन के साथ दान का महत्व</strong><br />हिंदू धर्म में दीप प्रज्ज्वलन के साथ भी महत्वपूर्ण व मोक्षकारी माना गया है. धन तेरस के अलावा भविष्यपुराण में सक्रांति, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, वैधृति, व्यतिपातयोग, उत्तरायण, दक्षिणायन, विषुव, एकादशी, शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, तिथिक्षय, सप्तमी तथा अष्टमी को स्नान कर दीपदान करना शुभ बताया गया है</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/in-hinduism-extinguishing-the-lamp-is-considered-very-inauspicious-know-what-the-bhavishya-purana-sa						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/in-hinduism-extinguishing-the-lamp-is-considered-very-inauspicious-know-what-the-bhavishya-purana-sa</guid>
					<pubDate>Sat, 22 Oct 2022 12:58:10 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[धनतेरस: धनतेरस पर इस समय न करें शॉपिंग, जाने धनतेरस पर क्या खरीदें?]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>धनतेरस का दिन भगवान धन कुबेर, धनवंतरी और माता लक्ष्मी की पूजा करने और उन्‍हें प्रसन्‍न करने का दिन होता है. इस दिन खरीदी गई शुभ चीजें जीवन में सौभाग्‍य, धन-समृद्धि लाती हैं. इस साल 23 अक्‍टूबर, रविवार को धनतेरस मनाया जाएगा. वहीं धनतेरस की पूजा के लिए 22 अक्‍टूबर की शाम का मुहूर्त भी अच्‍छा माना जा रहा है. हालांकि 22 अक्‍टूबर को शनिवार रहने से इस दिन वाहन या लोहे की चीजें खरीदना अशुभ रहेगा, ऐसे में खरीदारी के लिए शुभ दिन 23 अक्‍टूबर ही है. </p>
<p><strong>...लेकिन धनतेरस पर इस समय न करें शॉपिंग </strong></p>
<p>धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में पूजा करने, सोना-चांदी, पीतल जैसी शुद्ध धातुएं, वाहन-घर आदि खरीदने से आर्थिक संपन्नता बढ़ती है. लेकिन धनतेरस के ही दिन कुछ अशुभ समयावधि ऐसी भी होती है, जिसमें खरीदारी करने से बचना चाहिए. इस समय में की गई खरीदी लाभ की जगह हानि कराती है. </p>
<p>हिंदू पंचाग के अनुसार, इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि यानी कि धनतेरस शनिवार, 22 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 03 मिनट पर शुरू हो रही है, जो रविवार, 23 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगी. लेकिन इस दौरान एक समय ऐसा रहेगा जिसमें खरीदारी करना बहुत अशुभ रहेगा. यह समय है राहु काल. </p>
<p><strong>धनतेरस पर राहु काल </strong></p>
<p>धनतेरस के दिन राहु काल में गलती से भी खरीदारी न करें. इस साल धनतेरस पर राहु काल हिंदू पंचांग के अनुसार, 23 अक्टूबर की शाम 04 बजकर 19 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. राहु काल को शुभ चीजों की खरीदारी के लिए अशुभ माना गया है. दरअसल, राहु काल को किसी भी शुभ काम के लिए अशुभ माना गया है. इस समय किए गए काम और खरीदी गई चीजें अशुभ फल देती हैं. इसके अलावा 23 अक्‍टूबर की सुबह 09.00 बजे से लेकर सुबह 10.30 के बीच भी खरीदारी करने से बचें.</p>
<p><strong>धनतेरस पर क्या खरीदें?</strong></p>
<p>धनतेरस के दिन झाड़ू, धनिया, बर्तन, सोना-चांदी, वाहन, प्रॉपर्टी और कपड़ों की खरीदारी करना अच्‍छा होता है. ये चीजें जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाती हैं. लेकिन इस दिन मिलावटी या अशुद्ध चीजें जैसे प्‍लास्टिक, कांच-चीनी मिट्टी का सामान आदि न खरीदें. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/dhanteras-do-not-do-shopping-on-dhanteras-at-this-time-know-what-to-buy-on-dhanteras						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/dhanteras-do-not-do-shopping-on-dhanteras-at-this-time-know-what-to-buy-on-dhanteras</guid>
					<pubDate>Fri, 21 Oct 2022 11:22:23 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[धन और सम्पति के देवता कुबेर की 1300 साल पुरानी प्रतिमा यहां है, दर्शन करने जरूर जाये]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p><strong>Dhanteras 2022</strong> धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ ही श्रद्धालु धन के देवता कुबेर की पूाज अर्चना भी करते हैं। मध्यप्रदेश में कुबेर का मंदिर मंदसौर जिले में स्थित है। खिलचीपुरा में स्वतंत्र मंदिर में विराजे देवता कुबेर की विशेष पूजा अर्चना धनतेरस पर की जाएगी। बताया जाता है कि देश में केदारनाथ के बाद मंदसौर में ही कुबेर का स्वतंत्र मंदिर है।</p>
<p><strong>1300 साल पुरानी प्रतिमा</strong><br />जानकारी के अनुसार यह मंदिर करीब 1300 साल से अधिक प्राचीन है, यहां धन के देवता कुबेर की स्थापना भी खिलजी साम्राज्य से पहले की बताई जाती है। कहते हैं कि खिलजी के शासनकाल में ही खिलचीपुरा गांव बसाया गया था। यह मंदिर 30 डिग्री तक झुका है और इसकी नींव भी नहीं है। इसी कारण इस मंदिर का जीणोद्धार नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>नेवले पर सवार है कुबेर देव</strong><br />कुबेर की यह प्रतिमा नेवले पर सवार है, इसी के साथ चतुर्भुज है। देवता के एक हाथ में धन की पोटली, दो हाथों में शस्त्र व एक हाथ में प्याला है। इस प्रतिमा की ऊंचाई लगभग ढ़ाई फीट है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/the-1300-year-old-statue-of-kuber-the-god-of-wealth-and-wealth-is-here-must-visit						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/the-1300-year-old-statue-of-kuber-the-god-of-wealth-and-wealth-is-here-must-visit</guid>
					<pubDate>Thu, 20 Oct 2022 02:18:55 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[दिवाली गिफ्ट: दिवाली के समय न दे ये चीजें किसी को गिफ्ट, मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>बाजारों में दिवाली की रौनक देखने लायक है. दिवाली हिंदूओं का सबसे बड़ा त्योहार है. कई दिन पहले से ही लोग दिवाली की तैयारियों में जुट जाते हैं. दिवाली से कई दिन पहले से ही लोग अपने सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों के घर जाकर उन्हें दिवाली की बधाई देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं वास्तु शास्त्र में ऐसी कुछ चीजों के बारे में बताया गया है, जिन्हें दिवाली के समय किसी को गिफ्ट नहीं देना चाहिए. अगर ऐसा कोई करता है, तो मां लक्ष्मी रुष्ट होकर घर छोड़कर चली जाती हैं. </p>
उपहार में भूलकर भी न दें ये चीजें
<p><strong>चांदी का सिक्का</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र में ऐसे बहुत-सी चीजों के बारे में बताया गया है,जिन्हें गिफ्ट में देने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. बता दें कि कुछ चांदी के सिक्के ऐसे होते हैं, जिन पर मां लक्ष्मी का चित्र अंकित होता है. शास्त्रों में इस तरह की चांदी के सिक्के किसी दूसरे को देने से मना किया गया है. अगर कोई ऐसा करता है, तो इसका दुष्प्रभाव व्यक्ति के जीवन और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि ये सिक्का लेने-देने वाले दोनों पर ही बुरा प्रभाव पड़ता है. </p>
<p><strong>जूते-चप्पल</strong></p>
<p>वास्तु जानकारों के अनुसार दिवाली पर किसी को जूते-चप्पल उपहार में नहीं देने चाहिए. अगर कोई व्यक्ति भूल से भी ऐसा करता है, तो उसकी सुख-समृद्धि चली जाती है और आर्थिक समस्याएं उसे घेर लेती हैं. ऐसा कहा गया है कि अगर आप ऐसा करते हैं तो अपना अपना भाग्य भी दूसरों को सौंप देते हैं. </p>
<p><strong>रुमाल या परफ्यूम</strong></p>
<p>वास्तु में दिवाली पर किसी को रुमाल या परफ्यूम आदि देने को भी मना किया गया है. अगर कोई ऐसा करता है, तो उसका शुक्र कमजोर हो जाता है. वहीं, इत्र या परफ्यूम को भी शुक्र ग्रह का कारक माना गया है. इसलिए गिफ्ट में इत्र देने से व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. </p>
<p><strong>कांच देने से करें परहेज</strong></p>
<p>ज्योतष शास्त्र में कांच का टूटना अपशगुन माना गया है. ऐसे में किसी भी व्यक्ति को उपहार में कांच से बनी हुई वस्तुएं देने से परहेज करें. क्योंकि अगर ये टूट गया तो इसे अपशगुन माना जाएगा. इतना ही नहीं, इससे लेने और देने वाले दोनों पर ही संकट आ सकता है. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/diwali-gift-dont-give-these-things-to-anyone-at-the-time-of-diwali-maa-lakshmi-gets-angry						]]>
					</link>
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					<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 09:12:04 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[धनतेरस पर करें ये काम, धन्वंतरी देव की कृपा से जीवन में कभी धन की कोई कमी नहीं होगी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>दिवाली की शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है. दिवाली पांच दिवसीय पर्व है और इसका समापन भाई दूज के दिन होता है. धनतेरस का त्योहार कार्तिक माह की त्रयोदशी को मनाया जाता है. इस बार धनतेरस 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा. धनतेरस के दिन कुबेर देव, मां लक्ष्मी और धन्वंतरी देव की पूजा का विधान है. इस दिन खरीदी गईं चीजों को बहुत शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इस दिन सोना-चांदी, वाहन, प्रॉपर्टा आदि खरीदने से इन चीजों में 13 गुना  वृद्धि होती है.</p>
<p>धनतेरस के दिन ऐसे उपायों के बारे में भी बताया जाता है, जिन्हें करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. इस दिन भगवान धंवंतरी देव की पूजा की जाती है. कहते हैं कि धन्वंतरी देव की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी और उनकी कृपा से धन, दौलत के साथ व्यक्ति को बेहतर सेहत भी प्राप्त होती है. </p>
धन्वंतरी स्तोत्र का जाप
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धंवंतरी स्तोत्र का खास महत्व बताया जाता है. इस स्तोत्र के पाठ से ना सिर्फ मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, बल्कि धन्वंतरी देव की कृपा से व्यक्ति को जीवन में कभी धन की कोई परेशानी नहीं होती. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस दिन रात्रि में धंवंतरी देव की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस रात में धन्वंतरी देव की पूजा के बाद धन्वंतरी स्तोत्र का जाप करने से  घर और तिजोरी धन-धान्य से भर जाती है.  </p>
धन्वंतरी स्तोत्र
<p>ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।</p>
<p>सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥</p>
<p>कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारूपीतांबराढ्यम।</p>
<p>वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम॥</p>
<p>ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:</p>
<p>अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय</p>
<p>त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप</p>
<p>श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥</p>
धन्वंतरी स्तोत्र का पाठ करने के विधि
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनतेरस पर शाम को उत्तर दिशा में पूजा के लिए चौकी तैयार कर लें. इसके बाद चौकी पर भगवान कुबेर, धन्वंतरी और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. इस दिन कुबेर देव को सफेद मिठाई और धन्वंतरी देव को पीली रंग की मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद गणेश जी और मां लक्ष्मी की पूजा करें. इसके बाद धन्वंतरी देव के स्तोत्र का पाठ करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-this-work-on-dhanteras-by-the-grace-of-dhanvantari-dev-there-will-never-be-any-shortage-of-money-						]]>
					</link>
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					<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 09:02:28 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कार्तिक मास में गुरुवार के दिन तुलसी का पौधा लगाने से आर्थिक लाभ होता है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p><strong>Vastu Tips for Tulsi 2022</strong> तुलसी का पौधा हर घर में मौजूद होता है. छोटा सा ये पौधा न जानें कितने ही कष्टों का निवारण करता है. हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसी मान्‍यता है कि तुलसी मां लक्ष्मी का स्वरूप हैं और जिस घर में तुलसी का निवास होता है, वहां सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है</p>
<p>लेकिन क्या आप जानते हैं घर में किस दिन तुलसी का पौधा लगाना शुभ फल देता है और तुलसी के पौधे की वास्तु दिशा क्या होनी चाहिए? क्या हम तुलसी के पौधे को मुख्य दरवाजे के सामने रख सकते हैं? ऐसे कई सवालों के जवाब हम आपको देने जा रहे हैं. क्या हम तुलसी के पौधे को मुख्य दरवाजे के सामने रख सकते हैं? </p>
<p>लेकिन तब जब घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में हो. ऐसे में आप तुलसी का पौधा अपने मुख्य द्वार के पास रख सकते हैं, लेकिन घर के अंदर. तुलसी का पौधा घर के बाहर नहीं लगा होना चाहिए.</p>
<p><strong>घर में गुरुवार के दिन तुलसी का पौधा लगाएं? </strong></p>
<p>तुलसी लगाने का सबसे अच्छा समय कार्तिक मास में गुरुवार का है. लेकिन, इसे किसी भी गुरुवार को लगाया जा सकता है. कुछ का यह भी मानना​​है कि तुलसी का पौधा  रविवार और एकादशी के दिन नहीं लगाना चाहिए. वास्तु शास्त्र के मुताबिक तुलसी के पौधे के पास कभी भी कांटेदार पौधा नहीं रखना चाहिए</p>
<p><strong>दक्षिण दिशा में न रखे तुलसी का पौधा</strong></p>
<p>तुलसी का पौधा कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए. दक्षिण दिशा का संबंध अग्नि से है और इसलिए तुलसी का पौधा इस दिशा में नहीं लगाना चाहिए. वास्तुशास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा गलत दिशा में रख देने से घर में अशुभ प्रभाव पड़ता है. अगर आप अपने घर में एक से ज्यादा तुलसी लगवाना चाहते हैं तो इसकी संख्या हमेशा ऑड रखें. जैसे 1, 3, 5  </p>
<p><strong>आर्थिक लाभ</strong></p>
<p>घर के मुख्य द्वार पर तुलसी का पौधा रखना चाहिए. सुबह-सुबह तुलसी को जल अर्पित करें शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं. पूर्व या उत्तर दिशा से घर में सकारात्मकता बनी रहती है. तुलसी का पौधा कभी भी घर की छत पर नहीं होना  चाहिए. जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें आर्थिक हानि होती है. कार्तिक मास में गुरुवार के दिन तुलसी का पौधा लगाने से आर्थिक लाभ होता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/planting-a-tulsi-plant-on-thursday-in-the-month-of-kartik-brings-financial-benefits						]]>
					</link>
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					<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 02:09:16 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चाणक्य नीति: जिंदगी अगर सुखपूर्वक बिताना है तो इन 5 गुणों वाली लड़की से करें शादी, चमक जाएगी किस्मत]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p><strong>इस 5 गुणों वाली लड़की से करें शादी चमक जाएगी किस्मत</strong> आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में जीवन की कठोर सच्चाई के बारे में विस्तार से बताया है. आचार्य चाणक्य के विचार आपको कड़वे लग सकते हैं लेकिन वो सच्चे हैं. चाणक्य नीति की बातें जीवन की हर कसौटी पर खरी उतरती हैं. चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने पत्नी, मित्र, पिता जैसे कई रिश्तों के बारे में बात की है.</p>
<p>चाणक्य नीति के अनुसार, जो स्त्री गुणवान हो, उससे ही शादी करनी चाहिए. पुरुष को शादी के लिए सिर्फ सुंदर स्त्री के पीछे नहीं भागना चाहिए. अगर स्त्री सुंदर है और गुणवान नहीं है तो विपत्ति के समय में वह आपका साथ छोड़ जाएगी और आप अकेले पड़ जाएंगे. गुणवान स्त्री मुश्किल वक्त में भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ती है.</p>
<p><strong>धर्म-कर्म में विश्वास करने वाली </strong> आचार्य चाणक्य ने बताया है कि पुरुष को धर्म-कर्म में विश्वास करने वाली स्त्री से विवाह करना चाहिए. अगर स्त्री धर्म-कर्म वाली नहीं होती है तो आगे की पीढ़ी में भी इसकी कमी हो सकती है. अगर वह धर्म-कर्म में विश्वास नहीं करेगी तो बच्चों को भी वैसी ही शिक्षा देगी. इसलिए धर्म-कर्म वाली स्त्री से विवाह करना चाहिए.</p>
<p><strong>मर्यादित में रहने वाली </strong>चाणक्य नीति के मुताबिक, पुरुष को विवाह के लिए मर्यादित स्त्री का चुनाव करना चाहिए. मर्यादा में रहने वाली स्त्री अपने पति की इज्जत को संभाले रखती है. मर्यादित स्त्री के पति का सिर कभी शर्म से नहीं झुकता है.</p>
<p><strong>क्रोध को नियंत्रण में रखने वाली</strong> आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में बताया है कि अगर कोई स्त्री अपने गुस्से पर कंट्रोल करना जानती है तो वह विवाह करने के योग्य है. क्रोध इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है. जिस स्त्री के सिर पर हमेशा गुस्सा सवार रहता है वह अपने परिवार को कभी भी खुश नहीं रख पाती है.बिना स्त्री की मर्जी के ना करें विवाह</p>
<p>चाणक्य नीति के अनुसार, जो स्त्री क्रोध को नियंत्रण में रखने वाली हो उसी से शादी करनी चाहिए. ऐसी स्त्री पति को खुश रखती है और सम्मान देती है. अगर आपने बिना स्त्री की मर्जी के उससे शादी कर ली तो वह जीवन को नरक बना देती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/chanakya-niti-if-you-want-to-spend-life-happily-then-marry-a-girl-with-these-5-qualities-luck-will-s						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/chanakya-niti-if-you-want-to-spend-life-happily-then-marry-a-girl-with-these-5-qualities-luck-will-s</guid>
					<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 01:47:16 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शनि देव के क्रोध से बचने की लिए न करें ये काम, वर्ना करना पड़ेगा कई समस्याओं का सामना]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>व्यक्ति की जन्म कुंडली के आधार पर ग्रहों की दशा को समझा जाता है. अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में शनि की महादशा है या फिर शनि कमजोर स्थिति में है, तो उसे व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामान करना पड़ता है. वहीं, अगर शनि की अनुकूल स्थिति जीवन में सुख, आनंद और धन लेकर आती है. जीवन में शनि की प्रतिकूल स्थिति व्यक्ति के जीवन में समस्याएं पैदा करती है. अक्सर व्यक्ति लाइफ में कई ऐसी गलती कर बैठता है, जो उसे खुद नहीं पता होती. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की ये छोटी-छोटी गलतियों के चलते जीवन समस्याओं से घिर जाता है. इसका कारण शनि का नाराज  होना होता है और उनके क्रोध का सामना करना पड़ता है. शास्त्रों में कहा गया है कि दूसरों की चीजें इस्तेमाल करने से शनि देव नाराज हो जाते हैं. ऐसे में व्यक्ति को शनि की बुरी नजर का सामना करना पड़ता है. और उसे कई समस्याएं घेर लेती हैं. आइए जानते हैं शनि देव किन चीजों से नाराज होते हैं. </p>
<p><strong>शनि देव को नाराज कर देती हैं व्यक्ति की ये चीजें</strong></p>
<p>- शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय के देवता के रूप में माना जाता है. व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का फल शनि देव उसी के हिसाब से देते हैं. अच्छे कर्म वालों को जीवन की सभी सुख-सुविधाएं मिलती हैं. वहीं, बुरे कर्म करने वालों का जीवन समस्याओं से घिरा रहता है. शनि देव दूसरों की वस्तुओं के उपयोग करने से शनि नाराज हो जाते हैं. कई बार लोग आपस में एक-दूसरे से कपड़े, जूते या फिर कुछ और सामान मांग लेते हैं. लेकिन आपकी ये एक छोटी सी गलती आपके जीवन में परेशानियां खड़ी कर सकती है. मान्यता है कि दूसरों के कपड़े पहनने से व्यक्ति को दरिद्रता घेर  लेती है. </p>
<p>वास्तु जानकारों का कहना है कि दूसरों की अंगूठी पहनना भी अशुभ माना जाता है. इससे शनि देव तो नाराज होते ही हैं. साथ ही, दुर्भाग्य की शुरुआत होती है. ऐसे में कहा जाता है कि दूसरों की अंगूठी या रत्न किसी भी धातु का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से शनि देव नाराज हो जाते हैं और ग्रहों पर प्रतिकूल असर पड़ता है. </p>
<p>किसी दूसरे व्यक्ति की जूते-चप्पलों को भी पहनना अशुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति के चरणों में शनि देव का वास होता है. ऐसे में दूसरों के चप्पल-जूते पहनने से शनि देव नाराज हो जाते हैं.  वहीं, कई बार लोग एक-दूसरे से पेन-पेंसिल लेकर भी इस्तेमाल कर लेते हैं, जिसे शास्त्रों में सही नही माना गया. इससे नकारात्मकता बढ़ती है और व्यक्ति को अशुभ फलों की प्राप्ति होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-not-do-this-work-to-avoid-the-anger-of-shani-dev-otherwise-you-will-have-to-face-many-problems						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-not-do-this-work-to-avoid-the-anger-of-shani-dev-otherwise-you-will-have-to-face-many-problems</guid>
					<pubDate>Sun, 16 Oct 2022 11:36:45 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आज ही छोड़ दे अपनी यह रोजाना की यह 5 आदतें, वरना रूठ जाएगी मां लक्ष्मी, छा जाएगी कंगाली]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>Vastu Tips : देवी लक्ष्मी को धन की लक्ष्मी कहा जाता है, अगर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे तो इंसान आगे बढ़ता है वहीं अगर मां लक्ष्मी रूठ जाएं तो घर से सुख समृद्धि भी रूठ जाती है।</p>
<p>आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने वाले हैं जिनका आपको ध्यान रखना है। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है, क्योंकि ये ऐसी बुरी आदतें हैं जो धन की देवी लक्ष्मी को बिल्कुल पसंद नहीं है। तो अगर उनकी कृपा बरकरार रखना चाहते हैं तो इन बुरी आदतों को आज ही छोड़ दें।</p>
<p>आज हम आपको उन 4 बुरी आदतों के बारे में बताने वाले हैं जिनका जिक्र ज्योतिष शास्त्र में भी है। आपके भले के लिए यही अच्छा है कि आप इन बुरी आदतों का पीछा छोड़ दें।</p>
आइए जानते हैं वो चार बुरी आदते-
सूर्योदय के बाद न उठें
<p>शास्त्रों में सूर्योदय के बाद उठने को गलत बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र में कई जगह इस बात का जिक्र आता है कि सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।</p>
<p>ब्रह्म मुहूर्त में उठने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। वहीं अगर आप शाम को सोते हैं तो ये आदत भी छोड़ दीजिए। शाम के समय सोने से मां लक्ष्मी रूठकर घर से चली जाती हैं।</p>
आसपास गंदगी न रखें
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मां लक्ष्मी को साफ सफाई बहुत पसंद है, और वो वहीं आती हैं जहां साफ सफाई होती है। इसलिए अपने आस पास और घर में सफाई रखें। नियमित रूप से घर की सफाई करने से मां लक्ष्मी बहुत खुश होती हैं।</p>
थाली में न छोड़ें खाना
<p>शास्त्रों में अन्न को मां लक्ष्मी का ही रूप बताया जाता है। इसलिए कभी भी अन्न की बर्बादी नहीं करना चाहिए। कभी भी अपनी थाली में जूठे भोजन न छोड़ें। उतना ही भोजन लें जितना आप खा सकें।</p>
<p>अगर आप थाली में खाना छोड़ते हैं तो इससे घर-परिवारवालों को दरिद्रता का सामना करना पड़ सकता है और घर की बरकत रुक जाती है।</p>
भूलकर भी किसी को हाथ में न दें नमक
<p>ज्योतिष शास्त्र में हाथ में किसी को नमक देने से सख्त मना किया गया है। ऐसा करना अशुभ होता है। ऐसा करने से नमक लेने वाले और देने वाले दोनों से ही मां लक्ष्मी नाराज होती हैं।</p>
<p>इसलिए जब भी किसी को नमक देना हो तो किसी बर्तन में ही दें, हाथ से हाथ में कभी न दें।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/give-up-these-5-daily-habits-of-yours-today-otherwise-mother-lakshmi-will-get-upset-she-will-become-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/give-up-these-5-daily-habits-of-yours-today-otherwise-mother-lakshmi-will-get-upset-she-will-become-</guid>
					<pubDate>Sun, 16 Oct 2022 11:01:16 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[भगवान शिव के इस प्रिय पेड़ को लगाने से होती है माँ लक्ष्मी की कृपा, नहीं होती धन संबंधी समस्या]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>वास्तु शास्त्र में हर पौधे का अलग महत्व है. उसे घर या घर के बाहर लगाने का उद्देश्य भी अलग है. वास्तु जानकारों का कहना है कि पेड़-पौधों को अगर सही दिशा या सही जगह पर लगाया जाए,तो ही वे सकारात्मक परिणाम देता है. वरना उसके नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ता है. मां लक्ष्मी की कृपा के लिए घर में तुलसी का पौधा लगाया  जाता है. ताकि घर परिवार पर सदा मां लक्ष्मी का वास रहे. वैसे ही घर में बिल्व वृक्ष लगाने की सलाह दी जाती है. </p>
<p>बिल्व वृक्ष का नाम सुनते ही दिमाग में भगवान शिव का नाम घुमने लगता है. सदियों से बिल्व पत्र शिवलिंग पर अर्पित करते आ रहे हैं. और ये भी सुना है कि बिल्व पत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है. लेकिन क्या आप ये बात जानते हैं कि इसमें मां लक्ष्मी का वास होता है. इसलिए इसकी पूजा करने से भगवान शिव के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं बिल्व वृक्ष से जुड़े फायदों के बारे में. </p>
<p><strong>घर में बिल्व वृक्ष लगाने के फायदे</strong></p>
<p>- ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि घर में बिल्व वृक्ष लगाने से व्यक्ति को किसी तरह  की धन संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता. कहते हैं कि बिल्व वृक्ष के नीच खड़े होकर अन्न, खीर, मिठाई आदि चीजों का दान करने से व्यक्ति के घर कभी गरीबी नहीं आती. </p>
<p>- ऐसा भी कहा जाता है कि अगर घर में बिल्व वृक्ष लगा हो तो घर में सांप नहीं आते. बिल्व वृक्ष का संबंध भगवान शिव से है. </p>
<p>- वास्तु के अनुसार बिल्व वृक्ष लगाने से भगवान शिव की कृपा बरसती है. ऐसा करने से अटके हुए सभी काम पूरे हो जाते हैं. </p>
<p>- बिल्व वृक्ष की जड़ को अगर लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी में रख लिया जाए तो व्यक्ति को धन की कमी नहीं रहती. </p>
<p>- मान्यता है कि बिल्व वृक्ष लगाने से वंश वृद्धि होती है. वहीं, ये वृक्ष काटने से वंश वृद्धि रुक जाती है. </p>
<p>- मान्यता है कि अगर इस वृक्ष को साफ पानी से सींचा जाए, तो पितर तृप्त होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.</p>
<p>- वास्तु जानकारों के अनुसार बिल्व वृक्ष और सफेद आक को जोड़े से लगाने से भगवान शिव और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/by-planting-this-favorite-tree-of-lord-shiva-goddess-lakshmi-is-pleased-there-is-no-money-related-pr						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/by-planting-this-favorite-tree-of-lord-shiva-goddess-lakshmi-is-pleased-there-is-no-money-related-pr</guid>
					<pubDate>Sun, 16 Oct 2022 10:31:56 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[धनतेरस पर भूलकर भी ये चीजें नहीं खरीदनी चाहिए, ऐसा करना अपशकुन होता है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>धनतेरस (Dhanteras) का त्योहार अब नजदीक आ चुका है. इस बार यह त्योहार 23 अक्टूबर रविवार को मनाया जाएगा. माना जाता है कि इस दिन जो लोग बर्तन या सोना-चांदी खरीदते हैं, उनका घर सालभर धन-दौलत से भरा रहता है. हालांकि शास्त्रों में इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि धनतेरस पर कुछ चीजें भूलकर भी नहीं खरीदनी चाहिए. ऐसा करना अपशकुन होता है और परिवार में अजीब-अजीब चीजें होने लगती हैं. आइए जानते हैं कि वे कौन सी 5 चीजें हैं, जिन्हें खरीदने से इंसान को बचना चाहिए. </p>
<p><strong>कांच के बर्तन खरीदना वर्जित</strong></p>
<p>धनतेरस (Dhanteras Shopping) के दिन कांच के बर्तन खरीदने की मनाही की गई है. इसकी वजह ये है कि कांच का संबंध राहु से होता है. ऐसे में अगर आप धनतेरस पर कांच के बर्तन खरीदकर लाते हैं तो आप राहु ग्रह को घर में आने का न्योता दे रहे होते हैं. इसके चलते परिवार के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो जाता है. </p>
<p><strong>नुकीली या धारदार चीजें न खरीदें</strong></p>
<p>चाकू, सुईं, पिन, कैंची या अन्य कोई भी धारदार चीज धनतेरस पर कभी नहीं खरीदनी चाहिए. इस दिन ऐसी चीजों की शॉपिंग सही नहीं मानी जाती. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और परिवार दरिद्रता के भंवर में फंसने लगता है. </p>
<p><strong>लोहे की चीज खरीदना अशुभ</strong></p>
<p>शास्त्रों में कहा गया है कि हमें धनतेरस (Dhanteras Shopping) वाले दिन लोहे की चीज खरीदने से बचना चाहिए. इसका कारण ये है कि लोहे को शनि देव का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में अगर आप लोहे की कोई चीज खरीदकर लाते हैं तो आपके घर में शनि देव विराजमान हो जाएंगे, जिसके बाद अनिष्ट होने की आशंका बढ़ती जाएगी.</p>
<p><strong>प्लास्टिक के सामान से बचें  </strong></p>
<p>आपको धनतेरस वाले दिन प्लास्टिक से बनी कोई चीज नहीं खरीदनी चाहिए. ऐसा करने घर में बरकत नहीं आती और मां लक्ष्मी रुष्ट होती हैं. इसके बजाय स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं. उनकी खरीद से कुंडली में दोष दूर हो जाते हैं.</p>
<p><strong>एल्यूमिनियम का सामान न लें</strong></p>
<p>ज्योतिष के मुताबिक धनतेरस (Dhanteras Shopping) पर एल्युमिनियम के सामान या बर्तन खरीदने वर्जित हैं. एल्युमिनियम पर राहु का काफी प्रभाव होता है. उसे दुर्भाग्य का सूचक भी माना जाता है. ऐसे में धनरेस पर अगर इसकी खरीद करते हैं तो आपके लिए दिक्कतें बढ़ सकती हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/one-should-not-buy-these-things-even-after-forgetting-on-dhanteras-it-is-inauspicious-to-do-so						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/one-should-not-buy-these-things-even-after-forgetting-on-dhanteras-it-is-inauspicious-to-do-so</guid>
					<pubDate>Sun, 16 Oct 2022 00:43:17 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[दरिद्रता का नाश करने के लिए, शाम को दीपक जलाते समय करें इस मंत्र का जाप]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में पूजा से संबंधित हर चीज का अपना अलग महत्व है. कहते हैं कि घर में दीपक जलाने से घर का अंधियारा दूर होजाता है. उसी प्रकार अगर भगवान के आगे दीपक जलाने से व्यक्ति के जीवन का अंधकार दूर होता है. इतना ही नहीं, जीवन की नकारात्मकता, दरिद्रता, रोग, कष्ट दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलता है.     </p>
<p>ज्योतष शास्त्र का कहना है कि दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. घर में दीपक को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. घर में दीपक जलाने से सकारात्मक शक्तियां घर के अंदर प्रवेश नहीं करतीं. वहीं, माना जाता है कि दीपक की लौ व्यक्ति के प्रगति का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान दीपक जलाते समय मंत्रों का जाप करना विशेष रूप से लाभदायी माना जाता है. आइए जानें घर में शाम के समय दीपक जलाते समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए. </p>
<p><strong>इसलिए जलाया जाता है दीपक </strong></p>
<p>- हिंदू धर्म में किसी भी पूज-अनुष्ठान के दौरान विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है. शास्त्रों में मंत्रों के जाप का खास महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि मंत्रों के उच्चारण के साथ अगर कोई कार्य किया जाए, तो उसमें पूर्ण सफलता प्राप्त होती है और पूजा पूर्ण मानी जाती है. </p>
<p>- शास्त्रों में शाम के समय दीपक जलाने के भी कुछ मंत्र बताए गए हैं. कहा जाता है कि शाम के समय इन मंत्रों के उच्चारण से जीवन में लाभ प्राप्त होता है. </p>
<strong>शाम को दीपक जलाते समय करें ये मंत्र जाप</strong>
<p>शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।</p>
<p>शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोस्तुते।।</p>
<p>दीपो ज्योति परंब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:।</p>
<p>दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोस्तुते।।</p>
<p><strong>मंत्र जाप के लाभ</strong></p>
<p>ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि पूजा करते समय मंत्र का उच्चारण करने से मनुष्य को विशेष लाभ प्राप्त होता है. कहते हैं कि इस मंत्र का अर्थ भगवान के सामने हमने जो दीपक जलाया है, उससे हमारा शुभ हो, कल्याण हो, आरोग्य मिले, रोगों का नाश हो और धन-संपदा में वृद्धि हो. सद्बुद्धि मिले और व्यक्ति के पापों का नाश हो.     </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/to-destroy-poverty-chant-this-mantra-while-lighting-the-lamp-in-the-evening						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/to-destroy-poverty-chant-this-mantra-while-lighting-the-lamp-in-the-evening</guid>
					<pubDate>Sat, 15 Oct 2022 23:44:46 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कार्तिक माह में क्यों है शनि पूजा का महत्व, इस राशि के जातक करें ये उपाय, प्रसन्न होकर शनि देव कर देंगे मालामाल]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कार्तिक माह का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इस माह में पूजा-पाठ, उपाय आदि करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. कल यानी 15 अक्टूबर को कार्तिक माह का पहला शनिवार है. और इस शनिवार को अगर खास विधि से शनि देव की पूजा की जाए, तो जातकों को शनि की महादशा, साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस माह में धनतेरस, दिवाली, नरक चतुर्दशी, देवउठनी एकादशी आदि होने के कारण इस माह का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. </p>
<p>हिंदू पंचाग के अनुसार 15 अक्टूबर को शनिवार के दिन षष्ठी तिथि है. मृगशिरा नक्षत्र और चंद्रमा के वृषभ में गोचर करने से शनि देव को प्रसन्न करने का उत्तम संयोग बन रहा है. इसी माह में शनि देव वक्री से मार्गी हो रहे हैं. बता दें कि शनि ग्रह 23 अक्टूबर को मार्गी हो रहे हैं. ऐसे में कार्तिक का पहला शनिवार काफी खास है. </p>
<p><strong>कार्तिक माह में क्यों है शनि पूजा का महत्व</strong></p>
<p>कार्तिक माह में भगवान विष्णु और मां तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है. कहते हैं कि इस माह में भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं. इसी माह में शालीग्राम और तुलसी का विवाह किया जाता है. इसलिए इस माह में दोनों की पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. इस माह में किए गए पूजा पाठ से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है. ब्रह्म पुराण में कहा गया है कि इस माह में भगवान विष्णु को जो भी सच्चे दिन से उपासना करता है, उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है. और उन लोगों पर शनि अपनी क्रूर दृष्टि नहीं डालते. </p>
<p><strong>ये राशि के जातक करें ये उपाय </strong></p>
<p>फिलहाल ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 5 राशि के जातक शनि की क्रूर दृष्टि का सामना कर रहे हैं. इनमें दो राशि मिथुन और तुला राशि के जातक शनि की ढैय्या, 3 राशि धनु, मकर, कुंभ के जातक शनि की साढ़े साती की महादशा से गुजर रहे हैं. ऐसे में इस लोगों को ये खास उपाय राहत पहुंचा सकते हैं. </p>
<p><strong>शनिवार को करें ये उपाय </strong></p>
<p>इन राशियों के अलावा जिन राशियों पर शनि की महादशा, अंर्तदशा या कुंडली में कहीं शनि अशुभ फल प्रदान कर रहे हैं, तो वे कार्तिक माह के प्रथम शनिवार को घर के पास शनि मंदिर में तिल का तेल चढ़ाएं. मान्यता है कि ऐसा करने से शनि के अशुभ फलों में कमी आती है. कहा जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा में तिल के तेल का विशेष महत्व है. वहीं, तिल का दान भी उत्तम माना गया है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/why-is-the-importance-of-shani-worship-in-the-month-of-kartik-the-people-of-this-zodiac-should-do-th						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/why-is-the-importance-of-shani-worship-in-the-month-of-kartik-the-people-of-this-zodiac-should-do-th</guid>
					<pubDate>Sat, 15 Oct 2022 11:51:55 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[धनतेरस: इस धनतेरस नया वहां खरीदने जा रहे है तो पहले करें ये काम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पंच दिवसीय दीपावली पर्व को सभी लोग धूमधाम से मनाते हैं और इसकी तैयारियां भी काफी पहले से शुरू कर देते हैं. इस बार दीपावली 24 अक्टूबर को पड़ रही है. सामान्यतः धनतेरस पर लंबे समय तक चलने वाली ही कोई चीज खरीदी जाती है, इसलिए धनतेरस पर बर्तन, ज्वैलरी और वाहनों को खरीदने का चलन है. कई लोगों ने तो वाहन लेने का पैसा पहले ही जमा कर दिया है और धनतेरस यानी 23 अक्टूबर को डिलीवरी लेने का प्लान किया है. यदि आप इस बार वाहन खरीद रहे हैं तो अच्छा है, किंतु ध्यान रखें कि डिलीवरी लेते ही एक काम करना बहुत जरूरी है और बिना इस काम को किए वाहन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. आप एक बात सोचिए कि यदि शुभ मुहूर्त में कोई वाहन लिया जाए और उस वाहन को ऐसा आशीर्वाद प्राप्त हो जाए कि वह जो भी यात्राएं करें और जिस प्रयोजन से वह घर से निकले, वह सार्थक हो तो इससे कितना फायदा होगा.</p>
<p>सबसे पहले आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि जो पुराना वाहन आपको इस स्थिति तक लेकर आया है कि आप नया खरीद पा रहे हैं तो उसके प्रति आपका आदर-सम्मान का भाव कम नहीं होना चाहिए. यदि आप उस पुराने वाहन को बेच रहे हैं तो बेचने से पहले एक बार जैसे इसको लेने के बाद मंदिर गए और पूजन किया था, उसी तरह से अब भी मंदिर जाएं और उसका पूजन करें और भाव पूर्ण तरीके से उसको विदा करते हुए नए वाहन को स्वीकार करें. </p>
<p>वाहन की पूजा परिवार की किसी वरिष्ठतम महिला से करानी चाहिए. वाहन के ऊपर सबसे पहले आम या फिर अशोक के पत्तों से जल छिड़कें. इसके बाद फिर वाहन में सिंदूर और घी से स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए. स्वस्तिक का निशान शुभ होने के साथ ही काफी ऊर्जा देने वाला होता है.</p>
<p>यात्रा में किसी प्रकार का व्यवधान न आए इसलिए स्वस्तिक बनाया जाता है. वाहन को फूल एवं माला अर्पित करते हुए उसका स्वागत करना चाहिए. कलावा रक्षा-सूत्र होता है, इसलिए वाहन को कलावा बांधना चाहिए, अब कपूर से आरती करें और वाहन पर मिठाई रखें. बाद में यह मिठाई गौ माता को खाने को दें. एक नारियल लेकर नए वाहन पर से सात बार घुमाकर वाहन के आगे फोड़ें. वाहन स्टार्ट कर उसे नारियल वाले स्थान पर से होते हुए एक चक्‍कर लगाएं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/dhanteras-if-you-are-going-to-buy-a-new-one-on-this-dhanteras-then-do-this-work-first						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/dhanteras-if-you-are-going-to-buy-a-new-one-on-this-dhanteras-then-do-this-work-first</guid>
					<pubDate>Fri, 14 Oct 2022 10:52:11 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[करवा चौथ: करवा चौथ के दिन राशिनुसार इस रंग के कपडे पहनने से होगी सारी मनोकामना पूरी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज पूरे देश में करवा चौथ का त्योहार धूम-धाम से मनाया जा रहा है. सरगी के साथ इस त्योहार की शुरुआत हो चुकी है. इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. यह त्योहार खासकर उत्तर भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रहती हैं और समय पर चांद को देखने के बाद व्रत खोलती हैं. आइए जानते हैं कि करवा चौथ के दिन राशिनुसार कौन सा रंग पहनना शुभ माना जाता है.</p>
<p><strong>मेष-</strong> मेष राशि की महिलाएं करवा चौथ की पूजा अगर लाल और गोल्डन रंग के कपड़े पहनकर करती हैं तो यह उनके लिए बेहद शुभ रहेगा. दरअसल मंगल ग्रह को इस मेष राशि का स्वामी माना जाता है. मंगल का रंग लाल होता है, इसलिए इस राशि की सुहागिन महिलाओं का लाल, नारंगी और गोल्डन कलर का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. </p>
<p><strong>वृष-</strong> चूंकि वृष राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है. इसलिए इस राशि की महिलाओं को विशेष फल और मनोकामना की प्राप्ति के लिए सिल्वर और हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए. इन रंगों के कपड़े पहनकर विधि-विधान से पूजा करने से पति-पत्नी के बीच में प्यार हमेशा बढ़ता जाएगा.</p>
<p><strong>मिथुन-</strong> मिथुन राशि की महिलाओं के लिए हरा रंग इस करवा चौथ के दिन कुछ ज्यादा ही शुभ रहने वाला है. इस राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन हरे रंग की साड़ी और लाल रंग की चूड़ियां पहनकर चांद की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से आपके पति की आयु लंबी होगी.  </p>
<p><strong>कर्क-</strong> कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं. इस राशि की महिलाएं लाल-सफेद रंग के कपड़े के साथ लाल, गुलाबी और नीली रंग की चूड़ियां भी पहन सकती हैं. </p>
<p><strong>सिंह-</strong> सूर्य देवता को सिंह राशि के स्वामी ग्रह माना जाता है. इसलिए सिंह राशि की महिलाएं आज लाल, संतरी, गुलाबी या गोल्डन कलर की साड़ी या लहंगा पहन सकती हैं. </p>
<p><strong>कन्या-</strong> 'बुध' कन्या राशि के स्वामी ग्रह हैं. इसलिए इस राशि की महिलाओं को आज लाल, हरा या गोल्डन कलर के कपड़े पहन सकती हैं. इन रंगों की साड़ी पहनकर पूजा करने से लाभ मिलेगा. ऐसा करने से पति-पत्नी दोनों के वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी.</p>
<p><strong>तुला-</strong> तुला राशि के स्वामी शुक्र देव हैं. इस राशि की महिलाओं के लिए लाल, गोल्डन या सिल्वर रंग शुभ रहेगा.</p>
<p><strong>वृश्चिक-</strong> वृश्चिक राशि की महिलाएं आज करवाचौथ पर लाल, मैरून या फिर गोल्डन रंग की साड़ी पहनकर पूजा करें तो शुभ फल मिलेगा.</p>
<p><strong>धनु-</strong> धनु राशि के स्वामी बृहस्पति ग्रह हैं. इस राशि की सुहागिनें पीले, फिरोजी या आसमानी रंग के कपड़े पहन सकती हैं. इससे पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ेगा और मनोकामना भी पूरी होगी.</p>
<p><strong>मकर-</strong> मकर राशि के स्वामी शनि हैं. इसलिए मकर राशि की सुहागिन महिलाओं को नीले रंग के कपड़े पहन कर करवा चौथ की पूजा करनी चाहिए. </p>
<p><strong>कुंभ-</strong> आपकी राशि का स्वामी ग्रह शनि है. नीला शनि का पसंदीदा रंग है. इस राशि की सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र के इस व्रत के शुभ मौके पर सिल्वर या नीले रंग के कपड़े भी पहन सकती हैं. ऐसा करने से गृहस्थ जीवन में आगे भी हमेशा सुख और शांति बनी रहेगी.</p>
<p><strong>मीन-</strong> इस राशि की महिलाओं को करवा चौथ पर लाल या गोल्डन रंग के कपड़े पहनना शुभ होगा. ऐसा करने से आप और आपके पति दोनों के बीच कभी प्रेम और स्नेह में कमी नहीं आएगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/karva-chauth-wearing-clothes-of-this-color-on-the-day-of-karva-chauth-will-fulfill-all-your-wishes						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/karva-chauth-wearing-clothes-of-this-color-on-the-day-of-karva-chauth-will-fulfill-all-your-wishes</guid>
					<pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:25:11 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए दिवाली की सफाई में घर से बाहर कर दें ये सामान, दोगनी रफ्तार से होगी तरक्की]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>दिवाली का त्योहार अब सिर्फ कुछ दिनों की दूरी पर है. इसके लिए जमकर तैयारियां शुरू हो गईं हैं. साफ-सफाई (Cleaning) से लेकर शॉपिंग (Shopping) तक के तमाम कामों में लोग जुट गए हैं. इस त्योहार पर साफ-सफाई का खास महत्व है. ऐसा कहा जाता है कि उन लोगों पर मां लक्ष्मी खूब कृपा बरसाती है जिनके घर में सफाई होती है. आज हम आपको बता दें कि दिवाली की सफाई में अगर आप इन चीजों को घर से बाहर कर देंगे तो घर की तरक्की दोगनी रफ्तार से होगी.</p>
<p><strong>इन चीजों को घर से कर दें दूर</strong></p>
<p>1. घर में टूटा हुआ शीशा दुर्भाग्य का प्रतीक होता है. यह नकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रसार करता है. अगर दिवाली पर आप घर की सफाई कर रहे हैं तो कोई भी टूटा शीशा घर में न रहने दें. इससे घर में आर्थिक दोष आता है और परिवार वालों की तरक्की रूक जाती है.</p>
<p>2. आजकल किचन में कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक सामानों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर आपके घर में कोई ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सामान है जो काम नहीं कर रहा है तो दिवाली से पहले उसकी मरम्मत करा लें. अगर सामान इस हालात में नहीं है कि उसकी मरम्मत हो सकती है तो उसे दिवाली से पहले घर से बाहर कर दें.</p>
<p>3. टूटी हुई मूर्तियां घर में आने वाले किसी विकट दशा की प्रतीक होती हैं. अगर आपके पूजा घर में भी कोई टूटी हुई मूर्ति है तो उसे दिवाली से पहले कहीं प्रवाहित कर दें. शास्त्रों में टूटी हुई मूर्तियों की पूजा करने को गलत बताया गया है. </p>
<p>4. इसके साथ अगर आपके घर में कोई टूटा हुआ फर्नीचर है तो उसे दिवाली से पहले ठीक करा लें. वरना उसे घर से बाहर का रास्ता दिखाएं. अगर घर में कोई पुरानी रुकी हुई घड़ी हो तो उसे भी ठीक करा लें. वरना बंद घड़ी को घर में रखने को बुरा संकेत माना जाता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/to-get-the-blessings-of-maa-lakshmi-put-these-items-out-of-the-house-in-the-cleaning-of-diwali-progr						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/to-get-the-blessings-of-maa-lakshmi-put-these-items-out-of-the-house-in-the-cleaning-of-diwali-progr</guid>
					<pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:18:11 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[46 साल बाद करवा चौथ पर बन रहा अद्भुत संयोग, इस संयोग में करें ये उपाय मिलेगा पति का ढ़ेर सारा प्यार]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रख भगवान शिव और मां पावर्ती की उपासना करती हैं. शुभ मुहूर्त में करवा चौथ की कथा पढ़ती और श्रवण करती हैं. रात में चंद्रोदय के बाद चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों जल ग्रहण करती हैं और व्रत पारण करती हैं.</p>
<p><strong>इस योग में रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत</strong></p>
<p>ज्योतिषियों का कहना है कि इस साल करवा चौथ पर बेहद खास संयोग बन रहा है. 46 साल बाद ग्रहों के ये खास स्थिति इस दिन के महत्व और दोगुना बढ़ा रही है. बता दें कि इस बार करवा चौथ का व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य और महालक्ष्मी योग में रखा जाएगा. इस बार करवा चौथ का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है. गुरु ग्रह इस समय मीन राशि में विराजमान हैं. इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 23 अक्टूबर 1975 में बनी थी. </p>
<p><strong>पति का प्यार पाने के लिए करें इनमें से कोई एक उपाय </strong></p>
<p>- अगर आप अपने रिश्तों को मजबूत बनाना चाहता है,तो आज लाल रंग के कपड़े में सिंदूर रखकर पूजा स्थान पर रख दें. अगले दिन इसे जल में प्रवाहित कर दें. इससे पति-पत्नी लंबे समय तक खुशहाली जीवन बिताते हैं. </p>
<p>- अगर किसी के प्रेम को पाना चाहता हैं, तो आज के दिन एक लाल रंग के कागज पर सुनहरे पेन से उसका नाम लिख लें. इसके बाद इस कागज में गोमती चक्र रखकर इसे कहीं सुरक्षित रख दें. माना जाता है कि ऐसा करने से आपका प्यार आपके पास आ जाएगा. </p>
<p>- पति-पत्नी में हमेशा कलह-कलेश रहता है तो आज के दिन महिलाएं दो झाड़ू की सींक लें. अब इन्हें उल्टा-सीधा रखकर नीले रंग के धागे से बांध दें. अब इन्हें घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में रख दें. इससे सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी.</p>
<p>- पति का प्यार पाने के लिए आज के दिन कुंवारी कन्या को लाल रंग की तुनरी ओढ़ाएं. इससे पति का आपकी ओर लगाव बढ़ेगा. </p>
<p>- चंद्र देव को अर्घ्य देते समय लाल रंग के फूल का इस्तेमाल करें. इससे दांपत्य जीवन मधुर बनता है.</p>
<p><strong>करवा चौथ पर चांद निकलने का सही समय  (Karwa Chauth Moon Rise time 2022)</strong></p>
<p>दिल्ली- 08 बजकर 09 मिनट पर</p>
<p>नोएडा- 08 बजकर 08 मिनट पर</p>
<p>मुंबई- 08 बजकर 48 मिनट पर</p>
<p>जयपुर- 08 बजकर 18 मिनट पर</p>
<p>देहरादून- 08 बजकर 02 मिनट पर</p>
<p>लखनऊ- 07 बजकर 59 मिनट पर</p>
<p>शिमला- 08 बजकर 03 मिनट पर</p>
<p>गांधीनगर- 08 बजकर 51 मिनट पर</p>
<p>अहमदाबाद- 08 बजकर 41 मिनट पर</p>
<p>कोलकाता- 07 बजकर 37 मिनट पर</p>
<p>पटना- 07 बजकर 44 मिनट पर</p>
<p>प्रयागराज- 07 बजकर 57 मिनट पर</p>
<p>कानपुर- 08 बजकर 02 मिनट पर</p>
<p>चंडीगढ़- 08 बजकर 06 मिनट पर</p>
<p>लुधियाना- 08 बजकर 10 मिनट पर</p>
<p>जम्मू- 08 बजकर 08 मिनट पर</p>
<p>बंगलूरू- 08 बजकर 40 मिनट पर</p>
<p>गुरुग्राम- 08 बजकर 21 मिनट पर</p>
<p>असम - 07 बजकर 11 मिनट पर</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/a-wonderful-coincidence-is-being-made-on-karva-chauth-after-46-years-do-this-remedy-in-this-coincide						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/a-wonderful-coincidence-is-being-made-on-karva-chauth-after-46-years-do-this-remedy-in-this-coincide</guid>
					<pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:01:24 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कार्तिक माह में तुलसी जी का पूजन करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>स्कंद पुराण में बताया गया है कि कार्तिक माह में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है. सभी माह में कार्तिक माह को श्रेष्ठ माना गया है. कहते हैं कि इस माह में तुलसी जी का पूजन करने से व्यक्ति को मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. कार्तिक माह भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है. तुलसी जी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस माह में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा साथ में करना विशेष लाभदायी होता है. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि इस माह में अगर सच्चे मन से तुलसी पूजा की जाए, सुबह-शाम तुलसी पर दीपक जलाया जाए, तो मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. इस माह में तुलसी जी की पूजा विष्णु जी के अवतार शालीग्राम के साथ करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. </p>
<p><strong>जानें कार्तिक माह में तुलसी के उपाय </strong></p>
<p>- कार्तिक माह में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तुलसी को जल अर्पित करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. </p>
<p>- मान्यता है कि नियमित रूप से कार्तिक माह में नियामनुसार तुलसी को जल दिया जाए, तो भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. </p>
<p>- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर लें और स्वस्थ वस्त्र धारण करें. इसके बाद एक लौटा जल सूर्य देव को अर्पित करें और फिर अपने ईष्ट देव की पूजा करके तुलसी मां को जल अर्पित करें. </p>
<p>- तुलसी मां को कार्तिक माह में नियमित रूप से सिंदूर और हल्दी अर्पित करें. ये मां का ऋंगार होता है. इसके बाद मां के सामने  घी का दीपक जलाएं और 7 बार तुलसी मां की परिक्रमा करें या अपने स्थान पर 2 बार ही घूम लें. </p>
<p>- इसके बाद मां की कथा, आरती और मंत्र जाप करें और उनके सम्मुख अपनी प्रार्थना रखें. कहते हैं कि विष्णु भगवान निंद्रा लोक से उठते ही सबसे पहले तुलसी मां की पुकार ही सुनते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/worshiping-tulsi-ji-in-the-month-of-kartik-one-gets-the-blessings-of-goddess-lakshmi-along-with-lord						]]>
					</link>
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					<pubDate>Tue, 11 Oct 2022 10:35:57 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कार्तिक मास : इस मास में कार्तिक स्‍नान और तुलसी पूजा करना बेहद शुभ माना गया, जाने इसके लाभ]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>स्कंद पुराण के अनुसार सभी महीनों में कार्तिक मास को सर्वश्रेष्ठ माना गया है. भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्‍मी को कार्तिक मास बहुत प्रिय है. इसी महीने भगवान विष्‍णु 4 महीने की निद्रा से जागते हैं और फिर तुलसी जी के साथ विवाह रचाते हैं. साल 2022 में आज यानी कि 10 अक्‍टूबर, सोमवार से कार्तिक मास शुरू हो गया है जो 8 नवंबर तक चलेगा. इस महीने में सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों के जल से स्‍नान करना और तुलसी पूजा करना बेहद शुभ माना गया है इसलिए इसे कार्तिक स्‍नान का महीना भी कहा जाता है. </p>
<p><strong>मां लक्ष्‍मी देंगी अपार धन </strong></p>
<p>मान्‍यता है कि इस महीने में मां लक्ष्‍मी धरती पर भ्रमण करती हैं और भक्‍तों को अपार धन देती हैं. इस महीने दिवाली मनाई जाती है और मां लक्ष्‍मी की विशेष पूजा की जाती है. इस महीने मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने के लिए तुलसी के पौधे से जुड़े कुछ उपाय भी कर लेने चाहिए जो बेशुमार धन दौलत दिलाते हैं. कार्तिक मास में भगवान विष्‍णु और लक्ष्‍मी जी की कृपा पाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें. फिर तुलसी जी को जल चढाएं. इस दौरान 'महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी. आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते..' मंत्र का जाप करें. वहीं शाम को तुलसी कोट में घी का दीपक जलाएं. इससे मां लक्ष्‍मी बहुत प्रसन्‍न होती हैं. </p>
<p>- कार्तिक माह में तुलसी का पूजन करने के अलावा तुलसी के पौधे का दान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. वहीं इस महीने में घर में तुलसी का पौधा लगाना बहुत सुख-समृद्धि देता है. </p>
<p>- कार्तिक मास में गुरुवार के दिन तुलसी के पौधे में कच्‍चा दूध मिश्रित जल चढ़ाएं. </p>
<p>- कार्तिक मास में श्रीहरि और तुलसी जी का विवाह रचाएं. इससे भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्‍मी खूब कृपा करते हैं और घर में खुशियां रहती हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/kartik-month-taking-kartik-bath-and-tulsi-puja-in-this-month-is-considered-very-auspicious-know-its-						]]>
					</link>
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					<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 11:48:05 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[घर में चाहते हैं लक्ष्मी का वास तो इस धनतेरस करे ये काम, कभी नहीं होगी धन की कमी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>जिन घरों में नित्य पूजा पाठ, संध्या उपासना आदि उत्सव होते रहते हैं और जो लोग भगवान शिव की आराधना करते हैं वहां पर लक्ष्मी जी का वास रहता है. जिस घर में देवी देवताओं की प्रतिमा के सामने धूप दीप आदि जलाए जाते हैं, भोग लगाया जाता है और जो लोग अपने गुरु को ईश्वर मान कर पूजा करते हैं. घर परिवार के बड़े बुजुर्गों का सम्मान करते हैं और नित्य प्रति उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं उनके घरों में भी लक्ष्मी जी विराजमान रहती हैं. ऐसे घरों में धन की कभी कोई कमी नहीं रहती है और पूरा परिवार सुखमय जीवन व्यतीत करता है.</p>
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इस स्तोत्र का पाठ करने से दूर होगा पति पत्नी का मनमुटाव
<p>यदि किसी के घर में पति पत्नी में नहीं पटती है, मनमुटाव रहता है और आए दिन कलह होती रहती है तो आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें, पति पत्नी के बीच की कटुता का शमन हो जाएगा. सूर्य को प्रतिदिन लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर तीन बार अर्ध्य दें तो घर में शांति बनी रहेगी. सूर्य को अर्घ्य देते हुए “ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्त्र किरणाय मम वांछित देहि देहि स्वाहाः” मंत्र का जाप करें.</p>
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इस मंत्र का भी करें जाप
<p>आप इस मंत्र का बाद में 108 बार जाप भी कर सकते हैं. इस मंत्र के अलावा ''ऊँ देवेंद्राणि नमस्तुभ्यं देवेंद्र प्रिय यामिनी, विवाहं भाग्यमारोग्यं शीघ्रलाभं च देहि मेंः'' मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं. ऐसा करने से आपका दांपत्य जीवन सुखी हो जाएगा और पत्नी के साथ अच्छे संबंध स्थापित होंगे.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-want-lakshmi-to-reside-in-the-house-then-do-this-work-on-this-dhanteras-there-will-never-be-a						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-you-want-lakshmi-to-reside-in-the-house-then-do-this-work-on-this-dhanteras-there-will-never-be-a</guid>
					<pubDate>Sun, 09 Oct 2022 13:20:14 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[धन संकट से चाहते हैं मुक्ति तो करें तुलसी से जुड़े ये अचूक उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हर कोई अपने जीवन में धन दौलत और सुख समृद्धि पाना चाहता है इसके लिए वह कड़ी मेहनत और प्रयास भी करता है लेकिन फिर भी उसे पूरा फल प्राप्त नहीं होता है और वह धन की कमी के कारण हमेशा ही परेशान रहता है धन संकट से व्यक्ति के कई काम रुक जाते हैं</p>
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धन संकट से चाहते हैं मुक्ति तो करें तुलसी से जुड़ा ये अचूक उपाय
<p>ऐसे में अगर आप धन से जुड़ी परेशानियों को दूर करना चाहते है तो कुछ अचूक उपाय इसमें आपकी सहायता कर सकते हैं इन उपायों को करने से धन की कमी दूर हो जाती है और सुख समृद्धि का वास होता है माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है </p>
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<strong>जानिए तुलसी से जुड़े उपाय</strong>
<p>हिंदू धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र माना जाता है इस धर्म को मानने वाले अधिकतर लोगों के घर में तुलसी का पौधा लगा होता है और लोग रोजाना इसकी पूजा करते हैं सुबह जल चढ़ाते हैं और शाम को तुलसी के आगे दीपक जलाते हैं ऐसे में धन की समस्या को दूर करने के लिए आप गुरुवार और शुक्रवार के दिन तुलसी के पौधे पर दूध अर्पित करें ऐसा करने से धन संपदा में वृद्धि होती है और घर में देवी लक्ष्मी वास करती है।</p>
<p>वही इन दिनों में आप पीले रंग के वस्त्र को लेकर मंदिर में जाएं और वहां तुलसी के पौधे के आसपास जो घास या दूब उगी हो में लपेटकर अपने घर में धन स्थान पर लाकर रख दें। ऐसा करने से सुख शांति बनी रहती है और धन की समस्या भी दूर हो जाती है किसी भी गुरुवार के दिन पुष्प नक्षत्र में काली हलदी को कामिया सिंदूर और गुग्गुल की धूप देकर लाल वस्त्र में लपेटकर कुछ मुद्रा सहित तिजोरी या फिर धन रखने के स्थान पर रख दें। ऐसा करने से धन में निरंतर वृद्धि होती है और दूर हो जाती है</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-want-to-get-rid-of-money-crisis-then-do-these-surefire-remedies-related-to-tulsi						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-you-want-to-get-rid-of-money-crisis-then-do-these-surefire-remedies-related-to-tulsi</guid>
					<pubDate>Sun, 09 Oct 2022 12:47:51 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[तुलसी के पौधे की पूजा करते समय करें यह छोटा सा काम, आपके ऊपर होगी लक्ष्मी माँ की कृपा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हमारे देश में मां तुलसी को काफी पवित्र माना जाता है और हिंदुओं के घरों में रोजाना तुलसी के पौधे को जल दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी के पौधे को जल देने से मां लक्ष्मी की अपार कृपा होती है और सुख सुविधा और संपत्ति घर में भरी रहती है। रविवार और एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए।तुलसी की नियमित पूजा करने से जीवन में चल रही परेशानियां दूर हो सकती हैं। देश में लगभग सभी घरों के आंगन में तुलसी का पौधा होता है। शास्त्रों के अनुसार मा तुलसी की पूजा करने से घर में धन-संपत्ति की वर्षा होती है और सुख सम्मान मिलता है।</p>
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<p>इतना ही कई देवी-देवताओं की पूजा अर्चना में भोग चढ़ाने के लिए तुलसी के पत्‍ते इस्तेमाल होते हैं। खासतौर पर इसके बिना श्री विष्णु जी की पूजा पूरी नहीं होती है।इसलिए आपको रोजाना तुलसी जी की पूजा जरूर करनी चाहिए। हालांकि तुलसी जी की पूजा के दौरान आपको कुछ चीजें जरूर करनी चाहिए। आइए जानते हैं। हालांकि तुलसी की पूजन के दौरान कुछ ऐसी चीज है जो नहीं करनी चाहिए तो आइए जानते हैं कौन है वह चीजें –</p>
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तुलसी पूजा के वक्त जरूर करें ये छोटा सा काम
<ul>
<li>नियमित रूप से सुबह तुलसी के पौधे की पूजा करने के बाद उसमें जल चढ़ाना चाहिए।</li>
<li>रोजाना शाम को संध्‍यावंदन करने के बाद तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी जी का वास होता है।</li>
<li>हालांकि रविवार और एकादशी के दिन तुलसी में भूलकर भी जल नहीं चढ़ाना चाहिए और ना ही इस दिन इसकी पत्तियां तोड़नी चाहिए।</li>
<li>अगर आपको इस दिन तुलसी की पत्तियों की जरूरत पड़े तो ऐसे में एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।</li>
<li>मान्यताओं के अनुसार, तुलसी की नियमित पूजा करने से जीवन में चल रही परेशानियां दूर हो सकती हैं।</li>
</ul>
<p> </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-this-small-work-while-worshiping-tulsi-plant-you-will-be-blessed-by-goddess-lakshmi						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-this-small-work-while-worshiping-tulsi-plant-you-will-be-blessed-by-goddess-lakshmi</guid>
					<pubDate>Sat, 08 Oct 2022 12:06:02 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[इस शरद पूर्णिमा इन राशियों के लिए है अत्यंत शुभ, मिलेगी कामयाबी होगी धन की बारिश]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर माह के आखिरी दिन पूर्णिमा मनाई जाती है. हर पूर्णिमा का अलग महत्व होता है. अश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस बार शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर के दिन पड़ रही है. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है इसलिए शरद पूर्णिमा की रात आकाश से अमृत की बूंदों की वर्षा होती है. इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी महत्व बताया जाता है. </p>
<p>इस दिन इनकी पूजा से धन की कमी दूर होती है और जीवनभर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. शरद पूर्णिमा पर ग्रहों की चाल का सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा. लेकिन कुछ राशि के जातक को इस दिन विशेष रूप से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी. आइए जानते हैं 24 घंटे बाद किन जातकों को धन लाभ होने वाला है.</p>
<p><strong>मेष राशि-</strong> ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस राशि के लोगों के लिए शरद पूर्णिमा का दिन खास होने वाला है. आय में वृद्धि की पूरी संभावना है. जातकों के रुके हुए कम पूरे होते दिख रहे हैं. इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी. यात्रा पर जा सकते हैं. वहीं, यात्रा से धन लाभ होने की भी उम्मीद है. अगर निवेश करने की सोच रहे हैं, तो  ये समय अनुकूल है. पैसों की बचत कर पाएंगे. अगर वाहन खरीदने की सोच रहे हैं, तो जल्द ये इच्छा पूरी होती दिख रही है. </p>
<p><strong>कन्या राशि-</strong> इस राशि के जातकों के लिए ये समय अनुकूल है. ये लोग मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाएंगे. इस दौरान आर्थिक लाभ होने की संभावना नजर आ रही है. परिवार का पूरा सहयोग पाएंगे. कार्यस्थल पर लोकप्रियता में वृद्धि होगी. शरद पूर्णिमा पर बॉस की सराहना मिल सकती है. आमदनी में बढ़ोतरी हो सकती है. कारोबारियों के लिए भी शरद पूर्णिमा का दिन बेहद खास है. धन लाभ होने की संभावना है. </p>
<p><strong>तुला राशि-</strong> इस राशि के जातकों को आय में वृद्धि हो सकती है. किसी भी काम में जीत मिलेगी. रुके हुए काम इस दौरान पूरे होंगे. कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी और नई जिम्मेदारी मिल सकती है. ऑफिस के काम से बाहर यात्रा पर जाना पड़ सकता है, जिससे धन प्राप्ति के योग बनते नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं, जरूरी कामों में पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा. इस दिन का उपयोग सही से करें, क्योंकि इस दिन आप पर मां लक्ष्मी पूर्ण रूप से मेहरबान हैं. </p>
<p><strong>धनु राशि-</strong> शरद पूर्णिमा पर धनु राशि के लोगों को निवेश में लाभ मिल सकता है. पार्टनरशिप के काम से भारी मुनाफा हो सकता है. पार्टनर के साथ संबंध मजबूत होंगे. इस दौरान नई नौकरी मिल सकती है. इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर काम की सराहना की जा सकती है. पुराने निवेश से लाभ मिलने की संकेत हैं. वहीं, मां लक्ष्मी की कृपा से पुराना कर्ज चुका सकेंगे. </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/this-sharad-purnima-is-very-auspicious-for-these-zodiac-signs-you-will-get-success-there-will-be-rai						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/this-sharad-purnima-is-very-auspicious-for-these-zodiac-signs-you-will-get-success-there-will-be-rai</guid>
					<pubDate>Sat, 08 Oct 2022 10:22:18 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[स्वप्न विज्ञान : अगर आप सपने में कोई चीज देख लेते है,तो जान लीजिए उसका आपके जीवन पर क्या असर होने वाला है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>स्वप्न विज्ञान में सपनों को भविष्य के संकेत के तौर पर लिया जाता है. ज्योतिष शास्त्र में हर सपने का कोई न कोई अर्थ होता है. ये सपने हर बार कोई न कोई ऐसा संकेत दे रहे होते हैं, जिनका अर्थ होता है- या तो आपके जीवन में कुछ अच्छा घटित होने वाला है अथवा कुछ बुरा.</p>
<p>माना जाता है कि नींद में आने वाले ख्वाबों का अपना एक अर्थ होता है. स्वप्न विज्ञान में सपनों को भविष्य के संकेत के तौर पर लिया जाता है. ज्योतिष शास्त्र में हर सपने का कोई न कोई अर्थ होता है. ये सपने हर बार कोई न कोई ऐसा संकेत दे रहे होते हैं, जिनका अर्थ होता है- या तो आपके जीवन में कुछ अच्छा घटित होने वाला है अथवा कुछ बुरा. ज्योतिष शास्त्र में सपनों को लेकर कई उपाय भी बताए गए हैं, जिसे करके आप ऐसी चीजों से छुटकारा भी पा सकते हैं कि आपके साथ कुछ भी अहित न हो. ऐसे में आचार्य विक्रमादित्य से जानिए सपने में डायरी या ब्लैकबोर्ड देखने का क्या मतलब है. ये सपने आपके भविष्य को लेकर क्या संकेत दे रहे हैं.</p>
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<strong>जानिए बाल काटने के सपने का क्या है संकेत </strong>
<p>सपने में बाल कटवाते देखना हुए शुभ संकेत माना जाता है. आने वाले समय में आपके ऊपर जो भी जिम्मेदारियां या कर्जा है, उससे आप जल्द ही मुक्त हो जायेंगे. आपको जल्द ही ढेर सारे धन की प्राप्ति होगी और आपके जीवन में खुशहाली आयेगी. अगर आप या आपके घर में कोई लंबे समय से बीमार चल रहा है तो वह जल्दी स्वस्थ हो जायेगा. ऐसे सपने जीवन में शुभ योग बनाते हैं.</p>
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<strong>जंगली जानवर का हमला होने का सपना </strong>
<p>वहीं माना जाता है कि यदि आपके सपने में आप पर किसी खूंखार जंगली जानवर ने हमला किया है तो समझ लीजिए कि आप किसी बड़ी परेशानी में फंसने वाले हैं। इसका अर्थ यह भी है कि आपके परिवार में चल रही समस्‍याओं का आपकी प्रोफेशनल लाइफ और आपके बिजनस पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है और जिसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। जंगली जानवर का सपने में आप पर हमला इस बात का भी संकेत है कि आप भविष्‍य में अपने माता-पिता की ओर से कोई दुखद समाचार मिल सकता है। यहां तक कि आपका कोई करीबी भी आपको धोखा दे सकता है।</p>
<strong>कुछ जल्द ही अच्छा होगा ऐसा संकेत देता है ये सपना</strong>
<p>स्वपन शास्त्र के अनुसार, सपने में अगर खुद को या फिर किसी और को आत्महत्या करते हुए देखा है तो यह शुभ माना जाता है। यह सपना आपको दीर्घायु होने का संकेत देता है। स्वास्थ्य के लिए लिहाज से भी यह सपना अच्छा माना जाता है। अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो आपके जल्द बेहतर होने के संकेत देता है।</p>
कुएं<strong> से पानी निकलने का सपना देता है ये संकेत </strong>
<p>सपने से कुएं से पानी निकालते हुए देखना शुभ संकेत माना जाता है. इसका सकारात्मक प्रभाव जीवन पर पड़ता है. यह सपना व्यक्ति को जीवन में आगे चलकर होने वाले धन लाभ का संकेत देता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार ऐसे सपने देखने वाले व्यक्ति को गुप्त धन की प्राप्ति भी हो सकती है. इसके अलावा यह सपना जिस व्यक्ति को आता है भविष्य में उसकी आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद रहती है.</p>
<strong>सपने में जंगली जानवरों का शिकार करते देखना</strong>
<p>माना जाता है अगर आपने सपने में ये देखा है कि आप जंगली जानवर का शिकार कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि आपका लालच दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और जिसकी आपको जरूरत नहीं है। इसका अर्थ है कि आप अपने बिजनेस या फिर समाज में आप से जुड़े लोगों से किसी प्रकार का झूठ बोल रहे हैं। इससे आप और आपके दोस्‍तों के बीच झगड़ा हो सकता है।</p>
<strong>यह सपना देता है </strong><strong>लाभ</strong>
<p>अगर आपने खुद का सिर कटा हुआ देखा है तो भविष्य पुराण के अनुसार यह धन लाभ का सूचक है। सपने में खूद का सिर कटा देखना या सिर पर चोट लगने का मतलब है आपका अटका हुआ धन आपको मिलने वाला है या फिर आपको किसी क्षेत्र से लाभ होने वाला है.</p>
<strong>यह सपना बताएगा नुकसान होने का संकेत </strong>
<p>आपने फांसी लगाते हुए सपना देखा है तो यह शुभ संकेत नहीं है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आपको सकारात्मक रहना होगा अन्यथा कोई बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर आपने सपने में किसी की अर्थी देखी है तो यह शुभ माना जाता है इसका अर्थ है कि आपका भाग्य जगने वाला है। वहीं अगर रोगी अर्थी देखे तो यह</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/dream-science-if-you-see-something-in-your-dream-then-know-what-effect-it-is-going-to-have-on-your-l						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/dream-science-if-you-see-something-in-your-dream-then-know-what-effect-it-is-going-to-have-on-your-l</guid>
					<pubDate>Fri, 07 Oct 2022 12:41:44 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आप भी अगरबत्ती का प्रयोग करते हैं पूजा-पाठ में तो तुरंत कर दे बंद, लगता है पितृदोष,जानिए इसका कारण]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार बांस को शुभ माना जाता है और यह सकारात्मकता और साथ ही साथ उन्नति लाता है। वास्तु दोष को दूर करने में बांस काफी सहायता करता है। वैसे तो अगरबत्ती शुभ है लेकिन अगरबत्ती में बांस का प्रयोग होता है इसलिए अगरबत्ती को जलाना अनुचित माना जाता है।</p>
<strong>बांस जलाने से पितृ दोष लगता है</strong>
<p>बांस को वंश का प्रतीक भी माना गया है। ऐसे में बांस को जलाना अपने हाथों से अपने पारिवारिक वंश को नुकसान पहुंचाने जैसा है। हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार और अर्थी तैयार करने के लिए बांस का उपयोग किया जाता है। हिंदू धर्म में चिता जलाने के लिए अन्य लकड़ियों का उपयोग होता है लेकिन कभी बांस का प्रयोग नहीं किया जाता है। क्योंकि बात चलाने से पितृ दोष लगता है।</p>
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<strong>भाग्य का नाश होता है</strong>
<p>बांस जलाने से टॉक्सिक हेवी मेटल जलते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। फेंगशुई के मुताबिक बांस जलाने से जातक के किस्मत का नाश होता है। बांस का पौधा सौभाग्य लाने वाला है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-also-use-incense-sticks-in-worship-then-stop-it-immediately-it-seems-pitradosh-know-the-reaso						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-you-also-use-incense-sticks-in-worship-then-stop-it-immediately-it-seems-pitradosh-know-the-reaso</guid>
					<pubDate>Fri, 07 Oct 2022 12:38:26 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कन्याओं के विवाह बाधा दूर करने के आसान उपाय, विष्णु जी के मंदिर में चढ़ा दें ये चीज]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>लड़का हो या लड़की अगर इनका विवाह सही आयु में नहीं तय हुआ तो माता पिता का परेशान होना स्वाभाविक है. वैसे भी हर मां बाप की यह दिली इच्छा होती है कि उनके पुत्र पुत्री का विवाह उचित समय में हो जाए और आंगन में किलकारियां गूंजने लगे तो वह भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त हुआ समझें. कई बार तो ऐसा होता है कि रिश्ते बनते-बनते अचानक इनकार हो जाता है. बहुत से ऐसे परिवार भी हैं जिनके पास धन दौलत है, बेटी पढ़ी लिखी सुंदर और सुयोग्य भी है फिर भी किन्हीं कारणों से उसका विवाह नहीं हो पा रहा है. आइए जानते हैं ऐसी कन्याओं के विवाह की बाधा को कैसे दूर किया जा सकता है.</p>
<p><strong>विष्णु जी के मंदिर में चढ़ा दें ये चीज</strong></p>
<p>शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार को कन्या विष्णु और लक्ष्मी जी के किसी ऐसे मंदिर में जाए जहां पर विष्णु और लक्ष्मी जी की बड़ी मूर्ति हो. इस मंदिर में जाने के बाद कन्या श्री विष्णु जी को दूल्हे के सेहरे के ऊपर लगने वाली कलगी चढ़ाएं. साथ ही एक बड़ी सी पीले रंग की गेंदे के फूलों की माला भी विष्णु और लक्ष्मी जी को अर्पित करने के साथ ही बेसन के पांच लड्डुओं का भोग लगाएं. इसके बाद कन्या हाथ जोड़कर पूरी आस्था, श्रद्धा और विश्वास के साथ अपने विवाह की कामना करे, तो उसकी कामना अवश्य ही पूरी होती है.</p>
<p><strong>गुरुवार को इस तरह से करें पूजन</strong></p>
<p>विवाह योग्य कन्या प्रत्येक गुरुवार को पीले रंग के कपड़े पहने, केले के वृक्ष पर चंदन व केसर से स्वास्तिक बना कर जल व चावल चढ़ाए, साथ ही अपने भी हल्दी या केसर का तिलक लगाए, यह प्रयोग नौ गुरुवार तक बिना किसी गैप के करें तो कन्या के विवाह के शीघ्र विवाह की स्थितियां बनने लगेंगीं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/easy-ways-to-remove-obstacles-in-the-marriage-of-girls-offer-this-thing-in-vishnus-temple						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/easy-ways-to-remove-obstacles-in-the-marriage-of-girls-offer-this-thing-in-vishnus-temple</guid>
					<pubDate>Fri, 07 Oct 2022 08:39:34 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शुक्रवार के उपाय: धनवान बनने के लिए चावल और हल्दी से कर ले ये उपाय और देखे चमत्कारी लाभ]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>मां लक्ष्मी को धन की देवी के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए नियमित रूप से पूजा-पाठ के साथ कुछ ज्योतिषीय उपाय भी कर  लिए जाएं, तो मां लक्ष्मी भक्तों की सभी समस्याएं दूर  करती हैं. साथ ही, व्यक्ति के घर धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती. ज्योतिष के इन उपायों को कर ने से धन में तो वृद्धि होती ही है. साथ ही, घर का वातावरण भी शुद्ध होता है. </p>
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय 
<p>- अगर आप मां लक्ष्मी की कृपा जीवनभर बनाए रखना चाहते हैं, तो चावल के साबूत 21 दानों को हल्दी में रंग लें. इन चावलों को लाल रंग के एक कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी के पास रख दें. मां लक्ष्मी के पूजन के बाद लाल सिंदूर लगा कर इस पोटली को तिजोरी या फिर धन रखने वाली जगह पर रख दें. कुछ ही दिन में लाभ होगा. </p>
<p>- अगर पैसे आते ही खर्च हो जाते हैं तो वट या पीपल के 21 पत्ते ले लें और इस पर भगवान श्री राम का नाम लिखें. अब शुक्रवार के दिन इन्हें नदी में प्रवाहित कर दें. इस उपाय को लगातार 5 हफ्ते तक करने से  करने से फायदा होगा. </p>
<p>- कहते हैं कि जहां साफ-सफाई होती है मां लक्ष्मी भी वहीं वास करती हैं. गंदी जगह को मां लक्ष्मी के हिसाब से बहुत अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि मां लक्ष्मी गंदगी और बिखरे घर में वास नहीं करतीं. इसलिए घर में साफ-सफाई रखें. </p>
<p>- घर में मौजूद नकारात्मकता घर में बरकत नहीं होने देती. ऐसे में शाम के समय घर में जल का छींटा देने से नकारात्मकता का नाश होता है. साथ ही गूगल की धूनी दिखाएं. घर में सकारात्मता आएगी. </p>
<p>- धन लाभ के लिए नियमित रूप से घर में महालक्ष्मी की पूजा करें और महालक्ष्मी सूक्त का पाठ करें. पाठ के अंत में लक्ष्मी जी को गुलाब के फूल अर्पित करें और आरती करें. </p>
<p>- ज्योतिष अनुसार रात में बिना मुंह और पैर धोए बिना सोने से धन खर्च होने लगता है. शास्त्रों के अनुसार इससे घर में दरिद्रता आती है. खाना खाने के बाद झूठे मुंह सोने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. </p>
<p>- खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए रात को सोने से पहले किचन को पूरी तरह से साफ करके सोना चाहिए. रसोई के गंदे रहने से मां अन्नपूर्णा नराज हो जाती हैं. और व्यक्ति के धन-धान्य की कमी हो जाती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/friday-remedies-to-become-rich-do-these-remedies-with-rice-and-turmeric-and-see-the-miraculous-benef						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/friday-remedies-to-become-rich-do-these-remedies-with-rice-and-turmeric-and-see-the-miraculous-benef</guid>
					<pubDate>Fri, 07 Oct 2022 08:15:31 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आखिर दशहरे के दिन क्यों खाई जाती हैं जलेबी, जानें भगवान राम से इसका कनेक्शन]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज देश भर में दशहरे का पर्व मनाया जायेगा। दशहरा हिंदूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। और ये पर्व साल के सबसे पवित्र और शुभ दिनों में से एक माना गया है। यह पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। इसलिए ही इसे विजयादशमी या आयुध-पूजा भी कहा जाता है इसी दिन पुरूषोत्तम भगवान राम ने रावण का वध किया था। कुछ स्थानों पर यह त्यौहार विजयादशमी, के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यतानुसार यह उत्सव माता विजया के जीवन से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा कुछ लोग इस त्योहार को आयुध पूजा के रूप में मनाते हैं। </p>
<p>GOOGLEADBLOCK</p>
<p>दशहरा को विजयदशमीं के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने राक्षक महिषासुर का वध किया था। इसके अलावा इसी दिन राम की रावण पर भी जीत हुई थी। माना जाता है कि देवी दूर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से लड़ाई की थी। दसवें दिन, जिसे दशमी भी कहते हैं उन्हें विजय हासिल हुई थी। </p>
<p>दशहरे पर जब भी भी रावण दहन देखने गए होंगे तो देखा होगा कि आसपास जलेबी के बहुत से स्टॉल होते हैं। तो कभी आपने सोचा है कि दशहरे वाले दिन लोग जलेबी क्यों खाते हैं और रावण दहन के बाद जलेबी लेकर घर क्यों जाते हैं। कहते हैं कि राम को शश्कुली नामक मिठाई बहुत पसंद थी। जिसे आजकल जलेबी के नाम से जाना जाता है। इसलिए रावण पर विजय के बाद जलेबी शी मनाई जाती है। </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/after-all-why-jalebi-is-eaten-on-the-day-of-dussehra-know-its-connection-with-lord-ram						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/after-all-why-jalebi-is-eaten-on-the-day-of-dussehra-know-its-connection-with-lord-ram</guid>
					<pubDate>Thu, 06 Oct 2022 14:30:55 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Vastu Tips : जीवन में तरक्की और कर्ज से छुटकारा पाना चाहते हैं तो बाथरूम में रखें इस रंग की बाल्टी में पानी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मनुष्य के जीवन में घट रही घटनाओं का सीधा संबंध उसके कुंडली में मौजूद ग्रह नक्षत्रों से होता है। अगर बात करें वास्तु शास्त्र के मुताबिक व्यक्ति घर में रखी वस्तुओं से भी गहरा संबंध होता है और इसका उसके जीवन पर असर दिखता है। अगर किसी घर में ज्यादा फटे पुराने कपड़े या टूटे-फूटे बर्तन होते हैं तो उस घर में दरिद्रता तेजी से बढ़ती है। अगर वही घर में साफ-सुथरे चीजें रखी हो और रोजाना सफाई होती रहती है। तो उस घर में खुशियां और तरक्की भी बढ़ती है। ऐसे में घर के सामान की दिशा उसे रखने का तरीका और उस सामान का रंग रूप भी व्यक्ति के जीवन में खास प्रभाव डालता है।</p>
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<p>अगर आप कर्ज से घिरे हुए हैं और इससे जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं तो वास्तु शास्त्र में इसके लिए एक खास उपाय बताए हैं। वास्तु के मुताबिक बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी में पानी भरकर रखने से लंबे समय का कर्ज से जल्द से जल्द छुटकारा मिलता है। इस बात का खास ध्यान रखें की बाल्टी हमेशा साफ-सुथरी रहे और कर्ज में डूबा हुआ व्यक्ति रात में सोने से पहले नीले रंग की बाल्टी में पानी भरकर रखें। सुबह उस पानी का इस्तेमाल बाथरूम की सफाई के लिए करें, भूलकर भी इस पानी का इस्तेमाल नहाने के लिए ना करें। वरना असर विपरीत हो सकता है। अगर बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी में पानी भरकर रखते हैं तो उन्नति के रास्ते खुलते हैं और घरों घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।</p>
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रसोई में भूलकर भी ना छोड़े झूठे
<p>झूठे  बर्तन धर्म शास्त्र के मुताबिक रसोई में सिंक में झूठे बर्तन नहीं छोड़ना चाहिए, अगर आप रात के समय बर्तन नहीं हो पाते हैं तो पानी से ही धो कर रख दें। इससे धन की हानि नहीं होगी।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/vastu-tips-if-you-want-to-progress-in-life-and-get-rid-of-debt-then-keep-water-in-a-bucket-of-this-c						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/vastu-tips-if-you-want-to-progress-in-life-and-get-rid-of-debt-then-keep-water-in-a-bucket-of-this-c</guid>
					<pubDate>Thu, 06 Oct 2022 11:30:35 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Vastu Tips for money : घरों में करे बस यह छोटा सा उपाय, बहुत ही जल्दी अमीर बन जाएंगे आप आपके घरों में होगी पैसों की बारिश]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होने से आर्थिक समृद्धि, सुख, वैभव व अच्छी सेहत की प्राप्ति होती है। जबकि घर में नकारात्मक ऊर्जा होने पर व्यक्ति को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में किसी भी तरह का वास्तु दोष होने पर व्यक्ति को तरक्की में बाधा और धन हानि का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वास्तु शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर घर में सुक-समृद्धि व बरकत को लाया जा सकता है। आप भी जानें वास्तु टिप्स-</p>
<p>कमरों का रंग- वास्तु शास्त्र के अनुसार, कमरे के पूर्व दिशा में हल्के नीले रंग का चुनाव करें। उत्तर दिशा में हरा, पूर्व दिशा में सफेद, पश्चिम दिशा में नीला और दक्षिण दिशा में लाल रंग का चुनाव करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।</p>
<p>जल निकाय की दिशा- वास्तु शास्त्र के अनुसार, जल निकाय को उत्तर, उत्तर पूर्व दिशा में रखें। पानी की टंकी को घर के दक्षिण, दक्षिण पूर्व या दक्षिण पश्चिम में रखें। पानी की टंकी इन दिशाओं में रखने से धन का आगमन होता है।</p>
<p>GOOGLEADBLOCK</p>
<p>तिजोरी रखने की दिशा- वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में तिजोरी को दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा की ओर रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तिजोरी का दरवाजा उत्तर दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ के योग बनते हैं।</p>
<p>GOOGLEADBLOCK</p>
<p>घर रखें व्यवस्थित- घर को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए।</p>
<p>साफ-सुथरे स्थान पर ही मां लक्ष्मी का वास होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर दिशा को व्यस्थित रखना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में धन वृद्धि होती है।</p>
<strong>Vastu Tips :घर के दरवाजे या खिड़कियां-</strong>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के दरवाजे या खिड़कियों को साफ रखना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। बरकत घर आती है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/vastu-tips-for-money-just-do-this-small-remedy-in-homes-you-will-become-rich-very-soon-money-will-ra						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/vastu-tips-for-money-just-do-this-small-remedy-in-homes-you-will-become-rich-very-soon-money-will-ra</guid>
					<pubDate>Wed, 05 Oct 2022 11:58:45 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[MP Utsav: मध्यप्रदेश के इन तीन जगहों पर नहीं किया जाता रावण दहन, बड़ी रोचक है वजह]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>असत्य पर सत्य की जीत के पवित्र पर्व दशहरे को जहां पूरे देश में रावण का पुतला दहन कर भगवान राम की पूजा की जाती है. वहीं मध्य प्रदेश में कुछ गांव ऐसे हैं जहां रावण को आस्था का प्रतीक माना जाता है और दशहरे के दिन यहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है. बल्कि इस दिन रावण की विशेष पूजा अर्चना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो लोग रावण की पूजा करके उनसे मन्नत मांगते हैं उनकी मनोकामान अवश्य पूरी होती है.</p>
<p>GOOGLEADBLOCK</p>
<strong>राजगढ़ में होती है रावण की पूजा </strong>
<p>दरअसल राजगढ़ जिले के भाटखेड़ी गांव में सड़क के किनारे रावण और कुंभकर्ण की प्रतिमा बनी हुई है. यहां के रहवासियों का मानना है कि ये रावण मन्नत पूर्ण करने वाला है. इसलिए ग्रामीण यहां नियमित पूजा अर्चना करते हैं. यहां आस-पास के गांव के लोग भी मन्नत मांगने के लिए आते हैं. मन्नत पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाया जाता है. शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां पर नौ दिन तक रामलीला का आयोजन किया जाता है और दशहरे के दिन रावण की पूजा अर्चना कर राम और रावण के पात्रों द्वारा भाला छुआ कर गांव और जनकल्याण की खुशी के लिए मन्नत मांगी जाती है.</p>
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<strong>विदिशा में होती है रावण की पूजा </strong>
<p>रावण की पत्नी मंदोदरी मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से मानी जाती है. ऐसे में यहां रावण को दामाद माना जाता है और उसे सम्मान के साथ रावण बाबा बोला जाता है. दशहरे दिन यहां रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है, बल्कि इस दिन रावण की नाभि में रुई में तेल लेकर लगाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी नाभि में लगे तीर का दर्द कम हो जाता है. इस दिन लोग रावण की पूजा करके उनसे विश्वकल्याण और गांव की खुशहाली के लिए मन्नत मांगते हैं.</p>
<strong>उज्जैन के इस गांव में होती है रावण की पूजा</strong>
<p>प्रदेश के उज्जैन जिले के काचिखली गांव में भी दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है. बल्कि इस दिन यहां रावण की पूजा की जाती है. यहां के बारे में ऐसी मान्यता है कि यदि रावण की पूजा नहीं की जाएगी तो गांव जलकर राख हो जाएगा. इसी डर से ग्रामीण यहां पर आज भी दशहरे के दिन रावण का दहन न करके उसकी मूर्ति की पूजा करते</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/mp-utsav-ravana-combustion-is-not-done-in-these-three-places-of-madhya-pradesh-the-reason-is-very-in						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/mp-utsav-ravana-combustion-is-not-done-in-these-three-places-of-madhya-pradesh-the-reason-is-very-in</guid>
					<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 13:34:14 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[दशहरा 2022 दशहरे पर रावण दहन कर करें इस पेड़ की पूजा, धन की समस्या दूर होगी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>दशहरे पर रावण दहन कर करें इस पेड़ की पूजा, धन की समस्या दूर होगी सनातन धर्म में दशहरा धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को अन्याय पर धर्म की जीत के उपलक्ष्य में दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस बार दशहरा या विजयदशमी 5 अक्टूबर 2022 को पड़ रही है। इस दिन रावण दहन के साथ-साथ शस्त्र, वाहन की पूजा करने और देवी दुर्गा, भगवान राम, गणपति देव की पूजा करने की भी परंपरा है। इसके अलावा, विजयादशमी को विजया तिथि कहा जाता है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। दशहरे के दिन तीन चीजें उपहार में देना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे देवी लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और घर में किसी भी हाल में धन की कमी नहीं होती है।</p>
<p>GOOGLEADBLOCK</p>
<strong>दशहरा दिवस पर गुप्त दान का महत्व</strong>
<p>दशहरा दिवस न केवल अन्याय पर धर्म की जीत का दिन माना जाता है, बल्कि इसे सुख-समृद्धि लाने वाला दिन भी माना जाता है। इसलिए इस दिन गुप्त दान का बहुत महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता कहती है कि देवी लक्ष्मी इस कृत्य के माध्यम से व्यक्ति पर अपना आशीर्वाद बनाए रखती हैं।</p>
<p>मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें इन तीन चीजों का दान<br />दशहरे के दिन किसी धार्मिक स्थान पर जाकर नई झाड़ू दान करें।<br />दशहरे के दिन भोजन के साथ-साथ वस्त्र भी दान करना चाहिए।<br />इसके बाद मां लक्ष्मी से अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें।</p>
<p>GOOGLEADBLOCK</p>
<p>इस वर्ष दशमी तिथि 4 अक्टूबर को दोपहर 2:20 बजे से शुरू होकर 5 अक्टूबर 2022 को दोपहर 12 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदगम तिथि 5 अक्टूबर को मान्य होगी। अब जबकि सनातन धर्म में उदय तिथि पर कोई भी व्रत उत्सव मनाने का प्रावधान है। ऐसे में इस बार दशहरा पर्व 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा।</p>
<p>दशहरा यानि विजयादशमी 5 अक्टूबर 2022 को है। विजयादशमी पर रावण को जलाने के बाद शमी वृक्ष की पूजा करने का विधान है। आइए जानते हैं दशहरे पर क्यों की जाती है शमी के पेड़ की पूजा और महत्व।</p>
<p>नवरात्रि 4 अक्टूबर 2022 को समाप्त होगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शक्ति पूजा के नौ दिनों के बाद हर साल अश्विन महीने के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल दशहरा यानि विजयादशमी 5 अक्टूबर 2022 को है। इस दिन भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था।</p>
<p>दशहरा रावण का पुतला जलाकर अन्याय पर धर्म की जीत का जश्न मनाने वाला त्योहार है। विजयादशमी के दिन रावण को जलाने के बाद शमी वृक्ष की पूजा करने का विधान है। आइए जानते हैं दशहरे पर क्यों की जाती है शमी के पेड़ की पूजा और महत्व।</p>
<p><strong>दशहरा 2022 मुहूर्त</strong></p>
<p>विजय मुहूर्त – 2:13 अपराह्न – 3:00 अपराह्न (5 अक्टूबर, 2022)</p>
<p><strong>अवधि – 47 मिनट</strong></p>
<p>अपराह्न पूजा मुहूर्त – 1:46 अपराह्न – 3:48 अपराह्न (5 अक्टूबर, 2022)</p>
<p><strong>दशहरे पर शमी वृक्ष पूजा का महत्व</strong></p>
<p>विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह एक धार्मिक मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने रावण से लड़ने से पहले मां दुर्गा और शमी वृक्ष की पूजा की थी। परिणाम लंका पर विजय प्राप्त हुई, तभी से दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा शुरू हुई। विशेष रूप से क्षत्रियों में इस दिन शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।</p>
<strong>रावण दहन के बाद शमी के पत्ते बांटने के फायदे</strong>
<p>विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष की पूजा करने और रावण दहन के बाद उसके पत्ते और प्रियजनों में बांटने की भी प्रथा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शमी के पत्तों को सोना माना जाता है।<br />दशहरे के प्रदोष काल में शमी वृक्ष की पूजा करने से स्वास्थ्य और धन का वरदान मिलता है।<br />शमी के पेड़ को पूजनीय माना जाता है इसलिए विजयदशमी के दिन इसके पत्तों को भाग्य, समृद्धि, खुशी और जीत का आशीर्वाद देने के लिए कहा जाता है, इसलिए इसे रावण को जलाने के बाद प्रियजनों को उपहार में दिया है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/dussehra-2022-worship-this-tree-by-burning-ravana-on-dussehra-the-problem-of-money-will-be-removed						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/dussehra-2022-worship-this-tree-by-burning-ravana-on-dussehra-the-problem-of-money-will-be-removed</guid>
					<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 13:31:09 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए नवमी के दिन करें ये पूजा-पाठ और टोटके, होंगी सारी मनोकामनाएं पूरी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शारदीय नवरात्रि की महानवमी आज 4 अक्‍टूबर, मंगलवार को मनाई जा रही है. नवरात्रि के आखिरी दिन यानी कि नवमी का बड़ा महत्‍व है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. साथ ही 9 दिन के व्रत-पूजा का समापन हवन और कन्या पूजन के साथ किया जाता है. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए नवमी का दिन बहुत अहम होता है. इस दिन किए गए पूजा-पाठ और टोटके-उपाय सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि की महानवमी के कुछ कारगर उपाय- </p>
महानवमी के टोटके 
<p>लंबी बीमारी से निजात पाने का उपाय: जो लोग लंबे समय से किसी बीमारी से परेशान हैं वे आज महानवमी के दिन आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्ण के बीच का हिस्‍सा) में मां दुर्गा का स्‍मरण करके ज्योति जलाएं. इससे बीमारी और शत्रुओं का नाम होता है. </p>
मनोकामना पूर्ति का उपाय:
<p>महानवमी के दिन पूरे भक्ति-भाव से दुर्गा सप्तशती के उत्तम चरित्र का पाठ करें. इससे मनोकामना पूरी होती है.</p>
धन-समृद्धि और खुशहाल जीवन पाने का उपाय:
<p>नवमी के दिन 2 से 10 साल की उम्र की 9 कन्याओं की पूजा करें. उन्हें घर बुलाकर भोजन कराएं. भेंट दें. इससे घर में खूब सुख-समृद्धि आती है. </p>
आर्थिक तंगी दूर करने का उपाय:
<p>नवमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का गंगाजल से करवाएं. फिर पूरे भक्ति भाव से दुर्गा रक्षा स्त्रोत का पाठ करें. मातारानी आपका घर धन-धान्‍य से भर देंगी. </p>
अचानक धनवान बनने का उपाय:
<p>महानवमी के दिन शांत कमरे में उत्तर की दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं. बैठने के लिए पीले रंग का आसन इस्‍तेमाल करें. फिर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्‍वीर के आगे 9 दीपक जलाएं. फिर इन दीपकों के सामने लाल रंग के चावल की ढेरी बनाएं और उस पर श्रीयंत्र स्‍थापित करके लक्ष्‍मी मंत्र का जाप करें. बाद में इस श्रीयंत्र को घर के मंदिर में स्‍थापित कर दें. ऐसा करने से अचानक धन लाभ होता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/to-get-the-blessings-of-maa-durga-do-these-pujas-and-tricks-on-the-day-of-navami-all-your-wishes-wil						]]>
					</link>
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					<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 10:16:32 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्रि के समापन दिवस महानवमी पर न मिलें नौ कन्या, तो करें ये उपाय और करें मातारानी को प्रसन्न]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>नवरात्रि का समापन महानवमी या राम नवमी के दिन किया जाता है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. साथ ही, कन्या को देवी का रूप मानते हुए घर पर आमंत्रित किया जाता है. उनके चरणों को जल से धोकर घर में बैठाया जाता है. उन्हें भोजन कराया जाता है. ऋंगार का सामान उपहार में दिया जाता है. नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान 9 कन्याओं को घर पर बुलाया जाता है. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये 9 कन्याएं मां के नौ स्वरूप होते हैं. मान्यता है कि कन्याओं के घर में प्रवेश करने से माता रानी स्वयं घर में विराजती हैं. लेकिन कई बार लोगों को पूरी 9 कन्याएं पूजन के लिए नहीं मिल पातीं और ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि के व्रत का समापन 9 कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही पूरा माना जाता है. ऐसे में ज्योतिषीयों के अनुसार क्या किया जाना चाहिए. जानें. </p>
<p><strong>यूं करें कन्याओं का पूजन</strong></p>
<p>- अक्सर जो लोग नवरात्रि का व्रत रखते हैं वे महानवमी का पूजन करते हैं, लेकिन कुछ लोग व्रत न रखने के बाद भी नवमी पूजन करते हैं और घर पर कंजकों का बुलाते हैं. इस दिन मां दुर्गा की पूजा कर हवन किया जाता है. इसके बाद मां दुर्गा को हलवा-चने और पूरी का भोग लगाया जाता है. लेकिन अगर कन्याओं को भोजन कराने में असमर्थ हैं, तो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है, कि आप मां को लगाए भोग का अंश छत पर पक्षीयों के लिए भी रख सकते हैं. इसका फल कन्या पूजन के सामान ही मिलता है. या फिर आप गौ माता को भी प्रसाद देकर इसका पुण्य पा सकते हैं. </p>
<p>- अगर कन्या पूजन के दौरान कोई कन्या कम रह जाती है, तो उसकी पूरी थाली पूरी-हलवा चने का प्रसाद और गिफ्ट-पैसे आदि बाहर किसी मंदिर में दे आएं या फिर कहीं बाहर जाकर किसी कन्या को पकड़ा दें. इसके साथ ही, कन्या के वहीं पर  पैर छूना न भूलें. </p>
<p>- अगर आप कहीं घर से बाहर हैं और घर पर कन्याओं को भोजन करवाना संभव नहीं है, तो आप सूखे मेवे, धन और कुछ प्रयोग में आने वाली चीजों को कन्या के नाम से पूजा में रखकर पूज लें और फिर बाद में जब भी संभव हो, कन्याओं को दे दें. ऐसा करने से भी कन्याओं को भोजन कराने जितना फल मिलता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/nine-girls-do-not-meet-on-mahanavami-the-closing-day-of-navratri-then-do-these-measures-and-please-t						]]>
					</link>
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					<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 10:09:00 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्री की इस महानवमी पर बना विशेष शुभ योग 'रवि योग', यह पूजा-पाठ के अलावा नया काम शुरू करने के लिए भी शुभ है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शारदीय नवरात्रि के 9 दिन बहुत महत्‍वपूर्ण होते हैं लेकिन इसकी अष्‍टमी और नवमी विशेष होती हैं. इसी कारण इन्‍हें महाअष्‍टमी और महानवमी कहा जाता है. इस साल 4 अक्‍टूबर को महानवमी मनाई जाएगी. नवमी के दिन 9 दिनों के व्रत का पारण किया जाता है. कन्‍या पूजन और हवन भी किया जाता है. नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है. ज्‍योतिष के अनुसार इस साल नवमी पर एक विशेष शुभ योग 'रवि योग' बन रहा है. रवि योग को पूजा-पाठ के अलावा नए काम शुरू करने, शुभ काम करने के लिए बहुत अच्‍छा माना गया है. </p>
नवमी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त 
<p>वैदिक पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि 3 अक्टूबर 2022 की शाम 4 बजकर 36 मिनट से शुरू हो चुकी है और 4 अक्टूबर 2022 की दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार नवरात्रि की नवमी 4 अक्टूबर 2022 को मनाई जाएगी. वहीं नवमी के दिन हवन-कन्‍या पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त 4 अक्‍टूबर की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक है. वहीं नवरात्रि व्रत का पारण करने के लिए शुभ समय दोपहर 2 बजकर 21 मिनट के बाद है. </p>
नवमी पूजा विधि
<p>नवमी की सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें. फिर एक चौकी पर देवी सिद्धिदात्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. साथ ही भगवान गणेश, वरुण और नवग्रह की स्थापना करें. इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और सभी 9 देवियों की पूजा करें. मंत्र जाप करें. मां सिद्धदात्री की पूजा-अर्चना करें और 'सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥' मंत्र का जाप करें इससे वैभव और यश मिलता है. यदि अष्‍टमी को कन्‍या पूजन नहीं किया है तो नवमी के दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को भोजन कराएं, भेंट दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें. </p>
<p>मां सिद्धिदात्री की आरती</p>
<p>जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता</p>
<p>तू भक्तों की रक्षक  तू दासों की माता,</p>
<p>तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि</p>
<p>तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!</p>
<p>कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम</p>
<p>जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,</p>
<p>तेरी पूजा में तो न कोई विधि है</p>
<p>तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!</p>
<p>रविवार को तेरा सुमरिन करे जो</p>
<p>तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,</p>
<p>तुम सब काज उसके कराती हो पूरे</p>
<p>कभी काम उसके रहे न अधूरे!!</p>
<p>तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया</p>
<p>रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,</p>
<p>सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली</p>
<p>जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!</p>
<p>हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा</p>
<p>महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,</p>
<p>मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता</p>
<p>वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/a-special-auspicious-yoga-ravi-yoga-made-on-this-mahanavami-of-navratri-it-is-also-auspicious-to-sta						]]>
					</link>
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					<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 10:00:31 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शास्त्रों में तुलसी के पत्ते तोड़ने और जल अर्पित करने को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं. आइए जानें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>Tulsi Puja Rules: हिंदू धर्म में तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है. नियमित रूप से तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है. शास्त्रों में तुलसी के पौधे को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं. तुलसी को तोड़ने, जल अर्पित क रने और पूजा आदि पूजा में तुलसी का प्रयोग किया जाता है.</p>
<p>विष्णु भगवान की पूजा तुलसी के भोग के बिना अधूरी मानी जाती है. शास्त्रों में तुलसी के पत्ते तोड़ने और जल अर्पित करने को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं. आइए जानें.</p>
<strong>Tulsi Puja Rules:तुलसी पत्र तोड़ने के नियम</strong>
<ul>
<li>मान्यता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए तुलसी के पत्ते तोड़ते समय हाथ जोड़कर उनसे अनुमति लेना जरूरी है. इसके बाद ही तुलसी पत्र तोड़ें.</li>
<li>तुलसी के पत्ते चाकू, कैंची या नाकून आदि से नहीं तोड़ने चाहिए.</li>
<li>तुलसी के पत्ते बिना कारण न तोड़ें. मान्यता है कि अगर कोई ऐसा करता है को घर में दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है.</li>
</ul>
<p>तुलसी को जल देने के नियम</p>
<ul>
<li>तुलसी में जल अर्पित करने से पहले साधक इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी तरह का अन्न जल ग्रहण न किया हो.</li>
<li>मान्यता है कि तुलसी में सूर्योदय के समय जल अर्पित करना सर्वोत्तम माना जाता है. इस बात का भी खास ख्याल रखें कि तुलसी के पौधे में जरूरत से ज्यादा जल अर्पित नहीं करना चाहिए.</li>
</ul>
<ul>
<li>शास्त्रों में तुलसी में जल अर्पित करते समय बिना सिला कपड़ा पहन कर जल अर्पित करने की सलाह दी गई है.</li>
<li>रविवार और एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी के पौधे में जल अर्पित न करें. मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.</li>
</ul>
<p>-बिना नहाए तुलसी में जल अर्पित न करें. हमेशा स्नान आदि के बाद साफ वस्त्र धारण करने के बाद ही तुलसी में जल अर्पित करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/some-special-rules-have-been-told-in-the-scriptures-regarding-breaking-of-tulsi-leaves-and-offering-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/some-special-rules-have-been-told-in-the-scriptures-regarding-breaking-of-tulsi-leaves-and-offering-</guid>
					<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 00:27:10 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[महाष्टमी के दिन बिना हवन के पूजा का लाभ नहीं मिलता, जाने हवन-पूजन का शुभ मुहूर्त]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हुई थी. 9 दिनों तक चलने वाला यह महापर्व अब समाप्ति की तरफ है. 3 अक्टूबर को महाअष्टमी मनाई जाएगी. नवरात्रि का आठवां दिन काफी खास माना जाता है. इस दिन महागौरी की पूजा अर्चना करने के साथ कन्या पूजन भी किया जाता है. इस दिन हवन करना काफी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि बिना हवन के पूजा का लाभ नहीं मिलता है. वहीं, पूजा और हवन के लिए शुभ मुहूर्त भी जानना बेहद जरूरी है.</p>
<p><strong>शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>महाअष्टमी के तिथि की शुरुआत 2 अक्टूबर 2022 को शाम 06 बजकर 47 मिनट से हो जाएगी. वहीं, इसका समापन 3 अक्टूबर 2022 को शाम 4 बजकर 37 मिनट पर है. इस दिन शुभ योग 2 अक्टूबर शाम 5 बजकर 14 मिनट से 3 अक्टूबर दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. वहीं, संधि पूजा का मुहूर्त 3 अक्टूबर शाम 4 बजकर 14 मिनट से 5 बजकर 2 मिनट तक होगा.</p>
<p><strong>राहुकाल</strong></p>
<p>महाअष्टमी के दिन राहुकाल सुबह 7 बजकर 33 मिनट से 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इस दिन शुभ कार्य करने से बचना चाहिए. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक है.</p>
<p><strong>कन्या पूजन</strong></p>
<p>नवरात्र के आठवें दिन महागौरी की पूजा करने शारीरिक और मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही धन-वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा को नारियल जरूर चढ़ाएं. इसके साथ ही कन्या पूजन भी करें. इसके लिए 2 से 10 साल उम्र की कन्याओं को भोजन कराना चाहिए, साथ ही कुछ उपहार भी देना चाहिए.</p>
<p><strong>हवन सामग्री</strong></p>
<p>महाअष्टमी में जहां लोग कन्या पूजन करते हैं. वहीं, इस दिन हवन करना भी काफी जरूरी माना जाता है. हवन के लिए सामग्रियों की जानकारी होना भी जरूरी है. इसके लिए हवन कुंड, आम की लकड़ी, चावल, जौ, कलावा, शक्कर, गाय का घी, पान का पत्ता, काला तिल, सूखा नारियल, लौंग, इलायची, कपूर, बताशे का व्यवस्था कर लें. </p>
<p><strong>हवन पूजा विधि </strong></p>
<p>सबसे पहले हवन कुंड को गंगाजल से शुद्ध करें. इसके बाद हवन कुंड के चारों तरफ कलावा बांधकर उस पर स्वास्तिक बनाकर पूजा करें. ये करने के बाद हवन कुंड पर अक्षत, फूल और चंदन अर्पित करें. इसके बाद कुंड में घी, शक्कर, चावल और कपूर डालें, फिर हवन कुंड में पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर 4 आम की लकड़ी रखें.</p>
<p><strong>हवन कुंड में आहुति</strong></p>
<p>हवन कुंड में डाली गई सामग्रियों के बीच में पान का पत्ता रखकर उस पर कपूर, लौंग, इलायची, बताशा रखें, फिर अग्नि प्रज्वलित करें, अब मंत्र बोलते हुए हवन सामग्री से अग्नि में आहुति दें. हवन पूर्ण होने के बाद कन्या पूजन करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/on-the-day-of-mahashtami-there-is-no-benefit-of-worship-without-havan-knowing-the-auspicious-time-of						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/on-the-day-of-mahashtami-there-is-no-benefit-of-worship-without-havan-knowing-the-auspicious-time-of</guid>
					<pubDate>Mon, 03 Oct 2022 10:41:42 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शारदीय नवरात्रि की अष्‍टमी: माता पूजा का पूरा फल प्राप्त करने के लिए रखे इन बातों का ध्यान]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शारदीय नवरात्रि की अष्‍टमी आज 3 अक्‍टूबर, सोमवार को मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में नवरात्रि की अष्‍टमी तिथि का बड़ा महत्‍व है इसलिए इसे महाअष्‍टमी भी कहते हैं. इसके अलावा इसे दुर्गाष्‍टमी भी कहा जाता है. आज से दुर्गा पूजा का पीक समय शुरू हो जाता है. अष्‍टमी के दिन घर-घर में हवन और कन्‍या पूजन होता है. आज नवरात्रि के आठवे दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है. इस दिन कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है, वरना पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है. </p>
महाअष्‍टमी के दिन ध्‍यान रखें ये बातें
<p>- नवरात्रि अष्‍टमी के दिन सुबह जल्‍दी स्‍नान करके माता रानी का पाठ करें. यदि व्रत नहीं भी रखा है तो भी जल्‍दी स्‍नान करके पूजा करें. देर तक सोना या ना नहाने की गलती न करें. </p>
<p>- अष्टमी के दिन नीले या काले रंग के कपड़े न पहनें. बल्कि पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें. </p>
<p>- अष्‍टमी के दिन हवन-पूजन जरूर करें, वरना नवरात्रि के दौरान किए गए पूजा-पाठ का फल अधूरा ही मिलेगा. हवन के दौरान ध्‍यान रखें कि हवन सामग्री कुंड के बाहर ना गिरे. </p>
<p>- पूजा के बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्‍तशती का पूरे भक्ति भाव से पाठ करें. इस दौरान किसी से बात न करें. </p>
<p>- जिन लोगों ने घर में घटस्‍थापना की है या 9 दिन व्रत के किए हैं, वे आज कन्‍या पूजन जरूर करें. 2 से 10 साल तक की बच्चियों को भोजन करवाकर उन्‍हें भेंट और पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें. इससे मां दुर्गा प्रसन्‍न होती हैं. गलती से भी किसी कन्‍या को परेशान न करें. </p>
<p>- 9 दिन के नवरात्रि व्रत रखने वाले लोग अष्‍टमी के दिन हवन-पूजन करें लेकिन व्रत का पारण नवमी को विधि-विधान से ही करें. नवमी के दिन लौकी का सेवन न करें. यदि नवमी गुरुवार को पड़े तो इस दिन केले और धू का सेवन भी नहीं करना चाहिए. </p>
<p>- सुख-समृद्धि पाने के लिए अष्‍टमी के दिन तुलसी कोट के पास 9 दिए जलाकर उसकी परिक्रमा करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/ashtami-of-sharadiya-navratri-keep-these-things-in-mind-to-get-the-full-fruit-of-mata-puja						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/ashtami-of-sharadiya-navratri-keep-these-things-in-mind-to-get-the-full-fruit-of-mata-puja</guid>
					<pubDate>Mon, 03 Oct 2022 10:17:05 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[बस अपनाएं यह टिप्स, मिलेगा कई तरह की परेशानियो से छुटकारा, घर आएगी खुशहाली]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>Fengshui tips:फेंगशुई चीनी वास्तु शास्त्र है लेकिन भारतीय लोग इसका बहुत बड़ी संख्या में अब इस्तेमाल करने लगे हैं। फेंगशुई के कुछ साधारण से टिप्स अपनाकर घर में आने वाली निगेटिव एनर्जी को पॉजिटिव एनर्जी में बदला जा सकता है। फेंगशुई की कला हमें अपने आसपास की वस्तु और जीवन के बीच संतुलन बनाने में मदद करती है। फेंगशुई एक चीनी पद्धति है जो आज से 3000 साल पहले चीन में उत्पन्न हुई।</p>
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Fengshui tips
<ul>
<li>फेंगशुई के अनुसार बाहर से पहन कर आए जूते और चप्पलों को बाहर ही रखें। उन्हें अपने साथ लेकर अंदर ना आए। ऐसा करने से बाहर से आई हुई गंदगी, टेंशन और निगेटिव एनर्जी जूते, चप्पल के रास्ते घर में आ जाती है और जिसका हमारे शरीर पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।</li>
<li>कमरे में या लिविंग रूम में बैठते वक्त अक्सर हमें दीवार से टीक कर या पीठ लगाकर बैठने की आदत हो जाती है। फेंगशुई के अनुसार ऐसा करने से आपके के अंदर की सारी एनर्जी दीवार के सहारे बाहर चले जाती है और आप खुद को बहुत अकेला और कमजोर महसूस करने लगते हैं।</li>
<li>फेंगशुई के अनुसार घर में खुशहाली लाने के लिए घर में मेन गेट के सामने अंदर या बाहर एक फाउंटेन लगाना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि फाउंटेन का पानी उस के बीचो बीच ही रहे जिसका मतलब है कि आपके जीवन में भी अवसर आते रहेंगे।</li>
<li>फेंगशुई के अनुसार घर में क्रिस्टल कछुआ रखने से बीमारियां दूर रहती है और परिवार में सभी लोगों की उम्र बढ़ती है और यह देखने में भी काफी अच्छा लगता है।</li>
</ul>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/just-follow-these-tips-you-will-get-rid-of-many-problems-happiness-will-come-home						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/just-follow-these-tips-you-will-get-rid-of-many-problems-happiness-will-come-home</guid>
					<pubDate>Sat, 01 Oct 2022 15:45:41 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आचमन करना पूजा-अर्चना का जरूरी हिस्सा माना गया, जाने पूजा-हवन से पहले क्यों किया जाता है आचमन]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भारतीय संस्कृति में हवन-पूजा से जुड़े कई विधि-विधानों का वर्णन किया गया है, जिसका हमें धार्मिक क्रियाकलापों के दौरान पालन करना होता है. इन्हीं में से एक विधि है आचमन करना. इस विधि को पूजा-अर्चना का जरूरी हिस्सा माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि जब तक पूजा से पहले आचमन (Aachman) न किया जाए, तब तक किसी भी पूजा को पूर्ण नहीं माना जा सकता. </p>
<p><strong>पूजा-अर्चना से पहले किया जाता है आचमन</strong></p>
<p>आचमन करने का अर्थ होता है पवित्र जल को ग्रहण करना. असल में पूजा पाठ करने से पहले शरीर को शुद्ध करना बहुत जरूरी होता है. इसलिए पूजा-अर्चना शुरू करने से पहले आचमन (Aachman) किया जाता है. जब पवित्र जल का आचमन किया जाता है तो पंडित जी मंत्रोच्चारण करके देवी-देवताओं का स्मरण कर अपनी कृपा बरसाने का आग्रह करते हैं. यह आचमन कैसे किया जाता है और शास्त्रों में इसके क्या लाभ बताए गए हैं, आज आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे. </p>
<p><strong>सभी सामग्रियों को एकत्र कर लें</strong></p>
<p>जब भी आपके घर-दुकान में कोई पूजा या हवन हो तो सबसे पहले उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री को एक जगह एकत्रित कर लें. इसके बाद तांबे के कलश या लोटा में गंगाजल या शुद्ध जल भरकर रखें. उस जल में तुलसी की कुछ पत्तियां भी डालें. तांबे के कलश में एक छोटी चम्मच रखना भी न भूलें. इसके बाद पूजा शुरू करने से पहले आंख बंद करके भगवान का स्मरण करें. साथ ही पुजारी के जरिए चम्मच से तांबे के कलश में रखा पवित्र जल लेकर अपनी हथेली पर रखें.</p>
<p><strong>आचमन के दौरान करें प्रभु का स्मरण</strong></p>
<p>आचमन (Aachman) के दौरान पवित्र मंत्रों का उच्चारण जरूरी होता है. लिहाजा पुजारी ‘ॐ केशवाय नम: ॐ नाराणाय नम: ॐ माधवाय नम: ॐ ह्रषीकेशाय नम:’ का मंत्रोच्चारण कर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं. इसके बाद मंत्रोच्चारण के बीच 3 बार पवित्र जल का आचमन किया जाता है. यहां इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है कि आचमन करने के बाद कान और माथे को छूकर भगवान का प्रतिमा को प्रणाम जरूर करें. </p>
<p><strong>पूजा में दिशाओं का रखें खास ध्यान</strong></p>
<p>जब आप पूजा शुरू करने से पहले पवित्र जल का आचमन कर रहे हों तो इस बात का खास ख्याल रखें कि आपका मुख पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की तरफ होना चाहिए. अगर आप गलत दिशा में मुख करके पूजा करते हैं तो आपको उसका कोई फल प्राप्त नहीं होगा. सही दिशा में मुख करके आचमन (Aachman) करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/aachman-was-considered-an-essential-part-of-worship-know-why-aachman-is-done-before-worship-havan						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 30 Sep 2022 11:20:55 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[वास्तु शास्त्र : बड़े चमत्कारी हैं नमक के ये 7 टोटके, खोल देते हैं बंद किस्मत के ताले, भिखारी भी बन जाता है राजा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हर भारतीय किचन में नमक जरूर मिल जाता है। नमक खाने का स्वाद बढ़ता है। इसके बिना हर खाना अधूरा सा रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से भी नमक बड़े काम की चीज होती है। इसके कुछ खास उपाय कर आप अपने जीवन की कई समयाएं हाल कर सकते हैं। यह एक चुटकी नमक आपकी लाइफ बदल सकता है।</p>
नमक के चमत्कारी उपाय
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<p>1. यदि आपके घर अक्सर लड़ाई झगड़े होते हैं, घर में अशांति रहती है, तो आप रोज पोंछा लगाने के पानी में एक चुटकी नमक मिला दें। नमक वाले पोंछे से घर की सभी नकारात्मकता समाप्त हो जाएगी। नमक नेगेटिव एनर्जी का खात्मा करता है। इस उपाय से ना सिर्फ आपके घर सुख और शांति रहेगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।</p>
<p>2. घर में सबसे अधिक नेगेटिव एनर्जी बाथरूम और शौचालय में होती है। यहां सबसे अधिक गंदगी पाई जाती है। ऐसे में बाथरूम के अंदर एक कटोरी में नमक भरकर रख देना चाहिए। ये नमक वहां की सभी नेगेटिव एनर्जी को सोख लेगा। इस उपाय से राहु दोष भी कम होता है। साथ ही बाथरूम में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु भी मर जाते हैं।</p>
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<p>3. यदि आपके बच्चों को बार बार नजर लग जाती है और वे अक्सर बीमार पड़ते रहते हैं तो ये उपाय आपके काम का है। आपको उनके नहाने के पानी में एक चुटकी नमक मिला देना चाहिए। इससे उन्हें कोई बुरी नजर नहीं लगेगी। साथ ही एलर्जी से जुड़ी बीमारियां भी दूर रहेगी।</p>
<p>4. यदि आप घर की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते हैं तो बेडरूम या ड्राइंगरूम में एक कांच की कटोरी में सेंधा नमक डालकर रख दें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी। एक पॉजिटिव माहौल बनेगा। बता दें कि मां लक्ष्मी भी ऐसे घर में प्रवेश करना पसंद करती है जहां सकारात्मक ऊर्जा अधिक हो।</p>
<p>5. यदि आपको नौकरी नहीं मिल रही, या उसमें कोई दिक्कत आ रही, या बिजनेस में कोई प्राब्लम है तो ये उपाय करे। अपनी हथेली पर थोड़ा सा नमक लें। अब मुट्ठी बांधकर इसे अपने सिर से लेकर पैर तक सात बार घुमाएं। फिर नमक को घर से बाहर फेंक दें। इस उपाय से आपके जरूरी कामों में आ रही सभी बाधाएं दूर होगी।</p>
<p>6. यदि आप अपनी बुरी किस्मत से परेशान हैं तो खड़ा नमक के कुछ टुकड़े हमेशा जेब में रखकर घूमे। इससे दुर्भाग्य आपका पीछा छोड़ देगा। आपकी किस्मत रंग लाएगी। आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे वह किस्मत के दम पर पूर्ण हो जाएगा।</p>
<p>7. जिन जातकों की शादी नही हो रही वह प्रत्येक गुरुवार को पीपल के पेड़ पर नमक वाला पानी चढ़ाएं। इससे उन्हें जल्द कोई अच्छा और पसंद का जीवनसाथी मिल जाएगा।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/astrology/vastu-shastra-these-7-tricks-of-salt-are-very-miraculous-they-open-the-locks-of-fate-beggar-also-bec						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/astrology/vastu-shastra-these-7-tricks-of-salt-are-very-miraculous-they-open-the-locks-of-fate-beggar-also-bec</guid>
					<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 12:43:32 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्रि के ये 9 दिन टोटकों-उपायों के लिए बहुत अहम माने गए है, ये टोटके आपकी किस्मत बदल सकते हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शक्ति पूजा और उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुका है. नवरात्रि के ये पावन 9 दिन बहुत ही शुभ माने गए हैं. नौ दिनों तक देवी मां के स्वरूपों की उपासना की जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दौरान देवी माता दुर्गा धरती पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. नवरात्रि के ये 9 दिन टोटकों-उपायों के लिए बहुत अहम माना गया है. लौंग के ऐसे बहुत से उपाय हैं जो घर में सुख, समृद्धि लेकर आ सकते हैं. आइए जानते हैं कौन से वे उपाय है जिनको करने से आप पर मां की कृपा बरसेगी.</p>
<p><strong>जीवन की हर समस्या का होगा हल</strong></p>
<p>नवरात्रि के इन पावन दिनों में आप धानी के तेल का दीपक जलाएं और उसमें चार लौंग डालकर भगवान हनुमान की आरती उतारें. ऐसा करने से जीवन का हर संकट दूर हो सकता है.  </p>
<p><strong>क्लेश से मिलेगी मुक्ति</strong></p>
<p>अगर घर में हमेशा लड़ाई-झगड़ा रहता है तो इन नवरात्रि में लौंग का एक विशेष उपाय कर लीजिए. इसके लिए आपको लौंग का एक जोड़ा पीले कपड़े में बांधकर घर के किसी कोने में टांग देना है. इससे आपकी समस्या हल हो जाएगी. ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि ऐसा करने से धन के स्थान पर रख दिया जाए तो घर में कभी रुपये, पैसे की कमी नहीं रहती.</p>
<p><strong>जीवन में पाएंगे तरक्की</strong></p>
<p>अगर आप कोशिशों के बाद भी सफल नहीं हो रहे हैं तो आपको ये टोटका अपनाना चाहिए.  आज ही एक नींबू पर चार लौंग लगाएं और 21 बार ''ॐ श्री हनुमते नम:'' मंत्र का जाप कर लें. बजरंगबली आपकी सारी परेशानियों को दूर कर देंगे. नवरात्रि के दिनों में ये टोटका करें तो सफल जरूर होंगे.</p>
<p><strong>विरोधी होंगे पस्त, अगर किया ये काम</strong></p>
<p>अगर आप अपने विरोधियों से परेशान रहते हैं तो इसके लिए आप पूजा स्थल पर 5 लौंग अर्पित कर दें. इसके साथ ही मां को मंदिर में पीले फल या फिर मिठाई का भोग लगाएं. अगर इन दिनों ये करेंगे तो आपके दुश्मन पस्त हो जाएंगे.</p>
<p><strong>पीपल के पत्ते पर लिखें नाम</strong></p>
<p>लौंग के अलावा अगर नवरात्रि के दिनों में ये टोटका भी आजमा सकते हैं. आप पीपल के 3 या 5 पत्ते लें और उस पर राम नाम लिखें. इस पर कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाये. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से धन लाभ होगा.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/these-9-days-of-navratri-are-considered-very-important-for-tricks-and-remedies-these-tricks-can-chan						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/these-9-days-of-navratri-are-considered-very-important-for-tricks-and-remedies-these-tricks-can-chan</guid>
					<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 09:22:13 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्री में मनोकामना पूर्ति के लिए करें इन प्रभावशाली मन्त्रों का जाप, माँ अम्बे सारे कष्ट हर लेगी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>26 सितंबर से नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और इनका समापन 5 अक्टूबक विजय दशमी के दिन किया जाएगा.इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. कहते हैं कि ये 9 दिन मां दुर्गा भक्तों के बीच धरती पर आती हैं और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देती हैं. ऐसे में हर कोई मां को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय करता है. मां की विधि-विधान से पूजा करते हैं. </p>
<p>ज्योतिष शास्त्र में मंत्रों का भी विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि पूजा के बाद मंत्र जाप करने से ही पूजा पूर्ण होती है और भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं. दुर्गा सप्तशती में भी मां शक्ति के कई प्रभावशाली मंत्रों के बारे में बताया गया है. इनका नियमपूर्वक जाप करने से व्यक्ति को जीवन में आरोग्य, धन, सौभाग्य, सुख-समृद्धि आदि की प्राप्ति होती है और मां का आशीर्वाद मिलता है. </p>
नवरात्रि में करें इन मंत्रों का जाप     
<p><strong>- जीवन में सुख-समृद्धि के लिए</strong></p>
<p>सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।</p>
<p>शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तु ते।।</p>
<p><strong>- दरिद्रता से मुक्ति पाने के लिए</strong></p>
<p>दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो।</p>
<p>सवर्स्धः स्मृता मतिमतीव शुभाम् ददासि।।</p>
<p><strong>- असाध्य रोगों के नाश और आरोग्य प्राप्ति के लिए </strong></p>
<p>रोगानशेषानपहंसि तुष्टा</p>
<p>रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।</p>
<p>त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां</p>
<p>त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।</p>
<p><strong>- संकटों और कष्टों के नाश के लिए </strong></p>
<p>करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी</p>
<p>शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।</p>
<p><strong>- आकर्षक व्यक्तित्व के लिए</strong></p>
<p>ऊं महामायां हरेश्चैषा तया संमोह्यते जगत्, ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।</p>
<p><strong>- संतान प्राप्ति के लिए </strong></p>
<p>सर्वाबाधा वि निर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।</p>
<p>मनुष्यो मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥</p>
<p><strong>- किसी भी कार्य में सफलता के लिए </strong></p>
<p>दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।</p>
<p><strong>- योग्य जीवन साथी के लिए </strong></p>
<p>पत्नीं मनोरमां देहि नोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥</p>
<p><strong>- धन-वैभव के लिए</strong></p>
<p>ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः। शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै।।</p>
<p><strong>- आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और तरक्की के लिए</strong></p>
<p>दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः। सवर्स्धः स्मृता मतिमतीव शुभाम् ददासि।।</p>
<p>दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः। सवर्स्धः स्मृता मतिमतीव शुभाम् ददासि।।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/chant-these-powerful-mantras-for-fulfillment-of-wishes-in-navratri-mother-ambe-will-take-away-all-th						]]>
					</link>
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					<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 09:11:28 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आर्थिक तंगी से है परेशान तो गुरुवार के दिन करें ये उपाय, ये टोटके आपको कर देंगे मालामाल]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भगवान विष्णु की पूजा- आरधना के लिए गुरुवार का दिन समर्पित है. इस दिन विधिविधान से श्री हरि की पूजा करने, व्रत रखने और कुछ उपाय करने से जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी की कृपा तो प्राप्त होती है. साथ ही, बृहस्पित देव भी प्रसन्न होते हैं. देवगुरु बृहस्पति देव को ग्रहों का गुरु कहा जाता है. मान्यता है कि अगर किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति देव की स्थिति मजबूत है, तो उसे जीवन में कभी धन संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता. </p>
<p>गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस दिन केले के पेड़ में हल्दी मिश्रित जल अर्पित किया जाता है. कहते हैं केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. ऐसे में नियमित रूप से हर गुरुवार केले के वृक्ष की पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. इस दिन केले का सेवन नहीं करना चाहिए. अगर  आपकी कुंडली में गुरु की स्थिति खराब है, तो आज के दिन ये उपाय आपकी किस्मत बदल सकते हैं. </p>
<p><strong>गुरुवार के दिन करें ये उपाय</strong></p>
<p>- गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना के साथ अगर ये उपाय कर लिया जाए, तो व्यक्ति के दिन बदल सकते हैं. ये उपाय व्यक्ति को मालामाल कर देगा. गुरुवार के दिन पानी में हल्दी डालकर स्नान करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और कुछ ही दिन में इसका असर दिखने लगता है. </p>
<p>- गुरुवार के दिन घर में पोंछा न लगाएं. इस दिन केले का सेवन न करें. आज के दिन केले के पेड़ की पूजा का विधान है. कहते हैं कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. </p>
<p>- गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए. साथ ही, इस दिन पीले रंग की वस्तुएं ही खानी चाहिए. अगर संभव हो तो इस दिन आटे में हल्दी डाल दें, जिससे वे पीले रंग की हो जाए. </p>
<p>- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरुवार के दिन घर के सभी सदस्य एक साथ बैठकर सत्यनारायण की कथा पढ़ें व सुनें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-are-troubled-by-financial-constraints-do-these-measures-on-thursday-these-tricks-will-make-yo						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-you-are-troubled-by-financial-constraints-do-these-measures-on-thursday-these-tricks-will-make-yo</guid>
					<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 08:52:39 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आज नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और करें अपने सभी कार्य सफल]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज 27 सितंबर दिन मंगलवार है. आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है. कल से शारदीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है. आज नवरात्रि का दूसरा दिन है. आज के दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. इन्हें त्याग और संयम का प्रतीक माना गया है. शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए देवी ब्रह्मचारिणी ने कठिन तप किया था. हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व है. यदि आप आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-आराधना और व्रत रख रहे हैं, तो सबुह उठकर सबसे पहले स्नान ध्यान से निवृत्त हो जाएं. लाल रंग के वस्त्र धारण करें. उसके बाद मां ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या मूर्ति को पूजा स्थल पर रखें. लाल रंग के फूल, धूप, अक्षत, रोली, हल्दी आदि चढ़ाएं. घी का दीपक जलाएं. आप चीनी, मिश्री, पंचामृत, सेब, सुपारी, पान का पत्ता आदि से भोग लगाएं. अब देवी के मंत्रों का जाप करें, कथा पढ़ें और आखिरी में आरती करें. मान्यता है कि जो व्यक्ति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करता है, उसके सभी कार्य सफल होते हैं. उद्देश्यों की पूर्ति होती है. भक्तों को बल, संबल, शत्रुओं का सामने करने की शक्ति और ताकत मिलती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/today-on-the-second-day-of-navratri-worship-maa-brahmacharini-and-make-all-your-work-successful						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/today-on-the-second-day-of-navratri-worship-maa-brahmacharini-and-make-all-your-work-successful</guid>
					<pubDate>Tue, 27 Sep 2022 10:25:24 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्री में पारिवारिक क्लेश व आर्थिक तंगी दूर करने के लिए करें ये उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सोमवार 26 सितंबर यानी कि आज से नवरात्र का पर्व शुरू हो रहा है. पूरे नौ दिन तक चलने वाले इस पर्व में भक्त मां भगवती की उपासना करेंगे. नवरात्र के यह नौ दिन बहुत ही महत्वपूर्ण और ऊर्जावान होते हैं. वास्तव में यह समय स्वयं को शक्ति से जोड़ने के दिन हैं, इन दिनों ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे शक्ति का क्षय हो, शक्ति का ह्रास किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए. आखिर नवरात्र के इतने उपयोगी दिनों का सदुपयोग कैसे कर सकते हैं. जीवन में कई प्रकार के तनाव हैं, संकट है, मन में अशांति व्याप्त है, घर में सदस्यों को बीमारियां घेरे हैं तो समझिए इन समस्याओं को दूर करने का सही समय आ गया है. देवी दुर्गा की उपासना से इन्हें ठीक किया जा सकता है. आइए जानते हैं मां भगवती की कृपा पाने के क्या हैं उपाय.</p>
<p><strong>पारिवारिक क्लेश के लिए करें ये उपाय </strong></p>
<p>आपके परिवार में क्लेश है, जिसके कारण पूरे घर की प्रगति रुकी हुई है तो नवरात्र में मां भगवती की उपासना करें और अष्टमी या नवमी के दिन हवन करें. हवन करते हुए 'सब नर करहिं परस्पर प्रीति चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति' मंत्र पढ़ते हुए समिधा की 108 आहुतियां दीजिए. यदि घर में हवन करने में किसी तरह की दिक्कत है तो घर पास स्थित किसी मंदिर में जाएं, जहां हवन हो रहा हो तो उसमें शामिल होकर इसी मंत्र का जाप करते हुए आहुति दीजिए. इसके बाद प्रतिदिन 21 या 27 बार जितना भी संभव हो मंत्र का जाप करें. जाप के बाद मां भगवती से पारिवारिक क्लेश को दूर करने के लिए प्रार्थना करें. आप देखेंगे कि कुछ ही समय में मां भगवती प्रसन्न होकर आप पर कृपा करेंगी और मानसिक क्लेश से छुटकारा मिल जाएगा.</p>
<p><strong>आर्थिक तंगी के लिए अष्टमी को करें ये पूजा</strong></p>
<p>घर में आर्थिक संकट है, धन की हानि हो रही है तो अष्टमी या नवमी के दिन स्नान ध्यान करने के बाद उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं. कुछ चावलों को पहले ही लाल रंग से संग लें और उसकी ढेरी बनाकर उसके ऊपर स्फटिक के श्रीयंत्र को रखें. स्फटिक का श्रीयंत्र न हो तो अभी से बाजार से लाकर रख लें. अब श्री यंत्र के आगे तेल के नौ दीपक जला कर मां भगवती से धन लाभ के लिए प्रार्थना करिए. बाद में श्रीयंत्र पूजा के स्थान पर रख दें और नियमित पूजा करते रहें. श्रीयंत्र को रोज शहद या गंगाजल या फिर साफ जल से स्नान कराने के बाद इत्र अथवा अन्य कोई सुगंध अवश्य लगाएं. पूजा लगातार करते रहने से आप देखेंगे कि कुछ ही समय के भीतर आपके घर से दरिद्रता दूर होने लगेगी और धन की कोई कमी नहीं रहेगी.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/do-these-measures-to-remove-family-troubles-and-financial-difficulties-in-navratri						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/do-these-measures-to-remove-family-troubles-and-financial-difficulties-in-navratri</guid>
					<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 10:18:31 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्रि का व्रत : नवरात्रि का व्रत रखने वालों के लिए इन नौ नियमों का पालन करना जरूरी है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>नवरात्रि श्रद्धा और भक्ति का पावन पर्व है. इस दौरान 9 दिनों तक व्रत रखा जाता है और मां की पूजा-अर्चना की जाती है. ये बेहद पवित्र त्योहार है, इस दौरान पूरे विधि-विधान और नियमों के साथ व्रत रखना चाहिए. हालांकि हर जगह व्रत रखने का तरीका अलग-अलग होता है. सब अपनी श्रद्धा और शक्ति अनुसार व्रत रख सकते हैं, लेकिन नियमों का पालन करना जरूरी है. आइए जानते हैं कि नवरात्रि के व्रत के दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए. </p>
नवरात्रि व्रत के नौ नियम
<p>1. नवरात्रि का व्रत रखने के वक्त ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. व्रत के दौरान तन-मन से पवित्र होकर माता की सेवा करना चाहिए. </p>
<p>2. नौ दिनों तक विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए. रोज नहा-धोकर पूजा-अर्चना करें. सुबह -शाम दोनों वक्त आरती करें, शाम को भी पवित्र होकर ही आरती करनी चाहिए. </p>
<p>3. व्रत का मतलब ही साधना होता है. नवरात्रि के व्रत में कोई पाप का काम नहीं करना चाहिए. चोरी, झूठ, क्रोध और लालच का त्याग कर देना चाहिए. व्रत के दौरान अच्छे कर्म करना चाहिए. किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए.</p>
<p>4. कन्या को माता का रूप माना जाता है. नवरात्रि में कन्याओं की पूजा भी की जाती है. इसलिए कन्या या महिला का अपमान नहीं करना चाहिए. महिलाओं का आदर-सम्मान करना चाहिए.</p>
<p>5. नवरात्रि में हर जगह माता का वास होता है. इन दिनों में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. सात्विक भोजन करना चाहिए. </p>
<p>6. कुछ लोग फरियाली खिचड़ी खाने के चक्कर में व्रत रखते हैं, ऐसे व्रत का फल नहीं मिलता है. व्रत का मतलब ही संयम है. इस दौरान खाने पर संयम रखें और कम खाना चाहिए चाहें वह फल ही क्यों न हों. </p>
<p>7. बीमार होने की स्थिति में व्रत नहीं करना चाहिए, जिससे व्रत बीच में खंडित हो. पीरिएड्स में भी व्रत करने की मनाही है.</p>
<p>8. नवरात्रि में कुछ नियमों का पालन जरूरी होता है. अगर आप व्रत रखते हैं तो बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए. इन दिनों में दाढ़ी और मूंछ बनाना भी वर्जित माना जाता है.</p>
<p>9. नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक व्रत करना चाहिए. नवमी या अष्टमी के दिन कन्याओं को भोज कराकर ही भोजन ग्रहण करना चाहिए. नवमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ होता है.   </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/navratri-fasting-it-is-necessary-to-follow-these-nine-rules-for-those-who-keep-the-fast-of-navratri						]]>
					</link>
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					<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 10:14:23 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्री: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की कथा श्रवण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मिलता है मां का आशीर्वाद]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है. नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है. मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं. मां दुर्गा के 9 स्वरूप व्यक्ति को जीवन जीने की सीख देते हैं. शैल का अर्थ होता है पत्थर या पहाड़. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा इसलिए की जाती है, ताकि व्यक्ति जीवन में मां शैलपुत्री के नाम की तरह स्थिरता बनी रहे. अपने लक्ष्य को पाने के लिए जीवन में अडिग रहना जरूरी है, जो कि हमें मां शैलपुत्री की पूजा से मिलता है. </p>
<p>बता दें कि नवरात्रि के दिन कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन स्थापना के बाद दुर्गासप्तशती का पाठ किया जाता है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है. जैसे किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी से होती है वैसे ही पूजा में कलश पूजा से ही शुरुआत होती है. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की ये कथा श्रवण करने या सुनने से  घर में सुख-समृद्धि आती है और मां शैलपुत्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है. </p>
<p><strong>मां शैलपुत्री कथा (Navratri Maa Shailputri Katha)</strong></p>
<p>ज्योतिष अनुसार मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ (बैल) है. हिमालयराज पर्वत की बेटी मां शैलपुत्री हैं. आइए जानें इनके पीछे की कथा के बारे में. एक बार प्रजापति दक्ष (सती के पिता) ने यज्ञ के दौरान भगवान शिव और सती को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया था. लेकिन सती बिना बुलाए ही यज्ञ में जाने को तैयार थीं. लेकिन भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि ऐसे बिना बुलाए जाना सही नहीं. लेकिन सती नहीं मानी. ऐसे में सती की जिद्द के आगे भगवान शिव ने उन्हें जाने की इजाजत दे दी. </p>
<p>पिता के यहां यज्ञ में सती बिना निमंत्रण पहुंच गई. सती के साथ वहां बुरा व्यवहार किया गया . वहां सती से उनकी माता के अलावा किसी से सही से बात नहीं की. इतना ही नहीं, सती की बहनें भी यज्ञ में उनका उपहास उड़ाती रहीं. ऐसा कठोर व्यवहार और पति का अपमान सती बर्दाश नहीं कर पाईं और क्रोधित हो उन्होंने खुद को यज्ञ में भस्म कर दिया. भगवान शिव को जैसे ही ये समाचार मिला उन्होंने अपने गणों को दक्ष के यहां भेज यज्ञ विध्वंस करा दिया. शास्त्रों के अनुसार अगले जन्म में सती ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और इनका नाम शैलपुत्री रखा गया. अतः नवरात्रि के पहले मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. </p>
<p><strong>मां शैलपुत्री का प्रिय रंग</strong></p>
<p>ज्योतिष अनुसार बता दें कि मां शैलपुत्री को सफेद रंग बेहद प्रिय है. इसलिए पूजा के दौरान उन्हें सफेद रंग की चीजें बर्फी आदि का भोग लगाया जाता है. पूजा में सफेद रंग के फूल अर्पित किए जाते हैं. पूजा के समय सफेद रंग के वस्त्र धारण करना लाभकारी है. इस दिन जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए एक पान के पत्ते पर लौंग, सुपारी और मिश्री रखकर अर्पित करने से सभी समस्याओं का अंत होता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/navratri-hearing-the-story-of-maa-shailputri-on-the-first-day-of-navratri-brings-happiness-and-prosp						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/navratri-hearing-the-story-of-maa-shailputri-on-the-first-day-of-navratri-brings-happiness-and-prosp</guid>
					<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 10:07:29 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[नवरात्री : नवरात्रि के पहले दिन इस शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें और मां शैलपुत्री की इस तरह आराधना करें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है. आज से देशभर में नवरात्रि का पर्व शुरू हो रहा है. कहते हैं कि अमावस्या पर पितर विदा होते हैं और मां दुर्गा धरती पर भक्तों के बीच आती हैं. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. पहले दिन विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है और इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा होती है. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने और पूजा के बाद मां शैलपुत्री की ये आरती करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है. आइए जानें मां शैलपुत्री की आरती और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त.</p>
<strong>नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त</strong>
<p>नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है उसके बाद ही मां की पूजा का विधान है. ऐसे में कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में करना ही शुभ माना जाता है. 26 सितंबर को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 बजे से 07:51 बजे तक  है. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 तक है. फिर </p>
<p>विजय मुहूर्त दोपहर 02:13PM बजे से 03:01PM तक है और गोधूलि मुहूर्त शाम 06:01PM बजे से लेकर 06:25PM तक है. </p>
मां शैलपुत्री की आरती
<p>शैलपुत्री मां बैल सवार। करें देवता जय जयकार।</p>
<p>शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी।</p>
<p>पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।</p>
<p>ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।</p>
<p>सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने उतारी।</p>
<p>उसकी सगरी आस जा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।</p>
<p>घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।</p>
<p>श्रृद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित शीश झुकाएं।</p>
<p>जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद चकोरी अंबे।</p>
<p>मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/navratri-on-the-first-day-of-navratri-establish-a-kalash-in-this-auspicious-time-and-worship-maa-sha						]]>
					</link>
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					<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 09:55:54 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सर्वपितृ अमावस्या: पितरों को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद पाने और पितृदोष से मुक्ति के लिए जरूर करें ये पाठ]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सर्वपितृ अमावस्य पर उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि याद नहीं होती है या फिर तिथि वाले दिन किसी कारण वश श्राद्ध न कर पाए हो। पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध बेहद जरूरी माना जाता है। 16 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होते हैं।</p>
<p>अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष लगा है या फिर अपने पितरों को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने के अलावा पितृ कवच, पितृ सूक्त और पितृ स्तोत्र का पाठ करें। इससे आपको अवश्य लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>पितृदोष से निजात पाने के लिए ऐसे करें पाठ</strong></p>
<p>अगर आप कुंडली में मौजूद पितृ दोष से निजात पाना चाहते हैं, सर्वपितृ अमावस्या या साल में पड़ने वाली अन्य अमावस्या के दिन इन पितृ कवच, स्त्रोत और सूक्त का पाठ कर सकते हैं। इनका पाठ करने के लिए शाम के समय स्नान आदि करने के बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद घर की दक्षिण दिशा में बैठकर एक लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा सा तिल डालकर लें। इसके बाद पितरों को याद करके पाठ आरंभ करें। अंत में भूल चूक के लिए माफी मांगे और जल को पीपल में चढ़ा दें।</p>
पितृ कवच ( Pitra Kavach)
<p>कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।</p>
<p>तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥</p>
<p>तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।</p>
<p>तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥</p>
<p>प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।</p>
<p>यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥</p>
<p>उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।</p>
<p>यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥</p>
<p>ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।</p>
<p>अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।</p>
<p>अग्नेष्ट्वा तेजसा सादयामि॥</p>
पितृ स्त्रोत Pitru Stotra
<p>अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।</p>
<p>नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।</p>
<p>इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।</p>
<p>सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।</p>
<p>मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।</p>
<p>तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ।।</p>
<p>नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।</p>
<p>द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।</p>
<p>देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्।</p>
<p>अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि:।।</p>
<p>प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।</p>
<p>योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।</p>
<p>नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।</p>
<p>स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।</p>
<p>सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।</p>
<p>नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।</p>
<p>अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।</p>
<p>अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत:।।</p>
<p>ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।</p>
<p>जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण:।।</p>
<p>तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।</p>
<p>नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज:।</p>
पितृ सूक्त ( Pitru Suktam)
<p>उदीरतामवर उत्परास उन्मध्यमा: पितर: सोम्यास:।</p>
<p>असुं य ईयुरवृका ऋतज्ञास्ते नोsवन्तु पितरो हवेषु ।।</p>
<p>अंगिरसो न: पितरो नवग्वा अथर्वाणो भृगव: सोम्यास:।</p>
<p>तेषां वयँ सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम ।।</p>
<p>ये न: पूर्वे पितर: सोम्यासोsनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठा:।</p>
<p>तोभिर्यम: सँ रराणो हवीँ ष्युशन्नुशद्भि: प्रतिकाममत्तु ।।</p>
<p>त्वँ सोम प्र चिकितो मनीषा त्वँ रजिष्ठमनु नेषि पन्थाम् ।</p>
<p>तव प्रणीती पितरो न इन्दो देवेषु रत्नमभजन्त धीरा: ।।</p>
<p>त्वया हि न: पितर: सोम पूर्वे कर्माणि चकु: पवमान धीरा:।</p>
<p>वन्वन्नवात: परिधी१ँरपोर्णु वीरेभिरश्वैर्मघवा भवा न: ।।</p>
<p>त्वँ सोम पितृभि: संविदानोsनु द्यावापृथिवी आ ततन्थ।</p>
<p>तस्मै त इन्दो हविषा विधेम वयँ स्याम पतयो रयीणाम।।</p>
<p>बर्हिषद: पितर ऊत्यर्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।</p>
<p>त आ गतावसा शन्तमेनाथा न: शं योररपो दधात।।</p>
<p>आsहं पितृन्सुविदत्रा२ अवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णो:।</p>
<p>बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पितृवस्त इहागमिष्ठा:।।</p>
<p>उपहूता: पितर: सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।</p>
<p>त आ गमन्तु त इह श्रुवन्त्वधि ब्रुवन्तु तेsवन्त्वस्मान् ।।</p>
<p>आ यन्तु न: पितर: सोम्यासोsग्निष्वात्ता: पथिभिर्देवयानै:।</p>
<p>अस्मिनन् यज्ञे स्वधया मदन्तोsधि ब्रुवन्तु तेsवन्त्वस्मान्।।</p>
<p>अग्निष्वात्ता: पितर एह गच्छत सद: सद: सदत सुप्रणीतय:।</p>
<p>अत्ता हवीँ षि प्रयतानि बर्हिष्यथा रयिँ सर्ववीरं दधातन ।।</p>
<p>ये अग्निष्वात्ता ये अनग्निष्वात्ता मध्ये दिव: स्वधया मादयन्ते ।</p>
<p>तेभ्य: स्वराडसुनीतिमेतां यथावशं तन्वं कल्पयाति ।।</p>
<p>अग्निष्वात्तानृतुमतो हवामहे नाराशँ से सोमपीथं य आशु:।</p>
<p>ते नो विप्रास: सुहवा भवन्तु वयँ स्याम पतयो रयीणाम् ।।</p>
<p>आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।</p>
<p>मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥14॥</p>
<p>आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।</p>
<p>पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥15॥</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/sarvapitri-amavasya-please-do-this-lesson-to-please-ancestors-and-get-their-blessings-and-to-get-rid						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 25 Sep 2022 12:58:46 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सर्वपितृ अमावस्या: आज ब्राह्मणों के साथ-साथ इन लोगों को भी भोजन अवश्य कराएं, होंगे पितर प्रसन्न और देंगे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना जाता है। भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हुए पितृपक्ष अश्विन मास की अमावस्या तिथि को समाप्त होंगे। अश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जानते हैं। इस बार सर्व पितृ अमावस्या 25 सितंबर को है। इस दिन उन पितरों का भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि का पता न हो या फिर किसी कारण वश पहले श्राद्ध न पाए हो। सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों के साथ-साथ इन लोगों को भोजन अवश्य करना चाहिए। आइए जानते हैं कि सर्वपितृ अमावस्या तिथि के दिन किन किन लोगों का श्राद्ध करना चाहिए।</p>
सर्वपितृ अमावस्या के दिन इन लोगों को कराएं भोजन
<p><strong>गाय</strong></p>
<p>गाय को भी श्राद्ध के लिए भोजन करना चाहिए। पितरों को श्राद्ध करते समय एक भाग गाय के लिए जरूर निकालें। इसके अलावा घर के पश्चिम दिशा में गाय को महुआ या पलाश के पत्तों पर भोजन कराना शुभ माना जाता है।</p>
<p><strong>कुत्ता</strong></p>
<p>ब्राह्मणों को भोजन कराने से पांच भागों में से एक भाग कुत्ता के लिए निकाला जाता है।</p>
<p><strong>कौवा</strong></p>
<p>श्राद्ध के समय कौए को भी भोजन कराएं। माना जाता है कि पितर कौवे के रूप में भी आकर भोजन ग्रहण करते हैं।</p>
<p><strong>चींटी</strong></p>
<p>पिपल्यादि बलि यानी चींटी, कीड़े-मकौड़ों आदि को भी भोजन करना चाहिए।</p>
<p><strong>देवी-देवता</strong></p>
<p>श्राद्ध वाले दिन पितरों, ब्राह्मणों को ही नहीं बल्कि भगवान विष्णु, अर्यमा, यम, चित्रगुप्त सहित अन्य देवी देवता को पत्ते पर भोजन कराएं।</p>
<p><strong>ब्राह्मण</strong></p>
<p>श्राद्ध के दौरान 5 लोगों को भोजन कराने के बाद ब्राह्मणों को जरूर भोजन कराएं। उन्हें भोजन करने के साथ दक्षिणा जरूर दें।</p>
<p><strong>भांजा</strong></p>
<p>कहा जाता है कि 100 ब्राह्मण और एक भानेज यानी एक भांजा के भोजन कराने 100 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>जमाई</strong></p>
<p>शास्त्रों के अनुसार, श्राद्ध के दौरान जमाई या फिर बहनोई को जरूर भोजन कराना चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।</p>
<p><strong>मछली</strong></p>
<p>पितरों का निमित्त पिंडदान, श्राद्ध कर्म करने के बाद मछलियों को भी दाना जरूर खिलाएं।</p>
<p><strong>पीपल</strong></p>
<p>श्राद्ध कर्म के साथ पीपल को भी जल के रूप में भोजन खिलाएं और विधिवत पूजा करें। </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/sarvapitri-amavasya-along-with-brahmins-these-people-must-also-be-fed-the-ancestors-will-be-happy-an						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/sarvapitri-amavasya-along-with-brahmins-these-people-must-also-be-fed-the-ancestors-will-be-happy-an</guid>
					<pubDate>Sun, 25 Sep 2022 12:58:43 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[पितृ विसर्जनी अमावस्या: पितरो की इस तरह करें विदाई, अज्ञात पितरों के नाम करें सामूहिक श्राद्ध]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पितृ विसर्जनी अमावस्या 25 सितंबर को है। इस दिन ज्ञात व अज्ञात पूर्वजों के नाम पर श्राद्ध तर्पण करना श्रेयस्कर होता है। इस दिन तिथि अज्ञात होने पर श्राद्ध का फल पूर्वजों को मिल जाता है। 25 काे मध्याह्न काल में ही श्राद्ध क्रिया करना चाहिए। अमावस्या तिथि पूरे दिन व रात्रि 3:24 बजे तक रहेगी जिस व्यक्ति की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो उन्हें अमावस्या तिथि पर ही श्राद्ध करना चाहिए। गीता का पाठ, रुद्राष्ट्राध्यायी के पुरुष सूक्त,रुद्र सूक्त ब्रह्म सूक्त का पाठ भी करना चाहिए।</p>
<p>पीपल के वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु का पूजन कर गाय का दूध चढ़ाएं पितृ श्राप से मुक्ति के लिए इस दिन पीपल एक पौधा भी अवश्य ही लगाना चाहिए। श्राद्ध चिन्तामणि के अनुसार किसी मृत आत्मा का तीन वर्षो तक श्राद्ध कर्म नहीं करने पर जीवात्मा का प्रवेश प्रेत योनि में हो जाता है, जो तमोगुणी रजोगुणी एवं सतोगुणी होती है। पृथ्वी पर रहने वाली आत्माएं तमोगुणी होती हैं। अत: इनकी मुक्ति अवश्य करनी चाहिए।</p>
<p>पितृविसर्जन के दिन पितृ लोक से आये हुयें पितरो की विदाई होती है। उस दिन तीन या छः ब्राह्मणों को मध्याहन के समय घी में बने हुये पुआ,गोदुग्ध में बने खीर आदि सुस्वादुकर भोजन से संतृप्त कर उन्हें वस्त्र दक्षिणा आदि देकर विदा करें एवं सायं काल घी का दीपक जलाकर पितृ लोक गमन मार्ग को आलोकित करने की परिकल्पना करें ! जिससे पितृ संतुष्ट होकर अपने वंश के उत्थान की कामना करते हुए स्वलोक गमन करेगें। सरोवरों के किनारे नदी के घाटों पर श्राद्ध करना चाहिए। </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/pitru-visarjani-amavasya-farewell-the-ancestors-like-this-perform-mass-shradh-in-the-name-of-unknown						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/pitru-visarjani-amavasya-farewell-the-ancestors-like-this-perform-mass-shradh-in-the-name-of-unknown</guid>
					<pubDate>Sun, 25 Sep 2022 12:04:56 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सर्वपितृ अमावस्या: ऐसे करें श्राद्ध, जाने सर्वपितृ अमावस्या का मुहूर्त और श्राद्ध करने की विधि]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भाद्रपद की पूर्णिमा से आरंभ हुए श्राद्ध पक्ष आश्विन मास की अमावस्या तिथि को समाप्त होते हैं। आज पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। आज के दिन पितरों का श्राद्ध करने के साथ उन्हे प्रथ्वी से विदाई दी जाएगी। आज उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि याद न हो या फिर फिर किसी कारण वश उनकी तिथि पर श्राद्ध न कर पाए हो। इसके साथ ही इस दिन पितरों की विदाई की जाती है। जानिए सर्वपितृ अमावस्या का मुहूर्त और श्राद्ध करने की विधि।</p>
<p><strong>सर्वपितृ अमावस्या की तिथि और मुहूर्त</strong></p>
<p>आश्विन मास की अमावस्या तिथि 25 सितंबर, रविवार को दोपहर 03 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है जो 26 सितंबर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट में समाप्त होगी। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या 25 सितंबर को ही होगी।</p>
<p><strong>सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे करें श्राद्ध</strong></p>
<p>इस दिन प्रात: काल उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ सुथरे सफेद रंग के वस्त्र धारण कर लें। अब  पितरों का तर्पण करने के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। इसके बाद एक तांबे के लोटे में जल में थोड़ा सा गंगाजल डाल लें। इसके साथ ही काले तिल, कच्चा दूध और थोड़ा सा कुश डाल लें। इस जल को धीमे-धीमे जमीन में गिराते हुए पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।</p>
<p>इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना लाभकारी माना जाता है।  भोजन में खीर अवश्य बनाएं। बनाएं गए भोजन से 5 हिस्से जरूर निकाल दें। यह हिस्से कौवा, गाय, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए निकाल दें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर योग्यतानुसार दक्षिण दें। इसके बाद अन्य लोग भोजन करें।  अगर आप व्यापक तरीके से भोजन कराने में सामर्थ्य नहीं है, तो शाक सब्जी ही दान कर सकते हैं।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/sarva-pitri-amavasya-how-to-do-shradh-know-the-timing-of-sarva-pitri-amavasya-and-the-method-of-perf						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/sarva-pitri-amavasya-how-to-do-shradh-know-the-timing-of-sarva-pitri-amavasya-and-the-method-of-perf</guid>
					<pubDate>Sun, 25 Sep 2022 11:24:47 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कौनसी राशियां शनि की साढ़े साती की मार झेल रही हैं और शनि के प्रकोप से राहत पाने के क्‍या है उपाय, आओ जाने]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या हर व्‍यक्ति को अपने जीवनकाल में कभी न कभी झेलनी पड़ती है. यदि व्‍यक्ति के कर्म अच्‍छे हैं और उसकी कुंडली में शनि अशुभ नहीं हैं तब तो ठीक है, वरना शनि भयंकर कष्‍ट देते हैं. यही वजह है कि शनि की महादशा का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं. इस समय 3 राशियों पर शनि की साढ़े साती चल रही है. साढ़े साती के 3 चरण होते हैं, पहला , दूसरा और तीसरा. इन तीनों चरणों में शनि देव अलग-अलग तरह से कष्‍ट देते हैं. आइए जानते हैं कौनसी राशियां शनि की साढ़े साती झेल रही हैं और शनि के प्रकोप से राहत पाने के क्‍या उपाय हैं. </p>
<p><strong>साढ़े साती का दूसरा चरण सबसे ज्‍यादा कष्‍टकारी </strong></p>
<p>शनि की साढ़े साती के तीनों चरणों में शनि जीवन पर अलग-अलग असर डालते हैं. इसमें तीसरे चरण को सबसे ज्‍यादा मुश्किल माना जाता है. इसमें शनि का प्रकोप सबसे ज्‍यादा झेलना पड़ता है. ज्‍योतिष के अनुसार शनि साढ़े साती के पहले चरण में आर्थिक स्थिति पर, दूसरे चरण में पारिवारिक जीवन पर और तीसरे चरण में सेहत पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं. </p>
<p><strong>इन 3 राशि पर चल रही साढ़े साती </strong></p>
<p>इस समय धनु, कुंभ और मकर राशि पर शनि की साढ़े साती चल रही है. इसमें धनु राशि पर साढ़े साती का तीसरा चरण है और इन जातकों को जनवरी 2023 में साढ़े साती से मुक्ति मिल जाएगी. वहीं कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण और मकर राशि वालों पर तीसरा चरण चल रहा है. धनु राशि से साढ़ेसाती हटने के बाद मीन राशि वालों पर महादशा शुरू होगी. </p>
<p><strong>साढ़े साती से राहत पाने के उपाय </strong></p>
<p>शनि के कहर से राहत पाने के लिए शनिवार का दिन सबसे ज्‍यादा खास होता है. इस दिन शनि चालीसा का पाठ करें. शनिदेव से संबंधित चीजों जैसे तेल, काली उड़द, काला वस्त्र, लोहा, काला कंबल आदि का दान करें. छाया दान करें. इसके लिए एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें फिर तेल सहित उस कटोरी को शनि मंदिर में रख आएं. संभव हो तो कांसे के कटोरे का इस्‍तेमाल करें. इसके अलावा भगवान शिव और बजरंगबली की पूजा करने से भी शनि के प्रकोप से राहत मिलती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/which-zodiac-signs-are-facing-the-impact-of-shanis-half-and-half-and-what-are-the-remedies-to-get-re						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/which-zodiac-signs-are-facing-the-impact-of-shanis-half-and-half-and-what-are-the-remedies-to-get-re</guid>
					<pubDate>Sun, 25 Sep 2022 00:38:52 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Navratri 2022: नवरात्रि के दौरान घरों में क्यों नहीं काटना चाहिए नींबू, क्या है धार्मिक कारण]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p >26 सितंबर से नवरात्रि शुरू हो रही है। इस दौरान कई कार्यों को करना वर्जित माना गया है। इन्हीं में से एक है नींबू का काटना। आपने कई बार सुना होगा कि नवरात्रि में घरों में नींबू नहीं काटना चाहिए। पर क्या आपने कभी सोचा है ऐसा करने के पीछे कारण क्या है। यदि नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा न करने के पीछे क्या कारण है।</p>
<strong>क्यों नहीं काटना चाहिए नींबू –</strong>
<p>नौरात्रि के नौ दिनों में आपको सबसे अधिक ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इस दौरान आपको घरों में नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए। एक विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि इन 9 दिनों में नींबू को काटना नहीं चाहिए। क्योंकि अगर आप नींबू काटने का कार्य करेंगे, तो तामसिक शक्तियां आप पर प्रभाव जमा सकती हैं।</p>
<strong>क्या हैं नवरात्रि के नियम –</strong>
<ul>
<li >नवरात्रि के दिनों में हमें मनसा वाचा कर्मणा शुद्ध रहना चाहिए।</li>
<li >किसी भी प्रकार के मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।</li>
<li >नवरात्र में लोग बाल बनवाना दाढ़ी बनवाना नाखून काटना पसंद नहीं करते हैं।</li>
<li >शुद्ध रहने के लिए आवश्यक है कि हम मांसाहार, प्याज, लहसुन आदि तामसिक पदार्थों का त्याग करें।</li>
<li >तला खाना भी त्याग करना चाहिए।</li>
<li >अगर आपने नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित किया है या अखंड ज्योत जला रहे हैं तो आपको इन दिनों घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।</li>
<li >नवरात्र में प्रतिदिन हमें साफ तथा धुले कपड़े पहनना चाहिए।</li>
<li >विष्णु पुराण के अनुसार नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोना निषेध है।</li>
<li >अगर आप इन दिनों मां के किसी मंत्र का जाप कर रहे हैं पूजा की शुद्धता पर ध्यान दें ।जाप समाप्त होने तक उठना नहीं चाहिए।</li>
</ul>
<p> </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/navratri-2022-why-lemon-should-not-be-cut-in-homes-during-navratri-what-is-the-religious-reason						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sat, 24 Sep 2022 14:38:49 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[इंदिरा एकादशी: इस दिन कुछ नियमों का पालन करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिन्दू परम्परा में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में श्राद्ध कर्म करने से और कुछ उपायों को करने से भक्तों को बहुत लाभ होगा। पंचांग के अनुसार इंदिरा एकादशी व्रत इस वर्ष 21 सितंबर 2022 (Indira Ekadashi 2022 Date) को रखा जाएगा। मान्यता है कि भगवान विष्णु की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और सभी दुःख दूर हो जाते हैं। माना यह भी जाता है कि इस दिन कुछ उपयों का पालन करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु के साथ-साथ पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं-</p>
<p><strong>जरूर कराएं ब्राह्मण भोजन (Indira Ekadashi 2022 Upay)</strong></p>
<p>इंदिरा एकादशी व्रत के दिन ब्राह्मण भोजन कराने से व्यक्ति को विशेष लाभ होता है। इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। ऐसा करने से पितृ दोष भी समाप्त हो जाता है।</p>
<p><strong>संध्या काल में करें ये उपाय</strong></p>
<p>एकादशी व्रत के दिन संध्या काल में तुलसी के सामने घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए पौधे की 11 परिक्रमा करें। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में धन-धान्य व सौभाग्य की वृद्धि होती है।</p>
<p><strong>एकादशी के इस उपाय से होता है बहुत लाभ</strong></p>
<p>इंदिरा एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा करने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके साथ आप भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें। इससे सभी नकारात्मक ऊर्जाएं खत्म हो जाती हैं और खुशियों का मार्ग खुल जाता है।</p>
<p><strong>इंदिरा एकादशी शुभ मुहूर्त (Indira Ekadashi 2022 Shubh Muhurat)</strong></p>
<p>एकादशी तिथि आरम्भ: 20 सितंबर 2022, मंगलवार रात 09:26 से</p>
<p>एकादशी तिथि समाप्त: 21 सितंबर 2022, बुधवार रात 11:34 मिनट तक</p>
<p>पूजा शुभ समय: 21 सितंबर 2022 सुबह 06:09 मिनट से सुबह 09:11 तक</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/indira-ekadashi-by-following-some-rules-on-this-day-one-gets-freedom-from-pitra-dosha						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/indira-ekadashi-by-following-some-rules-on-this-day-one-gets-freedom-from-pitra-dosha</guid>
					<pubDate>Wed, 21 Sep 2022 09:17:46 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चाणक्य नीति : आचार्य चाणक्य के अनुसार घर की बर्बादी से बचने की लिए मुखिया को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आचार्य चाणक्‍य ने कूटनीति, राजनीति, अर्थशास्‍त्र के अलावा व्‍यवहारिक जीवन से जुड़ी बहुत अहम बातें भी बताई हैं. यदि चाणक्‍य नीति की इन बातों का पालन किया जाए तो जीवन सुख-समृद्धि से भरपूर रहता है. वहीं कई बार छोटी सी गलती भी पूरे परिवार को तबाह कर देती है. आचार्य चाणक्‍य ने सुखी और समृद्धि परिवार के लिए घर के मुखिया की कुछ जिम्‍मेदारियां बताई हैं, जिसका उसे हमेशा ध्‍यान रखना चाहिए. घर के मुखिया होने के नाते उस पर ये बड़ी जिम्‍मेदारी होती है कि परिवार की खुशियां, सम्‍मान और समृद्धि बनी रहे. </p>
<p><strong>घर का मुखिया रखे इन बातों का ध्‍यान </strong></p>
<p>- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हर परिवार के मुखिया का घर के सभी सदस्‍यों से अच्‍छा संपर्क रहना चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि मुखिया अपने परिवार को समय दे. सभी लोगों से संवाद करे ताकि उसे उनकी समस्‍याओं का पता चलता रहे. साथ ही सभी के बीच प्रेम बना रहे. </p>
<p>- परिवार की सुख-सुविधाओं का ध्‍यान रखना भी घर के मुखिया की जिम्‍मेदारी है. लेकिन इस चक्‍कर में बेवजह खर्च ना हो यह भी देखना जरूरी है. वरना आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा और परिवार मुसीबत से घिर सकता है. हमेशा घर का बजट बनाएं और पूरा परिवार उसी के मुताबिक पैसा खर्च करे. साथ ही भविष्‍य के लिए कुछ बचत भी की जाए. </p>
<p>- परिवार की सुख-शांति और अच्‍छी छवि के लिए जरूरी है कि भाई-बंधुओं से अच्छे संबंध रहें. घर के मुखिया को हमेशा अपने भाई-बंधुओं, रिश्‍तेदारों से अच्‍छे संबंध बनाए रखना चाहिए. वरना परिवार पर इसका बुरा असर पड़ता है और उनके बीच अलगाव होने की आंशका रहती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/chanakya-niti-according-to-acharya-chanakya-the-head-should-take-care-of-these-things-to-avoid-the-r						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 23:39:45 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[खरगोन जिले में प्रसिद्ध ओखलेश्वर धाम मंदिर में दिखा चमत्कार, हनुमान जी की मूर्ति ने झपकाई पलक]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में प्रसिद्ध ओखलेश्वर धाम में हनुमान मंदिर है. इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है. इस मंदिर में हर महीने के रोहणी नक्षत्र में 27 वें दिन हनुमान जी का श्रृंगार किया जाता है. इस बार के श्रृंगार को लेकर दावा किया जा रहा है कि भगवान हनुमान की प्रतिमा ने अपनी पलकें झपकाईं. इस चमत्कारी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आइये आपको दिखाते हैं दंग कर देने वाला वीडियो.</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो</strong></p>
<p>वायरल वीडियो में जिस मंदिर का जिक्र किया जा रहा वह मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के बडवाह के पास ओखला गांव में स्थित है. इस प्राचीन हनुमान मंदिर के बारे में कई बार खबरें सामने आ चुकी हैं. अब हनुमान जी के पलक झपकाने की घटना को लेकर लोग अचरज में हैं. </p>
<p><strong>मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़</strong></p>
<p>वीडियो वायरल होने के बाद मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. यह घटना भगवान के श्रृंगार करते वक्त की बताई जा रही है. कई लोग दावा कर रहे हैं कि भगवान की मूर्ति के पलक झपकाने का वीडियो उन्होंने अपने मोबाइल में कैप्चर कर लिया है. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भक्तों के साथ मंदिर के पुजारी ने भी इस एक चमत्कारी घटना बताया है.</p>
<p><strong>श्रृंगार के दौरान हुई चमत्कारी घटना</strong></p>
<p>ओखलेश्वर धाम में हनुमान जयंति सहित साल में 13 बार हनुमान जी का श्रृंगार होता है. श्रृंगार में हजारों की संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं. वायरल वीडियो के मुताबिक शनिवार देर शाम जब हनुमान जी की मूर्ति का श्रृंगार हो रहा था तो मूर्ति ने अचानक पलक झपकाई. पुरानी मान्यता है कि ओखलेश्वर धाम में भगवान के दर्शन मात्र से ही हर मनोकामना पूरी होती है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/miracle-seen-in-the-famous-okhleshwar-dham-temple-in-khargone-district-hanuman-jis-idol-blinked						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/miracle-seen-in-the-famous-okhleshwar-dham-temple-in-khargone-district-hanuman-jis-idol-blinked</guid>
					<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 23:13:58 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[Pushya Nakshatra 2022 : दीपावली पर इस दिन आ रहा है पुष्य नक्षत्र, खरीदारी के लिए अभी से नोट कर लें तारीख, समय, महत्व]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p > साल भर के इंतजार के बाद यदि लोग खरीदारी के लिए कोई दिन शुभ मानते हैं तो वह है दीपावली पर आने वाला पुष्य नक्षत्र। आपको बता दें इस बार पुष्य नक्षत्र 18 अक्टूबर को आ रहा है। जो पूरे दिन और पूरी रात रहेगा। आपको बता दें इस दिन तुला संक्रांति भी है। दीपावली के त्योहार पर लोग इस दिन खरीदारी करना बेहद शुभ मानते हैं। अगर आप भी इस दिन का इंतजार कर रहे हैं। तो अभी से नोट कर लें पुष्य नक्षत्र की तारीफ। साथ ही जानें ये कब से कब तक रहेगा। हम आपको बताने जा रहे है कि किस राशि वालों को क्या खरीदना शुभ होगा।</p>
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<p ><strong>राशिवार क्या खरीदना होगा शुभ – </strong></p>
<p >GOOGLEADBLOCK<br /><strong>मेष, वृश्चिक, धनु, मीन, सिंह –</strong><br />मेष, वृश्चिक, धनु, मीन और सिंह राशि के जातकों को लाल चीजें खरीदना शुभ होगा। इसलिए इस राशि के जातक पुष्य नक्षत्र के दिन सोना और तांबे की खरीदारी कर सकते हैं।</p>
<p ><strong>कर्क, तुला और वृष राशि – kark, tula, vrash </strong><br />कर्क, तुला और वृष राशि के जातकों को सफेद चीजें खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इस राशि के जातकों को चांदी, सफेद वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ होगा।</p>
<p ><strong>कन्या, मिथुन -kanya mithun </strong><br />ज्योतिषाचार्यों की मानें तो कन्या और मिथुन राशि के जातकों को सौंदर्य संबंधी चीजों की खरीदारी करना शुभ होगा। ऐसे में इन चीजों की खरीदारी कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कब से कब तक रहेगा पुष्य नक्षत्र – </strong><br />18 अक्टूबर को सुबह ब्रहृम मुहूर्त में 4ः30 से शुरू होकर<br />19 अक्टूबर को सुब 7ः11 बजे तक रहेगा।</p>
<p ><strong>इसलिए खास मानते हैं पुष्य नक्षत्र (Pusya nakshatra sayog for shopping) </strong><br />ज्योतिष शास्त्र में सभी नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है। अगर ऐसे में यदि इस नक्षत्र पर शनि और गुरु की विशेष कृपा हो जाए तो यह बेहद शुभ हो जाता है। चूंकि शनि को शक्ति और ऊर्जा का कारका माना जाता है तो वहीं गुरु, ज्ञान और धन के देवता हैं। चूंकि इस साल यह पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन आ रहा है। इस दिन इसी पुष्य नक्षत्र विराजमान शनि और गुरु दोनों एक साथ मकर राशि में विराजमान होंगे। रहेंगे।</p>
<p ><strong>बहीखाते खरीदना होता है शुभ Diwali Pushya Nakshatra 2022 bahikhata </strong><br />चूंकि पुष्य नक्षत्र में हिंदू धर्म के अनुसार किसी नए काम की शुरुआत शुभ मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिन बहीखाते और कलम-दवाद खरीदना शुभ होता है। काम-काज में शुभता बढ़ेगी। बहीखाते या कलम-दवात खरीदने के बाद इनकी विधिवत पूजा करना चाहिए। धार्मिक पुस्तके खरीदना भी शुभ होता है।</p>
<p > </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/pushya-nakshatra-2022-pushya-nakshatra-is-coming-on-this-day-on-deepawali-note-down-the-date-time-im						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/pushya-nakshatra-2022-pushya-nakshatra-is-coming-on-this-day-on-deepawali-note-down-the-date-time-im</guid>
					<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 12:48:21 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चाणक्य नीति के अनुसार आइए जानते हैं सफलता प्राप्ति के उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>जीवन में मेहनत तो सभी लोग करते हैं लेकिन सफलता सबको हाथ नहीं लगती. कई लोग आत्मविश्लेषण कर इसकी वजह खोजने में कामयाब हो जाते हैं, जबकि बाकी लोग सोचते ही रह जाते हैं. भारत के महान दार्शनिक आचार्य चाणक्य ने अपनी लिखी पुस्तक चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में सफलता हासिल करने के लिए कई ऐसे उपाय बताए हैं, जिन पर चलकर कोई भी इंसान अपनी जिंदगी को कामयाब बना सकता है. आइए जानते हैं कि सफलता प्राप्ति के वे उपाय क्या हैं. </p>
<p><strong>जिंदगी में लक्ष्य निर्धारित करें </strong></p>
<p>आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) कहते कि अगर जिंदगी में कामयाब होना है तो सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करें. बिना लक्ष्य के आप भटकते हुए प्राणी के समान रहेंगे. अगर आपने पैसा कमाने का लक्ष्य निर्धारित किया है तो उसके लिए उपयुक्त योजना बनाएं. योजना के बिना आप अपने सपने को पूरा नहीं कर पाआगे. योजना बनने के बाद आप उसे गोपनीय रखते हुए पूरा करने का काम शुरू कर दें. आप एक दिन निश्चित रूप से अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे. </p>
<p><strong>पैसों की अहमियत को समझें </strong></p>
<p>चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में कहा गया है कि पैसा जिंदगी में सबकुछ तो नहीं लेकिन काफी कुछ जरूर है. इसलिए पैसों के मामले में कभी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. जो लोग बुरे वक्त के लिए पैसा बचाकर नहीं रखते और उसे अंधाधुंध खर्च करते रहते हैं, वे अक्सर संकट में फंसे रहते हैं. मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) ऐसे लोगों के घर कभी नहीं टिकती और उनका आवास छोड़कर चली जाती है. इसलिए समझदारी से पैसों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. </p>
<p><strong>हमेशा समय के साथ चलें  </strong></p>
<p>आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) कहते हैं कि जीवन में कामयाबी पाने के लिए समय की कद्र करना बहुत जरूरी है. जो इंसान वक्त की परवाह नहीं करता, वह एक दिन पछताता है. ऐसे लोग जिंदगी में कभी कामयाब नहीं हो पाते. वहीं समय के हिसाब से अपने आपको ढालने और उसके मुताबिक चलने वाला वक्त हमेशा कामयाब रहता है. इसलिए हमेशा समय की कद्र करें और उसके अनुरूप चलें. </p>
<p><strong>मेहनत करने में न करें कंजूसी</strong></p>
<p>किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए सही दिशा में मेहनत करना भी जरूरी होता है. अगर आप केवल लक्ष्य निर्धारित करके और योजना बनाकर घर पर बैठ जाएंगे तो आप जिंदगी में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे. इसलिए मेहनत करने में कभी कंजूसी न करें. जो इंसान मेहनत करता रहता है, वह देर से ही सही लेकिन अपनी मंजिल को जरूर प्राप्त कर लेता है. वहीं मेहनत न करने वाले लोग अंत में पछताते रह जाते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/according-to-chanakya-niti-lets-know-the-ways-to-achieve-success						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/according-to-chanakya-niti-lets-know-the-ways-to-achieve-success</guid>
					<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 01:43:50 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[स्वप्न शास्त्र: सपने में पैसे खोने, गिनने या फिर सड़क पर गिरे नोटों को उठाने मतलब, जानिए इसके शुभ और अशुभ संकेत]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज के समय में हर किसी की चाहत होती है कि वह अमीर होने के साथ सुख शांति से जिए। इसके लिए वह कड़ी मेहनत करता है। इसके साथ ही वह हर समय अमीर बनने के सपने देखता है। लेकिन अगर वो सोते हुए भी अमीर होने का सपना देखता है, तो उसका अर्थ जानना बेहद जरूरी है। जानिए आखिर क्या है सपने में पैसे खोने, गिनने या फिर सड़क पर गिरे नोटों को उठाने मतलब।</p>
<p>स्वप्न शास्त्र के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि सपने व्यक्ति के साथ होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होता है। आने वाले समय के बारे में संकेत देता है।</p>
<p><strong>जमीन में गिरे पैसे का अर्थ </strong></p>
<p>अगर किसी व्यक्ति को सपने में दिखाई देता है कि वह जमीन में गिरे पैसे को उठा रहा है तो इसका मतलब है कि वह वास्तव में है क्या और दुनिया को कौन सी हकीकत दिखा रहा है। सपने का अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी वास्तविक हकीकत पहचान लेनी चाहिए और उसी के अनुसार कार्य करना चाहिए।</p>
<p><strong>हवा में उछलते हुए पैसे देखना </strong></p>
<p>अगर कोई व्यक्ति सपने में पैसे उछलते हुए देखता है तो उसका मतलब है कि आने वाले समय में कोई व्यक्ति आपसे विशेष सलाह लेने वाला है।</p>
<p><strong>पैसे खो जाना देखना</strong></p>
<p>अगर कोई व्यक्ति सपने में पैसे खो जाना देखता है, तो इसका मतलब है कि वह किसी बात को लेकर काफी चिंतित है और तनाव में जी रहा है। इसलिए जरूरी है कि उस बात की जरूरत पर जाकर उसे हल करने की कोशिश करें। </p>
<p><strong>पैसे गिरते हुए देखना</strong></p>
<p>अगर कोई व्यक्ति सपने में पैसे खुद को गिनते हुए देखता है तो इसका मतलब है कि वह जल्द ही कामयाब होने वाला है।</p>
<p><strong>पैसे निगलते हुए देखना</strong></p>
<p>अगर कोई व्यक्ति खुद को सपने में पैसे निगलते हुए देखता है तो इसका मतलब है कि आने वाला समय सही नहीं जाने वाला है। इसलिए संभल कर रहे।</p>
<p><strong>कटे-फटे नोट देखना</strong></p>
<p>अगर कोई व्यक्ति सपने में कटे फटे नोट देखता है तो यह एक अशुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का मतलब है कि आने वाले समय में आपको धन हानि हो। </p>
<p><strong>गड़ा हुआ धन देखना </strong></p>
<p>अगर सपने में कोई व्यक्ति गड़ा हुआ धन देखता है तो इसका मतलब है कि आने वाले समय में उसे धन लाभ होगा। </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/dream-scripture-meaning-of-losing-money-counting-or-picking-up-notes-on-the-road-in-a-dream-know-its						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/dream-scripture-meaning-of-losing-money-counting-or-picking-up-notes-on-the-road-in-a-dream-know-its</guid>
					<pubDate>Thu, 15 Sep 2022 11:59:16 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[किसी कारणवश परिवार के लोग श्राद्ध नहीं कर पा रहें, तो ऐसे करें पितरों को प्रसन्न]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म करना शुभ माना जाता है पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ संतुष्ट होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। आश्विन मास की अमावस्या तिथि तक चलने वाले पितृपक्ष क् दौरान पितरों का श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। कई बार किसी कारणवश परिवार के लोग श्राद्ध नहीं कर पाते हैं। अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो कैसे पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं जानिए।</p>
<p>पितरों का श्राद्ध करते समय ब्राह्मण भोज के साथ दान देने का विधान है। इसके साथ ही परिवार सहित अपने करीबियों को बुलाकर भोज कराया जाता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का स्थिति ऐसी नहीं है कि वह ठीक ढंग से श्राद्ध कर पाएं, तो ऐसे में पद्म पुराण में बताया गया कि आखिर कैसे करना चाहिए पितरों का श्राद्ध।</p>
<p><strong>पद्मपुराण के एक श्लोक में लिखा है - ‘तस्माच्छ्राद्धं नरो भक्त्या शाकैरपि यथाविधि'</strong></p>
<p>इस श्लोक का मतलह है कि व्यक्ति पितरों का श्राद्ध शाक सब्जी से भी कर सकता है।</p>
<p>अगर आप बड़ा भोज करने के लिए सामर्थ्य नहीं है, तो पितरों को आशीर्वाद पाने के लिए शाक सब्जी से श्राद्ध कर दें। ऐसा करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>शाक का भी सामर्थ्य न हो, तो</strong></p>
<p>अगर आप शाक सब्जी से भी श्राद्ध करने में असमर्थ है, तो इस बारे में विष्णु पुराण में एक श्लोक बताया गया है।</p>
<p>शाक सब्जी के अभाव होने पर दक्षिण की ओर मुख करके आकाश की ओर दोनों भुजाओं को उठा दें और इस प्रार्थना करते हुए बोले</p>
<p><strong>"न मे·स्ति वित्तं धनं च नान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितृन्न्तो·स्मि।</strong></p>
<p><strong>तृप्यन्तु भक्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य॥"</strong></p>
<p>हे पितृगण.. मेरे पास श्राद्ध करने के लिए अपयुक्त धन-धान्य आदि नहीं है। हां मेरे पास आपके लिए श्रद्धा और भक्त है। मैं इन्हीं के द्वारा आपको तृप्त करना चाहूं। आप तृप्त हो।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/due-to-some-reason-the-family-members-are-not-able-to-perform-shradh-so-please-the-ancestors-like-th						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/due-to-some-reason-the-family-members-are-not-able-to-perform-shradh-so-please-the-ancestors-like-th</guid>
					<pubDate>Thu, 15 Sep 2022 11:53:46 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आश्विन मास में कई कार्यों को करने की मनाही है, आइए जानते हैं कि आश्विन मास में क्या करें और क्या नहीं।]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास साल का सातवां माह है। यह माह काफी खास होता है। क्योंकि इस माह पितरों के साथ देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिलता है। इसलिए इस माह को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष आश्विन मास 11 सितंबर से शुरू होकर 9 अक्टूबर 2022 तक चलेंगे। इस मास में पितृपक्ष, शारदीय नवरात्रि के साथ कोजागर पूजा के साथ शरद पूर्णिमा जैसे व्रत त्योहार पड़ रहे हैं। सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। आश्विन मास में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नवरात्र प्रारंभ होते हैं। इन्हें शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। आश्विन मास में कई कार्यों को करने की मनाही है। आइए जानते हैं कि आश्विन मास में क्या करें और क्या नहीं।</p>
आश्विन मास में क्या करें?
<p>आश्विन मास में पितृपक्ष पड़ते हैं। इसलिए पितरों का श्राद्ध कर्म अवश्य करें।</p>
<p>इस मास में पितरों का पिंडदान, तर्पण आदि जरूर करें।</p>
<p>इस मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं। इसलिए व्रतों का पालन जरूर करें।</p>
<p>नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधिवत तरीके से करें।</p>
<p>दुर्गा सप्तशती का पाठ रोजाना करें।</p>
<p>स्नान, दान-पुण्य का अधिक महत्व है। इसलिए दान जरूर करें।</p>
<p>रोजाना गुड़ का सेवन करें।</p>
आश्विन मास में न करें ये चीजें
<p>दूध का सेवन न करें।</p>
<p>इस मास में करेला का सेवन नहीं करना चाहिए।</p>
<p>तला हुआ, मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।</p>
<p>इस मास में धूप में ज्यादा निकलने से बचें। हमेशा पूरा शरीर ढक कर बाहर निकले।</p>
<p>आश्विन मास में मांसाहार, तामसिक भोजन, बैंगन, प्याज-लहसुन, बासी भोजन, सफेद तिल, लौकी, काला नमक, मसूर की दाल, सरसों का साग, चना आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/it-is-forbidden-to-do-many-things-in-the-month-of-ashwin-let-us-know-what-to-do-and-what-not-to-do-i						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/it-is-forbidden-to-do-many-things-in-the-month-of-ashwin-let-us-know-what-to-do-and-what-not-to-do-i</guid>
					<pubDate>Mon, 12 Sep 2022 09:44:17 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[यह पौधा घर में लगाने से मां लक्ष्मी स्वयं घर में वास करने लगती हैं और दूर होने लगती है पैसे की कमी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[हर सिंगार का पौधा घर में लगाने से क्या लाभ मिलता है?
<p>हरसिंगार का पेड़ घर में लगाने से मां लक्ष्मी खुद उस घर में निवास करने आती हैं. हरसिंगार के फूलों से मां लक्ष्मी का पूजन करने से लक्ष्मी वरदान मिलता है.</p>
हरसिंगार का पौधा कहां लगाना चाहिए?
<p>हरसिंगार के पौधे को घर के उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए. इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है घर में सुख शांति सदैव बनी रहती है. इस पौधे को घर की पश्चिम दिशा में भी लगाया जा सकता है और पश्चिमोत्तर दिशा भी इसके लिए उचित होती है.</p>
धन देने वाला पौधा कौन सा है?
<p>वास्तु शास्त्र में क्रासुला के पौधे को बहुत ही भाग्यशाली कहा गया है. इसे लगाने से घर में धन की आमद बढ़ जाती है और घर में कभी पैसे की किल्लत नहीं रहती. क्रासुला के पौधे को आम भाषा में जेड ट्री, लकी ट्री, मनी ट्री भी कहते हैं. वास्तुशाष्त्र में इसे धन का पौधा कहा जाता है.</p>
धन प्राप्ति के लिए घर में कौन सा पौधा लगाना चाहिए?
<p>घर में हरसिंगार का पौधा लगाने से घर में सुखशांति बनी रहती है और परिवार में खुशहाली रहती है. मान्यता के मुताबिक, जिस घर में हरसिंगार का पौधा होता है वहां मां लक्ष्मी का वास होता है. हरसिंगार का फूल मां लक्ष्मी को चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है.</p>
हरसिंगार का पौधा कब लगाना चाहिए?
<p>घर में हरसिंगार का पौधा लगाने से मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है. जानकारों का मानना है कि यदि घर में हरसिंगार का पौधा लगाना हो तो उसे सोमवार या गुरुवार के दिन लगाना चाहिए. इस दिन हरसिंगार का पौधा लगाना शुभ माना जाता है.</p>
हरसिंगार का पौधा किस दिन लगाना चाहिए?
<p>हरसिंगार का पौधा घर में लगाते ही खुशियां मिलने लगती हैं. इसे बहुत शुभ माना जाता है. इसको सोमवार या गुरुवार के दिन घर में लगाना अत्यंत ही शुभ माना जाता है.</p>
कौन सा पौधा घर में नहीं लगाना चाहिए?
<p>मान्यताओं के मुताबिक, पूर्व में पीपल, अग्निकोण में दुग्धदार वृक्ष, दक्षिण में पाकड़, निम्ब, नैऋत्य में कदम्ब, पश्x200dचिम में कांटेदार वृक्ष, उत्तर में गूलर, केला, छाई और ईशान में कदली वृक्ष नहीं लगाना चाहिए. लेकिन इसके लिए किसी वास्तुशास्त्री से अवश्य सलाह ली जानी चाहिए.</p>
किस पौधे का है मां लक्ष्मी से सीधा संबंध?
<p>लक्ष्मणा पौधे का मां लक्ष्मी से सीधा संबंध है. इस पौधे को भी घर में लगाने से मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न रहती हैं और उस घर में वास करती हैं जहां पर इसको लगाया जाता है. इसकी पत्तियां पीपल या पान के पत्ते के समान होती हैं. इस पौधे में धन को आकर्षित करने वाले गुण पाए जाते हैं.</p>
हरसिंगार का पौधा घर में किस दिशा में लगाना चाहिए?
<p>वास्तुशाष्त्र के मुताबिक, हरसिंगार का पौधा पूरब या उत्तर दिशा में लगाना उत्तम माना जाता है. इस पौधे को घर लगाने से सदैव सुखशांति बनी रहती है और घर में मां लक्ष्मी का सदैव वास रहता है.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/by-planting-this-plant-in-the-house-mother-lakshmi-herself-starts-living-in-the-house-and-starts-get						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/by-planting-this-plant-in-the-house-mother-lakshmi-herself-starts-living-in-the-house-and-starts-get</guid>
					<pubDate>Sun, 11 Sep 2022 13:36:51 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[अगर पितृदोष है तो कुछ उपाय करके इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं, जानिए इसके लक्षण, वजह और उपाय]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भाद्रपद पूर्णिमा के साथ पितृपक्ष शुरू हो चुके है। इस साल पितृपक्ष पूरे 16 दिनों के पड़ रहे हैं जो आश्विन मास की अमावस्या तिथि के साथ समाप्त होंगे। इन दिनों में पितरों का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर पृथ्वी पर आ जाते हैं, जिससे उनका श्राद्ध कर्म करके मोक्ष की प्राप्ति कर सके। </p>
<p>माना जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष चल रहा है वह भी इस अवधि में कुछ उपाय करके इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं। आइए जानते हैं क्या है पितृ दोष, साथ ही जानिए इसके लक्षण, वजह और उपाय।</p>
क्या है पितृ दोष?
<p>अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार विधि विधान से न किया जाए या फिर उस व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाए तो उस व्यक्ति से जुड़े परिवार को पितृ दोष का सामना करना पड़ता है। यह एक पीढ़ी ही नहीं बल्कि पीढ़ियों दर पीढ़ियों चलता रहता है।</p>
पितृदोष के लक्षण
<p><strong>संतान सुख न मिलना</strong></p>
<p>अगर किसी दंपति को ढेरों उपाय करने के बाद भी संतान सुख से वंचित होना पड़ रहा है। या फिर उत्पन्न हुए संतान मंदबुद्धु, विकलांग आदि होती है या फिर बच्चे के पैदा होते ही मृत्यु हो जाना।</p>
<p><strong>हानि होना</strong></p>
<p>बिजनेस से लेकर नौकरी में किसी न किसी तरह से हानि होना भी पितृदोष के कारण हो सकती है।</p>
<p><strong>परिवार में कलह</strong></p>
<p>घर में रह रहे लोगों के बीच किसी न किसी बात पर वाद-विवाद होता रहता है, तो यह पितृदोष का कारण हो सकता है।</p>
<p><strong>कोई न कोई बीमार रहना</strong></p>
<p>घर में मौजूद सदस्यों में से किसी न किसी का बीमार रहना।</p>
<p><strong>विवाह न होना</strong></p>
<p>विवाह में किसी न किसी तरह की अड़चन आना या फिर विवाह हो जाने के बाद तलाक तक बात पहुंच जाना।</p>
<p><strong>दुर्घटना का सामना</strong></p>
<p>पितृदोष होने पर व्यक्ति को दुर्घटनाओं का सामना भी करना पड़ता है।</p>
पितृदोष होने की वजह
<p>पितरों का अपमान करना</p>
<p>किसी सांप को मार देना। इससे सर्प के साथ पितृदोष लगता है</p>
<p>पितरों का विधिवत अंतिम संस्कार न करना</p>
<p>पितरों का श्राद्ध न करना</p>
<p>पीपल, नीम या फिर बरगद के पेड़ को कटवाना</p>
पितृदोष से मुक्ति दिलाएंगे ये उपाय
<p><strong>रोजाना चढ़ाएं माला</strong></p>
<p>अगर आपकी कुंडली में पितृदोष है, तो पितरों की फोटो दक्षिण दिशा की ओर लगाएं। इसके साथ ही रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्मरण करना चाहिए।</p>
<p><strong>पीपल में चढ़ाएं जल</strong></p>
<p>पीपल के पेड़ पर दोपहर के समय जल चढ़ाएं। इसके साथ ही फूल, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं और पितरों का स्मरण करें।</p>
<p><strong>दीपक जलाएं</strong></p>
<p>रोजाना शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाएं। रोजाना नहीं जला सकते, तो पितृपक्ष के दौरान जरूर जलाएं।</p>
<p><strong>कराएं विवाह</strong></p>
<p>पितृदोष से मुक्त पाने के लिए गरीब कन्याओं का विवाह कराएं। किसी के विवाह में मदद करने से भी पितृ दोष से निजात मिलेगी।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-there-is-pitra-dosh-then-by-taking-some-measures-you-can-get-rid-of-this-problem-know-its-symptom						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/if-there-is-pitra-dosh-then-by-taking-some-measures-you-can-get-rid-of-this-problem-know-its-symptom</guid>
					<pubDate>Sat, 10 Sep 2022 10:54:46 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[पितृ हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है, उनका विधि विधान से श्राद्ध कर्म उन्हें नाराज न करें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। पितरों की मुक्ति के लिए विधि विधान से श्राद्ध कर्म किया जाता है। 16 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष में पितरों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान समेत कई अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दौरान कई परहेज और सावधानियां भी बरतनी पड़ती है। मान्यता है कि इस अवधि में ऐसी कुछ चीजें हैं जिनका सेवन नहीं करना चाहिए। आइए हम विस्तार से इस बारे में अवगत कराते हैं।</p>
<p>पितृपक्ष के दौरान घर को साफ सुथरा रखना चाहिए। इस दौरान घर के किचन में बासी या झूठा खाना नहीं रखना चाहिए। रसोई में गंदा बर्तन रखने से पितृ नाराज हो जाते हैं। पितृपक्ष में लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब, सिगरेट व तामसिक भोजन व जमीन में उगने वाली सब्जियां जैसे मूली, आलू, अरवी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। चना, मसूर की दाल का सेवन करना भी वर्जित है।</p>
<p>पितृ पक्ष में करें दुर्गा सप्तशती या सुंदरकांड का पाठ : हर रोज दुर्गा सप्तशती या सुंदर कांड का पाठ करना चाहिए। इसके पाठ करने से न केवल पितरों को शांति मिलती है बल्कि प्रभावित व्यक्ति के जीवन की बाधाएं भी दूर होती हैं। प्रतिदिन घर में गीता का पाठ करें। ऐसा करने से आपको सभी परेशानियों से मुक्ति प्राप्त होगी।</p>
<p>उठते है जेहन में ये सवाल : पितरों को लेकर बहुत से लोगों में हमेशा जिज्ञासा बनी रहती है। जैसे वे कौन हैं, वे क्यों नाराज होते हैं, उनकी नाराजगी से क्या होता है। ये पितृ दोष क्या है? यदि हमारे पितृ हमसे नाराज हैं तो हमें कैसे मालूम चले कि वे हमसे नाराज हैं और यदि वे नाराज हैं तो हम उन्हें कैसे प्रसन्न करें। पितृ हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है। कोई न कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है।</p>
<p>मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है। पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है और इससे ऊपर स्वर्ग लोक है। कुछ लोग शंका करते हैं कि श्राद्ध में समर्पित की गईं वस्तुएं पितरों को कैसे मिलती है? कर्मों की भिन्नता के कारण मरने के बाद गतियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं। कोई देवता, कोई पितृ, कोई प्रेत, कोई हाथी, कोई चींटी, कोई वृक्ष और कोई तृण बन जाता है। तब मन में यह शंका होती है कि छोटे से पिंड से अलग-अलग योनियों में पितरों को तृप्ति कैसे मिलती है?</p>
<p>पितरों और देवताओं की योनि ऐसी है कि वे दूर से कही हुई बातें सुन लेते हैं, दूर की पूजा ग्रहण कर लेते हैं और दूर से कही गईं स्तुतियों से ही प्रसन्न हो जाते हैं। पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष व तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता हैं। इन्हीं को पितृ कहते हैं। जिस तिथि को माता-पिता का देहांत होता है, उसी तिथि को पितृपक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है।</p>
<p>शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में अपने पितरों के निमित्त जो अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुरूप शास्त्र विधि से श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं। पितृ दोष के अनेक कारण होते हैं। अपने माता-पिता तथा अन्य ज्येष्ठ जनों का अपमान न करें। प्रति वर्ष पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण अवश्य करें।</p>
<p>यदि इन सभी क्रियाओं को करने के पश्चात् पितृ दोष से मुक्ति न होती हो तो ऐसी स्थिति में किसी सुयोग्य कर्मनिष्ठ विद्वान ब्राह्मण से श्रीमद् भागवत् पुराण की कथा करवायें। वैसे श्रीमद् भागवत् पुराण की कथा कोई भी श्रद्धालु पुरुष अपने पितरों की शांति के लिए करवा सकता है। इससे विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/pitras-are-our-ancestors-whose-debt-is-on-us-dont-make-them-angry-with-their-rituals						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/pitras-are-our-ancestors-whose-debt-is-on-us-dont-make-them-angry-with-their-rituals</guid>
					<pubDate>Sat, 10 Sep 2022 10:33:24 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA['पितृ पक्ष' में पितर धरा पर आते हैं और श्राद्ध-तर्पण से संतुष्ट हो सुख-समृद्धि के आशीषों की वर्षा करते हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू इस साल 10 सितंबर से 'पितृ पक्ष' या 'श्राद्ध' मनाएंगे। पितृ पक्ष पितरों का महोत्सव है। उन्हें स्मरण करने और श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध व तर्पण करने का यह समय होता है। नवरात्रि से पहले 15 दिनों की अवधि को 'पितृ पक्ष' या 'श्राद्ध' के रूप में जाना जाता है। इस दौरान हिंदू अपने पूर्वजों को याद करते हैं। उन्हें प्रार्थना के रूप में भोजन प्रसाद चढ़ाते हैं।</p>
<p><strong>श्राद्ध के 15 दिन</strong></p>
<p>सनातन धर्म में जिस तरह देवों की पूजा आराधना के लिए अलग-अलग माह समर्पित हैं, उसी तरह आश्विन कृष्ण पक्ष देव तुल्य पितरों के नाम है। इसमें अपने वंशजों के आवाहन पर देव-पितर धरा पर आते हैं।</p>
<p>पूर्णिमा से अगली अमावस्या तक श्राद्ध के 15 दिन होते हैं। इस दिन सूर्योदय के समय पितरों को तिल, चावल और अन्य खाद्य सामग्री का भोग लगाया जाता है। इसके बाद 'पूजा', 'हवन' और 'दान' किया जाता है। इस दौरान किसी भी उत्सव की अनुमति नहीं होती है, इसके और कुछ भी नया नहीं खरीदा जा सकता है।</p>
<p><strong>हिंदू कैलेंडर के अनुसार तिथि</strong></p>
<p>हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पितृ पक्ष 'गणेश उत्सव' के बाद पखवाड़े मनाया जाता है और भाद्रपद (सितंबर) के हिंदू चंद्र महीने के दूसरे 'पक्ष' (पखवाड़े) में होता है। वहीं इसी प्रकार इस साल, 'पितृ पक्ष' 10 सितंबर से शुरू होगा और 25 सितंबर तक चलेगा, जिसके बाद नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव शुरू होगा।</p>
<p><strong>'पितृ पक्ष' का इतिहास</strong></p>
<p>'पितृ पक्ष' में अपने वंशजों के आवाहन पर देव-पितर धरा पर आते हैं। श्राद्ध-तर्पण से संतुष्ट हो सुख-समृद्धि के आशीषों की वर्षा करते हुए हुए अपने धाम को जाते हैं।  'पितृ पक्ष' का इतिहास बहुत गहरा है। किंवदंती है कि जब महाभारत के नायक कर्ण का निधन हो गया और स्वर्ग में प्रवेश किया, तो वह यह जानकर चौंक गए कि उन्होंने जो भी खाद्य पदार्थ छुआ था, वह सोने में बदल गया था, जिससे वह भूखा था।</p>
<p>जब कर्ण और सूर्य ने इंद्र से कारण के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने समझाया कि हालांकि कर्ण ने अपने पूर्वजों को 'पितृ पक्ष' में सोना दिया था, उन्होंने उन्हें कभी भोजन नहीं दिया था और परिणामस्वरूप, उन्होंने उसे शाप दिया था। अपने पूर्वजों की अज्ञानता को स्वीकार करते हुए, कर्ण ने 'श्राद्ध' समारोह करने और उनके सम्मान में भोजन और पानी देने के लिए 15 दिनों के लिए पृथ्वी पर वापस आकर क्षमा मांगने का वचन दिया। तबसे 15 दिनों की अवधि उस समय 'पितृ पक्ष' के रूप में जानी जाने लगी।।</p>
<p><strong>क्या है 'पितृ पक्ष' महत्व</strong></p>
<p>पितृ पक्ष के दौरान किसी के पूर्वजों की तीन पीढ़ियों की पूजा की जाती है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, मृत्यु के देवता यम द्वारा शासित स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का स्थान 'पितृलोक' पिछली तीन पीढ़ियों की आत्माओं का घर है। इन तीन पीढ़ियों से पहले की पीढ़ियां स्वर्ग में रहती हैं और इस वजह से उन्हें तर्पण नहीं दिया जाता है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/in-the-pitru-paksha-the-ancestors-come-to-the-earth-and-being-satisfied-with-the-shraadh-tarpan-they						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sat, 10 Sep 2022 01:43:34 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[वास्तु के इन नियमों का पालन करने से पितर प्रसन्न होंगे]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>शनिवार को पितृपक्ष शुरू हो रहे हैं। इसके साथ ही पितरों को याद करके श्राद्ध कर्म औप तर्पण विधि भी शुरू हो जाएगी। शास्त्रों के अनुस, पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करने से वह प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। कहा जाता है कि जब किसी पर पितृ प्रसन्न होते हैं, तो सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं, पितर नाराज होते, पितृदोष के साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए पितृपक्ष के दौरान कुछ उपायों को जरूर करना चाहिए। इसके अलावा वास्तु शास्त्र में कुछ चीजों के बारे में बताया गया है जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि वास्तु के किन नियमों का पालन करने से पितर प्रसन्न होंगे।</p>
<p><strong>इस जगह पर न रखें पितरों की तस्वीर</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, पितरों की तस्वीर सही दिशा में होना बेहद जरूरी है। इसलिए पितरों की तस्वीर बेडरूम, किचन, पूजा घर में नहीं लगानी चाहिए। इससे पितृ तो नाराज होते ही हैं। इसके साथ ही देव दोष भी लगता है। ऐसे में सुख-समृद्धि की कमी आती है और घर में वाद विवाद अधिक होते है। इसके साथ ही पितरों की तस्वीर ऐसी जगह न लगाएं, जहां से आते जाते आपकी नजर उसपर पड़ें।</p>
<p><strong>इन जगहों पर लगाएं पितरों की तस्वीर</strong></p>
<p>पितरों की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा की ओर लगानी चाहिए। क्योंकि यह दिशा यमराज के साथ-साथ पितरों की है।</p>
<p>पितृ पक्ष संबंधी ये वास्तु नियम रखें ध्यान</p>
<p><strong>चढ़ाएं जल</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, पितरों को प्रसन्न करने के लिए घर के मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखें रोजाना सुबह मुख्य द्वार में जल डालें।</p>
<p><strong>जलाएं दीपक</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा कही जाती है। इसलिए रोजाना शाम को दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष से भी मुक्ति मिलेगी।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/the-ancestors-will-be-happy-by-following-these-rules-of-vastu						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sat, 10 Sep 2022 01:22:56 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चाणक्य के अनुसार घर का मुखिया भूल कर भी ना करें यह ग़लतियाँ, वरना कभी भी नहीं टिकेगा पैसा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p class="p1">आचार्य चाणक्य को काफ़ी समझदार और नीति निर्देशक माना जाता है। और ऐसे ही चाणक्य ने कहीं नीतियाँ बताई है जिसका जीवन में बहुतप्रभाव पड़ता है। चाणक्य के अनुसार घर के मुखिया को हमेशा मधुर संबंध बनाए रखने चाहिए। आपको अपने भाई और अपने रिश्तेदारों के साथअच्छे संबंध बनाए रखने चाहिए। इससे आप पूरे घर को एक तार में बांध सकेंगे।</p>
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<p class="p1"><strong>भोजन का अनादर न करें</strong> – घर के मुखिया को कभी भी भोजन को बर्बाद नहीं करना चाहिए। जितनी जरूरत हो, ले लो। क्योंकि घर में बच्चे बड़ोंसे ही सीखते हैं। अगर बच्चे आपको ऐसा करते हुए देखते हैं, तो वे कल भी ऐसा ही करेंगे। ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है। घर में सुख–समृद्धि बनाए रखने के लिए कभी भी अन्न की बर्बादी न करें।</p>
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<p class="p1"><strong>बात करने का तरीक़ा</strong><strong>–</strong> घर के मुखिया को सभी से बात करनी चाहिए. इससे न सिर्फ रिश्ते बेहतर होते हैं, बल्कि कई समस्याओं का समाधान भी हो सकता है।इसलिए मुखिया का यह कर्तव्य है कि वह सबकी बात सुने और उन पर चर्चा करे।</p>
<p class="p1"><strong>फिजूलखर्ची से बचें – </strong>घर के मुखिया को परिवार के भविष्य के बारे में सोचकर आगे बढ़ना होगा. कभी–कभी फालतू खर्च आगे आने वालीसमस्याओं के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। इसलिए मुश्किल समय के लिए पैसे बचाएं।</p>
<p class="p1"><strong>सोच–समझकर निर्णय लें</strong>– घर के मुखिया को कोई भी निर्णय लेने से पहले बहुत सोच–विचार कर लेना चाहिए। कभी भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय नलें। यह परिवार के सदस्यों के भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए कोई भी फैसला सोच–समझकर लें।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/according-to-chanakya-do-not-make-these-mistakes-even-by-forgetting-the-head-of-the-house-otherwise-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/according-to-chanakya-do-not-make-these-mistakes-even-by-forgetting-the-head-of-the-house-otherwise-</guid>
					<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 19:31:10 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[अनंत चतुर्दशी: अनंत चतुर्दशी के दिन अत्यंत शुभ संयोग का बन रहा है रहा है जिससे भक्तों को बहुत लाभ मिलेगा]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>9 सितंबर 2022 के अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। यह दिन इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि इस भगवान विष्णु के अनंत रूपों की विधिवत पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का महत्व इसलिए बहुत अधिक है क्योंकि इस दिन गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2022) महापर्व का समापन हो जाता है और धूम-धाम से बप्पा को विदा किया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी के दिन अत्यंत शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है जिससे भक्तों को बहुत लाभ मिलेगा। आइए जानते हैं क्या है इस दिन का महत्व और शुभ मुहूर्त।</p>
<p>अनंत चतुर्दशी 2022 शुभ मुहूर्त (Anant Chaturdashi 2022 Shubh Muhurat)</p>
<p>अनंत चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ : 08 सितंबर 2022 को रात 09:02 से</p>
<p>अनंत चतुर्दशी तिथि समाप्त: 09 सितंबर को शाम 06:07 बजे तक</p>
<p>पूजन का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:10 मिनट से शाम 06:07 मिनट तक</p>
<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर बन रहा शुभ योग (Anant Chaturdashi 2022 Shubh Yoga)</strong></p>
<p>इस वर्ष अनंत चतुर्दशी पर्व पर अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस योग में में भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को धन और ऐश्वर्य का आशीर्वाद प्राप्त होगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस दिन रवि योग और सुकर्मी योग का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए कार्यों का परिणाम बहुत ही शुभ होता है और व्यक्ति को जीवन में सफलता प्राप्त होती है। इसके साथ यह भी बताया गया है कि रवि योग में विधि-विधान से की गई पूजा से भक्तों को भगवान से दोगुना आशीर्वाद प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>भगवान विष्णु का चमत्कारी मंत्र (Bhagwan Vishnu Mantra)</strong></p>
<p>शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं</p>
<p>विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम।</p>
<p>लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं</p>
<p>वंदे विष्‍णुं भवभयहरंसर्वलोकैकनाथम्।।</p>
<p><strong>इन मंत्रों का भी करें जाप</strong></p>
<p>ॐ अं वासुदेवाय नम:</p>
<p>ॐ आं संकर्षणाय नम:</p>
<p>ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:</p>
<p>ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:</p>
<p>ॐ नारायणाय नम:</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/anant-chaturdashi-very-auspicious-coincidence-is-happening-on-the-day-of-anant-chaturdashi-due-to-wh						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 09:39:46 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[अनंत चतुर्दशी : क्या आप जानते हैं, अनंत में कितनी गांठे होती है, इसे क्यों धारण किया जाता है और क्या मान्यताएं हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी को मनाए जाने वाले अनंत चतुर्दशी का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस पर्व के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा अनंत चतुर्दशी के एक दिन पूर्व जहां स्नानोपरांत अरवा भोजन ग्रहण किया जाता है। वहीं, अनंत चतुर्दशी के दिन काफी श्रद्धा, निष्ठा व सेवा भाव से भगवान विष्णु के 14 स्वरूपों की पूजा कर 14 गांठ वाले अनंत को धारण किया जाता है। महिला श्रद्धालुओं द्वारा जहां बांए भुजा में अनंत का धारण किया जाता है। वहीं पुरुष श्रद्धालु दाहिने भुजा में इसे धारण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि दु:खों से मुक्ति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के कथनानुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी के दिन व्रत रखकर अनंत की पूजा-अर्चना की थी। साथ ही 14 गांठ वाले अनंत डोरा को बांह पर धारण किया था। इसके बाद कौंडिल्य व उनकी पत्नी दीक्षा तथा शीला ने भी अनंत की पूजा की थी। उस समय से ही सनातन धर्म में उक्त तिथि को अनंत चतुर्दशी मानते हुए अनंत पूजा करने की परंपरा शुरू हुई।</p>
<p><strong>भगवान विष्णु के 14 स्वरूपों की होती है पूजा</strong></p>
<p>अनंत में कुल 14 गांठें होती हैं। यह सभी गांठें भगवान विष्णु के 14 नामों पर आधारित होती हैं। इस तरह अनंत पूजा में भगवान विष्णु के 14 नाम की पूजा की जाती है। अनंत के हर गांठ पर भगवान विष्णु के अनंत, पुरुषोत्तम, ऋषिकेश्, पद्मनाभ, माधव, बैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर व गोविद के नाम का आवाह्न किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को 14 प्रकार के फल, पकवान, मधु आदि का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने, कथा सुनने व अनंत डोरा का धारण करने से जहां सभी प्रकार के दु:खों से मुक्ति मिलती है। वहीं जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। अनंत धारण करने से पूर्व मंत्र का जाप श्रेयस्कर माना जाता है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/anant-chaturdashi-do-you-know-how-many-knots-are-there-in-infinity-why-it-is-worn-and-what-are-the-b						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 09:28:39 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[गणेशजी को प्रसन्न करने के लिए 10 दिनों तक लगाएं अलग-अलग तरह का भोग]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज से गणेश चतुर्थी का महोत्सव शुरु हो चुका है। लोग घरों में बप्पा की स्थापना करते हैं और पूरे विधि-विधान के साथ सुबह-शाम इनकी पूजा, आरती करते हैं। मंगल कार्यों के शुरूआत करते हैं। लेकिन अगर आपको मनचाहा फल चाहिए तो भगवान को उनकी प्रिय चीज़ों का भोग भी लगाएं। तो 10 दिन अलग-अलग तरह के भोग में आप किन चीज़ों को कर सकते हैं शामिल, यहां जानें इसकी पूरी लिस्ट। </p>
<p><strong>1. मोदक</strong></p>
<p>आप गणपति महराज को हर दिन अलग अलग प्रकार के मोदक भोग के रूप में लगा सकते हैं। चाकलेट. रवा, मावा मोदक उनका प्रिय भोग में से एक है।</p>
<p><strong>2. मोतीचूर लड्डू</strong></p>
<p>भगवान गणेश को मोदक के अलावा मोतीचूर लड्डूओं का भी भोग लगा सकते हैं। </p>
<p><strong>3. खीर</strong></p>
<p>चावल, केले की खीर भी भोग लगाने लिए एकदम बेस्ट है। </p>
<p><strong>4. तिल के लड्डू</strong></p>
<p>तिल, गुड़, मूंगफली और सूखे नारियल से तैयार होने वाला तिल के लड्डूओं का चढ़ावा भी भगवान गणेश को बहुत पसंद आता है। </p>
<p><strong>5. बासुंदी</strong></p>
<p>बासुंदी गाढ़ा दूध से तैयार होने वाली डिश है। जिसमें सूखे मेवे, इलायची और जायफल जरूर डालें इसका स्वाद बढ़ाने के लिए।</p>
<p><strong>6. बेसन के लड्डू</strong></p>
<p>घर में आसानी से तैयार होने वाले बेसन के लड्डूओं को भी आप भोग में शामिल कर सकते हैं। </p>
<p><strong>7. पूरनपोली</strong></p>
<p>महाराष्ट्र की इस मशहूर डिश को भी आप बना सकते हैं भोग का हिस्सा। जो खाने में बहुत ही टेस्टी होता है और मीठा भी।</p>
<p>8. मालपुआखास अवसरों पर तैयार होने वाले मालपुए से भी आप गणपति बप्पा को खुश कर सकते हैं। जिसे मिनटों में किया जा सकता है तैयार।</p>
<p><strong>9. नारियल लड्डू</strong></p>
<p>नारियल तो हर व्रत और पूजा का खास हिस्सा होता है। भगवान गणेश जी की पूजा में भी नारियल का भोग लगता है। नारियल या नारियल के लड्डुओं का भोग लगाना शुभ माना जाता है। </p>
<p><strong>10. श्रीखंड</strong></p>
<p>यह एक पारंपरिक स्वीट डिश है, जिसे आप घर पर ही तैयार कर के भगवान गणेश को प्रसाद के रूप में भोग लगा सकते हैं।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/to-please-ganesha-offer-different-types-of-bhog-for-10-days						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/to-please-ganesha-offer-different-types-of-bhog-for-10-days</guid>
					<pubDate>Thu, 01 Sep 2022 11:35:33 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[गणेशजी के ऐसे पांच गुण जो जीवन में सफलता के लिए जरूरी हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं का जिक्र मिलता है। हर एक देवता अपने विलक्षण गुणों की वजह से भक्तों के प्रिय हैं। लेकिन हम भगवान की सिर्फ पूजा-अराधना ही करते हैं उनके गुणों से कुछ सीखने की कोशिश नहीं करते। अगर हम उन गुणों का आधा प्रतिशत भी अपने जीवन में उतार लें तो हमारा जीवन पूरी तरह से सफल हो सकता है। ऐसे ही गुणों की खान हैं गणेश भगवान। जो अन्य देवताओं से दिखने में ही नहीं बल्कि कई चीज़ों में अलग हैं। इन्हें लंबोदर, विनायक, गजानन जैसे कई नामों से पुकारा जाता है। तो गणेश चतुर्थी के अवसर पर हम उनके ऐसे पांच गुणों के बारे में जानेंगे, जो सफल होने के लिए हैं जरूरी।</p>
<p><strong>हर परिस्थिति में खुश रहना</strong></p>
<p>भगवान गणेश जी से जो सबसे ज्यादा और बड़ी सीख मिलती है वो है जीवन में हमेशा खुश रहना। परिस्थितियां हमारे मुताबिक हों या न हो, व्यक्ति को खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। अंदर से खुश रहने वाला व्यक्ति बड़ी से बड़ी मुश्किल को आसानी से पार कर लेता है। भगवान गणेश को सबसे खुश रहने वाला देवता माना जाता है।</p>
<p><strong>धैर्य से काम लेना</strong></p>
<p>गणेश जी के जीवन से जो दूसरी बात सीखने योग्य है वो है धैर्य। किसी भी स्थिति में धैर्य का साथ न छोड़े फिर देखें उसका परिणाम। वहीं धैर्य न रखने वाले व्यक्ति को पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों ही जीवन में कई तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>शांत रहना</strong></p>
<p>तीसरा गुण तो भगवान गणेश से सीखना चाहिए वो है शांतचित्त बने रहना। शांतचित्त रहकर आप प्रोडक्टिव सोच सकते हैं। अपने ऊपर काम कर सकते हैं। मन भी उस वक्त सही डिसीजन ले पाता है जब आपका मन पूरी तरह से शांत होता है।</p>
<p><strong>छोटे-बड़े का भेदभाव न करना</strong></p>
<p>चौथी सीख जो भगवान गणेश से सीखने लायक है वो है छोटे-बड़े के भेदभाव का त्याग। वो जितना प्यार नंदी बैल से करते थे उनता ही मूषकराज से भी। इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को बराबर का सम्मान देना चाहिए। कई बार छोटे से दिखने वाले प्राणी बड़ा काम कर जाते हैं।</p>
<p><strong>विवेकशील होना</strong></p>
<p>पांचवीं सीख जो भगवान गणेश के जीवन से हमें सीखनी चाहिए वो है विवेकशीलता। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए क्या सही है और उसे पाने के लिए कैसे क्या करना है ये हमारे विवेक पर ही निर्भर करता है।</p>
<p>तो अगर आप लाइफ को आसान बनाना चाहते हैं और जिंदगी में सफल भी होना चाहते हैं, तो इन गुणों को उतार लें अपने जीवन में।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/five-such-qualities-of-ganesha-which-are-necessary-for-success-in-life						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/five-such-qualities-of-ganesha-which-are-necessary-for-success-in-life</guid>
					<pubDate>Thu, 01 Sep 2022 11:22:56 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[गणेश चतुर्थी: गणेश की मूर्ति स्थापित करने जा रहे हैं, तो मूर्ति खरीदने से पहले ये जान लें बातें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>गणेश उत्सव के दौरान जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की पूजा विधिवत तरीके से करता है, तो उसकी हर एक मनोकामना पूर्ण होती है। अगर आप भी इस साल गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने जा रहे हैं, तो पहले ये मूर्ति खरीदने से पहले ये बातें जान लें, जिससे कि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो।</p>
<p>भगवान गणेश का उत्सव भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 31 अगस्त से शुरू हो रहा है। गणेश उत्सव पूरे 10 दिनों तक चलते हुए 9 सितंबर को समाप्त होगा। गणेश चतुर्थी के दिन घरों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है। </p>
<p><strong>गणेश जी की ऐसी मूर्ति लाएं घर</strong></p>
<p>भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय उनकी मुद्रा पर जरूर ध्यान रखें। वास्तु के अनुसार माना जाता है कि ललितासन यानी बैठी हुई मुद्रा में गणेश जी की मूर्ति सबसे अच्छी होती है। इस मूर्ति को घर लाने से सुख-समृद्धि और शांति आती है। इसके अलावा गणपति जी की लेटे हुए अवस्था में मूर्ति लाना भी माना जाता है शुभ।</p>
<p><strong>गणपति जी की सूंड की दिशा</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणपति बप्पा के बैठने की मुद्रा के साथ-साथ उनके सूंड की दिशा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। वास्तु के अनुसार, गणपति जी की सूंड बाईं ओर झुकी होनी चाहिए। ऐसी मूर्ति स्थापित करने से सुख-समृद्धि के साथ सफलता मिलती है। वहीं दाएं ओर वाली झुकी हुई सूंड वाले गणेश जी को प्रसन्न करना काफी मुश्किल है।</p>
<p><strong>मूषक और मोदक</strong></p>
<p>घर में गणपति बप्पा की मूर्ति लाते समय इस बात का जरूर रखें कि मूर्ति में मूषक हो और हाथों में मोदक हो। क्योंकि मोदक भगवान को अति प्रिय है और मूषक गणेश जी का वाहन है।</p>
<p><strong>इस रंग की लाएं मूर्ति</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार आत्म विश्वास जगाने के लिए लाल सिंदूर के रंग की गणेश मूर्ति घर लाएं और सुख-समृद्धि और शांति के लिए सफेद रंग की गणेश जी की मूर्ति घर लाएं।</p>
<p><strong>इस दिशा में करें गणेश जी की मूर्ति स्थापित</strong></p>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना करते समय दिशा का सबसे अधिक ध्यान रखें। इसलिए गणेश जी की मूर्ति उत्तर दिशा में रखें। क्योंकि इस दिशा में मां लक्ष्मी के साथ शिवजी भी वास करते हैं। इसके साथ ही उनका मुख घर के मुख्य द्वार की ओर होना चाहिए।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/ganesh-chaturthi-if-you-are-going-to-install-an-idol-of-ganesha-then-know-these-things-before-buying						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/ganesh-chaturthi-if-you-are-going-to-install-an-idol-of-ganesha-then-know-these-things-before-buying</guid>
					<pubDate>Thu, 01 Sep 2022 00:50:15 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सुख-समृद्धि और धन-वैभव चाहते हैं तो गणेशजी की इस रंग की मूर्ति की स्थापना करें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>देशभर में गणेश चतुर्थी का उत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है. इस साल 31 अगस्त यानी बुधवार को गणपति हमारे घरों में पधारेंगे. इसी दिन गणपति जी पूरे विधि-विधान के साथ उनकी पूजा की जाएगी. गणपति की घर में स्थापना करने से पहले कुछ बातों की ध्यान रखना बेहद जरूरी है. वास्तु शास्त्र में गणेश स्थापना और पूजा के कुछ नियम बताए गए हैं. इन नियमों का पालन करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी.</p>
वास्तु में बताए गए हैं गणेश स्थापना के नियम
<p>शास्त्रों के अनुसार, घर में गणेश स्थापना को लेकर कई नियम बताए गए हैं. इसमें उनके प्रतिमा के स्वरूप से लेकर उनकी डिजाइन, रंग, सूंड का आकार और दिशा के बारे में बताया गया है. गणेश पूजा में इन बातों का ध्यान रखने से घर में सुख समृद्धि के और धन-वैभव की कमी नहीं होती है.</p>
धन प्राप्ति के लिए गुलाबी रंग के गणेश जी की करें पूजा
<p>आपको बता दें कि गणेश भगवान को प्रथम पूज्य माना जाता है. किसी भी पूजा-पाठ में सबसे पहले उनकी आराधना होती है. इसके अलावा धन प्राप्ति के लिए भी गणेश जी की पूजा की जाती है. इसलिए आर्थिक वैभव की प्राप्ति के लिए गणेश जी की मूर्ति की स्थापना की जाती है. इसके लिए आप घर में गुलाबी रंग के गणेश जी रख सकते हैं.</p>
सफेद गणेश जी होते हैं बेहद पवित्र
<p>अगर आप घर में सुख-समृद्धि और शांति चाहते हैं, तो उनको अपने घर में सफेद रंग के गणेश जी की स्थापना करनी चाहिए. वास्तु के मुताबिक, सफेद रंग के गणपति बेहद पवित्र माने जाते हैं. ऐसे में घर में सफेद रंग की गणेंश जी की मूर्ति स्थापित करने से शांति बनी रहती है.</p>
संकट हर्ता हैं गणपति
<p>इसके अलावा गणेश जी की पूजा करने से पुराने अटके काम भी पूरे हो जाते हैं. अगर आपका कोई काम अटका हुआ है या कोई अन्य बाधा है, तो घर में सिंदूरी रंग के गणेश जी स्थापित करने चाहिए. घर में सिंदूरी रंग के गणेश जी की रोजाना पूजा करने से आपके सारे संकट दूर हो जाएंगे.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/if-you-want-happiness-prosperity-and-wealth-then-establish-an-idol-of-this-color-of-ganesha						]]>
					</link>
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					<pubDate>Thu, 01 Sep 2022 00:50:02 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[गणेश चतुर्थी के अवसर पर इन चीजों का जरूर ध्यान रखें, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>गणेश चतुर्थी का पर्व 31 अगस्त से शुरू हो रहा है जो 10 दिनों तक चलते हुए अनंत चतुर्थी के दिन समाप्त होगी। इस दौरान भगवान गणेश को विधिवत घर में विराजित किया जाएगा। भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य को करने से पहले गणेश पूजा करना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से भविष्य में शुभ फलों की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी के दिन देशभर में गणपति बप्पा के विभिन्न तरह के पंडाल लगते हैं। इसके साथ ही घर में भी दिनों के हिसाब से बप्पा को विराजित करते हैं। अगर आप भी इस बार गणेश चतुर्थी के अवसर पर घर में गणपति बप्पा को ला रहे हैं, तो इन चीजों का जरूर ध्यान रखें।</p>
<p><strong>न करें लहसुन-प्याज का सेवन</strong></p>
<p>अगर आप भगवान गणेश को घर में स्थापित कर रहे हैं, तो इस बाद का ख्याल रखें कि न ही भगवान के भोग में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल करें और न ही खुद इसका सेवन करें। क्योंकि इसे तामसिक भोजन माना जाता है।</p>
<p><strong>भगवान गणेश को न चढ़ाएं तुलसी</strong></p>
<p>भगवान गणेश को तुलसी बिल्कुल भी अर्पित न करें। क्योंकि तुलसी जी ने भगवान गणेश को शादी का प्रस्ताव दिया था जिसे गणपति जी ने ठुकरा दिया था। जिसके कारण तुलसी ने दो शादियां का शाप गणेश जी को दे दिया। इससे क्रोधित होकर गणेश जी ने भी राक्षस से शादी होने का शाप दे दिया। इसके बाद से गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है।</p>
<p><strong>घर में लगाएं नई मूर्ति</strong></p>
<p>अगर आप इस साल घर में गणपति जी की मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि घर में रखी गणपति जी को स्थापित न करें बल्कि नई मूर्ति लेकर आएं।</p>
<p><strong>इस तरह न करें गणपति जी के दर्शन</strong></p>
<p>शास्त्रों के अनुसार, अंधेरे में गणपति जी के दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए जब भी गणपति जी की पूजा या दर्शन करें तो लाइट की उचित व्यवस्था रखें।</p>
<p><strong>न पहनें इस रंग के कपड़े</strong></p>
<p>भगवान गणेश की पूजा करते समय नीले और काले रंग के वस्त्र न पहनें। क्योंकि काले और नीले रंग के वस्त्र शनिदेव से संबंधित है। इसलिए इस रंग के कपड़े पहनने से बचें।</p>
<p><strong>एक से ज्यादा न रखें मूर्ति</strong></p>
<p>शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश की स्थापना करते समय इस बात का ध्यान रखें कि एक से ज्यादा मूर्ति न रखें। यह अशुभ माना जाता है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/on-the-occasion-of-ganesh-chaturthi-keep-these-things-in-mind-otherwise-you-will-not-get-the-fruits-						]]>
					</link>
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					<pubDate>Thu, 01 Sep 2022 00:49:47 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[चाणक्य नीति अनुसार महिलाओं के अंदर है अगर ये चार अवगुण तो समझो बर्बादी निश्चित, बनाकर रखें इनसे दो कदम दूरी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आचार्य चाणक्‍य द्वारा लिखा गया नीति शास्‍त्र मनुष्‍य जीवन के लिए अनमोल खजाना है। इसमें जीवन के रहस्‍यों को लेकर कई बातें बताई गई हैं। इनमें बताए गए उपायों को अपना कर व्‍यक्ति अपने जीवन को सुधार सकता है। आचार्य चाणक्‍य ने अपने इस नीति शास्‍त्र में महिलाओं के बारे में भी कई बातें बताई हैं। आचार्य कहते हैं कि परिवार को बनाने-बिगाड़ने में महिलाओं की सबसे बड़ी भूमिका होती है। अगर महिला गुणी है तो वह परिवार की दशा सुधार ऊंचाइयों पर ले जाती है, वहीं अवगुणों से युक्‍त महिला घर-परिवार को तबाह कर सकती है। इसलिए ऐसी महिलाओं से हमेशा दूरी बनाकर रखें।</p>
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अशिक्षित महिला
<p>आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि शिक्षा परिवार और समाज में बड़ा बदलाव लाता है। अगर कोई शिक्षित और बुद्धिमान महिला है तो वह परिवार और समाज का निर्माण का कार्य करेगी। वहीं अशिक्षित महिला परिवार को बर्बाद कर सकती है। क्‍योंकि शिक्षा के अभाव में इनके अंदर कई तरह के ऐसे अवगुण घर कर सकते हैं, जो पूरे समाज को नुकसान पहुंचा सकते हैं।</p>
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लालच से युक्‍त महिला
<p>आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि पुरुष हो या महिला अगर किसी में लालच की भावना आ गई तो वह उसके समेत आसपास के लोगों को बर्बाद कर सकती है। वहीं अगर महिला के अंदर लालच का अवगुण है तो इसका सबसे ज्‍यादा प्रभाव परिवार पर पड़ता है। इस अवगुण से युक्‍त महिला न केवल घर की शांति भंग कर देती है, बल्कि पूरे परिवार को ही बर्बाद कर देती हैं।</p>
अहंकारी महिला
<p>आचार्य चाणक्‍य का मानना है कि अहंकार हर मानव के लिए विनाशकारी होता है। वहीं अहंकार अगर किसी स्‍त्री में है तो उससे मां सरस्‍वती और मां लक्ष्‍मी दोनों नाराज रहती हैं। ऐसी महिलाएं ना तो अपने ज्ञान-बुद्धि का उपयोग कर पाती है और न ही सही दिशा में कोई कार्य कर पाती है। ये अपने अहंकार के कारण घर की सुख-समृद्धि को पूरी तरह से खत्‍म कर देती हैं।</p>
झूठ बोलने वाली महिला
<p>किसी महिला में अगर झूठ बोलेने का अवगुण है, तो यह भी परिवार के बर्बादी का कारण बन सकता है। आचार्य कहते हैं कि जो महिलाए झूठ बोलती हैं, वे अपने परिवार को कभी भी धोख दे सकती है। इनके झूठ बोलने से परिवार के बीच हमेशा लड़ाई-झगड़ा होता रहता है। जिससे पूरा परिवार ही बर्बाद हो जाता है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/according-to-chanakya-policy-if-these-four-demerits-are-inside-women-then-understand-that-the-ruin-i						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/according-to-chanakya-policy-if-these-four-demerits-are-inside-women-then-understand-that-the-ruin-i</guid>
					<pubDate>Tue, 30 Aug 2022 12:40:48 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जानिए हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने का विधान है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए इस व्रत को रखती है। इस दिन महिलाएं मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजा करती है। बता दें कि यह व्रत भी हरियाली तीज और कजरी तीज की तरह ही निर्जला रखा जाता है।</p>
हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त
<p><strong>हरतालिका तीज 2022 शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि प्रारंभ- 29 अगस्त, सोमवार को दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से शुरू</p>
<p>शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि समाप्त- 30 अगस्त, मंगलवार को दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक</p>
<p><strong>हरतालिका तीज पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>सुबह के समय हरतालिका पूजन मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 42 मिनट तक</p>
<p>प्रदोष काल हरतालिका पूजन मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 42 मिनट से दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक</p>
<p>शाम को पूजा का मुहूर्त: शाम 6 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 51 मिनट</p>
<p>तीज पारण का समय- 31 अगस्त</p>
<p><strong>हरतालिका तीज पूजन विधि</strong></p>
<p>इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण कर लें।</p>
<p>इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का मनन करते हुए व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>हरतालिका तीज के दिन काली मिट्टी या रेत से शंकर-पार्वती मूर्ति बनाएं।</p>
<p>एक लकड़ी की चौकी में चारों कोने में केले के पत्ते कलावा की मदद से बांध दें।</p>
<p>इसके बाद भगवान शिव के साथ परिवार की मूर्ति स्थापित कर दें।</p>
<p>भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा करें।</p>
<p>इसके साथ ही मां को सोलह श्रृंगार चढ़ाएं और महादेव को भी वस्त्र अर्पित करें।</p>
<p>अब भोग लगाएं।</p>
<p>भोग लगाने के बाद घी का दीपक जलाएं</p>
<p>अब हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें।</p>
<p>अंत में आरती कर के भूल चूक के लिए माफी मांगे। दिनभर व्रत रखने के साथ रात के समय जागरण करें।</p>
<p>अगले दिन स्नान आदि करने के बाद शिव-पार्वती जी की पूजा करके आरती कर लें।</p>
<p><strong>इसके बाद व्रत खोलें।</strong></p>
<p>हरतालिका तीज पर करें इन मंत्रों का जाप</p>
<p><strong>पति की लंबी के लिए</strong></p>
<p>नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।</p>
<p>प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।</p>
<p><strong>मनचाहे वर के लिए</strong></p>
<p>हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।</p>
<p>तथा माम कुरु कल्याणी कांतकांता सुदुर्लाभाम्।।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/know-the-auspicious-time-and-worship-method-of-hartalika-teej						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/know-the-auspicious-time-and-worship-method-of-hartalika-teej</guid>
					<pubDate>Tue, 30 Aug 2022 09:15:44 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[हरतालिका तीज के दिन कुछ खास उपाय करके विवाह से जुड़ी समस्याओं के साथ ही अन्य समस्याओं से छुटकारा पा सकते है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर माता पार्वती से संबंधित हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के साथ मजबूत रिश्ते और सौभाग्य की कामना करते हुए रखती हैं। इस व्रत को महिलाएं बिना पानी पिएं यानी निर्जला रखती हैं। इस दिन मां पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। इसके बाद अगले दिन यानी चतुर्थी के दिन स्नान आदि करने के बाद दान पुण्य करके व्रत को खोलती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन कुछ खास उपाय करके विवाह से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।</p>
हरतालिका तीज पर करें ये उपाय
<p><strong>विवाह में हो रही है देरी</strong></p>
<p>अगर किसी कारण विवाह होने में विलंब हो रहा है, तो पार्थिव शिवलिंग बनाकर 21 बेलपत्र चढ़ाएं। इसके साथ ही 11 या 21 बार परिक्रमा करें। इसके बाद इस पार्थिव शिवलिंग को बेल के पेड़ के नीचे रख दें। इसके बाद इस मंत्र को बोले- कात्यायनी महामाये महायोगिनी धीश्वरी नन्दगोपसुतं देवि पतिं में कुरु ते नम:</p>
<p>अगर कुंडली में विवाह का योग नहीं बन रहा है, तो इस दिन मां पार्वती को 11 गांठ हल्दी चढ़ा दें। इसके बाद इन्हें कन्याओं को दे दें। ऐसा करने से हर कष्ट से निजात मिल जाएगी।</p>
<p><strong>सुखी वैवाहिक जीवन के लिए</strong></p>
<p>हरतालिका तीज के दिन सूखे मालपुआ भगवान गणेश को अर्पित करें। ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ेगा।</p>
<p>दांपत्य जीवन को सुखी बनाने के लिए हरतालिका तीज के दिन पत्नियां अपने पति से मांग में सिंदूर भराने के साथ चूड़ी आदि पहनें।</p>
<p><strong>मनचाहा जीवनसाथी के लिए</strong></p>
<p>हरतालिका तीज को शाम के समय शिव-पार्वती जी के मंदिर जाकर घी के 11 दीपक जलाएं। इससे कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>सौभाग्य के लिए</strong></p>
<p>हरतालिका तीज के दिन सौभाग्य पाने के लिए मां पार्वती को खीर का भोग लगाएं।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/by-taking-some-special-measures-on-the-day-of-hartalika-teej-you-can-get-rid-of-problems-related-to-						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/by-taking-some-special-measures-on-the-day-of-hartalika-teej-you-can-get-rid-of-problems-related-to-</guid>
					<pubDate>Tue, 30 Aug 2022 09:09:20 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जानिये इस सप्ताह के व्रत-त्यौहार और इन व्रत-त्यौहारों पर किसकी पूजा की जाती है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ इस सप्ताह की शुरुआत हो रही है। इस सप्ताह में अगस्त माह के आखिर दो दिनों के साथ सितंबर माह की शुरुआत हो रही है। इस सप्ताह हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, सिद्धि विनायक व्रत, सूर्य षष्ठी व्रत, संतान सप्तमी व्रत जैसे कई बड़े तीज त्योहार पड़ रहे हैं। आइए जानते हैं इस सप्ताह पड़ने वाले सभी व्रत त्योहारों के बारे में।</p>
साप्ताहिक व्रत त्योहार
<p><strong>हरतालिका तीज- 30 अगस्त, मंगलवार</strong></p>
<p>पंचांग के अनुसार, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका व्रत रखा जाता है। इसे गौरी तृतीया के व्रत भी कहा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के सेथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी, गणेश उत्सव का आरंभ- 31 अगस्त, बुधवार</strong></p>
<p>पूरे देश में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी दिन से अगले 10 दिनों के लिए गणेश उत्सव शुरू आरंभ हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। इसी कारण इस दिन घर में गणपति बप्पा लाना शुभ माना जाता है। भक्तगण गणपति जी को घर में विधिवत तरीके से स्थापित करके विधिवत पूजा अर्चना करते हैं। इसके बाद तय समय पर उनकी विदाई करते हैं।</p>
<p><strong>ऋषि पंचमी व्रत-1 सितंबर, गुरुवार</strong></p>
<p>भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन किसी देवी-देवता नहीं बल्कि सप्तऋषि की पूजा करने का विधान है। यह व्रत महिलाओं के लिए काफी खास माना जाता है। इसे भाई पंचमी नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को धार्मिक कार्यों में शामिल होने की मनाही होती है। अगर कोई महिला मासिक धर्म के दौरान किसी पूजा आदि में शामिल हो जाती है, तो उसे कई दोषों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ऋषि पंचमी के दिन व्रत करके महिला हर तरह के दोषों से छुटकारा पा सकती हैं।</p>
<p><strong>सूर्य षष्ठी व्रत -2 सितंबर, शुक्रवार</strong></p>
<p>भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य षष्ठी का व्रत रखा जाता है। इसे ललिता षष्ठी नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की विधिवत पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पण करने के साथ पूजा जरूर करना चाहिए। इस व्रत को करने से आंखों संबंधी बीमारियों से बचाव हो सकता है। इसके साथ ही इस दिन लाल रंग के फूल, लाल रंग के वस्त्र, मसूर की दाल का दान करना शुभ माना जाता है।</p>
<p><strong>संतान सप्तमी व्रत- 3 सितंबर, शनिवार</strong></p>
<p>भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि वाले दिन किया जाता है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने के साथ संतान की रक्षा के लिए कामना की जाती है। इस व्रत को सिर्फ दोपहर तक ही रखने का विधान है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूजा करती है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/know-this-weeks-fast-festival-and-who-is-worshiped-on-these-fast-festivals						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/know-this-weeks-fast-festival-and-who-is-worshiped-on-these-fast-festivals</guid>
					<pubDate>Tue, 30 Aug 2022 08:59:45 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[क्यों कभी रोटियां गिनकर नहीं बनानी चाहिए और जरूरत से 4 रोटियां ज्‍यादा बनाना चाहिए, जानिए इसकी वजह]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>जब से एकल परिवारों का चलन बढ़ा है, घरों में हर सदस्‍य के हिसाब से गिनकर रोटियां बनाई जाने लगी हैं. जाहिर है जब रोटियां गिनकर बनेंगी तो खिलाई भी गिनकर जाएंगी. बढ़ते मोटापे-बीमारियों को देखते हुए कम खाने की ये ट्रिक एक नजर में तो अच्‍छी लग सकती है लेकिन यह जीवन पर बहुत बुरा असर डालती है. यह न केवल कुंडली के शुभ ग्रहों के असर को गड़बड़ा देती है, बल्कि घर की सुख-शांति-समृद्धि और परिजनों की सेहत तक छीन लेती है. आइए आज जानते हैं कि रोटी का ग्रहों से क्‍या संबंध है और रोटियां पकाने को लेकर धर्म, ज्‍योतिष और वास्‍तु शास्‍त्र में क्‍या मार्गदर्शन दिया गया है. </p>
हमेशा जरूरत से 4 रोटियां ज्‍यादा बनाएं 
<p>घर के सदस्‍यों के भोजन के लिए जितनी रोटियों की जरूरत है, हमेशा उससे 4 से 5 ज्‍यादा रोटियों का आटा तैयार करना चाहिए. इसमें पहली रोटी गाय के लिए बनानी चाहिए. इसका आकार तवे जितना बड़ा होना चाहिए. वहीं आखिरी रोटी कुत्‍ते के लिए बनानी चाहिए. इसे तोड़कर गाय की रोटी से अलग रख देना चाहिए. </p>
<p>वहीं 2 रोटी मेहमान के लिए बनानी चाहिए. सनातन धर्म में अतिथि को भगवान का रूप माना गया है. इसलिए पहले के समय में घरों में अप्रत्‍याशित तौर पर आने वाले मेहमान के लिए रोज अतिरिक्‍त रोटियां बनाई जाती थीं. ऐसा करने से घर में बरकत बनी रहती है और मां अन्‍नपूर्णा की कृपा भी रहती है. घर आए मेहमान का भूखा जाना अच्‍छा नहीं होता है. यदि मेहमान न आएं तो ये रोटियां खुद उपयोग कर लें या गाय अथवा कुत्‍ते, पक्षियों आदि को दे दें. </p>
बासी आटे से बनी रोटी कराती है परिवार में झगड़ा 
<p>जब रोटियां गिनकर बनाई जाती हैं तो बचे हुए आटे को फ्रिज में रख दिया जाता है और अगले दिन इसका इस्‍तेमाल किया जाता है. ऐसा करना वैज्ञानिक नजरिए से तो गलत है ही क्‍योंकि इसमें पैदा हुए बैक्‍टीरिया कई बीमारियों को जन्‍म देते हैं, इसके अलावा यह ज्‍योतिष के लिहाज से भी गलत है. </p>
<p>रोटी का संबंध सूर्य और मंगल से है. रोटी हमें ऊर्जा देती है लेकिन जब बासी आटे से रोटी बनाई जाती है, तो आटे में पैदा हुए बैक्‍टीरिया के कारण उसका संबंध राहु से हो जाता है. ऐसी रोटी कुत्‍ते को दी जानी चाहिए. लेकिन जब कुत्‍ते को दी जाने वाली ये रोटियां यानी कि बासी आटे की रोटियां जब घर के लोग खाते हैं तो वह सामान्‍य से तेज आवाज में बोलते हैं और यह स्थितियां झगड़े का कारण बनती हैं. लिहाजा घर में शांति चाहते हैं तो कभी भी बासी आटे से बनी रोटियां घर के लोगों को नहीं खानी चाहिए.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/why-should-never-make-rotis-by-counting-and-make-4-more-rotis-than-required-know-the-reason						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/why-should-never-make-rotis-by-counting-and-make-4-more-rotis-than-required-know-the-reason</guid>
					<pubDate>Sun, 28 Aug 2022 19:01:36 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[भोजन करने के भी हैं नियम, हमेशा इस दिशा में मुँह करके भोजन करें नहीं तो होगा बड़ा नुकसान]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भोजन का सीधा संबंध हमारी सेहत से होता है लेकिन इसके अलावा भी भोजन से मिली ऊर्जा हर पर बड़ा असर असर डालती है. इसलिए वास्‍तु शास्‍त्र में भोजन पकाने से लेकर, भोजन करने की दिशा और तरीके पर भी बड़ा जोर दिया गया है. वास्‍तु शास्‍त्र के इन नियमों का जरूर पालन करना चाहिए. वरना सेहत से लेकर आर्थिक स्थिति तक पर बुरा असर पड़ता है. </p>
इस दिशा की ओर मुख करके न करें भोजन 
<p>भोजन करते समय हमेशा दिशा का ध्‍यान रखें. गलत दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना बड़ा नुकसान करा सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में मुख करके भोजन करना सबसे अच्‍छा होता है. ऐसा करने से सेहत संबंधी समस्‍याएं दूर होती है. व्‍यक्ति दीर्घायु होता है. उत्‍तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से धन के देवता कुबेर प्रसन्‍न होते हैं और व्‍यक्ति धनवान बनता है. जबकि पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से बीमारियां दूर होती हैं. व्‍यक्ति का मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य भी अच्‍छा रहता है. लेकिन हमेशा याद रखें कि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कभी भी भोजन न करें. यह यम की दिशा होती है और ऐसा करने से व्‍यक्ति बीमारियों का शिकार होता है, साथ ही उसकी उम्र कम होती है. </p>
भोजन को लेकर न करें ये गलतियां 
<p>भोजन करते समय सही दिशा की मुख करने के साथ-साथ कुछ अन्‍य बातों का भी ख्‍याल रखें. भोजन बनाते समय हमेशा पहली रोटी गाय के लिए निकालें. ऐसा भोजन न करें जिसमें बाल गिर गया हो या किसी का पैर लग गया हो. ऐसा भोजन दूषित होता है और नकारात्‍मक ऊर्जा देता है. इससे व्‍यक्ति बीमारी और पैसों की तंगी का शिकार होता है. हमेशा ताजा और पोषक भोजन करें. भोजन करते समय कोशिश करें कि मन में गलत विचार न आएं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/there-are-also-rules-for-eating-always-eat-with-your-face-in-this-direction-otherwise-there-will-be-						]]>
					</link>
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					<pubDate>Sun, 28 Aug 2022 19:01:27 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[अशुभ घटनाओं को रोकने के लिए महिलाएं पति के बाहर जाते ही भूलकर भी न करें ये काम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हर महिला अपने पति की लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती है, पूजा-पाठ करती है और कई तरह के उपाय करती है. ताकि पति की उम्र लंबी हो सके. लेकिन कुछ ऐसी मान्यताएं है, जिन्हें मानने से भी अशुभ घटनाओं को होने से रोका जा सकता है. घर के बड़े-बुजुर्गों अक्सर किसी के बाहर जाने पर कुछ काम करने से मना करते हैं. इसका सीधा संबंध पति की आयु और उसके स्वास्थ्य से होता है. आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ कामों के बारे में, जो पति के बाहर जाने के बाद सुहागिनों को नहीं करने चाहिए. </p>
पति के घर से जाने पर भूलकर भी न करें ये काम
- महिलाएं बाल न धोएं
<p>ऐसी मान्यता है कि पति जब घर से बाहर किसी काम से जाता है तो महिलाओं को न तो एकदम से बाल धोने चाहिए और न ही बालों को खोलकर झाड़ना चाहिए. अगर कोई महिला ऐसा करती है तो इससे आपसी रिश्तों पर प्रभाव पड़ता है. साथ ही, धन की कमी होने लगती है. </p>
- तेल का प्रयोग करना
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पति के बाहर जाने के बाद महिलाएं न तो शरीर पर तेल का इस्तेमाल करें और न ही बालों में तेल लगाएं. ऐसा करना अच्छा नहीं होता. अगर  कोई महिला ऐसा करती है तो इससे पति की आयु घटती है. पति के जाने के कुछ घंटे बाद सिर में तेल लगा सकते हैं. </p>
- पानी से धुलाई
<p>ऐसी मान्यता है कि पति के घर से जाने के बाद पानी नहीं डालना चाहिए. किसी तरह की धुलाई आदि से भी बचना चाहिए. घर में पानी डालकर धुलाई तब की जाती है, जब घर में कोई अनहोनी हो जाती है. इसलिए घर से पति के जाने के बाद भूलकर भी न पानी उडेलें. </p>
- गीले बालों में न लगाएं सिंदूर
<p>सुहागिनें इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि गीले बालों में भूलकर भी सिंदूर न लगाएं. ऐसा माना जाता है कि गीले बालों में सिंदूर के बह जाने का डर रहता है, जो कि अशुभ माना जाता है. बालों के ठीक से सूख जाने के बाद ही सिंदूर लगाएं. </p>
- ऋंगार न उतारें
<p>पति के घर से जाने के बाद महिलाएं इस चीज का विशेष ध्यान रखें कि वे एकदम से चूड़ी या बिंदी न उतारें. ये बहुत ही अपशगुन होता है. सुहागिन महिलाओं के लिए ये करना अच्छा नहीं माना गया है. कुछ देर बीत जाने के बाद ही ऐसा कोई काम करें.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/to-prevent-inauspicious-incidents-women-should-not-do-this-work-even-after-their-husband-goes-out						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 26 Aug 2022 18:34:32 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[शनिश्चरी अमावस्या: 14 साल के बाद बाद बन रहा है अद्भुत संयोग, ये उपाय करेंगे शनिदेव को प्रसन्न]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में शनि अमावस्या का काफी अधिक महत्व है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद की अमावस्या तिथि 27 अगस्त, शनिवार को पड़ रही है। शनिवार को पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। शास्त्रों के अनुसार, शनि अमावस्या के दिन स्नान-दान के साथ भगवान शनि की पूजा करने का विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस दिन पितरों का तर्पण करने का भी शुभ फल प्राप्त होगा। पंचांग के अनुसार, इस साल भादो में पड़ने वाली अमावस्या पर काफी दुर्लभ संयोग बन रहा है। शनि अमावस्या का शुभ मुहूर्त और कुंडली से शनि दोष, शनि साढ़े साती और ढैय्या दूर करने के उपाय।</p>
शनि अमावस्या तिथि का शुभ मुहूर्त
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद की अमावस्या तिथि 26 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से शुरू हो रही है जो 27 अगस्त, शनिवार को दोपहर 1 बजकर 47 मिनट को समाप्त होगी</p>
<p>ऐसे में उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, शनिवार को अमावस्या तिथि मान्य होगी।</p>
<p>अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक</p>
<p>शिव योग - 27 अगस्त की सुबह 2 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 2 बजकर 6 मिनट तक</p>
<p>सिद्ध योग- 28 अगस्त सुबह 2 बजकर 7 मिनट से शुरू हो रहा है।</p>
शनि अमावस्या पर बन रहा है खास संयोग
<p>ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भादो मास में शनि अमावस्या का होना काफी दुर्लभ माना जाता रहा है। क्योंकि ऐसा संयोग 2008 में बना था। ज्योतिषों के अनुसार, 14 साल पहले 30 अगस्त 2008 को भादो मास में शनि अमावस्या का योग बना था। इसलिए ऐसे दुर्लभ संयोग में भगवान शनि की पूजा करने का विशेष फल मिलेगा।</p>
शनि अमावस्या पर करें खास उपाय
<p>अमावस्या के दिन शनि साढ़े साती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए रुद्राक्ष की माला से ऊँ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए।</p>
<p>शनि अमावस्या के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें। इसके साथ ही सरसों के तेल का दीपक जलाएं।</p>
<p>शनि अमावस्या के दिन दान का काफी महत्व है। इसलिए इस दिन शनिदेव संबंधी चीजों का दान करना चाहिए इसलिए शनिश्चरी अमावस्या के दिन आटा, शक्कर, काले तिल को मिलाकर चींटियों को खिलाएं।</p>
<p>शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं। इसके साथ ही शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे कुंडली में साढ़े साती और ढैय्या का प्रभाव भी कम होगा।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/shanishchari-amavasya-a-wonderful-coincidence-is-being-made-after-14-years-these-measures-will-pleas						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/shanishchari-amavasya-a-wonderful-coincidence-is-being-made-after-14-years-these-measures-will-pleas</guid>
					<pubDate>Fri, 26 Aug 2022 10:27:01 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[ज्‍योतिष में 3 ऐसी राशियां बताई गई हैं जो भगवान गणेश को बेहद प्रिय हैं, वे हमेशा उन पर अपनी कृपा बरसाते रहते हैं]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>गणेश स्‍थापना में अब कुछ ही समय बाकी है. गणेशोत्‍सव के 10 दिनों में गणपति बप्‍पा अपने भक्‍तों के बीच रहते हैं और उनके सारे दुख दूर करके खुशियों से झोली भरते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन पर गणपति बप्‍पा हमेशा मेहरबान रहते हैं. ज्‍योतिष में 3 ऐसी राशियां बताई गई हैं जो भगवान गणेश को बेहद प्रिय हैं और वे हमेशा उन पर अपनी कृपा बरसाते रहते हैं.</p>
<strong>इसलिए इन राशि वालों पर मेहरबान रहते हैं गणपति </strong>
<p>बुध ग्रह बुद्धि, संपन्‍नता का कारक है और इसका संबंध भगवान गणेश से होता है. ज्‍योतिष में जिन राशियों के बुध ग्रह शुभ माने गए हैं, उन पर भगवान गणेश की विशेष कृपा रहती है. </p>
<p><strong>मेष राशि-</strong> मेष राशि के जातकों पर भगवान गणेश की विशेष कृपा रहती है. इस कारण ये जातक अपने काम तेजी से निपटाते हैं और उन्‍हें अच्‍छे नतीजे भी मिलते हैं. इन जातकों के कामों में रुकावटें कम आती हैं और यदि आती भी हैं तो वे अपने साहस-पराक्रम से उन्‍हें दूर कर देते हैं. </p>
<p><strong>मिथुन राशि-</strong> मिथुन राशि के स्वामी ग्रह बुध हैं. इस कारण ये जातक बुद्धि, संवाद में बहुत अच्‍छे होते हैं. यदि ये जातक व्‍यापार करें तो उसमें बहुत सफलता पाते हैं. वहीं नौकरी में भी वे अच्‍छा मुकाम पाते हैं. इन जातकों के काम भी भगवान गणेश की कृपा से जल्‍दी पूरे होते हैं. </p>
<p><strong>मकर राशि-</strong> मकर राशि के जातकों पर शनि देव के साथ-साथ भगवान गणेश की भी विशेष कृपा रहती है. इसलिए इन जातकों को आसानी से सफलता मिल जाती है. ये जातक अपने बुद्धि-कौशल से बड़ी से बड़ी चुनौती पार कर जाते हैं. ये लोग अपने जीवन में खूब सफल होते हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/in-astrology-there-are-3-such-zodiac-signs-which-are-very-dear-to-lord-ganesha-they-always-shower-th						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/in-astrology-there-are-3-such-zodiac-signs-which-are-very-dear-to-lord-ganesha-they-always-shower-th</guid>
					<pubDate>Thu, 25 Aug 2022 11:03:32 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[आज है अजा एकादशी, इसको करने से अश्वमेध यज्ञ कराने के समान पुण्य फलों की प्राप्त होती है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। 22 अगस्त को भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी पड़ रही है। इस एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। वहीं वैष्णव अजा एकादशी 23 अगस्त को मनाई जा रही है। अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। माना जाता है कि अजा एकादशी के दिन व्रत रखने से हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही अश्वमेध यज्ञ कराने के समान पुण्य फलों की प्राप्त होती है। इसके साथ ही श्रीहरि की कृपा हमेशा बनी रहती है। जानिए अजा एकादशी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।</p>
अजा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
<p>अजा एकादशी तिथि- 22 अगस्त, सोमवार</p>
<p>एकादशी तिथि प्रारंभ - 22 अगस्त 2022 को सुबह 03 बजकर 35 मिनट तक</p>
<p>एकादशी तिथि समाप्त - 23 अगस्त 2022, मंगलवार को सुबह 06 बजकर 06 मिनट तक</p>
<p>वैष्णव अजा एकादशी- 23 अगस्त 2022, मंगलवार</p>
<p>पारण का समय -24 अगस्त सुबह 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक</p>
अजा एकादशी पूजा विधि
<p>अजा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें।</p>
<p>इसके बाद भगवान विष्णु के सामने जाकर हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर अजा एकादशी व्रत रखने का संकल्प लें।</p>
<p>पूजा स्थान पर एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। फिर उनका अभिषेक करें।</p>
<p>पीले पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, फल, गंध, मिठाई आदि अर्पित करते हुए श्रीहरि की पूजा करें।</p>
<p>पंचामृत और तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएं।</p>
<p>इसके बाद एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।</p>
<p>अंत में आरती करके भूल चूक के लिए क्षमा मांग लें।</p>
<p>दिनभर फलाहारी व्रत रखें। इसके साथ ही प्रसाद का वितरण कर दें।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/today-is-aja-ekadashi-doing-this-gives-the-same-virtuous-fruits-as-performing-ashwamedha-yagya						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/today-is-aja-ekadashi-doing-this-gives-the-same-virtuous-fruits-as-performing-ashwamedha-yagya</guid>
					<pubDate>Mon, 22 Aug 2022 08:59:21 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर इस विधि से करें संतान गोपाल मंत्र का जाप होगी मनोकामना पूरी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>वैदिक शास्त्रों में संतान की प्राप्ति के लिए की मंत्र, साधाना, अनुष्ठान, व्रत और हवन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। इन्हीं चमत्कारी मंत्रों में से एक है संतान गोपाल मंत्र। शास्त्रों के अनुसार, ये मंत्र भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस मंत्र की महिमा कई शास्त्रों में बताई गई है। माना जाता है कि इस मंत्र का विधिवत तरीके से जाप किया जाए, तो मनुष्य को हर काम में सफलता के साथ-साथ उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संतान के जीवन में आने वाली हर एक समस्या से छुटकारा मिल जाता है। जानिए जन्माष्टमी के मौके पर कैसे करें संतान गोपाल मंत्र का जाप।</p>
संतान गोपाल मंत्र
<p><strong>विनियोग</strong></p>
<p>अस्य गोपाल मंत्रस्य, नारद ऋषि:, अनुष्टुप छंद:, कृष्णो देवता, मम पुत्र कामनार्थ जपे विनियोग:।</p>
ध्यान
<p>विजयेन युतो रथस्थित: प्रसभानीय समुद्र मध्यत:।</p>
<p>प्रददत्त नयान् द्विजन्मने स्मरणीयो वसुदेव नंदन:।।</p>
<p>संतान गोपाल मंत्र</p>
<p>ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।</p>
<p>देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।</p>
संतान गोपाल मंत्र करने का नियम
<p>वैदिक शास्त्रों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन संतान गोपाल मंत्र का करीब 1 लाख बार जाप करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, माना जाता है कि एक लाख बार जाप करने से सिद्धि की प्राप्ति हो जाती है। संतान गोपाल मंत्र का जाप रुद्राक्ष, स्फटिक, तुलसी या फिर जीवापोता की माला से कर सकते हैं। जब एख लाख बार मंत्र का उच्चारण हो जाए तो दशांश यानी 10 हजार मंत्रों के साथ हवन करना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मणों को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोजन कराकर दान देना चाहिए।</p>
जन्माष्टमी के दिन ऐसे करें संतान गोपाल मंत्र का जाप
<p>वैदिक शास्त्रों के अनुसार, संतान गोपाल मंत्र का लाख बार जाप करना चाहिए। इसके अलावा जन्माष्टमी के दिन भी मंत्रों का जाप करना शुभ होगा।</p>
<p>जन्माष्टमी के दिन नित्य कार्यों से मुक्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद बाल गोपाल को स्नान कराने के बाद साफ वस्त्र, श्रृंगार आदि कर दें। इसके साथ ही माखन मिश्री का भोग लगा लें। भोग लगाने के बाद तुलसी के माला से संतान गोपाल मंत्र का करीब एक 108 बार जाप करें। इसके बाद से नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करें। इससे आपको जल्द ही कान्हा जैसी संतान प्राप्त होगी।</p>
संतान गोपाल मंत्र करने से मिलेंगे ये लाभ
<p>निसंतान को उत्तम संतान की प्राप्ति होगी।</p>
<p>संतान के जीवन में आने वाली हर समस्या से छुटकारा मिलेगा।</p>
<p>जिन लोगों की संतान जीवित नहीं रहती हैं, तो उन्हें यह मंत्र का जाप करना लाभकारी होगा।</p>
<p>जिन स्त्रियों का बार-बार गर्भपात हो जाता है उन्हें भी इस मंत्र से काफी लाभ मिलेगा।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/to-get-the-best-children-on-janmashtami-chant-the-santan-gopal-mantra-with-this-method-your-wish-wil						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/to-get-the-best-children-on-janmashtami-chant-the-santan-gopal-mantra-with-this-method-your-wish-wil</guid>
					<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 10:51:15 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करें इन चीजों का दान, कभी नहीं होगी घर में पैसों की कमी]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व है। भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के अष्टमी तिथि की रात्रि 12 बजे जन्म हुआ था। इसी कारण इस दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा की जाती है। वहीं,</p>
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के साथ-साथ दान पुण्य करने का विशेष महत्व है। इस दिन राशि के अनुसार कुछ चीजों का दान करने से सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही धन-वैभव, मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि जन्माष्टमी के दिन किन चीजों का दान करना है शुभ।</p>
जन्माष्टमी पर राशि अनुसार इन चीजों का करें दान
<p><strong>मेष राशि</strong></p>
<p>मेष राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन घी, लाल वस्त्र, केला, अनार, तांबा, मूंग दाल, मालपुआ, गेहूं आदि भगवान कृष्ण को चढ़ाएं। इसके बाद दान कर दें। ऐसा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>वृषभ राशि</strong></p>
<p>इस राशि के जातक भगवान कृष्ण की कृपा पाने के लिए, फल, फूल, दही आदि का दान कर सकते हैं। इसके अलावा योग्यता है, तो चांदी से बनी कोई चीज किसी को दान कर सकते हैं। इसके अलावा अगर घर में सुख-शांति चाहते हैं केसर, बेसन और हल्दी का दान करें।</p>
<p><strong>मिथुन राशि</strong></p>
<p>मिथुन राशि राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन मूंग की दाल, छाता, सरसों का तेल, केला, मालपुआ, सिंदूर , कपड़े आदि दान कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कर्क राशि</strong></p>
<p>इस राशि के जातक सफेद चीजें जैसे कि चांदी, मोती, सफेद वस्त्र, दही, दूध, पानी, चावल और चीनी आदि का दान करें। इससे कभी भी आपको धन-धान्य की कमी नहीं होगी।</p>
<p><strong>सिंह राशि</strong></p>
<p>सिंह राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन गुड़, लाल कपड़े, सिंदूर, मोमबत्तियां, कपूर, तांबा आदि चीजों का दान करें। इससे सुख-शांति रहेगी।</p>
<p><strong>कन्या राशि</strong></p>
<p>कन्या राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन गन्ना, डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे जैसे पनीर, दही, क्रीम, घी के अलावा सफेद चावल, सफेद फूल और काजू का दान कर सकते हैं।</p>
<p><strong>तुला राशि</strong></p>
<p>तुला राशि के जातक दान में घी, कपूर, दही, चांदी, चावल, चीनी, सफेद कपड़े और फूल आदि दान करें।</p>
<p><strong>वृश्चिक राशि</strong></p>
<p>इस राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन तांबे से बनी वस्तुएं दान करें। इसके अलावा हो सके तो गरीबों को भोजन कराएं।</p>
<p><strong>धनु राशि</strong></p>
<p>धनु राशि के जातक पशु को गुड़ खिलाएं। इसके साथ भी श्री हरि के मंदिर में हल्दी चढ़ाएं। इससे लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>मकर राशि</strong></p>
<p>इस राशि के जातक जरूरतमंद को दान करें। इसके साथ ही भैंस को चारा खिलाएं।</p>
<p><strong>कुंभ राशि</strong></p>
<p>कुंभ राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन जरूरतमंद को अनाज, पानी, कपड़े, जूते, छाता आदि दे सकते हैं इससे भगवान कृष्ण की कृपा हमेशा आपके ऊपर बनी रहेगी।</p>
<p><strong>मीन राशि</strong></p>
<p>मीन राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन हल्दी, पीले फूल, शहद, बेसन, चीन, केला, बूंदी के लड्डू आदि का दान करें। इससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/donate-these-things-on-shri-krishna-janmashtami-there-will-never-be-a-shortage-of-money-in-the-house						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 10:43:12 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[क्यों मनाया जाता दही हांडी उत्सव है और क्या है इसका महत्व]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी इस साल दो दिन पड़ रही है ऐसे में कुछ लोगों ने 18 को मनाया और कुछ लोग आज जन्माष्टमी का पर्व मना रहे है। इसके साथ ही आज दही हांडी का पर्व भी मनाया जा रहा है।</p>
<p>भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसके साथ ही जन्माष्टमी के दूसरे दिन यानी आज दही हांडी का कार्यक्रम मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान कृष्ण के माखन चोरी को दर्शाता है। आइए जानते हैं आखिर दही हांडी उत्सव क्यों मनाया जाता है और इसका क्या है महत्व।</p>
क्यों मनाते हैं दही हांडी
<p>दही हांडी उत्सव कृष्ण की बाल लीलाओं से संबंधित है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण को माखन बहुत ही ज्यादा प्रिय था, तो वह अपनी टोली के साथ पूरे गोकुल में माखन चुराते थे। ऐसे में गोकुल वासियों से परेशान होकर ऊंचे स्थान में माखन के मटकियां लटकाना शुरू कर दिया था। ऐसे में कान्हा अपनी टोली के कंधों पर चढ़कर मटकी तक पहुंचते थे और स्वयं माखन खाते थे और पूरी टोली को खिलाते थे। माना जाता है कि यहीं से दही-हांडी की शुरुआत हुई। आज के समय में मानव पिरामिड बनाने वालों को गोविंदा कहा जाता है।</p>
दही हांडी का महत्व
<p>जन्माष्टमी में दही हांडी का विशेष महत्व है। भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाने के लिए दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है। माना जाता है कि जिस घर में माखन चोरी के लिए मटकी फोड़ी जाती है वहां से हर एक दुख भी भाग जाता है और खुशियां ही खुशियां आ जाती है।</p>
दही हांडी कैसे मनाते हैं
<p>दही हांडी उत्सव गुजरात और महाराष्ट्र में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन मिट्टी की मटकी में दही भरकर ऊंचाई पर लटका दिया जाता है। इसके बाद पुरुषों या फिर महिलाओं का एक समूह एक मानव पिरामिड बनाता है फिर एक नारियल के माध्यम से इसे फोड़ देते हैं। दही हांडी एक तरह की प्रतियोगिता भी होती है जिसमें भाग लेने वाले लोगों को गोविंदा कहा जाता है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/why-is-dahi-handi-festival-celebrated-and-what-is-its-importance						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/why-is-dahi-handi-festival-celebrated-and-what-is-its-importance</guid>
					<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 10:36:21 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[मनवांछित फल प्राप्ति के लिए भगवान कृष्ण की पूजा करते समय ध्यान रखें ये बातें]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की विधिवत पूजा करने के साथ अभिषेक किया जाता है। इस दिन भक्तों व्रत भी रखते हैं। अगर आप भी जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर रहे हैं, तो इन चीजों का जरूर ध्यान रखें। देशभर में जन्माष्टमी का पर्व 18 और 19 अगस्त को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दो दिन पड़ रही है। जिसके कारण लोगों के बीच जन्माष्टमी को लेकर थोड़ा सा असमंजस है।</p>
भगवान कृष्ण की पूजा करते समय ध्यान रखें ये बातें
<p>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने करने के बाद व्रत जरूर रखना चाहिए। इसके साथ ही सूर्य को तांबे के लोटे में जल लेकर अर्घ्य करना चाहिए।</p>
<p>सूर्य पूजा के बाद सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा करना चाहिए। उन्हें चंदन, दूर्वा, फूल-माला, भोग लगाने के साथ-साथ धूप और दीपक जलाना चाहिए</p>
<p>गणेश जी की पूजा के बाद भीग भगवान श्री कृष्ण की पूजा आरंभ करनी चाहिए। सबसे पहले अपने हाथों में थोड़ा सा जल आचमन के तौर पर लेकर धोएं। इसके बाद भगवान कृष्ण को जल अर्पित करें।</p>
<p>भगवान कृष्ण को दक्षिणावर्ती शंख के माध्यम से ही जल का स्नान करना चाहिए। इसके साथ ही दूध से अभिषेक करना भी शुभ होता है।</p>
<p>भगवान कृष्ण का अभिषेक करते समय कृं कृष्णाय नमः: मंत्र का जाप जरूर करते रहें।</p>
<p>जन्माष्टमी के दिन भगवान को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं। इसके साथ ही मुकुट में मोर पंख जरूर लगाएं।</p>
<p>भगवान कृष्ण की मूर्ति के पास गौ माता का मूर्ति जरूर रखना चाहिए। इसके साथ ही गौ माता का अभिषेक करने के साथ भोग लगाना चाहिए।</p>
<p>भगवान कृष्ण को दूध, दही, माखन, मिश्री, लड्डू आदि का भोग लगाएं। इसके साथ तुलसी का दल जरूर रखें।</p>
<p>श्रीकृष्ण के पूजन के समय दूर्वा, कुमकुम, चंदन, चावल, अबीर, फूल जरूर अर्पित करें। इसके साथ गाय के घी का दीपक जलाना चाहिए।</p>
<p>बाल गोपाल की पूजा करने के साथ-साथ राधारानी की पूजा भी जरूर करना चाहिए। </p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/keep-these-things-in-mind-while-worshiping-lord-krishna-to-get-desired-results						]]>
					</link>
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					<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 10:27:39 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[इस जन्माष्टमी पर करें भगवान कृष्ण का षोडशोपचार विधि से पूजन और जानें शुभ मुहूर्त]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल दो दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। कुछ पंचांह के अनुसार 18 को, तो कुछ के अनुसार 19 अगस्त को जन्माष्टमी मनाना शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। लेकिन इस बार अष्टमी तिथि के दिन रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र नहीं लग रहा है। ऐसे में मथुरा, वृंदावन सहित कुछ अन्य कृष्ण तीर्थों पर 19 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जा रही है। जानिए कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और षोडशोपचार पूजन विधि।</p>
जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त
<p>पंचांग के अनुसार, 18 अगस्त को रात्रि 9 बजकर 21 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो रही है जो 19 अगस्त को रात्रि 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 19 अगस्त को रात 01 बजकर 54 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में 18 अगस्त को गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए सबसे अच्छा माना जा रहा है।</p>
<p>उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा बताते हैं कि जैसा कि नाम से पता चलता है कि षोडशोपचार यानी 16 तरीकों से पूजन करना। जन्माष्टमी की इस षोडषोपचार पूजा विधि में सोलह चरण शामिल होते हैं। इन सभी चरणों के बारे में नीचे विस्तार से बताया जाएगा। जानिए जन्माष्टमी के दिन कैसे करें भगवान कृष्ण की षोडशोपचार पूजन।</p>
जन्माष्टमी के दिन ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा
<p>विधि अनुसार, सबसे पहले बाल कृष्ण की मूर्ति को एक बर्तन में रखें और उसे शुद्ध जल और दूध, दही, शहद, पंचमेवा और सुगंध युक्त गंगा जल से स्नान कराएं। फिर पालने में स्थापित करें और वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान के विधान के अनुसार आरती करें। अंत में उन्हें नैवेद्य यानी फलों और मिठाइयों के साथ-साथ अपनी परंपरा के अनुसार धनिया, आटा, चावल या पंच ड्राई फ्रूट्स की पंजीरी शामिल करें।</p>
<p>भगवान पर इत्र जरूर लगाएं। पंचामृत स्नान के बाद षोडशोपचार पूजा की जाती है। श्री कृष्ण की जयंती मनाने के लिए मंदिरों में इस पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। इसके बाद रात्रि जागरण करते हुए सामूहिक रूप से भगवान की स्तुति की जाती है। इन सभी 16 चरणों में सोलह मंत्र हैं, सोलहवें मंत्र को प्रभु की आरती कहते हैं।</p>
षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा और मंत्र
<p>कृष्ण जन्माष्टमी के दिन षोडशोपचार के 16 चरणों के मंत्र इस प्रकार हैं।</p>
<p><strong>ध्यान</strong></p>
<p>सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>ॐ तमअद्भुतं बालकम् अम्‍बुजेक्षणम्, चतुर्भुज शंख गदाद्युधायुदम्। श्री वत्‍स लक्ष्‍मम् गल शोभि कौस्‍तुभं, पीताम्‍बरम् सान्‍द्र पयोद सौभंग। महार्ह वैढूर्य किरीटकुंडल त्विशा परिष्‍वक्‍त सहस्रकुंडलम्। उद्धम कांचनगदा कङ्गणादिभिर् विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत। ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं,शंख चक्र गदाधरम्। पीताम्बरधरं देवं माला कौस्तुभभूषितम्। ॐ श्री कृष्णाय नम:। ध्‍यानात् ध्‍यानम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>आह्वान</strong></p>
<p>इसके बाद हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण का इस मंत्र से आह्वान करें…</p>
<p>ॐ सहस्त्रशीर्षा पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्त्रपात्। स-भूमिं विश्‍वतो वृत्‍वा अत्‍यतिष्ठद्यशाङ्गुलम्। आगच्छ श्री कृष्ण देवः स्थाने-चात्र सिथरो भव। ॐ श्री क्लीं कृष्णाय नम:। बंधु-बांधव सहित श्री बालकृष्ण आवाहयामि।</p>
<p><strong>आसन</strong></p>
<p>अब श्रीकृष्ण को आसन देते समय इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>ॐ विचित्र रत्न-खचितं दिव्या-स्तरण-सन्युक्तम्। स्वर्ण-सिन्हासन चारू गृहिश्व भगवन् कृष्ण पूजितः। ॐ श्री कृष्णाय नम:। आसनम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>पद्य</strong></p>
<p>आसन देने के बाद भगवान कृष्ण के चरण धोने के लिए, उन्हें पंचपात्र से जल अर्पित करते हुए, इस मंत्र का पाठ करें…</p>
<p>एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागंश्र्च पुरुष:। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि। अच्युतानन्द गोविंद प्रणतार्ति विनाशन। पाहि मां पुण्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम्। ॐ श्री कृष्णाय नम:। पादोयो पाद्यम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>अर्घ्य</strong></p>
<p>इस मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को अर्घ्य दें…</p>
<p>ॐ पालनकर्ता नमस्ते-स्तु गृहाण करूणाकरः। अर्घ्य च फ़लं संयुक्तं गन्धमाल्या-क्षतैयुतम्। ॐ श्री कृष्णाय नम:। अर्घ्यम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>आचमन</strong></p>
<p>इसके बाद आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल अर्पित करते हुए इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पुरुष:। स जातो अत्यरिच्यत पश्र्चाद्भूमिनथो पुर:। नम: सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञान रूपिणे। गृहाणाचमनं कृष्ण सर्व लोकैक नायक। ॐ श्री कृष्णाय नम:। आचमनीयं समर्पयामि।</p>
<p><strong>स्नान</strong></p>
<p>भगवान कृष्ण की मूर्ति को किसी कटोरी या किसी अन्य पात्र में रखकर स्नान करें। सबसे पहले पानी से स्नान करें, उसके बाद दूध, दही, मक्खन, घी और शहद से स्नान करें और अंत में एक बार फिर साफ पानी से स्नान करें। एक साथ मंत्र का जाप करें…</p>
<p>गंगा गोदावरी रेवा पयोष्णी यमुना तथा। सरस्वत्यादि तिर्थानि स्नानार्थं प्रतिगृहृताम्। ॐ श्री कृष्णाय नम:। स्नानं समर्पयामि।</p>
<p><strong>वस्त्र समर्पण</strong></p>
<p>भगवान की मूर्ति को एक साफ और सूखे कपड़े से पोंछकर नए कपड़े पहनाएं, फिर उन्हें पालने में रख दें और इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>शति-वातोष्ण-सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहा-लंकारणं वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ में। ॐ श्री कृष्णाय नम:। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि।</p>
<p><strong>यज्ञोपवीत</strong></p>
<p>इस मंत्र का जप करते हुए भगवान कृष्ण को यज्ञोपवीत अर्पित करें…</p>
<p>नव-भिस्तन्तु-भिर्यक्तं त्रिगुणं देवता मयम्। उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः। ॐ श्री कृष्णाय नम:। यज्ञोपवीतम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>चंदन</strong></p>
<p>श्रीकृष्ण को चंदन चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गंधाढ़्यं सुमनोहरम्। विलेपन श्री कृष्ण चन्दनं प्रतिगृहयन्ताम्। ॐ श्री कृष्णाय नम:। चंदनम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>गंध</strong></p>
<p>इस मंत्र का जाप करते समय श्रीकृष्ण, वनस्पति रसोद भुतो गंधह्यो गन्ध उत्तमः को धूप, अगरबत्ती दिखाएं। वनस्पति रसोद भूतो गन्धाढ़्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोढ़्यं प्रतिगृहयन्ताम्। ॐ श्री कृष्णाय नम:। गंधम् समर्पयामि।</p>
<p><strong>दीपक</strong></p>
<p>फिर श्रीकृष्ण की मूर्ति की समझ से घी का दीपक जलाएं और इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>साज्यं त्रिवर्ति सम्युकतं वह्निना योजितुम् मया। गृहाण मंगल दीपं,त्रैलोक्य तिमिरापहम्। भक्तया दीपं प्रयश्र्चामि देवाय परमात्मने। त्राहि मां नरकात् घोरात् दीपं ज्योतिर्नमोस्तुते। ब्राह्मणोस्य मुखमासीत् बाहू राजन्य: कृत:। उरू तदस्य यद्वैश्य: पद्भ्यां शूद्रो अजायत। ॐ श्री कृष्णाय नम:। दीपं समर्पयामि।</p>
<p><strong>नैवैद्य</strong></p>
<p>श्रीकृष्ण को भोग लगाएं और इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधि-क्षीर-घृतानि च, आहारो भक्ष्य- भोज्यं च नैवैद्यं प्रति- गृहृताम। ॐ श्री कृष्णाय नम:। नैवद्यं समर्पयामि।</p>
<p><strong>तांबूल</strong></p>
<p>अब पान पर लौंग-इलायची, सुपारी और कुछ मिठाई डालकर एक तांबूल बनाकर श्रीकृष्ण को अर्पित करें, साथ ही इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>ॐ पूंगीफ़लं महादिव्यं नागवल्ली दलैर्युतम्। एला-चूर्णादि संयुक्तं ताम्बुलं प्रतिगृहृताम। ॐ श्री कृष्णाय नम:। ताम्बुलं समर्पयामि।</p>
<p><strong>दक्षिणा</strong></p>
<p>अब अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा या प्रसाद चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें…</p>
<p>हिरण्य गर्भ गर्भस्थ हेमबीज विभावसो:। अनन्त पुण्य फलदा अथ: शान्तिं प्रयच्छ मे। ॐ श्री कृष्णाय नम:। दक्षिणां समर्पयामि।</p>
<p><strong>आरती</strong></p>
<p>षोडशोपचार का अंतिम चरण आरती है, इसके लिए घी के दीपक से बाल कृष्ण की आरती उतारें। साथ ही अपनी पसंदीदा कृष्ण आरती भी गाएं।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/on-this-janmashtami-worship-lord-krishna-with-shodashopachar-method-and-know-the-auspicious-time						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/on-this-janmashtami-worship-lord-krishna-with-shodashopachar-method-and-know-the-auspicious-time</guid>
					<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 10:20:59 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जन्माष्टमी पर क्यों चढ़ाते हैं पंजीरी, आओ जाने पंजीरी बनाने की विधि]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>धनिया पंजीरी भोग में चढ़ाया जाने वाला प्रसाद है और इसे खासतौर से जन्माष्टमी के अवसर पर ही बनाया जाता है। जिसे बनाने में धनिया का इस्तेमाल होता है जो कई मायनों में सेहत के लिए लाभकारी है। तो सबसे पहले तो जानेंगे कि क्यों भगवान को धनिया पंजीरी का भोग लगाते हैं और साथ ही इस प्रसाद को घर में आसानी से बनाने की विधि। </p>
क्यों भगवान कृष्ण को चढ़ाई जाती है धनिया की पंजीरी
<p>माखन के अलावा भगवान कृष्ण को एक और चीज़ बहुत पसंद है वो है धनिया पंजीरी। इस वजह से जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान को धनिया पंजीरी का भी भोग लगाया जाता है। क्यों चढ़ाते हैं यह प्रसाद? इसका जवाब यह है...क्योंकि जन्माष्टमी का त्योहार वर्षा ऋतु के दौरान आता है। जिस वक्त वात, कफ, पित्त इन चीजों की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं। साथ ही साथ संक्रमण भी तेजी से फैलता है। ऐसे में धनिए का सेवन इन सभी समस्याओं में लाभकारी है। इसमें कई सारे गुण पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को हेल्दी रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। इस वजह से जन्माष्टमी पर खासतौर से धनिया पंजीरी का प्रसाद बनाया जाता है। </p>
धनिया की पंजीरी बनाने की विधि
<p>सामग्री- 2 कप धनिया पाउडर, ½ कप कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल, ¼ कप घी, 10-12 काजू, 10-12 बादाम</p>
<p>½ कप मखाना, ½ कप पिसी चीनी</p>
विधि
<p>- कड़ाही में मीडियम आंच पर 1 चम्मच घी गर्म करें और इसमें काजू- बादाम डाल कर हल्का ब्राउन होने तक भून लें। इन्हें अलग कर लें। </p>
<p>- इसके बाद इसी पैन में मखाना डालकर क्रिस्पी होने तक भून लें और हल्का क्रश कर लें।</p>
<p>- अब पैन में बचा हुआ घी डालें। इसमें धनिया पाउडर डालकर धीमी आंच पर सुनहरा और खुशबू आने तक भूनें। लगातार चलाते रहें। ध्यान रहे ये जलना भी नहीं चाहिए और न ही कच्चा रहें। दोनों ही स्थितियों में इसका स्वाद कड़वा हो जाता है।</p>
<p>- धनिया भूनने के बाद इसमें भुने हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिलाएं। पैन को आंच से उतारकर मिश्रण को अच्छे से ठंडा होने दें।</p>
<p>- अब इसमें सूखा नारियल, पिसी चीनी और भूने हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिला लें और तैयार पंजीरी में तुलसी का पत्ता डालकर भगवान कृष्ण को भोग लगाएं।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/why-are-panjiri-offered-on-janmashtami-lets-know-the-method-of-making-panjiri						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/why-are-panjiri-offered-on-janmashtami-lets-know-the-method-of-making-panjiri</guid>
					<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 01:49:44 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जन्माष्टमी: जो लोग एकादशी का व्रत नहीं रहते उन्हें कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत जरूर रखना चाहिए]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>इस वर्ष जन्माष्टमी को लेकर भी संशय की स्थिति है। कोई 18 तो कोई 19 अगस्त को जन्माष्टमी की तिथि बता रहा है। ऐसे में हम आपको बता रहे कब है जन्माष्टमी और गृहस्थ और साधु संत के लिए जन्माष्टमी मनाने की तिथि क्या है। जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार दो दिन की जन्माष्टमी है, लेकिन गृहस्थ और साधु संत के लिए अलग-अलग तिथि है। आचार्य अरुण मिश्र कहते हैं, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत एक हजार एकादशी का फल देता है। अपने वेद ग्रंथों में यह मान्यता है कि इस व्रत से सौ जन्मों के पाप मिट जाते हैं। उन्होंने कहा, जो लोग एकादशी का व्रत नहीं रहते उन्हें कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत जरूर रखना चाहिए। </p>
<p>ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और वृषभ राशि के चंद्रमा में हुआ था। इसी कारण हर साल इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी इस बार दो दिन मनाई जाएगी। पहली 18 अगस्त को होगी, जिसे गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग मनाएंगे। वहीं, 19 अगस्त की साधु-संत जन्माष्टमी मनाएंगे। इस बार जन्माष्टमी काफी खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन काफी विशेष योग बन रहे हैं। इस दिन वृद्धि योग भी लग रहा है। मान्यता है कि जन्माष्टमी पर वृद्धि योग में पूजा करने से आपके घर की सुख संपत्ति में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी का वास होता हैं।</p>
<p>जन्माष्टमी इस साल 18 अगस्त गुरुवार को है। अष्टमी तिथि 18 अगस्त को शाम 09:21 से प्रारंभ होगी, जो कि 19 अगस्त को रात 10:59 पर समाप्त होगी। वृद्धि योग 17 अगस्त को दोपहर 08:56 से 18 अगस्त रात 08:41 तक रहेगा। धुव्र योग 18 अगस्त रात 08:41 से 19 अगस्त रात 08:59 तक रहेगा। शहर के मंदिरों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं, बाजार में भी जन्माष्टमी की रौनक है। मंदिरों में जन्माष्टमी पर कई प्रतियोगिताएं भी होंगी, जिसके लिए भी तैयारियां हो रही हैं। शहर के कई मंदिरों में जन्माष्टमी के पूजन का लाइव प्रसारण करने का भी प्रबंध किया गया है।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/janmashtami-those-who-do-not-keep-fast-on-ekadashi-they-must-keep-fast-on-krishna-janmashtami						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/janmashtami-those-who-do-not-keep-fast-on-ekadashi-they-must-keep-fast-on-krishna-janmashtami</guid>
					<pubDate>Wed, 17 Aug 2022 11:42:53 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[जाने राखी बांधने के शुभ मुहूर्त और राखी बांधने के नियम]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>रक्षाबंधन 11 अगस्‍त 2022 को मनाएं या 12 अगस्‍त 2022 को, यह कंफ्यूजन ज्‍यादातर लोगों को है. सावन महीने की पूर्णिमा 11 अगस्‍त को ही शुरू हो जाएगी लेकिन इस दिन भद्रा काल रहने से राखी बांधने के मुहूर्त को लेकर समस्‍या हो रही है. वहीं 12 अगस्‍त की सुबह 7 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहने और इसी दिन उदया तिथि रहने से लोग 12 अगस्‍त को राखी बांधने के लिए शुभ मान रहे हैं. ऐसे में जानें कि रक्षाबंधन मनाने के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से हैं और भद्रा काल के नकारात्‍मक प्रभाव से बचने के लिए क्‍या करें. </p>
रक्षाबंधन 2022 शुभ मुहूर्त 
<p>भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ होता है क्‍योंकि लंकापति रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में राखी बांधी थी और फिर एक साल में ही उसका विनाश हो गया था. लिहाजा भद्रा काल में कभी भी ना तो राखी बांधनी चाहिए और ना ही अन्‍य शुभ काम करना चाहिए. साल 2022 में सावन पूर्णिमा तिथि सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और अगले दिन 07:05 बजे तक रहेगी. इस बीच 11 अगस्‍त की शाम 05:17 बजे से भद्रा काल शुरू होगा. लेकिन इससे पहले 11 अगस्‍त को राखी बांधने के लिए कुछ शुभ मुहूर्त रहेंगे. </p>
<p>अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:37 से लेकर दोपहर 12:29 तक </p>
<p>विजय मुहूर्त- दोपहर 2:14 से 3:07 तक </p>
<p>12 अगस्त को सुबह 7:15 तक शुभ मुहूर्त </p>
राखी बांधते समय जरूर करें यह काम
<p>रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर बांधते समय कुछ बातों का जरूर ध्‍यान रखना चाहिए. ताकि भाई-बहन दोनों का जीवन सुखद और समृ‍द्ध रहे. इसके लिए हमेशा राखी बांधते समय 3 गांठें बांधें. ये गांठें अहम संकेत देती हैं. ये भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश को संबोधित करती हैं. इसके अलावा पहली गांठ भाई की लंबी उम्र और सेहत, दूसरी गांठ सुख-समृद्धि और तीसरी गांठ इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए बांधी जाती है. ध्‍यान रखें कि रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन काले कपड़े न पहनें. वहीं बहन अपने भाई को टूटे चावल माथे पर न लगाएं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/know-the-auspicious-time-to-tie-rakhi-and-the-rules-for-tying-rakhi						]]>
					</link>
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					<pubDate>Thu, 11 Aug 2022 14:06:28 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[अशुभ साबित होती हैं ऐसी राखी, भाई को इस तरह की राखी नहीं बांधनी चाहिए]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>आज 11 अगस्‍त 2022, गुरुवार को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है. कुछ लोग कल यानी कि 12 अगस्‍त 2022 को भी रक्षाबंधन मनाएंगे क्‍योंकि सावन पूर्णिमा की तिथि शुक्रवार की सुबह तक रहेगी. रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की लंबी उम्र और सुख-संपन्नता के लिए उसकी कलाई पर राखी बांधती है. वहीं भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन देते हैं. इसलिए राखी को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है. अपने प्‍यारे भाई को राखी बांधने के लिए बहनें बाजार में एक से एक खूबसूरत राखियां खोजती हैं लेकिन कई बार अनजाने में ऐसी राखियां ले लेती हैं जो उनके भाई के जीवन के लिए मुसीबतें ला सकती हैं. आइए जानते हैं कि भाई को किस तरह की राखी नहीं बांधनी चाहिए. </p>
अशुभ साबित होती हैं ऐसी राखी 
<p>- खूबसूरती और फैंसी डिजाइन के चक्‍कर में अशुभ चिह्नों वाली राखी कभी न खरीदें. रक्षाबंधन पवित्र त्‍योहार है ऐसे में भाई को अशुभ चिह्न वाली राखी बांधना जीवन में नकारात्‍मकता लाता है. </p>
<p>- कई बार भीड़-भाड़ के चलते लोग अच्‍छे से राखी देख नहीं पाते हैं और टूटी हुई या खंडित राखी ले आते हैं. ऐसी खंडित राखी भाई को कभी न बांधें. ऐसा करना मुसीबतों को बुलावा देना है. </p>
<p>- कई बार लोग देवी-देवताओं की तस्वीरों वाली राखी ले आते हैं. ऐसा करना गलत है. देवी-देवताओं वाली राखी हाथ में बांधना उनका अपमान करना है क्‍योंकि राखी कई दिन हाथ में बंधी रहती है और अपवित्र हो जाती है. </p>
<p>- रक्षाबंधन के दिन ना तो काले कपड़े पहनना चाहिए और ना ही काले रंग की राखी बांधना चाहिए. ऐसा करने से नकारात्‍मकता आती है और बुरा फल मिलता है. </p>
<p>- आजकल प्‍लास्टि की राखियां भी बाजार में मौजूद हैं, जो दिखने में भले ही सुंदर हों लेकिन इन्‍हें न खरीदें. प्‍लास्टिक का संबंध पापी ग्रह केतु से है, भाई को ऐसी राखी बांधने से उसे अपयश या मान हानि का सामना करना पड़ सकता है. </p>
<p>हमेशा रेशमी धागे से बनी राखी या कलावा ही भाई को बांधना चाहिए. ऐसी राखी शुभ होती है और भाई के जीवन सुख-समृद्धि लाती हैं.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/such-rakhi-proves-to-be-inauspicious-brother-should-not-tie-such-rakhi						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/such-rakhi-proves-to-be-inauspicious-brother-should-not-tie-such-rakhi</guid>
					<pubDate>Thu, 11 Aug 2022 13:56:49 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सावन का आखिरी सोमवार और पुत्रदा एकादशी, इस अद्भुत संयोग पर इस तरह पाइये शिवजी और श्रीहरि का आशीर्वाद]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। इस बार की ये एकादशी काफी शुभ है। क्योंकि इस दिन सावन का आखिरी सोमवार पड़ रहा है। ऐसे में इस दिन उपाय करके भगवान विष्णु के साथ-साथ शिवजी की कृपा भी पा सकते हैं। आइए जानते हैं कि पुत्रदा एकादशी के दिन कौन से उपाय करना होगा शुभ।</p>
<p>पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। माना जाता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत करने के साथ विधिवत पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन कुछ उपायों को करके अपने मनोकामनाओं की पूर्ति करने के साथ सुख-समृद्धि पा सकते हैं। </p>
<p><strong>चढ़ाएं तुलसी और बेलपत्र</strong></p>
<p>पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी की माला अर्पित करें। इसके साथ ही भोलेनाथ को 108 बेलपत्र की माला चढ़ाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से नौकरी-बिजनेस में अपार सफलता के साथ सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>पुत्रदा एकादशी के दिन करें ये पाठ</strong></p>
<p>हर काम में सफलता पाने के साथ हर क्षेत्र में नाम कमाने के लिए पुत्रदा एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।</p>
<p><strong>इन पेड़-पौधों की करें पूजा</strong></p>
<p>पुत्रदा एकादशी के दिन आंवले, बेलपत्र के साथ तुलसी के पौधे की पूजा अर्चना करें और शाम के समय घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से श्रीहरि और शिवजी की कृपा प्राप्त होगी।</p>
<p><strong>जरूरतमंद को करें दान</strong></p>
<p>पुत्रदा एकादशी और सावन के आखिरी सोमवार के दिन जरूरतमंद को अनाज, वस्त्र आदि का दान करें। सच्चे मन से सेवा करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो जाती है।</p>
<p><strong>इस मंत्र का करें जाप</strong></p>
<p>श्रावण पुत्रदा एकादशी पर पूजा कते समय संतान गोपाल मंत्र ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।। का जाप करें।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/the-last-monday-of-sawan-and-putrada-ekadashi-on-this-wonderful-coincidence-get-the-blessings-of-shi						]]>
					</link>
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					<pubDate>Mon, 08 Aug 2022 10:47:59 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[सावन का आखिरी सोमवार आज इन राशियों के लिए खास जाने वाला है]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>सावन का माह काफी शुभ माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस माह में पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे माह में भोलेनाथ की पूजा करने से सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही हर इच्छा पूरी हो जाती है। आज सावन का आखिरी सोमवार है। इसके साथ ही आज पुत्रदा एकादशी का योग बन रहा है। ऐसे में भगवान शिव के साथ श्रीहरि की पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। ज्योतिषों के अनुसार, आज का दिन कई राशियों के लिए खास जाने वाला है। जानिए किन राशियों के ऊपर भोलेनाथ होंगे मेहरबान।</p>
<p><strong>वृषभ राशि</strong></p>
<p>वृषभ राशि के जातकों के लिए सावन का आखिरी सोमवार काफी शुभ जाने वाला है। इस राशि के जातकों के ऊपर भोलेनाथ की विशेष कृपा होती है। हर क्षेत्र में सफलता प्राप्ति होगी। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होंगे। लंबे समय से खराब सेहत अब अच्छी हो जाएगी।</p>
<p><strong>मिथुन राशि</strong></p>
<p>मिथुन राशि के जातकों के ऊपर भगवान शिव की विशेष कृपा होगी। हर बिगड़े हुए काम अब सुचारू रूप से चलने लगेंगे। हर तरह के तनाव से मुक्ति मिलेगा। नौकरी के साथ-साथ व्यापार में भी लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>तुला राशि</strong></p>
<p>सावन का आखिरी सोमवार तुला राशि के जातकों के लिए अच्छा साबित होने वाला है। नौकरी में पदोन्नति मिलेगा। इसके साथ ही करियर में सफलता हासिल होगी। लंबे समय से जो आत्मविश्वास आपके अंदर नहीं आ रहा था वह अब बढ़ेगा। बिजनेस में मुनाफा का पूर्ण आसार है।</p>
<p><strong>कुंभ राशि</strong></p>
<p>कुंभ राशि के जातकों के लिए सावन का आखिरी सप्ताह खुशियां लेकर आएगा। लंबे समय से हो रही पैसों की दिक्कत से भी छुटकारा मिलेगा। हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/the-last-monday-of-sawan-is-going-to-be-special-for-these-zodiac-signs						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/the-last-monday-of-sawan-is-going-to-be-special-for-these-zodiac-signs</guid>
					<pubDate>Mon, 08 Aug 2022 10:39:25 +0530</pubDate>
				</item>

							<item>
                    
                    <title><![CDATA[कौरव और पांडवों से पहले कुरुक्षेत्र में हुआ था एक और युद्ध, 3 वर्ष तक चली थी घमासान लड़ाई]]></title>
					<description>
                    	<![CDATA[<p>कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) द्वारा दिए गए उपदेशों का ही प्रभाव रहा कि वीर धनुर्धर अर्जुन का बंधु बांधवों के प्रति मोह भंग हुआ और युद्ध करते हुए उन्होंने कौरवों को पराजित किया. हालांकि, बहुत कम लोगों को पता होगा कि इसी कुरुक्षेत्र में एक और बड़ा युद्ध हुआ जो तीन वर्ष तक चला. यह युद्ध हुआ था हस्तिनापुर नरेश राजा शांतनु के पुत्र चित्रांगद और गन्धर्वराज चित्रांगद के बीच.</p>
सत्यवती ने दो पुत्रों को दिया था जन्म 
<p>सत्यवती से विवाह करने के बाद राजा शांतनु (Raja Shantanu) के चित्रांगद (Chitrangad) और विचित्रवीर्य (Vichitravirya) नामक दो पुत्र हुए. दोनों ही बड़े पराक्रमी और होनहार थे. दोनों के युवावस्था में प्रवेश करने के पहले ही राजा शांतनु स्वर्गवासी हो गए. भीष्म ने सत्यवती की सहमति से चित्रांगद को राजगद्दी पर बिठाया. उसने अपने पराक्रम से सभी राजाओं को पराजित कर दिया. वह किसी भी मनुष्य को अपने समान नहीं समझता था.</p>
तीन वर्ष तक चला युद्ध  
<p>गंधर्वराज चित्रांगद ने देखा कि शांतनु नंदन चित्रांगद अपने बल पराक्रम के कारण देवता, मनुष्य और असुरों को नीचा दिखाने का काम कर रहा है. यह बात गंधर्वराज को खराब लगी तो गंधर्वराज ने उसके राज्य पर चढ़ाई कर दी. एक ही नाम के दोनों वीर योद्धाओं के बीच सरस्वती नदी के तट पर कुरुक्षेत्र के मैदान में घमासान युद्ध हुआ.</p>
मायावी था चित्रांगद
<p>यूं तो चित्रांगद बहुत पराक्रमी और बलशाली था किंतु गंधर्वराज चित्रांगद मायावी था. तीन वर्ष तक चले युद्ध में गंधर्वराज चित्रांगद ने युद्ध में मायावी शस्त्रों का इस्तेमाल किया, जिसके सामने राजा चित्रांगद नहीं  टिक सका. युद्ध क्षेत्र में गंधर्वराज ने राजा चित्रांगद को घेरकर मार दिया.</p>
विचित्र वीर्य ने किया शासन
<p>राजा चित्रांगद की मृत्यु के बाद देवव्रत भीष्म ने भाई चित्रांगद का अंत्येष्टि कर्म किया और फिर विचित्र वीर्य को राज सिंहासन पर बिठाया. विचित्र वीर्य तो अभी बालक ही थे फिर भी भीष्म के दिशा-निर्देश पर अपने पैतृक राज्य का शासन करने लगे.</p>]]>                    </description>

					<link>
						<![CDATA[
						https://megadailynews.com/religious/there-was-another-war-in-kurukshetra-before-kauravas-and-pandavas-the-fierce-battle-lasted-for-3-yea						]]>
					</link>
					<guid isPermaLink="true">https://megadailynews.com/religious/there-was-another-war-in-kurukshetra-before-kauravas-and-pandavas-the-fierce-battle-lasted-for-3-yea</guid>
					<pubDate>Sat, 06 Aug 2022 12:23:47 +0530</pubDate>
				</item>

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